विक्रय संवर्धन क्या है?

By Bandey No comments
प्रत्येक व्यवसायी जिन वस्तुओं का व्यापार करता है, वह उनकी बिक्री बढ़ाना चाहता है। इस
उद्देश्य की पूर्ति के लिए वह विभिन्न विधियाँ अपना सकता है। आपने शायद ‘‘लखपति
बनो’’, ‘‘सिंगापुर की यात्रा करो’’, ‘‘एक किलो के पैकेट में 30 प्रतिशत अतिरिक्त पाओ’’,
‘‘कार्ड खुरचो इनाम जीतो’’ आदि के बारे में अवश्य सुना होगा। आपको कुछ वस्तुओं के
साथ मुफ्त उपहार भी मिले होंगे, जैसे- लंच बॉक्स, पैंसिल, पैन, शैम्पू के पाउच आदि।
आपने किसी पुरानी वस्तु के बदले में नई वस्तु, जैसे टेलीविजन के वर्तमान मॉडल, घटे
हुए मूल्य पर नया मॉडल प्राप्त करने के प्रस्ताव भी देखे होंगे। आपने आस पास के बाजारों
में अक्सर ‘विंटरसेल’, ‘समर सेल’ ‘मेले’, ‘50 प्रतिशत की छूट’ और इसी प्रकार की
विभिन्न योजनाएं भी देखी होगी जो ग्राहक को कुछ विशेष उत्पाद खरीदने के लिए
आकर्षित करती हैं। ये सभी योजनाएं निर्माताओं या मध्यस्थों द्वारा अपनी वस्तुओं की बिक्री
में वृद्धि करने के लिए प्रयोग किए जाने वाले अभिप्रेरक हैं। ये अभिप्रेरक मुफ्त नमूनों,
उपहार, छूट कूपन, प्रदर्शन, प्रतियोगिताओं आदि के रूप में हो सकते हैं। ये सभी उपाय
साधरणतया उपभोक्ता को अधिक क्रय के लिए प्रेरित करते हैं और इस प्रकार से वस्तु
की बिक्री में वृद्धि करते हैं। वस्तुएं बेचने की इस विधि को विक्रय संवर्धन के नाम से
जाना जाता है।

विज्ञापन भी वस्तुओं की बिक्री बढ़ाने में
सहायता करते हैं। विज्ञापनों का प्रयोग भावी उपभोक्ताओं को विक्रय के लिए प्रयुक्त
अभिप्रेरकों के विषय में बताने के लिए सम्प्रेषण माध्यम के रूप में किया जा सकता है।
विक्रय संवर्धन बिक्री में वृद्धि के लिए विभिन्न अल्पकालीन एवं अनावर्ती विधियाँ को
अपनाता है। यह प्रस्ताव उपभोक्ताओं को वर्ष भर उपलब्ध् नहीं होते। साधरणतया ये योजनाएं
त्यौहारों के दिनों में, एक विशेष मौसम की समाप्ति पर, वर्ष की समाप्ति पर, या कुछ अन्य
विशेष अवसरों पर बाजार में उपलब्ध होती हैं।

इस प्रकार विक्रय संवर्धन में विज्ञापन एवं वैयक्तिक विक्रय के अतिरिक्त वे सभी क्रियाएं
सम्मिलित हैं, जो एक विशेष वस्तु की बिक्री को बढ़ाने में सहायक होती हैं।

विक्रय संवर्धन का महत्व

आज का व्यावसायिक जगत प्रतियोगिता का जगत है। यदि किसी व्यवसाय का उत्पाद बाजार
में नहीं बिक रहा है तो वह व्यवसाय बाजार में टिका नहीं रह सकता। अत: बिक्री में वृद्धि
के लिए ही समस्त विपणन क्रियाएं सम्पन्न की जाती हैं। उत्पादक, विज्ञापन एवं वैयक्तिक
विक्रय पर अत्यध्कि खर्च करते हैं। लेकिन पिफर भी वस्तुओं की बिक्री नहीं होती। अत:
उपभोक्ताओं को विभिन्न प्रकार से प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है जिससे आकर्षित होकर
उपभोक्ता वस्तु क्रय करें। अत: किसी भी वस्तु की बिक्री में वृद्धि करने के लिए विक्रय
संवर्धन अत्यंत महत्वपूर्ण है। आइए, निर्माताओं और उपभोक्ताओं के दृष्टिकोण से विक्रय
संवर्धन के महत्व की चर्चा करें।

निर्माताओं के दृष्टिकोण से

निर्माताओं के लिए विक्रय संवर्धन महत्वपूर्ण है क्योंकि :-

  1. प्रतियोगिता के बाजार में यह बिक्री बढ़ाने में सहायता करता है जिससे लाभ में वृद्धि
    होती है।
  2. यह भावी उपभोक्ताओं का ध्यान आकृष्ट कर बाजार में नए उत्पाद की प्रस्तुति में
    सहायता करता है।
  3. जब बाजार में कोई नया उत्पाद प्रस्तुत किया जाए या पैफशन में परिवर्तन हो जाए
    या उपभोक्ताओं की रूचि में परिवर्तन हो जाए तो वर्तमान स्टॉक को शीघ्रता से
    बेचने में विक्रय संवर्धन सहायता करता है और 
  4. यह अपने उपभोक्ताओं को अपने साथ रखकर विक्रय की मात्रा में स्थिरता लाता
    है। प्रतियोगिता के इस युग में यह संभव है कि उपभोक्ता के दिमाग में परिवर्तन
    आ जाए और वह अन्य ब्रान्ड की वस्तुओं का भी प्रयोग करना चाहे। विक्रय
    संवर्धन योजनाओं के अन्तर्गत विभिन्न अभिप्रेरक, उपभोक्ताओं को बनाए रखने में
    सहायता करते हैं।

उपभोक्ताओं के दृष्टिकोण से

उपभोक्ताओं के लिए विक्रय संवर्धन महत्वपूर्ण है क्योंकि :-

  1. इससे उपभोक्ता को वस्तु कम मूल्य पर मिल जाती है।
  2. यह विभिन्न पुरस्कार देकर तथा उपभोक्ताओं को भिन्न-भिन्न स्थानों का भ्रमण
    कराके उन्हें वित्तीय लाभ भी पहुंचाता है।
  3. इससे उपभोक्ताओं को विभिन्न वस्तुओं की गुणवत्ता, लक्षण एवं उनके उपयोग आदि
    के बारे में सभी सूचनाएं मिलती हैं।
  4. मूल्य वापसी जैसी कुछ योजनाएँ उपभोक्ताओं के मस्तिष्क में वस्तु की गुणवत्ता के
    प्रति विश्वास जाग्रित करती हैं और 
  5. यह लोगों का जीवन-स्तर ऊंचा उठाने में सहायता करता है। लोग अपनी पुरानी
    वस्तुओं के बदले में बाजार में उपलब्ध आधुनिक वस्तुओं का उपयोग कर सकते हैं।
    इस प्रकार की वस्तुओं के उपयोग से समाज में उनकी छवि सुधरते है।

विक्रय संवर्धन की तकनीकें

किसी भी उत्पाद की बिक्री को बढ़ाने के लिए निर्माता या उत्पादक विभिन्न विधियों
अपनाते हैं, जैसे : नमूने बांटना, उपहार देना, अतिरिक्त वस्तु देना और बहुत सी अन्य
विधियां। इन्हें विक्रय संवर्धन की तकनीकों या विधियों के नाम से जाना जाता है। आइए
सामान्यतया प्रयोग की जाने वाली विक्रय संवर्धन तकनीकों के बारे में और अधिक
जानकारी प्राप्त करें।

मुफ्त नमूनों का वितरण 

दुकानों से समान खरीदते समय आपने शैम्पू, कपड़े
धोने का साबुन, कॉफी पाउडर आदि वस्तुओं के मुफ्रत नमूने अवश्य ही प्राप्त किए
होंगे। कभी-कभी यह मुफ्त नमूने उन लोगों को भी वितरित
किए जाते हैं जो दुकान से कोई भी वस्तु नहीं खरीद रहे हैं।
इन नमूनों का मुफ्त वितरण लोगों को नए उत्पाद के प्रयोग
के प्रति आकर्षित करने और पिफर उन्हें ग्राहक बनाने के
उद्देश्य से किया जाता है। कुछ व्यवसायी उत्पाद को
लोकप्रिय बनाने के लिए नमूनों का मुफ्त वितरण करते हैं,
उदाहरण के लिए दवाओं का मुफ्त वितरण केवल चिकित्सकों
को तथा पाठ्य पुस्तकों की नमूना-प्रतिओं का वितरण केवल अध्यापकों के बीच
ही किया जाता है।

बोनस के रूप में वस्तु देना 

नैस्कैपेफ के साथ एक मिल्क शेकर, बोर्नवीटा के
साथ एक मग, 200 ग्राम टूथपेस्ट के साथ एक टूथब्रश, एक किलो के पैकेट में
30 प्रतिशत अतिरिक्त आदि, एक उत्पाद की खरीद पर
पुरस्कार स्वरूप मुफ्रत मिलने वाली वस्तुओं के कुछ
उदाहरण हैं। ये प्रस्ताव उपभोक्ता को एक विशेष
उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित करने में प्रभावपूर्ण सि( होते हैं। ये वर्तमान
उपभोक्ताओं को पुरस्कृत करने एवं उन्हें वही उत्पाद खरीदते रहने के लिए प्रेरित
करने में भी उपयोगी सि( होते हैं।

वस्तु विनिमय योजना 

इसका अभिप्राय पुरानी वस्तु देकर नई वस्तु को
वास्तविक मूल्य से कम मूल्य पर प्राप्त
करने की योजना से है। ग्राहकों का ध्यान
वस्तु के नये स्वरूप की ओर आकर्षित
करने के लिए भी यह योजना बहुत उपयोगी
है। अपना पुराना मिक्सर-सह-जूसर लाइए
और केवल रु 500 के भुगतान पर नया
मिक्सर-सह-जूसर प्राप्त कीजिए। अपने ब्लैक
एण्ड व्हाईट टेलीविजन के बदले रंगीन टेलीविजन ले जाइए आदि इस योजना के
कुछ लोकप्रिय उदाहरण हैं।

मूल्यों में कमी 

इस प्रस्ताव के अन्तर्गत उत्पाद को उसके वास्तविक मूल्य से कम
मूल्य पर बेचा जाता है। एक लाइपफबॉय की टिकिया खरीदने
पर रु 2 की छूट, ताजमहल चाय के 250 ग्राम पैकेट पर
रु 15 की छूट, कूलरों पर रु 1000 की छूट आदि कुछ
सामान्य योजनाएं है। मन्दी के समय और कभी-कभी नए
उत्पाद को बाजार में प्रस्तुत करते समय बिक्री को बढ़ाने के
लिए ऐसी योजनाएं लागू की जाती हैं।

कूपन बांटना 

कभी-कभी किसी वस्तु के निर्माता द्वारा उत्पाद के पैकेट में या
सामाचार पत्रा अथवा पित्राका में छपे विज्ञापन के माध्यम से
अथवा डाक द्वारा उपभोक्ताओं में कूपन वितरित किए जाते
हैं। वस्तु खरीदते समय इन कूपनों को उपभोक्ता, पुफटकर
विक्रेता को दे देता है। उपभोक्ता को वह वस्तु कुछ छूट पर
प्राप्त होती है। उदाहरण के लिए आपने इस प्रकार के कूपन
अवश्य देखे होंगे जिनके सम्बन्ध् में लिखा होता हैं। इस
कूपन को दिखाइए और 5 किलो अन्नपूर्णा आटा क्रय करने
पर रु 15 की छूट प्राप्त कीजिए आदि। इस योजना के
अन्तर्गत घटा हुआ मूल्य भावी उपभोक्ताओं को नई और संशोध्ति वस्तु की ओर
आकर्षित करता है।

मेले एवं प्रदर्शनियां 

 नए उत्पाद को प्रस्तुत करने, उत्पाद का प्रदर्शन करने तथा
उत्पाद के विशिष्ट लक्षणों और उपयोगिता को
समझाने के लिए स्थानीय, क्षेत्राीय, राष्ट्रीय एवं
अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मेले एवं प्रदर्शनियों का
आयोजन किया जाता है। वस्तुओं की सजावट
की जाती है तथा उनका प्रदर्शन किया जाता है
और उचित छूट पर उनकी बिक्री भी की जाती
है। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में प्रतिवर्ष 14 नवम्बर से 27 नवम्बर तक आयोजित
होने वाला ‘‘अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला’’ विक्रय संवर्धन की तकनीक के रूप में मेले
एवं प्रदर्शनियों का एक सुप्रसिद्ध उदाहरण है।

व्यापारिक टिकटें 

कुछ वस्तुओं के क्रय करने पर ग्राहकों को क्रय किए गये माल
के मूल्य के आधर पर व्यापारिक टिकटें वितरित की जाती हैं। जो क्रेता एक
निश्चित मूल्य की टिकटें एक निश्चित अवधि दौरान एकित्रत कर लेते हैं, वह
कुछ घोषित लाभों को प्राप्त करने के अधिकारी बन जाते हैं। यह तकनीक उपभोक्ता
को एक निश्चित मूल्य की टिकटें एकित्रात करने के लिए उत्पादों को बार-बार
खरीदने के लिए प्रेरित करती है।

खुरचिए एवं जीतिए 

ग्राहक एक विशेष उत्पाद को ही खरीदे इसके लिए
‘‘खुरचिए एवं जीतिए’’ योजना भी प्रस्तुत की जाती है। इस योजना के अन्तर्गत
ग्राहक, उत्पाद के पैकेट पर बनाए गए एक
चिन्हित क्षेत्रा को खुरचने पर लिखित पाई गई
सूचना के अनुसार लाभ प्राप्त करते हैं। इस
प्रकार उपभोक्ता चिन्हित क्षेत्रा में लिखी सूचना
के अनुसार कोई मुफ्रत वस्तु प्राप्त कर सकते हैं
या कभी-कभी निर्माताओं द्वारा आयोजित यात्राओं के द्वारा कुछ विशेष क्षेत्रों का
भ्रमण कर सकते हैं।

मूल्य वापसी योजना 

इस योजना के अन्तर्गत उपभोक्ताओं
को यह आश्वासन दिया जाता है कि यदि वस्तु का उपयोग
करने के बाद वे संतुष्ट नहीं हुए तो उन्हें उत्पाद का पूरा मूल्य
वापिस कर दिया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं में उस वस्तु की
गुणवत्ता के प्रति विश्वास जाग्रत होता है। नई वस्तु को बाजार
में प्रस्तुत करते समय यह तकनीक विशेष रूप से उपयोगी
होती है।

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