निबंध किसे कहते हैं?

अनुक्रम
निबंध से तात्पर्य उस रचना से है, जिसे अच्छी तरह से बाँधा जाता है या जिसमें विचारों अथवा घटनाओं को सही क्रम देकर, गूँथ कर लिखा जाता है। निबंध गद्य में लिखा जाता है। उपन्यास, कहानी, संस्मरण आदि के समान यह भी गद्य की एक महत्त्वपूर्ण विधा है। निबंध आकार में छोटा भी हो सकता है और बड़ा भी। दो-तीन पृष्ठों के निबंध भी लिखे जाते हैं और पच्चीस-तीस पृष्ठों के भी। आपको सामान्यत: तीन-चार पृष्ठों के निबंध लिखने का अभ्यास करना चाहिए। निबंध का विषय कुछ भी हो सकता है। आप किसी भी वस्तु, घटना, विचार अथवा भाव पर निबंध लिख सकते हैं। 

निबंध के प्रकार

विषय और लिखने वाले की मन:स्थिति के अनुसार अलग-अलग तरह के निबंध लिखे जा सकते हैं। इस प्रकार निबंध अनेक प्रकार के होते हैं। हम यहाँ तीन प्रकार के निबंध पर विचार करेंगे।
  1. वर्णनात्मक
  2. विचारात्मक
  3. भावात्मक।

वर्णनात्मक निबंध 

वर्णनात्मक निबंध में किसी वस्तु, घटना, प्रदेश आदि का वर्णन किया जाता है। उदाहरण के लिए, होली, दीपावली, यात्रा, दर्शनीय स्थल या किसी खेल के विषय पर जब हम निबंध लिखेंगे, तो उसमें विषय का वर्णन किया जाएगा। इस प्रकार के निबंधों में घटनाओं का एक क्रम होता है। इनमें साधारण बातें अधिक होती हैं। ये सूचनात्मक होते हैं तथा इन्हें लिखना अपेक्षाकृत सरल होता है।

विचारात्मक निबंध 

विचारात्मक निबंध लिखने के लिए चिंतन-मनन की अधिक आवश्यकता होती है। इनमें बुद्धि-तत्त्व प्रधान होता है तथा ये प्राय: किसी व्यक्तिगत, सामाजिक या राजनीतिक समस्या पर लिखे जाते हैं। ‘दूरदर्शन का जीवन पर प्रभाव’, ‘दहेज-प्रथा’, ‘प्रजातंत्र’ आदि किसी भी विषय पर विचारात्मक निबंध लिखा जा सकता है। इसमें विषय के अच्छे-बुरे पहलुओं पर विचार किया जाता है, तर्क दिए जाते हैं तथा कभी-कभी समस्या को हल करने के सुझाव भी दिए जाते हैं।

भावात्मक निबंध 

या भाव-प्रधान निबंध में आप विषय के प्रति अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। इनमें कल्पना की प्रधानता रहती है, तर्क की बहुत अधिक गुंजाइश नहीं होती। उदाहरण के लिए ‘मित्रता’, ‘बुढ़ापा’, ‘यदि मैं अध्यापक होता’ आदि विषयों पर निबंध लिखते समय आप अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर सकते हैं। भाव की तीव्रता होने के कारण इन निबंधों में एक प्रकार की आत्मीयता या अपनापन रहता है। यह अपनापन ही इस प्रकार के निबंधों की विशेषता है। इसी प्रकार निबंध को विषय-वस्तु के आधार पर भी अनेक वर्गों में बाँट सकते हैं। जैसे -
  1. सामाजिक निबंध
  2. सांस्कृतिक निबंध
  3. देश-प्रेम/राष्ट्रीय चेतना परक निबंध
  4. विज्ञान, तकनीक एवं प्रौद्योगिकी परक निबंध
  5. व्यायाम एवं खेल संबंधी निबंध
  6. शिक्षा एवं ज्ञान विषयक निबंध
  7. राजनीतिक निबंध
  8. प्रेरक व्यक्तित्त्व
  9. सूक्तिपरक निबंध
  10. मनोरंजन के साधन
  11. भाषा, साहित्य एवं प्रभाव परक-निबंध, आदि

निबंध के अंग

निबंध के तीन प्रमुख अंग होते हैं :
  1. भूमिका
  2. विषय-वस्तु
  3. उपसंहार

1. भूमिका 

भूमिका को प्रस्तावना भी कहते हैं। इसमें निबंध के विषय को स्पष्ट किया जाता है। भूमिका रोचक होगी, तभी पाठक निबंध पढ़ने के लिए उत्सुक होंगे। सवाल यह आता है कि निबंध की भूमिका कैसे लिखी जाए ? निबंध की शुरुआत किसी लेखक, कवि, चिंतक या राजनीतिज्ञ के कथन से की जा सकती है। यह सही है कि सुप्रसिद्ध कथन से निबंध प्रारंभ करने से पाठक के मन-मस्तिष्क पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। दूसरा प्रकार है कि किसी घटना के उल्लेख से निबंध प्रारंभ किया जाए। भूमिका में हाल ही में घटी किसी घटना से विषय को जोड़कर भी परिवेश का निर्माण किया जा सकता है। एक और पद्धति भी है।

2. विषय-वस्तु 

विषय-वस्तु निबंध का मुख्य भाग है। इसमें विषय का परिचय दिया जाता है, उसका रूप स्पष्ट किया जाता है। विषय का एक ही केंंद्रीय भाव होता है, उसका विस्तार करने की आवश्यकता होती है। विषय के विभिन्न पक्ष होते हैं। पक्ष-विपक्ष में तर्क देकर विषय-वस्तु को गहराई से समझाया जाता है। कुछ विषय ऐसे होते हैं, जिनसे प्राप्त होने वाले लाभ या हानि का उल्लेख भी किया जा सकता है, जैसे विज्ञान के लाभ और हानि। आवश्यकता पड़ने पर उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए उसे अपनाने की बात भी की जा सकती है, जैसे समाचार-पत्र पढ़ना। किसी चीज की बुराइयों का संकेत करते हुए उसे त्यागने पर बल दिया जा सकता है, जैसे-दहेज़-प्रथा। 

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