हारोड डोमर का विकास मॉडल

अनुक्रम
प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों ने पूँजी संचय के क्षमता वृद्धि पक्ष पर अधिक जोर दिया था और उसके माँग पक्ष की अवहेलना की थी। इसके विपरीत कीन्सवादियों ने पूँजी संचय के “आय- वृद्धि पक्ष पर अधिक जोर दिया और उसके क्षमता वृद्धि पक्ष को भुला दिया।” हैरोड डोमर ने इन दोनों घरानों की भूल को सुधारते हुये निवेश प्रक्रिया के दोनों पक्षों को मिला दिया है और इस प्रकार यह उनके माँडल की सबसे बड़ी विशेषता कही जा सकती है। हैरोड तथा डोमर ने भी आर्थिक वृद्धि की प्रक्रिया में निवेश को प्रमुख स्थान दिया है, विशेष रुप से उसकी द्धैत प्रकृति को एक तरफ निवेश आय में वृद्धि करता है, तो दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था के पूँजीगत स्टॉक को बढ़ाकर उसकी उत्पादन क्षमता में वृद्धि कर देता है। पहले को निवेश का माँग प्रभाव और दूसरे को पूर्ति प्रभाव कहा जा सकता है। इसलिए एक अर्थव्यवस्था में जब तक निवेश बढ़ता रहेगा, तब तक वास्तविक आय तथा उत्पादन का विस्तार होता रहेगा।

सर राँय एफ हैरोड ने गतिशील अर्थशास्त्र को सन् 1939 में एक नया मोड दिया जबकि उनका लेख “An Essay on Dynamic Theory” का प्रकाशन ब्रिटेन में ‘Economic Journal’ में हुआ। हैरोड ने इसी विषय लन्दन विश्वविद्यालय में सन् 1947 में एक भाषण माला भी दी जो सन् 1948 में ज्वूंतके । Dynamic Journal के शीषर्क से प्रकाशित हुई इन भाषणों में तीसरे भाषण का शीर्षक ‘Fundamental Dynamic Thermos’ था। इसी भाषण में हैरोड के विकास प्रारुप का प्रारूप दिया है।

हैराड का विकास प्रारुप की मान्यताएं

  1. समाज में अपेक्षित बचत (Intended extant Savings) तथा वास्तविक बचत बराबर होती है।
  2. अर्थव्यवस्था में अपेक्षित निवेश तथा वास्तविक निवेश भी बराबर होते है । अर्थात S = I
  3. उत्पादन का उद्देश्य साम्य की स्थिति को प्राप्त करना।
  4. विनियोग की दर उत्पादन व आय वृद्धि की दर पर निर्भर करती है।
  5. अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार विद्यमान है।
  6. मूल्य-स्तर तथा ब्याज की दर में कोई परिवर्तन नहीं होता और पूँजी श्रम अनुपात तथा पूँजी उत्पादन अनुपात भी यथा स्थिर है।
  7. राज्य हस्तक्षेप का अभाव है।
  8. पूँजी गुणाँक (Capital Coefficient) अर्थात पूँजीगत स्टॉक का आय से अनुपात स्थिर मान लिया गया है।
  9. पूँजीगत वस्तुओं का मूल्य हृास नहीं होता है।
हैरोड ने अपना विकास प्रारुप तीन प्रकार की वृद्धि दरों पर आधारित किया है।
  1. वास्तविक वृद्धि दर -
  2. अभीष्ट या आवश्यक वृद्धि दर -
  3. हैरोड वृद्धि मार्ग -

डोमर के विकास प्रारुप की मान्यताएं

  1. समाज में अपेक्षित बचत (Intended extant Savings) तथा वास्तविक बचत बराबर होती है। अर्थात औसत बचत प्रवृत्ति (APS), सीमान्त बचत प्रवृत्ति (MPS) के बराबर होता है। 
  2. अर्थव्यवस्था में अपेक्षित निवेश तथा वास्तविक निवेश भी बराबर होते है । अर्थात S = I
  3. उत्पादन का उद्देश्य साम्य की स्थिति को प्राप्त करना।
  4. विनियोग की दर उत्पादन व आय वृद्धि की दर पर निर्भर करती है।
  5. अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार विद्यमान है।
  6. मूल्य-स्तर तथा ब्याज की दर में कोई परिवर्तन नहीं होता और पूँजी श्रम अनुपात तथा पूँजी उत्पादन अनुपात भी यथा स्थिर है। 
  7. राज्य हस्ताक्षेप का अभाव है। 
  8. पूँजी गुणाँक (Capital Coefficient) अर्थात पूँजीगत स्टॉक का आय से अनुपात स्थिर मान लिया गया है। 
  9. पूँजीगत वस्तुओं का मूल्य हृास नहीं होता है।

आलोचना

  1. उत्पादन फलन तथा पूँजी श्रम अनुपात को स्थिर माना। 
  2. सीमांत बचत प्रवृति तथा औसत बचत प्रवृति स्थिर है। 
  3. कीमत परिवर्तन पर ध्यान नहीं दिया। 
  4. पूँजीगत तथा उपभोक्ता वस्तुओं में भेद नहीं करता। 
  5. उद्यमी व्यवहार की उपेक्षा की गई है। 
  6. सरकार की भूमिका पर विचार नहीं करता। 

हैरॅड तथा डोमर प्रारुप की असमानताएँ

  1. डोमर सीमान्त पूँजी उत्पादन तथा गुणक के व्युत्क्रम ΔY/d = ΔI / σ का प्रयोग करता है हैरोड सीमांत पूँजी उत्पादन तथा त्वरक का प्रयोग करता है। 
  2. डोमर निवेश को वृद्धि प्रक्रिया में मुख्य कार्य सौपता है जबकि हैरॅड आय स्तर को वृद्धि प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण कारक समझता है। 
  3. डोमर निवेश की माँग और पूर्ति में संबध स्थापित करता है जबकि हैरॅड बचत की माँग और पूर्ति को बराबर करता है। 
  4. डोमर पूँजी उत्पादन अनुपात के व्युत्क्रम का प्रयोग करते है हैरॅड पूँजी उत्पादन अनुपात का इस दृष्टि से डोमर का σ = 1/Cr हैरॅड का। 5. डोमर ΔI/I = ΔY/Y की मान्यता स्वीकारतें है जबकि हैरॅड नहीं।
  5. हैरॅड के लिए व्यापार चक्र वृद्धि के मार्ग का अभिन्न अंग पर डोमर के लिए नहीं फिर भी वह . निवेश की औसत उत्पादकता के उतरी चढ़ाव को माना है। 
  6. हैरॅड उद्यमियों के व्यवहार ढ़ाँचे को माना जबकि डोमर सम्बन्ध में कुछ नहीं सुझातें है।

Comments