स्वास्थ्य का अर्थ, स्वास्थ्य की परिभाषा

स्वास्थ्य का अर्थ

मनुष्य की शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक, बौद्धिक तथा सामाजिक सुखावह अवस्था को स्वास्थ्य (Health) कहते हैं । स्वास्थ्य जीवन का सबसे महत्त्वपूर्ण अंग है।  व्यक्ति को स्वस्थ तब कहा जाता है जब उसे कोई रोग नहीं होता है अर्थात् रोग न होने की अवस्था स्वास्थ्य है। 

स्वास्थ्य की परिभाषा

अनेक विचारकों ने समय-समय पर स्वास्थ्य की परिभाषा दी हैं। उनमें से कुछ महत्वपूर्ण परिभाषा निम्न प्रकार हैं।

वेब्सटर - शरीर, मन तथा चेतना की ओजस्वी अवस्था, जिसमें समस्त शारीरिक बीमारी और दर्द का अभाव हो, की स्थिति को स्वास्थ्य कहते है।

पर्किन्स - शरीर की रचना और क्रिया की ऐसी सापेक्ष साम्यावस्था जो किसी भी प्रतिकूल स्थिति में शरीर को सफलतापूर्वक, संतुलित एवं जीवन्त रखती है, स्वास्थ्य कहलाती है। स्वास्थ्य शरीर के आन्तरिक अवयवों और इन्हें आहत करने वाले कारकों के बीच निष्क्रिय प्रक्रिया न होकर इन दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित करने की सक्रिय प्रक्रिया है।

ऑक्सफोर्ड इंग्लिश कोष - शरीर और मन की तेजपूर्ण स्थिति, ऐसी अवस्था जिसमें समस्त शारीरिक और मानसिक कार्य समय से और पूरी क्षमता से सम्पादित हो रहे हों, ऐसी अवस्था को स्वास्थ्य कहते है।

जे.एफ. विलियम्स - स्वास्थ्य जीवन का वह गुण है, जो व्यक्ति को अधिक सुखी ढंग से जीवित रहने तथा सर्वोत्तम रूप से सेवा करने के योग्य बनाता है। 

मेरीबेकरऐड्डी - स्वास्थ्य वस्तु अवस्था न होकर मानसिक अवस्था है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (नं. 137) 1957 - किसी आनुवांशिक और पर्यावरणीय स्थिति में मनुष्य के जीवन चर्या का ऐसा गुणवत्तापूर्ण स्तर, जिसमें उसके द्वारा सारे कार्य यथोचित समय और सुचारू रूप से सम्पादित किये जा रहे हों, स्वाथ्य कहलाता है। 

टैबर मेडिकल इंसाइक्लोपीडिया - स्वास्थ्य वह दशा है, जिससे शरीर और मस्तिष्क के समस्त कार्य सामान्य रूप से सक्रियतापूर्वक सम्पन्न होते है। 

डयूवोस, आर., 1968 - जीवन का ऐसा उपक्रम, जो व्यक्ति को प्रतिकूल परिस्थितियों और अपूर्व विश्व में सुखपूर्वक जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त करता है, स्वास्थ्य कहलाता है।

आयुर्वेद - समदोष: समानिश्य समधातुमल क्रिया। प्रसन्नत्येन्द्रियमना: स्वस्था इत्ययिधीयते।। अर्थ-वात, पित्त एवं कफ-ये त्रिदोष सम हों, जठराग्नि, भूताग्नि आदि अग्नि सम हो, धातु एवं मल, मूत्र आदि की क्रिया विकार रहित हो तथा जिसकी आत्मा, इन्द्रिय और मन प्रसन्न हों, वही स्वस्थ है। 

संस्कृत व्युत्पत्ति के अनुसार-’’स्वस्मिन् तिष्ठति इति स्वस्था:’’ जो स्व में रहता है, वह स्वस्थ है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन, 1948 - स्वास्थ्य पूर्ण शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक संतुलन की अवस्था है, केवल रोग या अपंगता का अभाव नहीं। 

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं। मैंने अपनी पुस्तकों के साथ बहुत समय बिताता हूँ। इससे https://www.scotbuzz.org और ब्लॉग की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।

Post a Comment

Previous Post Next Post