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हिंदू धर्म ग्रंथों के नाम

हिन्दू धर्म ग्रंथ के नाम

हिन्दू धर्म भारत में 5000 वर्ष पूर्व आर्यों के आगमन के समय से माना गया है । हिन्दू धर्म को वैदिक धर्म भी कहा गया । भारत में सबसे अधिक हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं । हिन्दू धर्म की अपनी मान्यताएँ और विचार धराएँ हैं जो इसके वेदों, रचना, पुराणों और महाग्रंथों में परिलक्षित होती हैं । 

हिन्दू धर्म ग्रंथ के नाम

1. वैदिक साहित्य

वैदिक साहित्य में ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्वेद चार प्राचीनतम ग्रन्थ हैं। इनका रचनाकाल 1500-1000 ईस्वी पूर्व के मध्य का माना जा सकता वैदिक युग की सामाजिक, सांस्कृतिक की स्थिति के ज्ञान का एकमात्र श्रोत होने के कारण वेदों को एतिहासिक महत्व है। वैदिक, उत्तर-वैदिक काल से लेकर महाजनपदों के उदय तक की राजनैतिक, सामाजिक एवं दार्शनिक संस्कृति के ज्ञान के लिए यह साहित्य महत्वपूर्ण है।

2. ब्राह्मण ग्रन्थ

वैदिक मन्त्रों तथा संहिताओं की गद्य टीकाओं को ब्राह्मण ग्रन्थ कहा गया है। इसके अन्तर्गत एतरेय ब्राह्मण, शतपथ ब्राह्मण, तैतरीय ब्राह्मण, सांख्यान ब्राह्मण, पंचविश, षड़्विश ब्राह्मण, गोपथ ब्राह्मण अधिक महत्त्वपूर्ण है।

3. सूत्र साहित्य

सूत्र साहित्य के तीन भाग हैं :-

1. कल्प सूत्र :- कल्प सूत्रों में वैदिक यज्ञों का शास्त्रीय ढंग से वर्णन किया गया है।

2. ग्रह्म सूत्र में :- ग्रह्म सूत्रों में ग्रहस्थ जीवन में किये जाने वाले संस्कारों का वर्णन है। इन ग्रन्थों से ज्ञात होता है कि कन्या की विवाह आयु में कमी आ गयी थी। सम्भवत: युवावस्था के बिल्कुल पास पहुँचते ही या युवावस्था प्रारम्भ होते ही कन्याएँ विवाहित हो जाती थीं। वैवाहिक जीवन के आदर्श मन्त्र ब्राह्मण के समान ही प्रतिपादित किये गए हैं।

3. धर्म सूत्रों में :- डॉ. पी.वी. काणे ने धर्म सूत्रों का रचना काल 600-300 ई.पू माना है। इनमें नारी विषयक धर्मों पर यत्र-तत्र विस्तृत विचार हुआ है। इनमें कई ग्रन्थ पाए जाते हैं जैसे गौतम धर्मसूत्र, बौधायन धर्मसूत्र, आपस्तम्ब धर्मसूत्र तथा सिष्ठ धर्म सूत्र मुख्य है।

4. उपनिषद 

वैदिक साहित्य का अन्तिम भाग उपनिषद कहलाता है।

5. महाकाव्य 

वैदिक साहित्य के पश्चात रामायण और महाभारत दो महाकाव्यों का आविर्भाव हुआ। मूलत: इन ग्रन्थों की रचना ईसा पूर्व चौथी शताब्दी ई. को लगभग हुई थी। ये भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि ग्रन्थ हैं। इन दोनों ग्रन्थों में प्राचीन भारत की राजनैतिक, धार्मिक तथा सामाजिक दशा की जानकारी मिलती है।

6. रामायण

यह ६०० ई पू से पहले लिखा गया। 

7. महाभारत

महाभारत संस्कृत साहित्य का विख्यात महाकाव्य है। इसके रचियता महर्षि वेद व्यास हैं। आधुनिक रूप में अठारह पर्व तथा कुल मिलाकर एक लाख श्लोक पाये जाते हैं।

8. स्मृतियाँ

स्मृतियों में सामाजिक संस्थाओं के बारे में अधिक व्यवस्थित एवं विस्तार से जानकारी प्राप्त होती है। इन्हें प्राचीन परम्पराओं एवं आचार शास्त्र का मूर्त रूप कहा गया है। स्मृतियों में मुख्य है :-
  1. मनुस्मृति 
  2. याज्ञवल्क्य स्मृति 
  3. पाराशर स्मृति
  4. नारद स्मृति 
  5. ब्रहस्पति स्मृति 
  6. कात्यायन स्मृति
स्मृतियों से अनेक सामाजिक विषयों का वर्णन प्राप्त होता है।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

1 Comments

  1. Bhai mujhe bhart ke sabhi granth ke name ,send kr do mera WhatsApp number 9695107100 Priyanshu from Uttar Pradesh Hardoi , mai indian granth pr study kr rha hu ki bhatar me kitne Rishi the 🙏🙏🙏

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