संचार की परिभाषाएं एवं श्रेणियां

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सूचनाओं की सहभागिता करने की योग्यता संचार है। यह हमारी आवश्यकता है। हमारे सभी व्यवसाय व काम धंधे सुचारु रखने के लिए यह अत्यावश्यक है। साथ ही लोग भी इसी माध्यम से एक दूसरे के संपर्क में रहते हैं। संचार के माध्यम से ही हम पुलिस, एम्बुलैंस, फायर ब्रिगेड, डॉक्टर इत्यादि से संपर्क कर पाते हैं। जरा सोचें यदि संचार न होता तो दुनिया की आज क्या हालत होगी? अधिकतर चीजों का कोई प्रयोग ही नहीं रह जाएगा। यातायात एवं खाद्य आपूर्ति लोगों की जरूरत के अनुसार नहीं होगी। हमारी सूचना एवं मनोरंजन की आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए न तो कोई समाचार-पत्र ही होगा और न ही कोई रेडियो स्टेशन अथवा टीवी चैनल होगा। समाज फिलहाल जिन हालात में है वैसा तो कतई भी नहीं होगा।

अब थोडा सा भविष्य के बारे में भी सोचें। शायद कुछ साल बाद हमारे पास फोन ऐसे होंगे जैसे कि कलाई घडी (कुछ हद तक ऐसी स्थिति आ भी चुकी है)। इंटरएिक्टीविटी की सुविधा वाले त्रिआयामी टीवी भी संभव हो सकते हैं। संभव है कि सभी चीजों के साथ हमारा मानसिक संपर्क हो और हमारे सोचने मात्र से काम होने लगें।

क्या यह सब संभव है? यह बात तो भविष्य ही बता पाएगा। आज से 100 साल पहले कितने लोगों ने उन चीजों के बारे में सोचा था, जो कि आज के समय में यहां मौजूद हैं।

संचार की श्रेणियां

अन्त:व्यैक्तिक संचार

मनुष्य द्वारा अपने आप से बात करने यानी कि दिमाग में कुछ सोचने विचारने की प्रक्रिया को अन्त:व्यैक्तिक संचार कहा जाता है। सोच, विचार प्रक्रिया, भावनात्मक प्रतिक्रिया, दृष्टिकोण, मूल्य और विश्वास, स्व अवधारणा, अर्थों की रचना व उनकी व्याख्या इसी संचार के अन्तर्गत आते हैं।

अन्त:व्यैक्तिक संचार

दो या दो से अधिक लोगों के बीच होने वाले संचारीय आदान-प्रदान की प्रक्रिया अन्त:व्यैक्तिक संचार कहलाती है। इस प्रकार के संचार में संदेश प्रसारित करने के लिए एक से अधिक स्रोतों का भी प्रयोग किया जा सकता है। जैसे हम शाब्दिक संचार करते वक्त शारीरिक भाव भंगिमाओं से भी कुछ संदेश प्रेषित कर रहे होते हैं।

समूह संचार

सांचे दृष्टिकोण, उद्देश्य या हितों वाले कुछ लोगों का समूह आपस में जो संचार करता है वह समूह संचार की श्रेणी में आता है। इस संचार के प्रतिभागी सांझे मूल्य या व्यवहार के मानक प्रदर्शित करते हैं।

जन माध्यम

आमतौर पर जनमाध्यमों को परिभाषित करते हुए कहा जाता है कि “किसी संदेश का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन व प्रसार करने वाले संगठन जनमाध्यम हैं।” 1939 में हैरबर्ट ब्लूमर ने मानव एक़ित्रकरण की चार श्रेणियां निर्धारित की थीं। उनके अनुसार एक जगह एकत्रित होने वाले लोगों को समूह, जन समूह, भीडò और मास कहा जाता है। किसी भाषण, लेख, संकेत या व्यवहार के माध्यम से विचार, सूचना, संदेश इत्यादि का आदान-प्रदान ही संचार है। यह सूचना या विचारों को प्रभावशाली तरीके से दूसरों तक पहुंचाने के लिए सही शब्दों व संकेतों के चयन की तकनीक व कला है।

जनसंचार के क्षेत्र में हम उन साधनों के बारे में भी बात करते हैं, जिनमें काफी तीव्र गति से संदेश को काफी लोगों तक पहुंचाया जाता है। उदाहरण के लिए मुद्रण अथवा प्रसारण के माध्यम। इसमें सूचना के प्रसारण से जुडे विभिन्न पेशों जैसे कि विज्ञापन, पत्रकारिता इत्यादि को शामिल किया जाता है। इस प्रणाली में हम ई मेल, टीवी, टेलीफोन इत्यादि की तकनीक के माध्यम से संदेश प्रेषित करते हैं। संचार, खासकर मानव संचार तो इन चीजों को समझने से ही जुडे हुआ है कि मनुष्य संचार कैसे करता है।

अपने आप से : अन्त:व्यैक्तिक संचार
दूसरे व्यक्ति से : अन्तव्र्यैक्तिक संचार
समूह के अन्दर : समूह संचार
संगठन के अंदर : सांगठनिक संचार
अनेक लोगों के साथ : जन संचार
संस्कृतियों के पार : क्रास कल्चरल संचार

साधारणतम शब्दों में हम संचार को S-R से वर्णित करते हैं। यहां वर्ण S का अर्थ उद्दीपक (Stimuli) व R का अर्थ जवाब (Response) से है। प्राप्त किया गया संदेश उद्दीपक है, जबकि उस संदेश की प्रतिक्रिया जवाब है।

इसे प्रेषक-प्रापक माडल के नाम से भी जाना जाता है। यह संचार के प्रारम्भिक माडलों में से एक है। इस माडल में संचार के सिर्फ दो ही तत्व बताए गए हैं। यह कहता है कि हर संचार में इतनी क्षमता तो अवश्य होती है कि वह कोई प्रभाव पैदा कर पाए। कई बार यह प्रभाव साधारण व प्रत्यक्ष होता है तो कुछ मामलों में यह जटिल व विलम्बित भी हो सकता है। यह माडल संचार की प्रक्रिया का एक और महत्वपूर्ण पहलू दर्शाता है कि सभी संचार एक व्यक्तिगत स्तर पर होते हैं। अर्थात् आप भले ही काफी लोगों तक एक ही संदेश पहुंचा दें, लेकिन उस पर हर आदमी की प्रतिक्रिया अलग होगी।

सामान्यतया: संचार को एक गतिविधि के तौर पर देखा जाता है। लेकिन वास्तव में यह एक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में सूचना, विचार, भाव, कौशल, ज्ञान इत्यादि आपस में बांटे जाते हैं। यह सब काम कुछ ऐसे चिह्नों के माध्यम से किया जाता है, जिनका अर्थ उस समाज के सभी लोग समझते हों।

संचार ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें मनुष्य कुछ सीखता है। अर्थात् इस प्रक्रिया में हम दूसरों से सीखने की कोशिश करते हैं। यह गतिशील है व परिस्थिति के अनुसार इसकी प्रकृति भी परिवर्तित होती रहती है। अत: संचार को विचारों, भावों, अनुभवों की सहभागिता की प्रक्रिया कहा जा सकता है।

संचार एकतरफा प्र्रक्रिया न होकर दोतरफा है। किसी भी स्रोत से संदेश प्राप्त करने के बाद प्रापक अपनी प्रतिक्रिया उस तक पहुंचाने की कोशिश करता है। प्रापक की यह प्रतिक्रिया प्रतिपुष्टि होती है।

संचार की परिभाषाएं

अलग-अलग संचार शास्त्रियों ने संचार की अपने-अपने तरीके से व्याख्या की है। समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, नृशास्त्र व संचार के विशेषज्ञों ने सैंकड़ो तरीके से संचार को परिभाषित किया है। लेकिन आज तक कोई भी ऐसी परिभाषा विकसित नहीं हो सकी, जिसे सभी लोग एकमत से स्वीकार कर लें। सभी संचार शास्त्री किसी भी एक परिभाषा पर सहमत नहीं हो पाए हैं। संचार की अवधारणा की जटिलता व व्यापकता के चलते ही ऐसा नहीं हो पाया है।

संचार में हम लोग कुछ चीजों का आदान-प्रदान करते हैं, तो कुछ लोग इसे सहभागिता की प्रक्रिया मानते हैं। यह तो हम सभी समझते हैं कि संचार है क्या। हम सभी अधिकतर समय संचार की प्रक्रिया में ही लगे रहते हैं। हम कभी संदेश प्रेषक तो कभी प्रापक की भूमिका निभाते हैं। कई बार संचार करने के लिए कुछ मशीनी माध्यमों का प्रयोग भी करना पडò जाता है। सफलता व अन्य सभी उद्देश्यों को प्राप्त करने में संचार सहायक बनता है।

उपर्युक्त बातों के आधार पर हम संचार का वर्णन कर सकते हैं। संचार पर चर्चा भी कर सकते हैं। लेकिन जैसे ही हम संचार को परिभाषित करने की कोशिश करेंगे, हम पाएंगे कि यह बहुत ही जटिल कार्य है।

आइए देखते हैं कुछ विशेषज्ञों ने संचार को किस प्रकार परिभाषित किया है।
  1. Larry L. Barker & D. A. Barker के अनुसार : किसी एक निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एक व्यवस्था के दो घटकों द्वारा की जाने वाली अन्योन्यक्रिया को संचार कहा जाता है। (इनके अनुसार संचार गतिशील, परिवर्तनशील व अंतहीन प्रक्रिया है।)
  2. J. P. Legan के अनुसार : संचार वह प्रक्रिया है, जिसमें दो या अधिक व्यक्ति आपस में किसी एक संदेश पर समान समझ पैदा करने के लिए विचारों, भावों, तथ्यों, प्रभावों इत्यादि का आदान-प्रदान करते हैं।
  3. Brooker के अनुसार : संदेश के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक कोई अर्थ प्रेषित करने की प्रक्रिया संचार है।
  4. Weaver के अनुसार : संचार नामक प्रक्रिया की सहायता से हम दूसरों को आसानी से प्रभावित कर सकते हैैं।
  5. Thayer के अनुसार : पारस्परिक समझ, विश्वास व अच्छे मानवीय संबंध बनाने के लिए विचारों व सूचनाओं का आदान-प्रदान करने की प्रक्रिया संचार है।
  6. L. Brown के अनुसार : विचार, भाव और कर्तव्य इत्यादि के आदान-प्रदान की प्रक्रिया को संचार कहते हैं।
  7. Wilbur Schramm के अनुसार : उद्दीपकों का प्रसारण ही संचार है।
  8. John Harris के अनुसार : समानता स्थापित करने की प्रक्रिया ही संचार है।
  9. Dennis McQuil के अनुसार : संचार लोगों के बीच में समानता की भावना को बढ़ता है, लेकिन संचार होने के लिए समानता होना एक आवश्यक शर्त है। संचार लगभग वही है जो कि हम अपने दैनिक क्रिया कलापों में करते हैं। लोगों के आपसी संबंधों से इसका काफी कुछ लेना देना है। यह काफी साधारण से काफी जटिल हो सकता है। हम संचार कैसे करें, यह काफी हद तक संदेश, प्रेषक व प्रापक की प्रकृति पर निर्भर करता है। यहां संचार की कुछ और परिभाषाएं दी गई हैं।
संचार वह प्रक्रिया है, जिसमें लोग भावों की सहभागिता करते हैं। एक व्यक्ति (संचारकर्ता) द्वारा दूसरों (प्रापक) के व्यवहार में बदलाव के लिए उद्दीपक प्रसारित करने की प्रक्रिया संचार है।

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