संचार क्या है?

अनुक्रम
संचार का अर्थ शाब्दिक दृष्टि से विचार करें तो एक तकनीकी शब्द है जो अंग्रेजी के कम्युनिकेशन (Communication) शब्द का हिन्दी रूपान्तर है। संस्कृत के चर् धातु से ‘संचार’ शब्द निर्मित हुआ हे। चर् धातु का अर्थ है चलना। संचार का सामान्य अर्थ किसी बात को आगे बढ़ाना, चलाना या फैलाना है।  जब हम ‘संचार’ शब्द का प्रयोग कम्युनिकेशन के विशिष्ट अर्थ में करते हैं, तब यह एक पारिभाषिक शब्द बन जाता हे। अंग्रेजी के कम्युनिकेशन शब्द का अर्थ है समूह, या मनुष्य का एक दूसरे के साथ सम्बन्ध, भाई चारा, मैत्रीभाव, सहभागिता आदि। यानी मनुष्यों का परस्पर व्यवहार, समर्पक, आदान-प्रदान। 

सरल शब्दों में समझने के लिए कुछ उदाहरण लें। दो व्यक्तियों में आमने-सामने बैठकर होने वाली गपशप, टेलीफोन पर होने वाला वार्तालाप, पत्राचार, सेटेलाइट के माध्यम से दूरदर्शन पर प्रसारित कार्यक्रम आदि संचार है।

संचार के उद्देश्य

संचार के उद्देश्य हें- 
  1. भाव, विचार, संदेश ,ज्ञान, सूचना, आदि को दूसरे लोगों तक पहुंचाना। 
  2. अपने अनुभवों का परस्पर आदान-प्रदान करना। 
  3. समाज के सदस्यों को समझना, उनका विश्वास अज्रित करना। 
  4. ज्ञान, सूचना और अनुभवों को परस्पर बांटना। उन्हें दूर-दूर तक पहुंचाना या फैलाना।

संचार की परिभाषा

संचार की परिभाषा को कुछ विशेषज्ञों ने संचार को किस प्रकार परिभाषित किया है। Larry L. Barker & D. A. Barker के अनुसार : किसी एक निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एक व्यवस्था के दो घटकों द्वारा की जाने वाली अन्योन्यक्रिया को संचार कहा जाता है। (इनके अनुसार संचार गतिशील, परिवर्तनशील व अंतहीन प्रक्रिया है।) J. P. Legan के अनुसार : संचार वह प्रक्रिया है, जिसमें दो या अधिक व्यक्ति आपस में किसी एक संदेश पर समान समझ पैदा करने के लिए विचारों, भावों, तथ्यों, प्रभावों इत्यादि का आदान-प्रदान करते हैं। Brooker के अनुसार : संदेश के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक कोई अर्थ प्रेषित करने की प्रक्रिया संचार है।

Weaver के अनुसार : संचार नामक प्रक्रिया की सहायता से हम दूसरों को आसानी से प्रभावित कर सकते हैैं।
Thayer के अनुसार : पारस्परिक समझ, विश्वास व अच्छे मानवीय संबंध बनाने के लिए विचारों व सूचनाओं का आदान-प्रदान करने की प्रक्रिया संचार है।

L. Brown के अनुसार : विचार, भाव और कर्तव्य इत्यादि के आदान-प्रदान की प्रक्रिया को संचार कहते हैं।
Wilbur Schramm के अनुसार : उद्दीपकों का प्रसारण ही संचार है। John Harris के अनुसार : समानता स्थापित करने की प्रक्रिया ही संचार है।

Dennis McQuil के अनुसार : संचार लोगों के बीच में समानता की भावना को बढ़ता है, लेकिन संचार होने के लिए समानता होना एक आवश्यक शर्त है। संचार लगभग वही है जो कि हम अपने दैनिक क्रिया कलापों में करते हैं।लोगों के आपसी संबंधों से इसका काफी कुछ लेना देना है। यह काफी साधारण से काफी जटिल हो सकता है। हम संचार कैसे करें, यह काफी हद तक संदेश, प्रेषक व प्रापक की प्रकृति पर निर्भर करता है। यहां संचार की कुछ और परिभाषाएं दी गई हैं।

संचार की श्रेणियां

1. अन्त:व्यैक्तिक संचार -

मनुष्य द्वारा अपने आप से बात करने यानी कि दिमाग में कुछ सोचने विचारने की प्रक्रिया को अन्त:व्यैक्तिक संचार कहा जाता है। सोच, विचार प्रक्रिया, भावनात्मक प्रतिक्रिया, दृष्टिकोण, मूल्य और विश्वास, स्व अवधारणा, अर्थों की रचना व उनकी व्याख्या इसी संचार के अन्तर्गत आते हैं।

2. अन्त:व्यैक्तिक संचार -

दो या दो से अधिक लोगों के बीच होने वाले संचारीय आदान-प्रदान की प्रक्रिया अन्त:व्यैक्तिक संचार कहलाती है। इस प्रकार के संचार में संदेश प्रसारित करने के लिए एक से अधिक स्रोतों का भी प्रयोग किया जा सकता है। जैसे हम शाब्दिक संचार करते वक्त शारीरिक भाव भंगिमाओं से भी कुछ संदेश प्रेषित कर रहे होते हैं।

3. समूह संचार -

सांचे दृष्टिकोण, उद्देश्य या हितों वाले कुछ लोगों का समूह आपस में जो संचार करता है वह समूह संचार की श्रेणी में आता है। इस संचार के प्रतिभागी सांझे मूल्य या व्यवहार के मानक प्रदर्शित करते हैं।

4. जन संचार

आमतौर पर जनमाध्यमों को परिभाषित करते हुए कहा जाता है कि “किसी संदेश का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन व प्रसार करने वाले संगठन जनमाध्यम हैं।” 1939 में हैरबर्ट ब्लूमर ने मानव एक़ित्रकरण की चार श्रेणियां निर्धारित की थीं। उनके अनुसार एक जगह एकत्रित होने वाले लोगों को समूह, जन समूह, भीडò और मास कहा जाता है। किसी भाषण, लेख, संकेत या व्यवहार के माध्यम से विचार, सूचना, संदेश इत्यादि का आदान-प्रदान ही संचार है। यह सूचना या विचारों को प्रभावशाली तरीके से दूसरों तक पहुंचाने के लिए सही शब्दों व संकेतों के चयन की तकनीक व कला है।

संचार की प्रक्रिया 

संचार प्रक्रिया
संचार प्रक्रिया

एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक सूचना प्रवाहित करने और उसे समझने की प्रक्रिया संचार है। संचार की प्रक्रिया में 6 आधारभूत तत्व समाहित रहते हैं। यह तत्व हैं- प्रेषक (संकेतक), संदेश, माध्यम, प्रापक (विसंकेतक), शोर व प्रतिपुष्टि। यह तत्व संचार को प्रभावी बनाने में किस प्रकार सहायक हैं और आप इनको किस प्रकार प्रयोग कर सकते हैं इनकी जानकारी होने पर कोई भी व्यक्ति अपना संचार कौशल विकसित कर सकता है।

सबसे पहले प्रेषक संचार की प्रक्रिया की शुरुआत करता है। प्रेषक यह सुनिश्चित करता है कि उसे कौन सा अर्थ प्रेषित करना है। इसके बाद वह उसे ऐसे चिह्नों व संकेतों में परिवर्तित करता है जिनको कि संदेश प्राप्त करने वाला समझ सके। (प्रापक उस अर्थ को कितना ग्रहण कर पाता है, यह उस पर निर्भर करता है, लेकिन प्रेषक यही सोचकर संकेतों का चयन करता है कि वह प्रापक की समझने की भाषा है।) अर्थों को संकेतों में ढालने की यह प्रक्रिया संकेतीकरण कहलाती है। अब प्रेषक के पास संदेश तैयार है। फिर वह तय करता है कि संदेश किस माध्यम से प्रापक तक पहुंचाया जाए। संदेश वह सूचना या अर्थ है, जिन्हें प्रेषक प्रापक तक भेजना चाहता है। संचार का माध्यम बोले गए शब्द, लिखित या मुद्रित सामग्री इत्यादि हो सकता है। 

मौखिक संचार आमतौर पर अनौपचारिक होता है। आधिकारिक भाषणों, कार्यालयीन सम्मेलनों इत्यादि को छोडकर यह सामान्यतया व्यक्तिगत प्रकृति का होता है। जबकि कार्यालयों या फिर जब संचार काफी लोगों के साथ जुडòा हुआ हो तो इसे लिखित स्वरूप में किया जाता है। इंटर आफिस मेमो इत्यादि को अनौपचारिक पड़ताल और जवाब इत्यादि के रिकार्ड के लिए संभाला जाता है। व्यक्तिगत पत्रों के अलावा सभी पत्र काफी औपचारिक प्रकार के होते हैं।

सूचनाओं के आदान-प्रदान व संचार की आवश्यकता को काफी समय तक समय और स्थान की सीमाएं बांध नहीं पाई। ई मेल, वायस मेल, फैक्स इत्यादि ने संचार और ज्ञान की सहभागिता को बढ़ावा दिया है। कम्प्यूटर के माध्यम से लिखित संदेश के प्रसार की प्रक्रिया ई मेल है। वहीं डिजीटल प्रणाली में रिकार्ड आवाज का प्रसारण इत्यादि वायस मेल है। अब तो हमारे पास काफी संख्या में जनमाध्यम भी उपलब्ध हैं।

मौखिक संचार में अनौपचारिक बैठक, सुनियोजित सभा और जनसभा को शामिल किया जाता है। इस संचार में वक्ता की आवाज और प्रस्तुतिकरण की शैली काफी अन्तर पैदा करती है। दैनंदिन कार्य, निर्देशन, सूचनाओं का आदान-प्रदान और अन्तव्यर्ैक्तिक संबंधों में गर्माहट रखने के लिए अनौपचारिक बातें होना काफी आवश्यक है। आजकल सूचना प्रौद्योगिकी ने हम सबके संचार करने के तौर तरीकों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिए हैं। इंटरनेट व अन्य इलैक्ट्रानिक माध्यमों ने हमें किसी भी वक्त किसी भी स्थान से सूचना प्राप्त करने लायक बना दिया है।

यहां इससे संबंधित कुछ शब्दों का विवरण दिया गया है। प्रापक वह व्यक्ति या समूह है, जिसे संदेश पहुंचाने के लिए संचार की सारी कवायद की गई। संचारित संदेश में कुछ खलल पैदा करने वाली सभी चीजों को शोर की श्रेणी में रखा जाएगा। प्रतिपुुष्टि यह सुनिश्चित करती है कि संचार की प्रक्रिया में आपसी सहमति का निर्माण हुआ है। प्रापक से प्रेषक की तरफ कुछ सूचनाएं जाने की प्रक्रिया प्रतिपुष्टि कहलाती है।

संचार के कार्य 

  संचार के कार्य - मोटे तौर पर देखें तो संचार कार्य करता है: 
  1. सूचना देना 
  2. शिक्षा देना 
  3. मनोरंजन 
  4. किसी काम के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना ।
इसके अलावा भी संचार के कुछेक अतिरिक्त कार्य हैं। यह कार्य इस प्रकार हैं: 
  1. मूल्यांकन
  2. दिशा निर्देशन 
  3. प्रभावित करना 
  4. अभिविन्यास करना।

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