मोल अवधारणा क्या है?

अनुक्रम
दो पदार्थों के मिलाने से हमें एक या एक से अधिक नये पदार्थ मिलते हैं। उदाहरण के लिये जब हम हाइड्रोजन व ऑक्सीजन के मिश्रण को प्रज्ज्वलित करते हैं तो एक नया पदार्थ पानी बनता है। इसे हम रासायनिक समीकरण के रूप में दिखाते हैं।

2H2 (g) + O2 (g) ⎯→ 2H2O (l)

उपरोक्त समीकरण में दो हाइड्रोजन के अणु (चार परमाणु) एक ऑक्सीजन के अणु (2 परमाणु) के साथ अभिक्रिया करके पानी के दो अणु बनाते हैं। अत: हमें यह जानने की उत्सुकता रहती है कि रासायनिक अभिक्रिया में एक विशेष प्रकार के अणु अथवा परमाणु कितनी संख्या में दूसरी तरह के अणु अथवा परमाणु के साथ क्रिया करते हैं। चाहे वह कितने सूक्ष्म ही क्यों न हो। इस समस्या का समाधान करने के लिये एक सुविधाजनक इकाई का होना आवश्यक है। क्या आप इस तरह की सुविधाजनक इकाई नहीं चाहेंगे। निश्चित रूप से, पदार्थ में मौजूद अणुओं व परमाणुओं की गणना के लिये वांछनीय इकाई से काम सुविधाजनक हो जायेगा। अणुओं और परमाणुओं की रासायनिक गणना की इकाई को मोल कहते हैं।

सामान्य तौर पर मोल शब्द का प्रयोग 1896 में विल्हेम ओस्टवाल्ड ने किया था। इसकी उत्पति लैटिन शब्द ‘मोल्स’ से हुई है जिसका अर्थ ‘ढेरी’ है। मोल जिसका प्रतीक ‘मोल’ एस.आई. (अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली) पदार्थ की मात्रा को मापने के लिये आधार इकाई है। यह निम्न रूप में परिभाषित किया गया है।

“एक मोल पदार्थ की वह मात्रा है जिसमें उतने मौलिक कण (परमाणु, अणु, फार्मूला इका या अन्य मौलिक कण) हों जितेन 0.012 kg कार्बन-12 समस्थानिक में परमाणु की संख्या है।’’

सरल शब्दों में C-12 के 0.012 कि.ग्राम (12 ग्राम) में मौजूद परमाणुओं की संख्या को मोल कहते हैं। यद्यपि मोल को कार्बन के परमाणुओं के रूप में परिभाषित किया गया है, लेकिन यह इकाई किसी भी पदार्थ के लिये लागू होती है। जैसे कि दर्जन का अर्थ है 12 या एक ग्रॉस का अर्थ है 144। मोल, दर्जन या ग्रॉस की भांति वैज्ञानिकों की गणना की इकाई है। मोल का प्रयोग वैज्ञानिक विशेषकर रासायनिक पदार्थों में अणु व परमाणु की संख्या गिनने के लिये करते हैं। प्रयोगों के द्वारा अब यह पाया गया है कि निश्चित 12 ग्राम C-12 में 602,200 000 000 000 000 000 000 या 6.022×1023 परमाणु मौजूद हैं। इस संख्या को महान इतालवी वकील और भौतिक विज्ञानी अमीडो एवोगाड्रो के सम्मान में, एवोगाड्रो संख्या कहते है। जब इस संख्या को मोल में विभाजित करते है तो इससे मिलने वाले स्थिरांक को एवोगाड्रो का स्थिरांक कहा जाता है। इसको प्रदर्शित करने का प्रतीक है, NA = 6.02×1023 मोल–1।

हमने देखा है कि

कार्बन का परमाणु द्रव्यमान = 12 u
हीलियम का परमाणु द्रव्यमान = 4 u

अत: हम देखते हैं कि कार्बन का एक परमाणु हीलियम के एक परमाणु से तीन गुना भारी है। इसके अनुसार कार्बन के 100 परमाणु, हीलियम के 100 परमाणुओं की तुलना में तीन गुना भारी हैं। इसी प्रकार कार्बन के 6.02×1023 परमाणु हीलियम के 6.02×1023 परमाणु से तीन गुना भारी हैं। लेकिन कार्बन के 6.02×1023 परमाणुओं का वजन 12 ग्राम होता है अत: हीलियम के 6.02×1023 परमाणुओं का वजन 1/3 × 12 ग्राम त्र 4 ग्राम होगा। हम कुछ और तत्वों का उदाहरण लेकर उस तत्व के एक मोल परमाणुओं के द्रव्यमान की गणना कर सकते हैं।

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