एकात्मक सरकार का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, गुण एवं दोष

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एकात्मक सरकार के अन्तर्गत शासन की सारी शक्तियां केन्द्रीय सरकार के पास ही केन्द्रित रहती हैं। सारे देश में एक कार्यपालिका, एक विधायिका व एक न्यायपालिका ही होती है। यद्यपि उनको केन्द्रीय सरकार द्वारा कोई महत्वपूर्ण शक्ति नहीं दी जाती। यदि कोई शक्ति दे भी जाती है तो वे केन्द्रीय सरकार के नियन्त्रण में ही कार्य करती है। उन्हें उन शक्तियों का स्वतन्त्रा प्रयोग करने की छूट नहीं होती। इस प्रकार इन सरकारों की कोई पृथक व स्वतन्त्रा सत्ता नहीं होती। इन सरकारों की शक्तियों का स्रोत संविधान की जगह केन्द्रीय सरकार की होती है। प्रान्तीय या प्रादेशिक सरकारें केन्द्रीय सरकार की प्रतिनिधि बनकर ही कार्य करती हैं और देश के शासन संचालन में सहयोग देती हैं। एकात्मक सरकार अपने को प्रांतीय व प्रादेशिक सरकारों पर कम से निर्भर बनाने की कोशिश करती है ताकि उसकी अखण्डता को कोई खतना उत्पन्न न हो। ब्रिटेन में इस प्रकार की ही सरकार है। फ्रांस व चीन में भी ऐसी ही सरकारें हैं। इस प्रकार कहा जा सकता है कि जिस देश में शासन की सारी शक्तियां एक ही हाथ में हों तो वह एकात्मक सरकार होती है। एकात्मक सरकार को कुछ विद्वानों ने निम्न प्रकार से परिभाषित किया है :-
  1. विलोबी के अनुसार-”एकात्मक सरकार में प्रथम बार तो सारी शक्तियां केन्द्रीय सरकार को दे दी जाती हैं और वह सरकार जिस प्रकार उचित समझे, इन शक्तियों का विभाजन स्वतन्त्रा रूप से प्रादेशिक सरकारों में कर सकती है।”
  2. डॉयसी के अनुसर-”एक केन्द्रीय शक्ति के द्वारा शासन की सर्वोच्च शक्ति का प्रयोग किया जाना ही एकात्मक शासन है।”
  3. सी0एफ0 स्ट्रांग के अनुसार-”एकात्मक राज्य वह राज्य है जो एक केन्द्रीय शासन में संगठित हो अर्थात् केन्द्रीय सरकार के प्रबन्ध में बनाए गए विभिन्न जिलों की शक्तियों को केन्द्रीय सरकार की इचछानुसार संगठित व संचालित करे और केन्द्रीय शक्ति सम्पूर्ण क्षेत्रा में अपने प्रदेशों को विशेषाधिकार देने वाले किसी भी कानून से सीमित न होकर सर्वोच्च रहे।”
  4. फाइनर के अनुसार-”एकात्मक शासन वह होता है जहां एक केन्द्रीय सरकार में सम्पूर्ण शासन शक्ति निति होती है और उसकी इच्छा तथा अधिकार सारे क्षेत्रा पर कानूनी रूप से सर्वशक्तिमान होते हैं।”
  5. गार्नर के अनुसार-”एकात्मक सरकार वहां होती है, जहां संविधान द्वारा सरकार की समस्त शक्तियां अकेले केन्द्रीय अंग या अंगों को दे दी जाएं और स्थानीय सरकारें अपनी शक्तियां, स्वतन्त्राता व अस्तित्व केन्द्रीय अंग या अंगों से ही प्राप्त करें।”

एकात्मक शासन का व्यवहारिक रूप 

एकात्मक सरकार ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, इटली, जर्मनी व चीन आदि देशों में है। ब्रिटेन में स्थानीय संस्थाएं भी हैं, लेकिन उन्हें स्वतन्त्राता व शक्तियां संसद के सामान्य कानूनों द्वारा ही प्राप्त हुई हैं। वहां पर केन्द्रीय सरकार को स्थानीय सरकारों को स्वतन्त्रातापूर्वक कार्य कराने का अधिकार प्राप्त है। काऊण्टी बरो, काउण्टी कौंसिन्स, म्युनिसिपल बरो, शहरी व ग्रामीण जिले, पेरिश आदि स्थानीय संस्थाएं केन्द्रीय सरकार के ही नियन्त्राण में हैं। फ्रांस में भी ब्रिटेन की तरह ही शासन प्रणाली को अपनाया गया है। सारे फ्रांस को प्रान्तों (डिपार्टमेण्टस) में बांटा गया है। प्रत्येक प्रान्त के अन्तर्गत अनेक ऐरानडाइमेण्ट्स तथा कम्यून हैं। ये सभी सरकारें केन्द्रीय सरकार के ही अधीन हैं। इनके अधिकारों व शक्तियों को संसद जब चाहे वापिस ले सकती है। इसी तरह चीन, इटली, जापान व जर्मनी आदि देशों में भी प्रादेशिक या स्थानीय सरकारें केन्द्रीय सरकारों के अधीन हैं। उनकी स्वायत्तता संसदीय कानूनों पर निर्भर है। संविधानिक व्यवस्थाओं के अन्तर्गत उन्हें कोई अधिकार या शक्तियां नहीं दी गई हैं।

एकात्मक सरकार की विशेषताएं 

  1. एकात्मक शासन में शक्तियों का केन्द्रीयकरण होता है। यद्यपि प्रशासन की सुविधा के लिए राज्यों को प्रान्तों व इकाइयों में भी बांटकर कुछ शक्तियां केन्द्रीय सरकार द्वारा उन्हें दी जाती हैं, लेकिन केन्द्रीय सरकार जब चाहे उन शक्तियों को वापिस ले सकती है। इसका अर्थ यह है कि एकात्मक सरकार के पास शासन की सारी शक्तियां केन्द्रीत होती हैं। अपनी शक्तियों का बंटवारा प्रादेशिक सरकारों को भी करने में स्वतन्त्रा व सक्षम होती है।
  2. एकात्मक शासन में प्रभुसत्तात्मक शक्तियां केन्द्रीय सरकार के पास ही रहती हैं, इसमें इकाइयों को प्रभुसत्तात्मक शक्तियां नहीं दी जाती।
  3. एकात्मक शासन में एकल या इकहरी नागरिकता पाई जाती है। इसमें केन्द्र व प्रान्तों के लिए अलग-अलग या दोहरी नागरिकता का प्रावधान नहीं होता।
  4. एकात्मक सरकार में एक ही कार्यपालिका, विधायिका व न्यायपालिका होती है। प्रान्तों या इकाइयों की कोई कार्यपालिका, विधायिका व न्यायपालिका नहीं होती।
  5. एकात्मक शासन में संविधान लिखित भी हो सकता है और अलिखित भी। संविधान का होना एकात्मक सरकार को औचित्यता प्रदान करता है और शक्तियों का बंटवारा केन्द्र के पक्ष में करके प्रादेशिक सरकारों से उसकी रक्षा भी करता है। लिखित संविधान का होना एकात्मक शासन को वैधता प्रदान करता है। ब्रिटेन में यह संविधान अलिखित है, जबकि फ्रांस में लिखित है। ;6द्ध एकात्मक शासन में संविधान का स्वरूप लचीला या कठोर दोनों प्रकार का हो सकता है।
इस प्रकार शक्तियों का केन्द्रीयकरण, केन्द्रीय संसद की सर्वोच्चता, समान प्रभुसत्ता वाले निकायों का अभाव, इकहरी नागरिकता, इकहरा शासन, लिखित या अलिखित कठोर या लचीला संविधान एकात्मक सरकार या शासन की प्रमुख विशेषताएं हैं।

एकात्मक सरकार के गुण 

आज बदलते परिवेश में प्रभुसत्ता सम्पन्न एकात्मक सरकार का होना अनिवार्य हो गया है। संकटकालीन परिस्थितियों में तो एकात्मक सरकार के विचार को और अधिक बल मिलता है। इसलिए अनेक विद्वान एकात्मक सरकार को आधुनिक युग में सफलता का ताज कहते हैं। इसका प्रमुख कारण एकात्मक सरकार का उपयोगी होना है। एकात्मक सरकार के लाभ होते हैं :-
  1. राष्ट्रीय एकता - इकहरी नागरिकता के कारण नागरिकों के हित की भावना बढ़ती है। देश में एक सा कानून, एक सी न्याय व्यवस्था तथा एक सा शासन प्रबन्ध राष्ट्रीय एकता में वृद्धि करता है। एकात्मक शासन में देश के प्रत्येक व्यक्ति को समान अधिकार व स्वतन्त्राताएं प्राप्त होने के कारण मतभेदों के उत्पन्न होने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता।
  2. संकटकाल के लिए उपयुक्त - संकटकालीन परिस्थितियों के आवश्यक निर्णय लेने के लिए शक्तिशाली केन्द्र का होना अत्यन्त आवश्यक है। एकात्मक शासन व्यवस्था ऐसी ही शक्तिशाली केन्द्रीय सरकार की स्थापना करके संकटकालीन परिस्थितियों से निपटने में सक्षम होती है। इसमें केन्द्रीय सरकार को प्रादेशिक सरकारों से सलाह लेने की आवश्यकता नहीं होती। देश हित के सारे निर्णय केन्द्रीय सत्ता द्वारा ही स्वतन्त्रातापूर्वक लिए जाते हैं।
  3. दक्ष एवं कार्यकुशल प्रशासन - एकात्मक शासन व्यवस्था में समस्त नीतियां व निर्णय केन्द्रीय सरकार द्वारा ही लिए जाते हैं। इससे प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने में अधिक सुविधा रहती है। प्रशासनिक अधिकारियों को अपने अधिकार क्षेत्रा का स्पष्ट ज्ञान रहने के कारण प्रशासन में दक्षता व कार्यकुशलता के गुण का भी समावेश हो जाता है। इसमें केन्द्र व प्रान्तों में नीति सम्बन्धी गतिरोध पैदा नहीं होते और केन्द्र की सरकार की नीतियों व निर्णयों को मानना प्रान्तों के लिए बाध्यकारी होता है। इसमें निर्णय लेने व लपगू करने के बीच ज्यादा अन्तर न होने के कारण कुशल शासन का जन्म होता है।
  4. लचीला शासन - एकात्मक शासन में संविधान अधिक कठोर नहीं होता। इसमें कोई नया कानून बनाते समय या संविधान में आवश्यक संशोधन करत समय प्रांतीय सरकारों की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती। विलोबी ने संविधान के लचीलेपन को एकात्मक शासन की सफलता का आधार माना है। इसलिए यह शासन प्रणाली संकटकालीन परिस्थितियों का सामना करने में अधिक उपयुक्त है।
  5. शक्तिशाली शासन - एकात्मक शासन का यह एक प्रमुख गुण है कि इसमें शासन शक्तिशाली होता है। शासन की सारी शक्तियां केन्द्रीय सरकार में निहित होने के कारण कानूनों को बनाने व उन्हें लागू करने का दायित्व केन्द्रीय सरकार पर ही होता है। प्रान्तीय सरकारें केन्द्र के आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य होती हैं। इससे देश में आन्तरिक झगड़ों की सम्भावना नहीं रहती। शक्तिशाली शासन प्रभावकारी विदेश नीति का भी जन्मदाता होता है।
  6. सरल शासन - एकात्मक शासन प्रणाली में शासन का संगठन बहुत सरल होता है। इसमें न तो दोहरी शासन व्यवस्था होती है और न दोहरी नागरिकता। संविधान भी सीदे-सादे कानूनों का व्यवस्थापक होता है। कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी अपने देश के शासन के बारे में आसानी से ज्ञान प्राप्त कर सकता है। इसमं उलझाव वाली कोई संविधानिक व्यवस्था नहीं होती।
  7. कम खर्चीला शासन - एकात्मक शासन में एक ही विधायिका, कर्यपालिका व न्यायपालिका होने के कारण प्रांतीय सरकारों के ऊपर होने वाला खर्च बच जाता है। इसमें प्रान्तों के लिए अलग विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका नहीं होती हैं। संघात्मक सरकारों में होने वाली दोहरे खर्च की तुलना में एकात्मक सरकारों की व्यवस्था अधिक लाभकारी होती है।
  8. छोटे देशों के लिए उपयुक्त - यह शासन प्रणाली उन देशों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है जो जनसंख्या व भूभाग की दृष्टि से छोटे हैं और अधिक विकसित नहीं हैं। जापान व इटली द्वारा इसको अपनाने का प्रकुख कारण उनकी कम जनसंख्या व छोटा आकार होना है। यह उन देशों के लिए भी उपयुक्त है जो बड़े बड़े मिन्त्रामण्डलों का भार वहन करने में सक्षम नहीं है और आर्थिक दृष्टि से कमजोर है।
  9. शासन की एकता - इस शासन प्रणाली में एक कार्यपालिका होने से सारे देश के लिए एक जैसे कानूनों का निर्माण होता है और कानूनों को लागू करने वाली तथा प्रशासन चलाने वाली कार्यपालिका भी एक ही होती है। देश में समान कानून संहिता होने से प्रशासनिक एकता बनी रहती है और शासन मे सुचारूपन पैदा होता है।
  10. संघर्ष या मतभेदों का अभाव - एकात्मक शासन में शक्ति-विभाजन से उत्पन्न होने वाली समंस्याएं जन्म नहीं ले सकती। इसमें प्रान्तीय सरकारों को यह शिकायत नहीं रहती कि उन्हें कम शक्तियां दी गई हैं। इसलिए प्रान्तों व केन्द्र के बीच उत्पन्न होने वाले झगड़े एकात्मक शासन में पैदा नहीं होते और शासन सुचारु ढंग से बिना गतिरोध के चलता रहता है।
  11. मजबूत अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध व विदेश नीति में सहायक - स्वतन्त्र व मजबूत विदेश नीति आधुनिक परिस्थितियों में बहुत आवश्यक है। आन्तरिक रूप से मजबूत शासन व्यवस्था वाला देश विदेशी सम्बन्धों को भी मजबूत बनाने में सफल रहता है। आज सफल विदेशी सम्बन्धा के लिए शक्तिशाली केन्द्रीय शासन व स्थिर सरकार का होना आवश्यक है। उत्तरदायी व निर्णय लेने में सक्षम सरकार ही विदेश नीति व अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में त्वरित निर्णयों के माध्यम से मजबूती ला सकती है। एकात्मक सरकार ही विदेश नीति पर संघात्मक सरकार की अपेक्षा अधिक निश्चिन्त व दृढ़ निर्णय ले सकती है और अपनी योजनाओं को कार्यरूप दे सकती हैं।
  12. उत्तरदायी सरकार - एकात्मक सरकार समस्त निर्णयों व नीतियों के लिए स्वयं ही उत्तरदायी होती है। अपनी नीतियों व निर्णयों की असफलता का श्रेय वह दूसरों को नहीं दे सकती। हर क्षेत्रा में प्रभुसत्तासम्पन्न होने के कारण वह प्रत्येक निर्णय लेने में सक्षम होती है। प्रान्तीय सरकारों के पास प्रभाुसत्तासम्पन्न शक्तियों का अभाव एकात्मक शासन प्रणाली को अधिक उत्तरदायी बनाता है।
इस प्रकार कहा जा सकता है कि एकात्मक शासन प्रणाली कुशल और प्रभावी शासन का प्रतिबिम्ब होती है। समान कानून संहिता के कारण देश में शान्ति व्यवस्था बनाए रखने व राष्ट्रीय एकता में वृद्धि करने में ऐसी ही सरकार सहायक होती है। यह शासन व्यवस्था शक्ति-विभाजन जनित दुर्बलताओं से मुक्त होने के साथ सरल व स्पष्ट है। इसे देश का आम नागरिक भी समझ सकता है। प्रभुसत्तात्मक शक्तियों का विभाजन न होने के कारण यह केन्द्रीय सरकार के मार्ग-निर्देशन में सफल विदेश नीति के निर्माण व प्राप्ति में भी बहुत मददगार है। जिन देशों की जनसंख्या कम है या भौगोलिक दृष्टि से क्षेत्राफल कम है तो उन देशों के लिए यह शासन प्रणाली सबसे उपयुक्त है। संक्षेप में यह शासन प्रणाली संघात्मक शासन प्रणाली के सभी दोषों से मुक्ति प्रदान करती है।

एकात्मक शासन या सरकार के दोष 

यद्यपि एकात्मक शासन व्यवस्था विशेष रूप से छोटे देशों के लिए बहुत उपयुक्त रहती है। यह विकासशील देशों व आर्थिक रूप से कमहोर देशों के लिए भी उपयुक्त हो सकती है। लेकिन फिर भी यह दोषों से मुक्त नहीं है। इस पर आपेक्ष लगाये जाते हैं :-
  1. शासन की समस्त शक्तियां केन्द्र के पास होने के कारण यह केन्द्रीय सरकार की तानाशाही स्थापित करती है।
  2. केन्द्रीय सरकार की निरंकुशता के कारण यह प्रान्तीय व प्रादेशिक सरकारों के व्यक्तित्व व स्वतन्त्राता को कुचलने वाली है।
  3. इससे केन्द्रीय अवयवों के पास कार्य का अनावश्यक बोझ बढ़ जाता है। कई बार कम महत्व के मामलों पर भी केन्द्रीय सरकार को ही अनावश्यक समय बर्बाद करना पड़ता है।
  4. यह शासन प्रणाली स्थानीय समस्याओं का उपयुक्त हल तलाशने में प्राय: असफल ही रहती हैं।
  5. यह नौकरशाही की पोषक है। धीरे धीरे एकात्मक सरकार सरकारी निरंकुशता का रूप ले लेती है।
  6. यह प्रणाली बड़े राज्यों के लिए उपयुक्त नहीं है। इसी कारण भारत रूस, अमेरिका आदि देशों में इस शासन प्रणाली को नहीं अपनाया गया है।
  7. इस शासन प्रणाली में जनता को सार्वजनिक कार्यों के प्रति रुचि दिखाने का अवसर नहीं मिलता। गार्नर ने कहा है कि इससे स्थानीय शासन का महत्व व उपयोगिता का नाश होता है। इससे जन-चरित्र का ह्रास भी होता है।
  8. शक्तियों का केन्द्रीयकरण जनतन्त्राीय भावनाओं को कुचलता है। जन-आस्थाओं के विकास के लिए शक्तियों का विकेन्द्रीयकरण अपरिहार्य है।
  9. इसके शासन व आम जनता के प्रति दूरियां इतनी बढ जाती हैं कि कई बार ये राजनीतिक व्यवस्था के पतन का कारण भी बन जाती है। जनता की राजनीतिक सहभागिता में आने वाली कमी लोगों को राजनीतिक रूप में जागरूक बनाने में बाधक बन जाती है।
इस प्रकार कहा जा सकता है कि एकात्मक शासन में अनेक दोष हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इसका कोई महत्व नहीं है। यह व्यवस्था छोटे देशों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। संकटकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए एकात्मक शासन से अच्छा व प्रभावी विकल्प दूसरा नहीं हो सकता। सफल विदेश नीति के संचालन के लिए भी यह शासन प्रणाली आधुनिक युग में अपरिहार्य है। यदि एकात्मक शासन प्रणाली के दोषों को कुछ सीमा तक नियिन्त्रात कर दिया जाए तो इससे सर्वोत्तम शासन प्रणाली अन्य नहीं हो सकती। इसको महत्वपूर्ण साबित करने के लिए यही तथ्य पर्याप्त है कि आज भी यह शासन प्रणाली ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, चीन, जापान आदि देशों में अच्छा कार्य कर रही है।

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