प्रशिक्षण का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं विशेषताएं

प्रशिक्षण का अर्थ

प्रशिक्षण कर्मचारी के ज्ञान निपुणताओं, व्यवहार, अभिरूचियों तथा मनोवृत्तियों में सुधार करता है, परिवर्तन उत्पन्न करता है तथा ढालता है। इस प्रकार प्रशिक्षण एक सीखने का अनुभव है। प्रशिक्षण, कार्यों को सही एवं प्रभावपूर्ण ढंग से सम्पन्न करने के लिए कर्मचारियों को जानकारी प्रदान करने की प्रक्रिया है, जिससे कि उनकी कार्य के प्रति समझ, कार्यक्षमता तथा उत्पादकता में वृद्धि हो सके।

प्रशिक्षण की परिभाषा

प्रशिक्षण की परिभाषा इस प्रकार है  -
  1. फिलिप्पों के अनुसार, ‘‘प्रशिक्षण किसी विशेष कार्य को करने के लिए एक कर्मचारी के ज्ञान एवं कौशल में रूचि उत्पन्न करता है।’’
  2. जूसियस के अनुसार, ‘‘प्रशिक्षण एक ऐसी क्रिया है जिसके द्वारा विशेष कार्यों को करने के लिए कर्मचारियों की रूचि, योग्यता और निपुणता में वृद्धि की जाती है।
  3. डेल एस0 ब्रीच के अनुसार, ‘‘प्रशिक्षण एक ऐसी संगठित क्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति एक निश्चित उद्देश्य की प्राप्ति के लिए ज्ञान अथवा चातुर्य सीखते है।’’

प्रशिक्षण की विशेषताएं

प्रशिक्षण की विशेषताएं इस प्रकार है  -
  1. प्रशिक्षण एक पूर्ण व्यवस्थित, नियोजित एवं निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है।
  2. प्रशिक्षण से कार्य-कुशलता बढ़ती है जिसके फलस्वरूप वह कार्य में पूर्णता एवं दक्षता प्राप्त कर लेता है।
  3. प्रशिक्षण ज्ञान के विकास का एक साधन है।

प्रशिक्षण की आवश्यकता

प्रशिक्षण की आवश्यकता इस प्रकार है  -
  1. नवीन कर्मचारियों को उस काम का प्रशिक्षण देना आवश्यक है जो उनके लिए नया है तथा जिसका उन्हें व्यावहारिक ज्ञान नहीं है।
  2. नवीन विधियाँ व तकनीक का ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षण एक अनिवार्यता है।
  3. निम्न स्तर से उच्च पर पदोन्नति के लिए प्रशिक्षण आवश्यक होता है।

प्रशिक्षण के लाभ

प्रशिक्षण के लाभ इस प्रकार है  -
  1. अच्छे प्रशिक्षण का उद्देश्य कार्य की श्रेष्ठ पद्धतियों में दक्ष बनाना है। 
  2. प्रशिक्षण से कर्मचारी की कुशलता बढ़ती है।
  3. अच्छे प्रशिक्षण से कार्य अच्छे और संतोषजनक ढंग से करने की प्रसन्नता होती है।
  4. प्रशिक्षण के चुनाव की जांच कर सकते है। यदि कोई कर्मचारी अधिक कुशल तथा योग्य है तो वह अपने कार्य को अधिक आसानी से सीख लेगा।
  5. निरन्तर प्रशिक्षण के फलस्वरूप कर्मचारियों में नए-नए सुधारों तथा विधियों को सीखने तथा उनके अनुसार कार्य करने की योग्यता बढ़ जाती है। 
  6. प्रशिक्षण से कर्मचारियों का न केवल विकास होता है, बल्कि वे अपने से ऊँचे पदों को सम्भालने के योग्य भी हो जाते है। इससे उनको पदोन्नति में सहायता मिलती है।

प्रशिक्षण के सिद्धांत

प्रशिक्षण के सिद्धांत जिनका प्रयोग व्यवसाय में किया जा सकता है।
  1. प्रेरणा - प्रशिक्षण के माध्यम से वह अपनी इन अभिलाषाओं को पूरा करना सरल समझता है तो उसे प्रशिक्षण के लिए सरलता से अभिप्रेरित किया जा सकता है।
  2. अभ्यास - प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कर्मचारी को वास्तविक कार्य स्थितियों में अभ्यास करने का पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए।
  3. प्रगति प्रतिवेदन - प्रशिक्षण की पूर्ण सूचना दी जानी चाहिए अर्थात् प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले ने प्रशिक्षण काल में क्या-क्या सीखा है और कार्य के सम्बन्ध में उसकी क्या कठिनाई है।
  4. पूर्ण बनाम आंशिक प्रशिक्षण - इसके अनुसार इस बात का निर्णय किया जाता है कि कर्मचारियों को सम्पूर्ण कार्य का प्रशिक्षण दिया जाए अथवा कार्य के एक भाग का प्रशिक्षण दिया जाए। इस बात का निर्णय संस्था के साधनों, कार्य की प्रगति और कर्मचारियों की योग्यता के आधार पर किया जाता है।
  5. पुन: प्रवर्तन - प्रशिक्षण की अवधि समाप्त होने पर उस उद्देश्य की पूर्ति की जानी चाहिए। उदाहरणार्थ, यदि वेतन में बढ़ाने की बात थी तो वेतन वृद्धि की जानी चाहिए और पदोन्नति की बात थी तो पदोन्नति होनी चाहिए।
  6. व्यक्तिगत गुण - इसके अनुसार प्रशिक्षण देते समय जिन व्यक्तियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है उनके शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक गुणों एवं योग्यताओं का पूरा-पूरा ध्यान रखना चाहिए।

प्रशिक्षण के प्रकार

प्रशिक्षण के प्रकार है  -
  1. प्रारम्भिक प्रशिक्षण -
  2. कार्य प्रशिक्षण -
  3. पुर्नाभ्यास प्रशिक्षण -
  4. पदोन्नति के लिए प्रशिक्षण -

प्रारम्भिक प्रशिक्षण -

कर्मचारी की नियुक्ति के बाद उसे कार्य पर लगाने से पहले इस प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें उद्देश्यों, इतिहास, नियमों, निर्णयों तथा अवसरों से परिचित कराया जाता है। इस प्रशिक्षण के तीन उद्देश्य है:
  1. सेवा की शर्तों को परिभाषित करना,
  2. अपने कार्य की आवश्यकता के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देना।
  3. ऐसा प्रयत्न करना कि उपक्रम के प्रति स्वयं अपने काम करने की योग्यता का विश्वास पैदा हो।

कार्य प्रशिक्षण - 

इसका उद्देश्य कर्मचारियों को काम करने की श्रेष्ठतम प्रणाली सिखाना, दक्ष बनाना है। 

पुर्नाभ्यास प्रशिक्षण -

इसका उद्देश्य पुराने कर्मचारियों को काम करने की पद्धति फिर से सिखाना है, जिससे वे समय के बीतने के साथ अपने पुराने प्रशिक्षण में सीखे गए ज्ञान को, भूल जाने पर फिर से ताजा कर सकें।

पदोन्नति के लिए प्रशिक्षण -

अधिकाशं संस्थाएँ अपने यहाँ उच्च पदों पर नियुक्ति अपने ही योग्य अधिकारी को पदोन्नति देकर करती है। कर्मचारियों को प्रेरणा देने की यह एक महत्वपूर्ण विधि है। लेकिन कर्मचारियों को निम्न पदों से उच्चतर पदों पर पदोन्नति देते समय, उन्हें नए पदों की जिम्मेदारियों तथा बारीकियों के बारे में प्रशिक्षित कराना अनिवार्य है। प्रशिक्षण के बल पर ही वे नए वातावरण और अपने उत्तरदायित्व में कुशल तथा सफल सिठ्ठ हो सकेंगे।

प्रशिक्षण की कार्यविधि

  1. प्रशिक्षण कार्य को पूरा करने के लिए एक समय सारणी  तैयार की जानी चाहिए। उसी के अनुसार कार्य प्रारम्भ करना चाहिए जिसमे प्रशिक्षणाथ्र्ाी द्वारा अर्जित किया गया ज्ञान प्रमापित हो सके।
  2. कार्य का विभाजन प्रमुख क्रियाओं के मध्य होना चाहिए। 
  3. प्रशिक्षण के स्थान की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे समय पर कोई कठिनाई न हो।
  4. प्रशिक्षण के लिए सभी आवश्यक सामग्री शीघ्र सुलभ होनी चाहिए।
  5. प्रशिक्षण देने वाले और प्रशिक्षण पाने वाले की तैयारी की जाँच की जानी चाहिए।
  6. इसके बाद जो कार्य किया जाना है उसकी स्वयं की भी जांच होनी चाहिए।
  7. सभी प्रकार की आवश्यकता व्यवस्था और जांच के बाद कर्मचारी को स्वतन्त्र रूप से कार्य पर छोड़ दिया जाना चाहिए जिससे वह स्वयं भी कार्य कर सके। आवश्यकता पड़ने पर किसी की सहायता भी सुलभ कराई जा सकती है, जिससे की वह स्वयं कार्य में दक्षता प्राप्त कर ले।

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