अर्थशास्त्र का अर्थ, परिभाषा, शाखाएं

अर्थशास्त्र एक अत्यंत विशाल विषय है। इसलिये अर्थशास्त्र की कोई निश्चित परिभाषा अथवा अर्थ देना आसान नहीं है क्योंकि इसकी सीमा तथा क्षेत्र, जो इसमें सम्मिलित हैं, अत्यंत विशाल हैं। जिस समय से यह सामाजिक विज्ञान के अध्ययन की एक पृथक शाखा के रूप में उभर कर आया है, विभिन्न विद्वानों तथा लेखकों ने इसका अर्थ तथा उद्देश्य बताने का प्रयत्न किया है। 

अर्थशास्त्र का अर्थ

अर्थशास्त्र की उत्पत्ति ‘ग्रीस’ में मानी जाती है ऐसा प्लेटो एवं अरस्तु के लेखों से प्रमाणित होता है । अर्थशास्त्र का पर्यायवाची शब्द ‘इकोनोमिक्स’ है, ग्रीक शब्द ‘Oikos’ से बना है । जिसका अर्थ ‘घरेलु व्यवस्था’ (House hold Manegement) होता है ।

अर्थशास्त्र के अंतर्गत आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है । हमारे आस-पास के अधिकतर मनुष्य किसी-न-किसी व्यवसाय में लगे हैं क्योंकि मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति अर्जित धन के माध्यम से करता है । धन की पूर्ति मानव अनेक आर्थिक क्रियाओं के माध्यम से करता है । आर्थिक क्रियाएं वे क्रियाएँ हैं, जो मानवीय आवश्यकताओं को संतुष्ट करने में सहायक होती है । इन्हीं आर्थिक क्रियाकलापों की विवेचना अर्थशास्त्र के अंतर्गत किया जाता है । ये आर्थिक कार्यकलाप लोगों के उन कार्यकलाप से जुड़े होते हैं, जो यह निर्धारित करते हैं कि देश में किन वस्तुओं का उत्पादन किया जाएगा । परिवहन, भंडारण, विपणन, बैंकिग और बीमा जैसी सेवाएँ किस प्रकार प्रदान की जाएगी । 

अर्थशास्त्र के अंतर्गत यह भी निर्णय लिया जाता है कि उत्पादित वस्तुओं की अब कितनी खपत होगी और भविष्य के लिए कितना बचाकर रखा जाएगा । इन सारी बातों की समझ अर्थशास्त्र विषय के अंतर्गत आती है । इन आर्थिक वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादक और उपभोक्ता व्यक्ति, फर्म (कंपनियाँ), निजी संस्थाएँ और सरकार होती है । सरकार न केवल इन वस्तुओं और सेवाओं की उत्पादक है, बल्कि अपने नियमों तथा विनियमों के माध्यम से ढाँचे पर नियंत्रण भी रखती है ।

अर्थशास्त्र की परिभाषा

प्रोफेसर रॉबिंस के अनुसार अर्थशास्त्र सामाजिक विज्ञान है, जो मनुष्य की असीमित इच्छाओं तथा सीमित संसाधनों से उपजे हालातों एवं मानवीय व्यवहारों का अध्ययन करता है। यह मनुष्य की उत्पादन, उपभोग, वितरण तथा आदान प्रदान से जुड ़ी समस्त गतिविधियों पर विशेष ध्यान देता हैं। विभिन्न आर्थिक संगठनों जैसे बैंकों व बाज़ारों आदि के स्वरूप एवं कार्य प्रणालियाँ भी अर्थशास्त्र के अंतर्गत आते हैं। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि अर्थशास्त्र मनुष्यों की भौतिक आवश्यकताओं तथा उसके हितों से सीधा संबंध रखता है।

सिल्वर मैन के अनुसार अर्थशास्त्र समाजशास्त्र से ही जन्मा है जो सभी सामाजिक संबंधों के सामान्य सिद्धांतों का अध्ययन करता है।

अर्थशास्त्र की शाखाएं

अर्थशास्त्र के अध्ययन को दो भिन्न शाखाओं में विभाजित किया जाता है।
  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र
  2. समष्टि अर्थशास्त्र

1. व्यष्टि अर्थशास्त्र

“Micro” शब्द का अर्थ अत्यंत सूक्ष्म होता है। अत: व्यष्टि अर्थशास्त्र अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर अर्थशास्त्र के अध्ययन का अर्थ प्रकट करता है। इसका वास्तविक अर्थ क्या है? एक समाज जिसमें सामूहिक रूप से अनेक व्यक्ति सम्मिलित हैं, प्रत्येक अकेला व्यक्ति उसका एक सूक्ष्म भाग है। इसलिये एक व्यक्ति द्वारा लिये गये आर्थिक निर्णय व्यष्टि अर्थशास्त्र की विषय वस्तु हो जाते हैं। 

2. समष्टि अर्थशास्त्र

‘Macro’ शब्द का अर्थ है - बहुत बड़ा। एक व्यक्ति की तुलना में समाज अथवा देश अथवा सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है। इसलिये सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के स्तर पर लिये गये निर्णय समष्टि अर्थव्यवस्था की विषयवस्तु है। सरकार द्वारा लिये गये आर्थिक निर्णयों का उदाहरण लीजिये। हम सभी जानते हैं कि सरकार पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है, केवल एक व्यक्ति का नहीं। इसलिये सरकार द्वारा लिये गये निर्णय सम्पूर्ण समाज की समस्याओं को हल करने के लिये होते हैं।

उदाहरण के लिये, सरकार करों को एकत्र करने, सार्वजनिक वस्तुओं पर व्यय करने तथा कल्याण से संबंधित गतिविधियों आदि के बारे में नीतियां बनाती है जो पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं। ‘ये नीतियां किस प्रकार कार्य करती है’, समष्टि अर्थशास्त्र की विषय-वस्तु है। व्यष्टि अर्थशास्त्र में हम एक व्यक्ति के व्यवहार का क्रेता तथा विक्रेता के रूप में अध्ययन करते हैं। एक क्रेता के रूप में व्यक्ति वस्तु और सेवाओं पर धन/मुद्रा व्यय करता है जो उसका उपभोग व्यय कहलाता है। 

यदि हम सभी व्यक्तियों के उपभोग व्यय को जोड़ दें तो हमें सम्पूर्ण समाज के समग्र उपभोग व्यय का ज्ञान प्राप्त होता है। इसी प्रकार, व्यक्तियों की आयों को जोड़कर सम्पूर्ण देश की आय अथवा राष्ट्रीय आय हो जाती है। इसलिये, इन समग्रों जैसे राष्ट्रीय आय, देश का कुल उपभोग व्यय आदि का अध्ययन समष्टि अर्थशास्त्र के अन्तर्गत आते हैं। समष्टि अर्थशास्त्र का उदाहरण मुद्रा स्फीति अथवा कीमत-वृद्धि है।

मुद्रा स्फीति अथवा कीमत वृद्धि केवल एक व्यक्ति को प्रभावित नहीं करती, बल्कि यह सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। इसलिये इसके कारणों, प्रभावों को जानना तथा इसे नियंत्रित करना भी समष्टि अर्थशास्त्र के अध्ययन के अन्तर्गत आता है।

इसी प्रकार, बेरोजगारी की समस्या, आर्थिक संवृद्धि तथा विकास आदि देश की सम्पूर्ण जनसंख्या से संबंधित होते हैं, इसलिये समष्टि अर्थशास्त्र के अध्ययन के अन्तर्गत आते हैं।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

Post a Comment

Previous Post Next Post