भारत के जल संसाधन

अनुक्रम
भारत में विश्व के कुल जल संसाधन का 5 प्रतिशत जल संसाधन है। भारत में नदियों का औसत वार्षिक प्रवाह 1869 घन किलोमीटर है। सतही जल का सर्वाधिक प्रवाह सिंधु, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र में है जो कुल प्रवाह का 60 प्रतिशत है। भारत में सतही जल 1869 अरब घन मीटर प्रतिवर्ष आकलन किया गया है। सतही जल के मुख्य साधन नदियाँ, झीलें, तालाब आदि हैं। भारत में दो प्रकार की नदियाँ पाई जाती है। नदियों की कुल संख्या 10,360 एवं लम्बाई लगभग 2 लाख मील है। उत्तर भारत में सदावाही नदियाँ जो हिमालय पर्वत पर जमा अलवणीय जल के 80 प्रतिशत भाग के पिघलते रहने से गंगा, यमुना, सिन्धु एवं बह्मपुत्र सहित अनेक नदियाँ प्रवाहित होती है। 

दक्षिण भारत में नदियाँ जिसमें कृष्णा, कावेरी, गोदावरी, महानदी सहित अनेक नदियाँ बहती है, जो बंगाल की खाड़ी में जाकर अपने जल को उड़ेलती है, जबकि नर्मदा एवं ताप्ति नदियाँ अपने पानी को अरब सागर में डालती है। देश की सभी नदियों से केवल 95 लाख हैक्टेयर जल का उपयोग होता था, जो नदियों में बहने वाले जल का 5.6 प्रतिशत का 16 प्रतिशत भाग था।

जल संसाधन


भारत के जल संसाधन 

भारत के जल संसाधन नीचे दिए जा रहे हैं -

1. झीलों से प्राप्त जल संसाधन -

सतही जल संसाधन का स्त्रोत एक मात्र वर्षा है, वर्षा का अधिकांश भाग नदियों में प्रवाहित हो जाता है। राज्य में न्यून वर्षा के कारण सतही जल से पूर्ति नहीं की जा सकती है। सतही जल प्राप्ति का दूसरा प्रमुख स्रोत झीलें है। झीलें खारे पानी एवं मीठे पानी की होती है।
  1. खारे पानी की झीलें - सांभर झील, डीडवाना झील, लूणकरणसर झील।
  2. मीठे पानी की झीलें - जयसमन्दझील, राजसमन्द झील, पिछोला झील, आनासागर झील, फतेहसागर झील, नक्की झील, पुष्कर झील, फाई सागर झील इत्यादि है।
  3. तालाब - तालाबों द्वारा वर्ष 1964 में 14 प्रतिशत सींचित क्षेत्र था, जो वर्षा की कमी के कारण घटकर वर्ष 1996-97 में केवल 7 प्रतिशत ही रह गया। जल संग्रहण के लिए प्रमुख रूप से नाड़ी, जोहड़, तालाब, बांध, टांका, टोबा, झील, कुऐं एवं बावड़ी है।

2. नदियों से प्राप्त जल संसाधन -

राजस्थान में नदियों से प्राप्त जल के 50 प्रतिशत भाग का ही उपयोग हो पाता है। आवश्यकता ऐसी नीति की है, जिससे नदियों से प्राप्त जल का 90 प्रतिशत उपयोग किया जा सके।
  1. चम्बल नदी - यह नदी राजस्थान के कोटा, सवाईमाधोपुर और धौलपुर जिलों के 135 किलोमीटर में बहती है। राज्य में यही एक मात्र नदी है, जो पूरे वर्ष बहती है।
  2. माही नदी - यह नदी राजस्थान के बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों में बहती है। यह नदी अंत में खम्भात की खाड़ी गुजरात में गिर जाती है।
  3. लूनी नदी - यह नदी अजमेर के नाग पर्वत से निकलकर जोधपुर संभाग में बहती है इसका जल प्रवाह 28.3 अरब घन फुट है
  4. साबरमती नदी - उदयपुर के पास अरावली की पहाड़ियों से निकलकर दक्षिण की ओर बहती है। इसका जल प्रवाह 162 अरब घनफुट है।
  5. सिंधु नदी :- तिब्बत में स्थित मानसरोवर झील के समीप कैलाश हिमानी इस नदी का उद्गम स्थल है, जो समुुद्र तल से 5182 मीटर ऊँची है। इसकी लम्बाई 3880 किलोमीटर है, भारत में इसका प्रवाह 1134 किलोमीटर है इस नदी से 1,17,884 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र लाभान्वित होता है। यह भारत-पाकिस्तान से प्रवाहित होती हुई अरब सागर में गिरती है।
  6. सतलज :- मानसरोवर झील के निकट का क्षमताल इसका उद्गम स्थल है। इसकी समुद्र तल से ऊँचाई 4630 मीटर है। भारत में इसकी लम्बाई 1050 किलोमीटर है, इसका जल ग्रहण क्षेत्र 240000 वर्ग किलोमीटर है।
  7. चिनाव :- सिन्धु नदी की सहायक नदी है हिमाचल प्रदेश के ताब्डी के समीप बरालाया दर्षयम नदी का उद्गम स्थल है। समुद्र तल से 4480 मीटर ऊँचाई है, तथा भारत में 1180 किलोमीटर लम्बाई है इसका जल ग्रहण क्षेत्र 26785 वर्ग किलोमीटर है।
  8. व्यास :- सिंधु नदी की सहायक इस नदी का थीरपंजाल उद्गम स्थल है। यह समुद्र तल से 4062 मीटर ऊँची है, भारत में इस नदी की लम्बाई 470 किलोमीटर एवं 25900 वर्ग किलोमीटर जल ग्रहण क्षेत्र है।
  9. गंगा नदी :- यह भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी है। भारत के उत्तर काषी जिले के गंगोत्री में गंगा का उद्गम स्थल है। इसकी समुद्र तल से ऊँचाई 7016 मीटर है, इसकी लम्बाई 2510 किलोमीटर एवं जल ग्रहण क्षेत्र 951600 वर्ग किलोमीटर है।
  10. यमुना :- इसका यमुना की हिमनद उद्गम स्थल है। समुद्र तल से 6315 मीटर ऊँचाई पर है, 152 किलोमीटर मार्ग तय करने के बाद गंगा में प्रविष्ट होती है। अन्य नदियाँ - सोम, राम गंगा, घाघरा, गंडक, गोमती, चम्बल, दामोदर, बेतवा, तोम, बह्मपुत्र इत्यादि हैं।
  11. दक्षिण भारत में प्रमुख नदियाँ- महानदी, गोदावरी, कृष्णा, तुंगभद्रा, भीमा, ब्राह्मणी, वैतरणी, पैन्नार, कावेरी, पेरियार, नर्मदा, ताप्ति, लूणी, साबरमती, माही आदि है।

3. भूजल संसाधन -

भारत में लगभग 300 लाख हैक्टेयर मीटर जल वर्तमान में उपलब्ध है। सतही जल साधनों के पूर्ण विकास के बाद यह 350 लाख हैक्टेयर मीटर हो जाने का अनुमान है। वर्षा जल एवं नहरों के रिसाव से लगभग 270 लाख हैक्टेयर मीटर जल की वृद्वि होती है। 

1. घटते भूजल के कारण - नगरों का असीमित विस्तार, बढ़ती जनसंख्या एवं प्रति व्यक्ति जल खपत में वृद्धि के कारण कई क्षेत्रों में भूमिजल संसाधनों का अत्यधिक दोहन हो रहा है। औद्योगिक प्रदूषण से कई क्षेत्रों में भूमिजल गुणवता में गिरावट हुई है।

2. भूजल की उपलब्धता के स्रोत - यहाँ भूजल के स्रोतों से अभिप्राय उन स्रोतों से है जिनसे होकर भूजल धरातल पर प्राप्त होता है जबकि आकाशीय जल, सहजात जल तथा मैग्मा जलस्रोत वे स्रोत हैं जिनसे भूमिगत जल का संचय होता है। यहाँ जल इतनी तीव्रता से संचरित नहीं हो सकता कि जल संभरण किसी रूप या झरने के लिए पर्याप्त हो सके। जल की प्रकृति के आधार पर स्रोत इस प्रकार होते हैं -
  1. कूप (Well)- भूसतह के नीचे स्थित संयुक्त जल क्षेत्र का जल प्राप्त करने के लिए पारगम्य शैंलों में कुएँ खोदे जाते हैं जिनके नीचे अपारगम्य शैलें होने से जल भरा रहता है। वर्षा पर आधारित कुएँ कम गहरे होते हैं जो ग्रीष्मकाल में शुष्क रहते हैं। अधिक गहरे कुएँ लम्बे समय तक जलापूर्ति में सहायक होते हैं।
  2. पाताल तोड़ कुएँ या उत्स्रुत कुएँ (Artesian Well)- पाताल तोड़ कुएँ ऐसे प्राकृतिक जलस्रोत होते हैं जिनसे धरातल पर स्वत: जल प्रकट होता है। उसके निर्माण के लिए दो प्रकार की अनुकूल संरचना होनी चाहिए।
     

Comments