ब्रांड (brand) का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं विशेषताएँ

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ब्राण्ड कोई भी व्यापारिक चिन्ह है जिसके माध्यम से किसी उत्पाद को सही तरीके से पहचाना
जाता है और उपभोक्ताओं द्वारा जिसका वर्णन किया जा सकता है। अत: ब्राण्ड में ऐसी कोई भी
क्रिया एवं उपाय सम्मिलित है, जिससे उत्पाद की पहचान करवायी जाती है। इसमें वे शब्द, लेख या
अंक सम्मिलित है, जिनका उच्चारण हो सकता है और इसमें चित्र भी सम्मिलित है।

इस प्रकार ब्राण्ड कोई भी चिन्ह, पहचान चिन्ह, नाम, प्रतीक अथवा संकेताक्षर है, जो किसी
उत्पाद की पहचान करवाता है तथा जो उसकी अन्य उत्पादों या अन्य उत्पादकों के उत्पादों से पृथक
पहचान बनाता है। जैसे सर्फ, टाइटन, विमल, रेमण्ड्स, कोलगेट, एन्कर, पाण्ड्स, जॉनसन, बाटा आदि
प्रमुख ब्राण्ड है।

ब्रॉण्ड नाम’ ब्रॉण्ड का ही भाग या अंग है जिसका उच्चारण किया जा सकता है। यह शब्दों, अक्षरों,
अंको, आदि के रूप में हो सकता है। जैसे हीरो होण्डा, मोटर साईकल, 505 सोप, ए.बी.सी. कम्पनी
आदि।

  1. लिपसन एवं डारलिंग के अनुसार, ‘‘एक ब्राण्ड नाम अपने में उन शब्दों, अक्षरां े अथवा अंको को
    सम्मिलित करता है जो कि उच्चारण-योग्य होते हैं।’’ 
  2. अमेरिकन मार्केटिंग एसोसियशन के अनुसार, ‘‘ब्रॉण्ड एक नाम, शब्द, प्रतीत अथवा डिजाइन या
    संयोजन है जिसका उद्देश्य एक विक्रेता या विक्रेताओं के समूह की वस्तुओं या सेवाओं को पहचानना एवं
    उनका प्रतियोगियों की वस्तुओं या सेवाओं से भिन्न बतलाना है।’’

ब्राण्ड की विशेषताएँ 

  1. ब्राण्ड किसी भी उत्पाद का पहचान चिन्ह है। 
  2. ब्राण्ड कोई भी नाम, पहचान चिन्ह, संकेताक्षर, संख्या प्रतीक चिन्ह आदि में से कोई भी हो
    सकता है।
  3. यह उत्पाद की अन्य उत्पादों से पृथक पहचान कराता है। 
  4. यह एक उत्पादक के उत्पादों का अन्य उत्पादकों के उत्पादों से पृथक पहचान कराता
    है। 
  5. यह किसी उत्पाद की छवि या उसके व्यक्तित्व को प्रकट करता है। 
  6. यह उत्पाद का स्मृति सहायक चिन्ह है।
  7. ब्राण्ड कई प्रकार के हो सकते है, जैसे-उत्पादक ब्राण्ड, कम्पनी ब्राण्ड, मध्यस्थ ब्राण्ड आदि।

ब्राण्ड के प्रकार 

  1. निर्माता का ब्राण्ड – निर्माताओं द्वारा अपने उत्पादों को
    प्रदान किया गया ब्राण्ड, निर्माता का ब्राण्ड कहलाता है। इसे राष्ट्रीय ब्राण्ड भी कहते हैं
    क्योंकि निर्माता द्वारा निर्मित सभी उत्पादों पर एक छाप होती है और वह इसी एक ब्राण्ड
    के नाम से सम्पूर्ण देश में बेचे जाते है। जैसे फिलिप्स कम्पनी द्वारा निर्मित रेड़िया, बल्ब,
    ट्रांजिस्टर एवं टेलीविजन आदि पर फिलिप्स की छाप लगी रहती है। लाल इमली,
    धारीवाल, टाटा, बाटा आदि निर्माता के नाम को प्रकट करते है। 
  2. मध्यस्थों का ब्राण्ड – जब निर्माता अपने उत्पादों पर किसी
    प्रकार की छाप का प्रयोग नहीं करता है तो बड़े-बड़े थोक व्यापारी या फुटकर व्यापारी
    उन उत्पादों पर अपनी ब्राण्ड की मुहर या छाप लगाकर बेचते हैं, तो इस प्रकार के ब्राण्ड
    को मध्यस्थ ब्राण्ड कहते हैं। लिपसन एवं डारलिंग ने मध्यस्थों के ब्राण्ड को ‘पुनर्विक्रेता
    ब्राण्ड’ कहा है।
    मध्यस्थों के ब्राण्ड वाले उत्पादों की किस्म के अनुरूप ब्राण्ड का उत्तरदायित्व मध्यस्थों का होता है
    क्योंकि ब्राण्ड-नाम संस्थाओं की प्रतिष्ठा से जुड़ा होता है इसलिए उन्हें निर्माताओं अथवा उत्पादकों से
    सम्पर्क स्थापित करना होता है ताकि मध्यस्थों अथवा वितरकों की इच्छानुसार उत्पादों का निर्माण या
    उत्पादन किया जा सकें। 
  3. स्थानीय ब्राण्ड – वह ब्राण्ड जो एक स्थान विशेष पर ही लोकप्रिय हैं,
    स्थानीय ब्राण्ड कहलाता है, जैसे चाय, साबुन, डिटरजेन्ट पाउडर, पैन की स्याही और
    फोल्डर्स आदि। 
  4. प्रान्तीय ब्राण्ड – यह ब्राण्ड जो एक राज्य विशेष में ही
    प्रचलित है, उसको प्रान्तीय या राज्य ब्राण्ड कहते है, जैसे पटना मिर्च, अताणा मिर्च,
    ओसवाल साबुन, गुजरात दैनिक भास्कर एवं चण्डीगढ़ पत्रिका आदि।
  5. क्षेत्रीय ब्राण्ड – जब एक निर्माता राश्ट्र को अपने विक्रय के लिए
    कई क्षेत्रों में बाँट लेता है और प्रत्येक क्षेत्र में नये-नये ब्राण्डों का प्रयोग करता है तो इन
    ब्राण्डों को क्षेत्रीय ब्राण्ड कहते है। 
  6. राष्ट्रीय ब्राण्ड – इसे निर्माता ब्राण्ड भी कहते है। जब एक
    निर्माता सम्पूर्ण देश के लिए केवल एक ही ब्राण्ड का प्रयोग करता है तो उसका ब्राण्ड
    राष्ट्रीय ब्राण्ड कहलाता है। लिम्का, लक्स, कोलगेट आदि राष्ट्रीय ब्राण्ड है।
  7. व्यक्तिगत ब्राण्ड – जब एक निर्माता अथवा उत्पादाक प्रत्येक
    वस्तु के उत्पादन पर अलग अलग ब्राण्ड की मुहर लगाता है तो इसको व्यक्तिगत ब्राण्ड
    कहते हैं। सर्फ, विम, व्हील, एरियल आदि व्यक्तिगत ब्राण्ड है। 
  8. पारिवारिक ब्राण्ड – जब एक निर्माता अथवा उत्पादक अपनी सभी
    प्रकार की वस्तुओं की ब्राण्ड जिनका वह निर्माण अथवा उत्पादन करता है, एक ही रखता
    है तो ऐसे ब्राण्ड को पारिवारिक ब्राण्ड कहते हैं। बजाज गु्रप द्वारा सभी उत्पादनों पर
    बजाज शब्द का प्रयोग किया जाता है, जैसे स्कूटर-बजाज सुपर, बजाज, ब्रेवो बजाज
    वल्ब एवं ट्यूब बजाज आयरन, बजाज टोस्टर एवं बजाज मोटरसाईकल पल्सर आदि। 
  9. लड़ाकू ब्राण्ड – जब बाजार में प्रतिस्पर्द्धा हो और निर्माता या मूल
    ब्राण्ड की प्रतिष्ठा बचानी हो तो निर्माता एक कम मूल्य की वस्तु तैयार कर बाजार में
    प्रस्तुत कर दी जाती है। इस प्रकार की वस्तु ब्राण्ड को लड़ने वाली ब्राण्ड कहते है। 
  10. प्रतिस्पर्द्धी ब्राण्ड – जब विभिन्न प्रकार के निर्माताओं या
    उत्पादकों द्वारा बनायी गयी वस्तुओं में गुण, मूल्य, आकार-प्रकार आदि में कोई विशेष
    अन्तर नहीं होता है तो ऐसी वस्तुओं के ब्राण्ड प्रतिस्पर्द्धी ब्राण्ड कहलाते हैं। जैसे-कपड़े
    धोने का डिटर्जेन्ट पाउडर-सर्फ ब्राण्ड, व्हील, टाइड, निरमा, मैजिक, घड़ी, एरियल आदिं।
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अच्छे ब्राण्ड के आवश्यक तत्व

एक निर्माता द्वारा अपने उत्पाद के लिए कोई भी ब्राण्ड नाम रखा जा सकता है। किन्तु ऐसा
करते समय बहुत सावधानी की आवश्यकता है क्योंकि भविश्य में यही ब्राण्ड उसके लिए वरदान या
अभिशाप बन सकता है।
अत: एक अच्छे ब्राण्ड में इन तत्वों का होना आवश्यक है:-

  1. साधारण एवं छोटा – ब्राण्ड का नाम साधारण एवं सूक्ष्म होना चाहिए
    ताकि उसे आसानी से समझा जा सके एवं याद रखने में भी किसी प्रकार की कोई कठिनाई
    नहीं हो, जैसे-एयरटेल, डालडा, पनघट, सरस, उशा सेमसंग, बाटा, बिनाका, वज्रदन्ती, टाटा,
    बी.पी.एल., सेमसंग, दूध-गोल्ड एवं टनाटन नमकीन आदि। 
  2. उच्चारण में सुविधा – अच्छे ब्राण्ड की प्रथम आवश्यकता यह है
    कि इसका उच्चारण सुविधा से किया जा सके। उच्चारण में असुविधा होने पर लोग उस
    ब्राण्ड का नाम नहीं लेते और वह प्रचलित नहीं हो पाता है। टाटा, बाटा, पॉण्ड्स, लक्मे,
    रफ एण्ड टफ, उशा, सर्फ आदि ऐसे ब्राण्ड है जिनका उच्चारण आसानी से किया जा सकता
    है।
  3. स्मरण योग्य – ब्राण्ड स्मरण करने में सुविधाजनक होने चाहिये। लम्बे नाम
    प्राय: स्मरण नहीं हो पाते। बाटा, मारूति, हीरो होण्डा, कोकाकोला, कोलगेट, क्लोज-अप
    स्मरण योग्य ही हैं। 
  4. उत्पादक का संकेत – ब्राण्ड उत्पादक के नाम का संकेत देने वाला
    भी हो तो सोने में सुहागा। इससे ब्राण्ड एवं संस्था दोनों की ख्याति बनती है। ‘‘एच.एम.टी.’’
    ‘‘डी.सी.एम.’’, ‘‘टाटा’’, ‘‘बाटा’’, ‘‘गोदरेज’’ आदि ऐसे ही ब्राण्ड हैं जो उत्पादक के नाम का
    संकेत भी देते है। 
  5. पहचानने योग्य – ब्राण्ड ऐसा हो जिसे देखकर आसानी से पहचाना जा
    सके, जैसे- रेड लेबल टी, मरफी के रेडिया, सेलो रिफिल एवं पैन, केमल इंक रिलायन्स के
    सैलफोन आदि। 
  6. मितव्ययता – एक अच्छे ब्राण्ड में मितव्ययिता का गुण होना चाहिए अर्थात्
    उसे छपवाने, लिखवाने या प्रदर्शन करने में अधिक व्यय नहीं होना चाहिए। 
  7. ब्राण्ड नाम – ब्राण्ड का नाम ऐसा होना चाहिए जिससे वस्तु के बारे में
    जानकारी हो सके अथवा उसमें एवं वस्तु में कोई अनुकूल उपयोगी सम्बन्ध प्रकट हो सके
    अथवा वस्तु के किसी गुण का संकेत मिल सके। उदाहरण के तौर पर बैण्डएड मरहम पट्टी,
    कूल होम पंखे, वाटर कूलर, डिजिटल केमरा, नेस्केफ कॉफी, झंकार रेडियो आदि। 
  8. संवर्द्धन में सुविधा – ब्राण्ड ऐसा हो जो विज्ञापन, विक्रय संवर्द्धन,
    प्रचार आदि कार्यों में सुविधाजनक हो, उदाहरणार्थ, एयर इण्डिया का स्वागतातुर महाराजा का
    चित्र, देना बैंक का नाम, जीवन बीमा के हाथ वाला प्रतीक चिन्ह अािद सभी देखने या सुनने
    में ही ऐसे है मानों स्वयं इनकी सेवाओं का विज्ञापन कर रहे हों। 
  9. सुझावात्मक – ब्राण्ड का नाम इस प्रकार का होना चाहिए कि वह ग्राहाकें
    को प्रभावित करने के लिए कुछ सुझाव का भी कार्य कर सकें, जैसे- मिल्क मेड, बीमारी
    हितलाभ, केशवर्धनी तेल, जीवनरक्षक बीमापत्र, स्वास्थ्यवर्द्धक च्यवनप्राष आदि। 
  10. अन्य ब्राण्ड से भिन्न – प्रत्येक निर्माता/उत्पादक का
    ब्राण्ड अन्य निर्माता अथवा उत्पादक एवं उत्पादों के ब्राण्ड से भिन्न होना चाहिए ताकि किसी
    प्रकार की भ्रांति पैदा न हो। 
  11. सौन्दर्य एवं प्रसन्नचित – ब्राण्ड का नाम ऐसा होना चाहिए
    जिससे न केवल सौन्दर्य-बोध हो, प्रसन्नता के भाव प्रकट हो अपितु किसी सुन्दर स्थान
    की याद एवं झाँकी ताजा हो उठे। जैसे-ताजमहल, हिमायल, हॉलीवुड, अजन्ता, कश्मीर
    आदि। 
  12. कानूनी संरक्षण – ब्रॉण्ड का नाम ऐसा होना चाहिए जिसके कानूनी
    संरक्षण प्राप्त करने में अधिक बाधाएँ न आयें। अत: व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, संज्ञाएँ एवं
    विशेषण कम-कम से प्रयुक्त किये जाने चाहिए। गुणबोधक एवं असामान्य नामों का सृजन
    किया जाना चाहिए, जैसे-पाउडर के दूध के लिए ‘मिल्क मेड’, बे्रसरीज के लिए, ‘मेडन फॉम’
    पंखों के लिए ‘आंधी’ या ‘कूल’ तथा टेलीविजन के लिए ‘हवामहल गुंजन’ या रंगमच आदि। 
  13. समयानुसार – ब्राण्ड समय के अनूकूल होना चाहिए। कुछ समय के पुराने ब्राण्ड
    अप्रचलित हो जाते है, अत: ब्राण्ड समय-समय पर बदलते रहते है। इसलिए यह कहा जाता
    हैं कि एक अच्छा ब्राण्ड वही है, जो समय के अनुरूप हो। 
  14. सम्मानजनक – ब्राण्ड संस्था तथा उत्पाद के सम्मान, ख्याति तथा छवि को
    बनाने एवं निखारने में योग देने वाला होना चाहिए।
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