व्लादिमीर लेनिन का जीवन परिचय

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व्लादीमीर इलिच लेनिन का जन्म 9 अप्रैल, 1870 को रुस के यूलियानोवस्क नामक स्थान पर एक मध्यमवर्गीय सरकारी निरीक्षक के घर हुआ। उनका वास्तविक नाम व्लादीमीर इलचि उल्यानोव था। जब वे निर्वासित होकर साबबेरिया में लेना नदी के किनारे रहने लगे तो उनका नाम लेनिन पड़ गया। लेनिन के पांच भाई-बहन थे। वे सभी क्रान्तिकारी थे। उन सभी ने रुस की क्रान्ति में भाग लिया था। उसके सबसे बड़े भाई को जार अलैकजैन्डर की हत्या के प्रयास के अपराध में देशद्रोह का आरोप लगाकर मृत्यु के घाट उतार दिया गया था। इस घटना का लेनिन के मानस पटल पर गहरा प्रभाव पड़ा और वह एक क्रान्तिकारी बन गया। लेनिन बी0ए0 पास करने के बाद कलान विश्वविद्यालय में कानून की शिक्षा प्राप्त करने चला गया, वहां पर उसे क्रांतिकारी क्रियाकलापों के कारण एक बार विश्वविद्यालय से निष्कासित किया गया। 1891 में कानून की परीक्षा उसे सेन्ट पीटर्सबर्ग विश्वविद्यालय से पास की। यहां पर उसने मजदूरों के क्रान्तिकारी संगठनों का भी मार्गदर्शन किया। जार ने उसकी क्रान्तिकारी गतिविधियों के कारण उसे रुस से निष्कासित कर दिया और वह सीधा साइबेरिया जाकर लेनी नदी के किनारे रहने लगा। इस दौरान उसने अपने समाजवादी विचारों को पोषित किया। उसने इस दौरान अनेक पुस्तकें लिखीं और विदेशी भाषाओं का ज्ञान भी प्राप्त किया। 1900 में वापिस रुस आकर उसने समाजवादी लोकतन्त्रीय दल के नेता प्लेखनोव के साथ मिलकर कार्य किया। उसने समाजवादी प्रचार हेतु विदेशों में जाने का अवसर भी प्राप्त हुआ। उसने समाजवादी लोकतन्त्रीय दल को संगठित व अनुशासित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन 1903 में यह दल दो भागों-बोल्शेविक तथा मेन्शेविक में बंट गया। लेनिन ने बोल्शेविक गुट का नेतृत्व किया और समाजवादी क्रान्ति को संगठित करने का प्रयास किया। उसने पेशेवर क्रान्तिकारियों की टुकड़ी तैयार की और 1905 की मजदूर क्रान्ति के असफल रहने पर वह विदेशों में चला गया। 1917 की क्रान्ति के समय लेनिन वापस रुस आ गया और साम्यवादी क्रान्ति को सफल बनाने के लिए इसकी बागड़ोर अपने हाथ में ली।

लेनिन ने अपनी कुशाग्र बुद्धि तथा विलक्षण प्रतिभा के बल पर क्रान्ति को सफल बनाकर रुस के शासन को जार की तानाशाही से मुक्ति दिलाई और शासन की बागड़ोर अपने हाथ में ली। उसके बाद लेनिन ने सर्वहारा शासन को मजबूत बनाने के कई प्रयास किए और 1924 तक सोवियत शासन का प्रमुख बना रहा। 1918 में लेनिन को मारने का भी प्रयास किया गया, लेकिन वह बच गया। उसने सोवियत संघ का संविधान भी बनाया। 1924 में उसकी बीमारी के कारण मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु पर अनेक विचारकों ने उसे साम्यवाद का आध्यात्मिक गुरु कहा। स्तालिन ने कहा कि लेनिन ने माक्र्सवाद की रुस की परिस्थितियों के अनुसार ढालने तथा उन्हें अद्यतनीन (up - to - date) बनाने का महान कार्य किया गया है। बुखारिन ने उसे एक शक्तिशाली सिद्धान्तवेत्ता की संज्ञा दी। इस तरह लेनिन की महानता का पता उसको दी गई श्रद्धांजलियों से चलता है। नि:सन्देह लेनिन रुस के महान दार्शनिक थे। उनकी बराबरी अन्य कोई माक्र्सवादी विचारक नहीं कर पाया।

व्लादिमीर लेनिन की महत्वपूर्ण रचनाएं

लेनिन समाजवादी चिन्तन के इतिहास एक महत्वपूर्ण राजनीतिक विचारक है। उन्होंने एक राजनीतिक व शासक के साथ-साथ अच्छा लेखक होने का भी गौरव प्राप्त है। उसकी बहुमुखी प्रतिभा का पता इन पुस्तकों से चलता है-

Imperialism-The Highest Stage of Capitalism–

लेनिन की यह रचना बहुत महत्वपूर्ण है। लेनिन के इस पुस्तक में मार्क्सवाद पर लगे आपेक्षों का समाधान किया है। उसने बताय है कि अनेक देशों में पूंजीवाद समाप्त होने की बजाय बढ़ने का कारण उसको पोषित होने के लिए अनुकूल परिस्थितियों का मिल जाना है। लेनिन साम्राज्यवाद के रूप में पूंजीवाद का विकास उसकी अन्तिम प्रगति है। इसके बाद साम्राज्यवाद के दोषों के कारण पूंजीवाद का नाश अवश्यम्भावी है।

State and Revolution–

लेनिन ने इस पुस्तक में क्रान्ति की कार्य-पद्धति व कला पर व्यापक चर्चा की है। उसने संसार की क्रान्तियों का गहरा अनुशीलन करके क्रान्ति के सम्बन्ध में कुछ नियम इस पुस्तक में प्रतिपादित किए हैं। लेनिन ने राज्य सम्बन्धी विचार भी इस पुस्तक में दिए हैं।

What is to be done–

लेनिन ने इस पुस्तक में संगठित व पेशेवर क्रान्तिकारियों के विचार का प्रतिपादन किया है। लेनिन ने कहा है कि यदि क्रान्ति को एक पेशा मान लिया जाए तो मुट्ठी भर क्रान्तिकारी भी क्रान्ति को सफल बना सकते हैं। इसी कारण लेनिन को क्रान्ति का आचार्य कहा जाता है।

Materialism and Empiric Criticism–

लेनिन ने इस पुस्तक में माक्र्स के द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद की पुर्नव्याख्या की है। सेबाइन ने कहा है कि लेनिन ने द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद को एक उच्च ज्ञान बना दिया है जिसमें समस्त विद्वानों के गहनतम प्रश्नों को समझने की क्षमता है। कुछ विचारकों का मानना है कि लेनिन ने माक्र्स के द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद को पैरों के बल खड़ा किया है।

इनके अतिरिक्त लेनिन की अन्य रचनाएं-’Two Tactics of Social Democracy in Democratic Revolution’, ‘The Revolution of 1917’, ‘Left Wing Communism’, ‘An Infantile Disorder’, ‘The Soviets at Work’, ‘One Step Forward’, ‘Two Steps Back’, तथा ‘The Proletarian Revolution and Kautsky Renegade’ हैं। इन सभी रचनाओं में लेनिन ने माक्र्सवाद के संशोधित सिद्धान्तों का परिमार्जन किया है और अपने कुछ नए साम्यवादी विचार भी प्रतिपादित किए हैं।

लेनिन एक ऐसे समय की उपज है जब रुस में जार शासकों की तानाशाही थी। बचपन से ही लेनिन क्रान्तिकारियों के परिवार से संबंध रखता था। उसे जार शासकों की तानााशही से घृणा थी। रुस में भ्रष्टाचार का बोलबाला था। किसी भी व्यक्ति को देशद्रोह के अपराध मे मृत्युदण्ड दे दिया जाता था। किसान वर्ग व मजदूर वर्ग का जीवन बड़ा दु:खी था। माफीनामे बेचे जाते थे। नौकरियां रिश्वत लेकर दी जाती थी। प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार व तानाशाही प्रजा के दु:खों का प्रमुख कारण थी। औद्योगिक क्रान्ति ने श्रमिक वर्ग की दशा को ओर खराब कर दिया था। बौद्धिक क्षेत्र में भी मार्क्स के सिद्धान्तों की आलोचना हो रही थी। लेनिन ने मार्क्सवाद का बचाव करने का बीड़ा उठाया और स्वयं राजनीति के क्षेत्र में कदम रखकर जनता को जार की तानाशाही से मुक्ति दिलाने के प्रयास शुरू कर दिए। 1917 की बोल्शेविक क्रान्ति को सफल बनाने का श्रेय उन्हीं को प्राप्त है। लेनिन ने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी रुसी समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।

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