प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के गुण एवं दोष

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आधुनिक समय में चुनावों का बहुत महत्व है। चुनाव से जनता के हाथ में वे अस्त्र हैं, जिनके द्वारा वे अपनी इच्छा को व्यक्त करते हैं और अपने जनाधार द्वारा राजनीतिकदलों को सरकार बनाने के योग्य बनाते हैं। चुनाव ही राजनीतिक शक्ति की वैधता की परीक्षा करते हैं और सत्ता को औचित्यपूर्ण बनाते हैं। प्रत्येक देश में राजनीतिक शक्ति के वैधीकरण के लिए चुनाव रूपी साधन का प्रयोग किया जाता है, लोकतन्त्रीय देशों में तो चुनावों का बहुत महत्व होता है, क्योंकि लोकतन्त्रीय सरकार जनमत पर ही आधारित सरकार होती है जो अपना जनमत चुनावों से ही प्राप्त करती है। चुनावों के द्वारा जनता अपने प्रतिनिधि चुनती है, इस प्रक्रिया को चुनाव प्रणाली कहा जाता है। इस तरह चुनाव-प्रणाली ही प्रतिनिधित्व प्रणाली का आधार है। आज सभी देशों में दो प्रकार की चुनाव प्रणालियां हैं . (i) प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली (ii) अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली।

प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली

जब मतदाता अपने उम्मीदवार या प्रतिनिधि प्रत्यक्ष रूप से वोट डालकर चुनते हैं, तो उसे प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली कहा जाता है। इस प्रणाली के अन्तर्गत उम्मीदवार स्वयं मतदाता के पास जाकर वोट मांगते हैं और चुने जाने के बाद वे अपना उत्तरदायित्व भी महसूस करते हैं। इस प्रणाली के अन्तर्गत प्रतिनिधि सरकार का गठन होता है जो अधिक उत्तरदायी रहती है। भारत में प्रांतीय विधानमण्डलों के अधिकतर सदस्य इसी पद्धति के तहत चुने जाते हैं। स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों व लोकसभा के सदस्यों का भी चुनाव इसी विधि से होता है।

प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के गुण

  1. इससे लोगों में राजनीतिक चेतना उत्पन्न होती है।
  2. इसमें निर्वाचन सम्बन्धी भ्रष्टाचार के पनपने की संम्भावना कम है।
  3.  इसमें जनता को पूरी स्वतन्त्रता प्राप्त होती है। 
  4. इससे उत्तरदायी सरकार का जन्म होता है। 
  5. यह प्रणाली लोकतन्त्र के अनुकूल है, क्योंकि इसमें जनता व सरकार का सीधा सम्बन्ध बना रहता है।
  6. इससे लोगों को राजनीतिक शिक्षा भी मिलती है और वे अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनते हैं। 
  7. इससे सार्वजनिक हित को बढ़ावा मिलता है। 

प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के दोष

  1. यह प्रणाली अधिक खर्चीली है।
  2. इसमें दलबन्दी के सभी दोष उजागर हो जाते हैं।
  3. समें चुनावी प्रचार की चकाचौंध के कारण अयोग्य व्यक्ति भी चुने जा सकते हैं। 
  4. यह जनता के शासन के नाम पर जनता के साथ धोखा है। चुने जाने के बाद प्रतिनिधियों का जनता के प्रति उत्तरदायी बने रहना सर्वथा असम्भव है।
  5. इससे चुनावी भ्रष्टाचार अप्रत्यक्ष रूप से अवश्य पनपने लगता है।
  6. इससे योग्य व्यक्ति सरकार में पहुंचने से पिछड़ जाते हैं, क्योंकि उसका स्थान चालाक व बेईमान व्यक्ति ले लेते हैं। इस प्रकार कहा जा सकता है कि प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली में अनेक अवगुण हैं, लेकिन फिर भी यह विश्व के अनेक देशों में अपनाई गई है। इसको अपनाया जाना ही इसके महत्व को इंगित करता है।

अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली

यह प्रणाली प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली पर ही आधारित है। प्रत्यक्ष रूप में जो प्रतिनिधि जनता द्वारा चुने जाते हैं, वे आगे कुछ और प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं, इसे अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली कहा जाता है। इस तरह इसमें जनता द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचन में भाग नहीं लिया जाता। इसमें प्रतिनिधियों का चुनाव जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों के निर्वाचक मण्डल द्वारा ही होता है। अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव इसी पद्धति से होता है। भारत में भी राष्ट्रपति, राज्यसभा तथा विधान परिषदों का निर्वाचन इसी पद्धति से होता है।

अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के गुण

  1. इस प्रणाली के अन्तर्गत योग्य तथा वांछनीय व्यक्तियों का निर्वाचन सम्भव है। क्योंकि इसमें चुने हुए व्यक्ति ही भाग लेते हैं, जिन्हें सुयोग्य व्यक्तियों की परख होती है।
  2. इसमें दलबन्दी के दोष नहीं होते हैं। इसमें दलीय उग्रता का अभाव होता है। 
  3. यह भ्रष्टाचार से मुक्त रहती है। 
  4. इससे सार्वजनिक मताधिकार और भीडतन्त्र के दोषों से छुटकारा मिल जाता है।
  5. इससे निर्वाचन की पवित्रता बनी रहती है, क्योंकि इसमें चुनाव जीतने के लिए हिंसा अपनाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
  6. यह प्रणाली कम खर्चीली है।
  7. यह प्रणाली पिछड़े देशों के लिए अधिक उपयुक्त है।

अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के अवगुण

  1. यह प्रणाली अलोकतन्त्रीय है, क्योंकि इसमें मतदाता और प्रतिनिधियों का प्रत्यक्ष सम्पर्क टूट जाता है। इसमें निर्वाचक मण्डल के सदस्यों को ही अधिक सम्मान मिलता है, आम मतदाता को नहीं। 
  2. इससे नागरिकों को राजनीतिक चेतना व जागरूकता का हास होता है।
  3. इससे नागरिकों का मताधिकार और स्वतन्त्रता दोनों सीमित हो जाते हैं।
  4. इसमें भ्रष्टाचार उच्च स्तर पर होता है, क्योंकि सभी मतदाताओं को लुभाने की बजाय गिने चुने विधायकों को ही अपने पक्ष में करना होता है। इसके लिये गुप्त भ्रष्ट तरीकों का बहुत अधिक प्रयोग होता है। 
  5. इसमें दलबन्दी और साम्प्रदायिक भावनाएं अधिक प्रबल हो जाती हैं। जहां पर राजनीतिक दल सुव्यवस्थित अवस्था में होते हैं, वहां यह प्रणाली नाममात्र की रह जाती है। अमेरिका में सुव्यवस्थित दल प्रणाली के कारण राष्ट्रपति का निर्वाचन अप्रत्यक्ष होते हुए भी प्रत्यक्ष ही जान पड़ता है।
इस तरह अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली भी प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली की तरह दोषमुक्त नहीं है। लेकिन फिर भी इसे अमेरिका व भारत सहित कई देशों में आंशिक या अधिक तौर पर अवश्य अपनाया गया है। इसमें दलबन्दी और भ्रष्टाचार जैसे आरोप सार्वभौमिक नहीं है। यदि जनता जागरूक है और प्रतिनिधिगण उत्तरदायित्व को समझते हैं तो यह प्रणाली काफी महत्व की हो जाती है। सत्य तो यह है कि कहीं पर प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली, तो कहीं पर अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली या दोनों को मिश्रित रूप में अवश्य अपनाया गया है। भारत में निम्न सदन (लोकसभा) का निर्वाचन तो प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली द्वारा तथा उच्च सदन (राज्य सभा) का निर्वाचन अप्रत्यक्ष तरीके से होता है। इसके लिए सारे देश को एक सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र में बांट दिया जाता है। आधुनिक युग में एक सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था ही अधिक लोकप्रिय हो चुकी है।

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