अनुदेशन प्रारूप का अर्थ, परिभाषा एवं मान्यताएँ

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अनुदेशन प्रारूप का अर्थ

अनुदेशन प्रारूप दो शब्दों से मिलकर बना है-(1) अनुदेशन तथा (2) प्रारूप (Instruction + Designs) अनुदेशन का अर्थ है सूचनाएँ देना तथा प्रारूप का अभिप्राय ‘वैज्ञानिक विधियों से जाँच किये गये’ सिद्धान्तों से है। सारा शोध-संसार कुछ धारणाओं के आधार पर कार्य करता है और उनका मूल्यांकन कर निश्चित निष्कर्षों पर पहुँचने में मदद देता है। शैक्षिक तकनीकी का चतुर्थ वर्ग अनुदेशन प्रारूप कहलाता है। शिक्षण प्रक्रिया में अनुदेशन प्रारूप का अपना महत्त्वपूर्ण स्थान है। दूसरे शब्दों में प्रत्येक शोध का अपना प्रारूप होता है। इसी प्रकार शिक्षण के क्षेत्र में जिन प्रारूपों पर कार्य किया जाता है उन्हें अनुदेशन प्रारूप कहते हैं।

डेरिक अनविन (Derick Unnwin) ने इसका अर्थ बताते हुए स्पष्ट किया है कि अनुदेशन प्रारूप आधुनिक कौशल, प्रविधियों तथा युक्तियों का शिक्षा और प्रशिक्षण में प्रयोग है। अनुदेशन प्रारूप, इन कौशलों, प्रविधियों तथा युक्तियों आदि के माध्यम से शैक्षिक वातावरण को नियिन्त्रात करते हैं और कक्षा में सीखने तथा सिखाने के कार्य को सरल, सुगम तथा उपादेय बनाने में सहायता करते हैं।

अनुदेशन प्रारूप की मान्यताएँ

  1. अनुदेशन प्रारूप, शिक्षण सिद्धान्तों पर आधारित होता है।
  2. यह परिकल्पनात्मक तथ्यों को सहज रूप में परीक्षण के लिए स्वीकार करता है।
  3. अनुदेशन प्रारूप, भौतिक, संगणक तथा गणितीय प्रारूपों की सहायता लेता है।
  4. अनुदेशन प्रारूप में अधिगम के मापन के लिए प्रतिमानों (Pattern) का होना आवश्यक है। व्यवहार को उस के परिणामों के सन्दर्भ में नियिन्त्रात किया जाता है।
  5. नियम, सिद्धान्त तथा रचना, ये सभी अनुदेशन प्रारूप के लिए आवश्यक हैं।
  6. शिक्षण कला एवं विज्ञान दोनों है।
  7. शिक्षक को प्रभावशाली प्रशिक्षण के माध्यम से बनाया जा सकता है।

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