स्टीरियोटाइप का अर्थ, परिभाषा, मनोविज्ञान एवं प्रकार

अनुक्रम

स्टीरियोटाइप शब्द का उद्भव ग्रीक भाषा के (Otepeotuttoc) शब्द से हुआ है। इसका साहित्यिक अर्थ सोलेड काइन्ड (Solidkind) है। यह शब्द फरमिन डीडोट (Firmnin Didot) जो प्रिटिग वर्ल्ड से थे उनके द्वारा ईजाद किया गया था। मूल रूप से यह एक मौलिक टाइपोग्राफिकल एलीमैन्ट (Typographical Element) से बार-बार कुछ छापने की प्रक्रिया थी। अमेरिका के पत्रकार वाल्टर लीपमैन (Walter Lippmann) स्टीरियाटेाइप को ऐसा लक्षण बताते है जिसके कारण हमारे जहन में कोई तस्वीर अगर बैठ जाती हे तो वह चाहे सही हो या गलत हम उसे हिला नहीं सकते । फिर यही तस्वीर हमारे स्टीरियोटाइप विचार का नेतृत्व (Lead) करती है। स्टीरियोटाइप (Stereotype) शब्द का प्रयोग अंग्रेंजी में पहली बार 1850 में किया गया था और इसे संज्ञा का रूप भी दिया गया था, जिसका अर्थ एक स्थायी छवि से था जो बदल नहीं सकती।

स्टीरियोटाइप का अर्थ

हमें अपने आस-पास की सूचनाओ को केवल ग्रहण करना ही नहीं अपितु उस सूचना को आलाचेनात्मक रूप से विश्लेषण करना भी आवश्यक है। क्योकि सूचना अपने आप में कुछ ज्यादा नहीं बाले ती बल्कि उनकी व्याख्या ही सूचना को महत्वपूर्ण बनाती है। हम सूचनाओं के एक ऐसे अस्त-व्यस्त ससांर में रहते है, जहाँ सूचनाओं को अर्थपूर्ण, तार्किक और शीघ्र समझने के लिए हमें उनके वर्गीकरण की जरूरत होती हे और ये वर्गीकरण आगे जाकर स्टीरियाटेाइप विचारों का आधार बनता है।ये सूचनाएं या स्टिमयुलस हमारे सज्ञांनात्मक मानचित्र में एक खास साचें (Pattern) में अंकित होती है। जिनसेये हमारे आस-पास की वस्तुओ प्राणियों तथा अन्य घटनाओं को समझने का एकनजरिया उत्पन्न करती है। दूसरे शब्दों में हमें अपने सामाजिक पर्यावरण को दखेने का दृष्टिकोण पोषण करती है जिसकी बाद में हमारे अभिवृत्ति (Attitude) में ढलने की सम्भावना काफी प्रबल रहती है। हॉर्न (1974) ने स्टीरियोटाइप को स्थिर, औपचारिकृत (और मानकीकृत और इसलिए शायद बेबुनियाद), वाक्य, विचारया विश्वास के रूप में परिभाषित किया है। जैसा कि हमें परिभाषा से पता लगता हे कि स्टीरियाटेाइप हमारे स्थिर विश्वासों का एक मसला है और विश्वास समाजीकरण की प्रक्रिया में पुष्ट होते है। इसलिए स्टीरियाटेाइप का जन्म समाजीकरण की प्रक्रिया में देखा जा सकता है। स्टीरियाटेाइप और समाजीकरण दोनों प्राय: अचेत (Subconscious) प्रक्रियाएं है, जिससे गुजरने वालों को इसका भान नहीं होता।

उपर्युक्त परिभाषा से एक और जरूरी बात उजागर होती है कि स्टीरियोटाइप मूल्यों से मुक्त नहीं है और स्टीरियोटिपिकल विचारों की बेबुनियाद हाने की सम्भावना अधिक होती है। अर्थात् हमारे स्टीरियोटिपिकल विचार पूर्वाग्रह से ग्रसित हो सकते है।

उदाहरण के तौर पर हिन्दू समुदाय के लोगों और मुिस्लम समुदाय के लोगों का परस्पर व्यवहार सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्याकंन तथ्यों पर आधारित न होकर किवदंतियो, सुनी सुनाई बातोंया मीडिया चित्रण पर आधारित हो सकता है। क्योकि यह अवलाकेनया निष्कर्ष, किसी तथ्यया प्रमाण पर आधारितनहीं है। अत: इस स्टीरियोटिपिकल विचार की गलत हाने की सम्भावना बढ़ जाती है।

स्टीरियाटेाइप आम तौर पर एक बोध होता हे जोकि, एक समूह के लोगों द्वारा दूसरे समूह के लागेो का मूल्याकंन करने में सहायता करता है। इस बोध के कारण एक समूह के लागेो का व्यवहार दूसरे समूह के लोगों के लिए निश्चित हो जाता हैया फिर दूसरे शब्दों में एक समूह की दूसरे विशेष समूह के बारे में पक्की धारणा बन जाती है। जिसे हम स्टीरियाटेाइप धारणाया जिस समूह के लागेो के बारे में धारणा बन जाती है उस समूह के लोगों की स्टीरियाटेाइप छवि कह सकते है। यह धारणा किसी समूह के व्यक्ति में जब विकसितया घर कर लेती है तो वह दूसरे समूह के व्यक्ति का उसकी आँखों की गतिविधियां या फिर दूसरा जैसे उसकी वेश-भूषा आदि बातों से विश्लेषण करती है, जिसका आधारयह स्टीरियाटेाइप धारणा, बोध या उसके दिमाग में घर कर गई एक विशेष समूह की छवि है।

इस तरह से हम स्टीरियाटेाइप को एक ऐसा पूर्वाग्रह कह सकते है। जो एक समूह के लोगों को दूसरे समूह के व्यक्तियों की गलत छवि बनाने में उकसाता है। इस छवि के आधार नस्ल, सामाजिक समूह में विविधताया उनकी धर्म, भाषा या फिर लिंग भेद कुछ भी बनते हैं जिनकी मजबूत नींव कायम करता है व्यक्ति के दिमाग में जड़ पकड़ चुका पूर्वाग्रह।

इस प्रकार स्टीरियोटाइप धारणा एक विचार या छवि को बनाता होता है जो एक रूढिव़ादी या आमतौर की धारणा से पैदा हो सकते है। तथा आम हो सकते है। स्टीरियोटाइप कई बार दो चरों के बीच भ्रम या भ्रांति का एक ऐसा सम्बन्ध या परस्पर सम्बन्ध कायम करता है, जो नुकसान दये हो सकता है। स्टीरियाटेाइप एक तरह से नकारात्मक बोध होता है तथा यह सकारात्मक भी हो सकता है परन्तु नकारात्मक टोन में ही होता है।

स्टीरियोटाइप विचार बनाने का एक कारण होता है, जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्तियों को जो किसी दूसरे नस्ली या जातीय समूह से है, उनको ठोस रूप से नहीं जानता या उनसे उनकी घनिष्ठता नहीं होती। घनिष्ठता की यह कमी फिर सब व्यक्तियों में स्टीरियाटेाइप विचार के पक्का हाने में साहस देती हे अर्थात एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में इसका संचार होता है किसी विशेष समूह के बारे में धारणा बनाने में ये सहायता करता है। थाडे़ शब्दों में कहा जाए तो जानकारी का अभाव भी कई बार स्टीरियाटेाइप विश्वास को जन्म दने में मुख्य भूमिका निभाता है।

विभिन्न अनुशासन या विधा स्टीरियाटेाइप के विकास के बारे में विभिन्न स्पष्टीकरण देते है। मनोवैज्ञानिक स्टीरियाटेाइप का कारण जानने के लिए दो समूहों के आपस में अनुभव, उनमें संचार के पैटर्न तथा अन्र्त समूह प्रतिकलू ता पर फाके स करते है। ताकि स्टीरियाटेाइप के कारण को जान सक।ें जब समाजशास्त्री स्टीरियाटेाइप को जानने की काेि शश करते हैं तो वे दो समूहों के आपस में सम्बन्ध तथा उन विभिन्न समूहों के सामाजिक प्रारूप में स्थिति का अध्ययन करते है।

अत: ये एक समाजशास्त्री तथा मनोवैज्ञानिक के विभिन्न तरीके या कारण है जो स्टीरियोटाइप विचारधारा को प्रमाण देते है।

सैन्डरगिलमैन (Sandergilman)ने अपनी परिभाषा में कहा हे कि “प्रतिनिधित्वता सही नहीं हो सकती परन्तु एक से दूसरे को प्रक्षपेक है।”

स्टीरियाटेाइप विचार समूहों का सही प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता, बल्कि उनकी व्याख्या करने तथा उनके बीच के अन्तर को स्पष्ट करने में एक अर्थ दे सकता है अर्थात सहायता कर सकता है। स्टीरियाटेाइप सामग्री समूह के सामाजिक स्तर की स्थिति को निर्धारित तो कर सकती हे पर उस समूह के व्यक्तियों की व्यक्तिगत विशेषता नहीं बता सकती जो वास्तव में किसी व्यक्ति विशेष को होती है।

जिन समूहों के पास सामाजिक और आर्थिक लाभ कम या नाम मात्र होते है, स्टीरियाटेाइप विचार उन समूहों की व्याख्या करने में सहायता करता हे अर्थात् वह उनकी असमानता को दर्शाता है। जसैे निम्न राजेगार मूल्य की बात कर सकते है। एक ऐसा व्यक्ति जो निम्न वर्ग या जिसे सामाजिक और आर्थिक लाभ कम प्राप्त है और काम मिलने में उसे बेहद कठिनाई का सामना करना पडत़ा हे उस व्यक्ति की तुलना में जो समाज में एक उच्च जाति का है तथा सामाजिक ताकतों को प्रतिनिधित्व कर रहा है। उस निम्न व्यक्ति को तो स्टीरियोटाइप विश्वास की वजह सेनकारा घोषित करके कामनहीं दिया जाता, जबकि वह दक्ष है, परन्तु उस उच्च जाति के व्यक्ति को काम मिल जाता है जबकि शायद वह उस निम्न वर्ग के व्यक्ति से उस काम को करने में कम दक्ष है। इस तरह स्टीरियोटाइप विचार के कारण व्यक्ति का विश्लेषण किया जाता है तथा वह निम्न वर्ग का व्यक्ति कार्य प्राप्त नहीं कर पाता। स्टीरियाटेाइप दो समूहों के बीच के अन्तर को बढा़ चढा़ कर उस पर फाकेस करने में अहम भूमिका निभाते है।

स्टीरियोटाइप का मनोविज्ञान

श्रेणीकरण और जुडाव स्टीरियोटाइप विचार के दो आधारभूत विषय है।

1. श्रेणीकरण :- हम समूह के लोगो को उनकी विशेषताएँ जैसे आयु, नस्ल या फिर उनके लिंग आदि के आधार पर पहचानते है अर्थात इन विशेषताओं के कारण उन्हें एक श्रेणी में रख दिया जाता हे जो स्टीरियोटाइप ने हमारे मस्तिष्क में या जहन में पैदा की है। आरै ऐसा इसलिए होता हे क्योकि हममें जागरूकता का अभाव होता है।

2. जुडाव:- जब हमारे दिमाग में स्टीरियोटाइप विचार या विश्वास बैठ जाता है, दसूरी भाषा में जब हम स्टीरियोटाइप होते है तो जो विशेषताएँ किसी समहू के लागे ों के बारे में हमारे दिमाग में है उनको हम उस समहू के लोगो से जाडेक़र हमारे स्टीरियोटाइप विश्वास को पक्का करते है। स्टीरियोटाइप को पक्का करने के लिए जो किसी व्यक्ति या समूह के व्यवहार की उपलब्धता हमारे दिमाग में होती है, हम उसे ही सही ठहराने का प्रयास करते है इस तरह से हम कह सकते है कि स्टीरियोटाइप एक ऐसा विचार है जो उपलब्धता पर निर्भर करता है। इस तरह हमारे जहन मे वही आता हे जो विशेषता उस व्यक्ति या समहू की हम जानते है इस तरह हम सम्बन्धित व्यक्ति का स्टीरियोटिकल विश्लेषण तौर पर जैसे कि केवल अफ्रीकन अमेरिकन लोगो को ही मीडिया में अपराधी के रूप में दर्शाया जाता है, उन्हें अत्यधिक स्टीरियोटाइप साचें में ढाल दिया जाता है। फिर हर इन्सान यही सोचता है कि हर अफ्रीकन अमेरिकन अपराधी है। इस तरह उनकी छवि स्टीरियोटिपिकल हो जाती है।

स्टीरियोटाइप के प्रकार

विभिन्न देशो केनस्ल और एथनिक आधार पर स्टीरियोटाइप के प्रकार:-

1.नेटिव अमेरिकनस स्टीरियोटाइप स (Nativeamericansstereotypes ):- जब उपनिवेशवाद शरुु हुआ तो समूहों के बिखराव से, खासतौर पर जोनस्लें अल्पसंख्यक थी, उन्हानें संयुक्त राज्य को राष्ट्र की शुरुआत दी। इस उपनिवेश के साथनेटिव अमेरिकन का जन्म हुआ। जिसने (Savage) स्टीरियोटाइप छवि को जन्म दिया। यह स्टीरियाटेाइप छवि नेिटव अमेरिकन के लिए प्रयोग में आई। इनको लोकप्रिय मीडिया में जगंली, असभ्य, खतरनाक और वैहशी लोगों की तरह चित्रित किया जाता है जो व्हाइट सैटलर, काऊब्वायज और स्टेजकोचस (Stagecoaches) पर निरन्तर आक्रमण करते रहते है। जो अपने मुँह पर हाथ रखकर तरह-तरह की आवाजें निकालते है। काटर्नू , कॉमिक और एनीमेिटड फिल्मों में इन्हें गहरे लाल रंग से चित्रित किया जाता हे अर्थात इनकी त्वचा को लाला दिखाया जाता है। उदाहरण के तौर पर फिल्म पीटर पैन (1953) में इनका स्टीरियोटिपिकल चित्रण किया गया है।

2. कनेडियन स्टीरियोटाइप (Canadianstereotypes):- कनेडियन लोगो की ऐसी स्टीरियाटेाइप छवि हे कि उन्हें बीयर पीता हुआ, खास तौर के कपडे़ पहने हुए और एक अच्छे हॉकी खिलाड़ी के तौर पर दिखाया जाता है। और ये अपना वाक्य हमश्ेाा “Eh” के साथ समाप्त करते है। यह स्टीरियाटेाइप छवि Bob & Dongact जो अमेरिका में 1970 में CTV पर चित्रित हुआ था, उस पर आधारित और विकसित हुई है। इस स्टीरियाटेाइप के आधार पर कनाडा़ के लोगों की यह छवि है कि वे हमेशा शान्त स्वभाव के रहते है।

3. ब्लैक स्टीरियोटाइप (Blackstereotypes):- बीसवीं शताब्दी के मध्य में और इससे पहले भी ब्लैक लोगों को हमेशा मानै , असभ्य, आलसी, शैतान, जगंली और un-Christian रूप में चित्रित किया गया।ये विचार जों Anglo-Saxon उपनिवेशी थे वे अपने साथ संयुक्त राष्ट्र ले गये। सफदे उपनिवेश हमेशा यह विश्वास रखते है कि काले लागे सफेद लोगों से हीन है।ये स्टीरियाटेाइप विचार कालों को दास के रूप में जानने में सहायता करते है तथा इस कारण इन्हें इनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में निम्न रखकर देखा जाता है। इस कारण इन्हें आमतौर पर दास,नाकै र, गन्नों के खेत में काम करते हुए, कपास के गठठ्ों को उठाते हुए दिखाया जाता है। कई बार इन्हें चर्च में संगीत बजाते हुए चित्रित किया जाता है।

4. आधुुिनिक ब्लैकैक स्टीरियोटाइप (Modern Blacksterotypes):- लगभग 1960 के आस-पास काले लोगों की छवि में कुछ बदलाव आया। जोकि कुछ माध्यमों (Media) में था। अब उनकी छवि कुछ सकरात्मक बनी। अब काले लोगों और अफ्रीकन अमेरिकन को अच्छे खिलाडी़ और एक अच्छे प्रेमी के रूप में चित्रित किया जाने लगा। 1970 के पास काले लोगों को अच्छा व्यवहार करने वाले दयालु, ईमानदार और बुद्धिमान के रूप में दर्शाया गया। कहने का तात्पर्य यह है कि 1970 के पश्चात् काले लोगों की छवि आधुनिक काले लोगों की छवि ने ग्रहण कर ली थी, जो सकारात्मक स्टीरियोटाइप इमेज बन गई थी।

5. अरेबिक उत्तरी अफ्रीकन और मध्य पूर्वी स्टीरियोटेापस (Arabic, Northafrican and Middle Easternstereotypes):- इन्हें अक्सर कट्टर मुस्लिम और मारने मरने पर उतारू रहने वाले, चिल्ला-चिल्ला कर बात करने वाले तथा कम बुद्धिमान के रूप में चित्रित किया जाता है। इनकी बढी़ हुई मछूें, दाढी़ दिखाकर एक उपहास चित्र के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इन मुस्लिमों की जो लाके प्रिय छवियाँ प्रस्तुत की जाती है उनमें एक चटाई पर उडत़े हएु , रस्सी के सहारे किसी पर्वत पर चढत़े हुए, ऊटँ की सवारी करते हुए, तथा क्रोधित रूप में तलवार पकडत़े हुए तथा एक पण्डाल में हुक्के के द्वारा धर्मूपान करते हुए दर्शाया जाता है। अरेि बक लोगों को अक्सर अमीर, शख्ेा, चश्मा पहने हुए और सर पर तथा काधंो पर मफलर बांधे हुए दिखाया जाता है। अरेबिक और तों को बुरका पहने हुए और हाथ में फूल दान लिए हुए दिखाया जाता है। अरेबिकयुवतियों को बैली (Belly) नृतिका के रूप में दिखाया जाता है। लगभग 1970 से 2001 तक अरेिबक लोगों को आतकं वाद को पूरे विश्व में फैलाने कीनकारात्मक छवि के रूप में चित्रित किया गया। कई पश्चिमी दश्ेाो में इन्हें अशिक्षित, अपराधी, अक्रामक और खतरनाक लोगों की तरह दिखाया जाता है, जो कामनहीं करते पर सरकार की स्कीमों का फायदा उठाते हैं तथा कइर्- कई बच्चे पैदा करते है। अरेिबक लोगों को दुकानदार और सुपर मार्केट के प्रबन्धक के रूप में दर्शाया जाता है।

6. भारतीय, पाकिस्तानी, हिन्दु और दूसरे दक्षिण एशियन स्टीरियोटाइप (Indian, Pakistani, Hinduand Othersouthasianstereotypes):- इन्हें अक्सर एक दकुानदार, सुपरमाकर्टे का क्लर्क, गरुुया सपेरे के रूप में चित्रित किया जाता है। ये हाथी की सवारी करते है। गाय की पजूा करते है और काफी गर्म-गर्म राेि टयाँ और सब्जी खाते है। ये बॉलीवडु फिल्में दख्ेाना पसन्द करते है। इनकी कुछ और लोकप्रिय छवियाँ, जैसे बिना कपड़े पहने हुए एक फकीर, सम्मोहित करने वाले और जादूगर आदि है। कुछ और छवियाँ भी हे जिनके द्वारा इन स्टीरियोटाइप को चित्रित किया जाता है, जैसे जलते हुए कोयले पर चलते हुए दिखाना, चाकू द्वारा करतब करना, मिट्टी में दब जाना। अब आधुनिक दिनों में ये लागे इण्डियन अमेिरकन सॉफ्टवये र प्रार्गेामर के रूप में जाने जाते है। संयुक्त राष्ट्र में इनकी स्टीरियोटिपिकल जो छवियाँ है। वोये हे कि गजुराती हाटेल चलाते है, पजांबी टैक्सी चलाते है। तथा दक्षिण भारतीय सूचना तकनीकी के क्षेत्र में कार्यरत है।

7. पूर्वी एशियन स्टीरियोटाइप (Eastasianstereotypes):- ये पूर्वी एशियन आमतौर पर मीडिया में बुद्धिमान परन्तु एक बिना परिधीय दृष्टि के साथ चित्रित किए जाते है। इन्हें बुरा ड्राईवरया फिर मैरीटल आरटीस्ट के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता है। पश्चिम में इन्हें हमश्ेाा लॉन्डरीज (Laundries) का मालिक दिखाया जाता है। चाईनीज लोगों को अक्सर मीडिया में चावल की बनी चीजें खाता हुआ, किसी एक काम के लिए लम्बी कतार में खडा़ हुआ, किम्बल (Cymbal) जो एक तरह का संगीतयन्त्र हे हाथ में लिए हुए, सर पर बडी़ गाले टोपी तथा हाथ में रूमाल बांधे हुए दिखाया जाता है। आधुनिक मीडिया में इनकी छवि में थाडेा़ बदलाव आया है और इस छविने इनका मैरीटल आर्ट में सक्षम हाने वाली छवि को पीछे धकलेा हैया लुप्त कर दिया है। जापानी लोगों को आमतौर पर अत्यधिक विनम्र और आज्ञाकारी परन्तु एकना पसन्द आने वाला विदेशी के रूप में दर्शाया जाता है। इनकी अच्छा व्यवसायी हाने की छवि भी मीडिय़ा में प्रस्तुत की जाती है। चाइर्ना, जापान, कोरिया के लोगों को मछली अधिक खाते हुए भी चित्रित किया जाता है।

8. व्हाईट स्टीरियोटाइप (Whitestereotypes)- बदलते हुए समय में व्हाईट स्टीरियाटेाइप की सामाजिक परिभाषा में कुछ बदलाव आ गया है। अब व्हाईट समूह के लोगों को मीडिया द्वारा बुद्धिमान नहीं दिखाया जाता। इन एथनिक समूहों में हम ब्रिटिश, आईरिश और स्लेव को शामिल करते है।

9. इगंलिश स्टीरियोटाइप (Englishstereotypes):- इन लोगों को स्टीरियाटेाइप किया जाता है कि वे बहे द शान्त, पर हठील,े घमण्डी टाइप के होते है। उन्हें ब्रिटने के टी.वी. कार्यक्रमों में एक अच्छे कुक के रूप में दर्शाया जाता है। कनाडा़ में और सयं ुक्त राष्ट्र में ब्रिटिशया इगंलिश लोगों की अक्सर बुरे दातांें वाला चित्रित किया जाता है। पूर्वीयरूापे में इगं लिश लोगों की जो छवि है वो ज्यादा आकर्षितन दिखने की है। एक लाके प्रिय ब्रिटिश स्टीरियाटेाइप में एक उच्च श्रण्ेाी के व्यक्ति को अक्सर एक अच्छी वश्ेाभष्ूाा पहने हुए, सर पर गाले टोपी, ब्लैक सटू पहने हुए और हाथ में छाता लिए हुए चित्रित किया जाता है। ब्रिटिश स्टीरियाटेाइप को अक्सर व्यवसायी,नैनी (Nannies), विक्रेता, मिल्ट्री कमाडं र के रूप में दर्शाया जाता है।

10. व्हाईर्टट अमेरिकन स्टीरियोटाइप (Whiteamericanstererotypes):- यरूापे के दश्ेाों में इन्हें उतावले स्वभाव वाला, खुद को महत्व दने वाला, अबुद्धिमान, अनैतिक यौन सम्बन्धी मुद्दों पर लज्जालु प्रवृति का और माटेा व स्थलू चित्रित किया जाता है। व्हाईट अमेरिकन की जोये मोटे होने की छवि बनी हुई है, वह अमेरिकन खाने की वजह से है। जैसे (McDonald’sand Burgerking) इसके अलावा कुछ और लाके प्रिय छवियां है जिससे अमेिरकन को स्टीरियाटेाइप किया जाता हे जैसे काऊब्वॉय(Cowboys), अतिविश्वासी तथा सिगरेट पीते हुए एक व्यवसायी (See For Instance, Tintin inamericawhere Bothstereotypesare Present) और अनजान पर्यटकों का जाडेा़ जिसे वास्तविक संस्कृति में न रूचि हे तथा न ही वे इसको महत्व देते है। (See For Instance, theamerican Couple depicted in the Fawlty Towers episodewaldortsalad) 1960 और 1970 के दौरान, वियतनाम युद्ध के आस-पास अमेरिका और अमेरिकन की छवि में और अधिक बदलाव आया। अब अमेरिकन की छवि पूरे विश्व में और अधिकनकारात्मक बन गई। जैसे अमेरिकन अहकांरी, बेरहम, सम्राज्यवादी, पूंजीवादी, युद्ध करने वाले अन्तरराष्ट्रीय संस्कृति तथा प्राकृतिक पर्यावरण को नष्ट करने वाले है। यह स्टीरियोटिपिकलनकारात्मक छवि कई वर्षों से बरकरार है। विदशी समाचारों मे वृत्तचित्र रिपार्टे में अक्सर अमेरिकन की ये छविया दिखाई जाती है।

11. स्कोटिश स्टीरियोटाइप (Scotishstereotypes):- इन लोगों को अक्सर कठोर, कजंसू , चिड़िचडा़ और लाल बढी़ हुई दाढी़ वाला दर्शाया जाता है। इन्हें चनु टदार सकर्ट पहने दिखया जाता है। इन्हें प्राय: स्कॉच विस्की पीते हुए और डीप फ्राइड पिज्जा खाते हुए स्टीरियोटाइप किया जाता है। इन्ह गोल्फ और हाईलैण्ड गेम्स (Golf or Highland Games) खेलते हुए दिखाया जाता है। इनकेनाम अधिकतर “Mac” से शरुु होते है। तथाये अपने बातचीत में स्टीरियोटिपिकल शब्द जसैे Taye(बेबीनमे ), laddie(थोडा़ समय),wee(लडक़ा) और “r” Letter पर अधिक जोर देते है। स्कोटिश स्टीरियोटिपिकल लोगों के उदाहरण है।

12. वैल्श स्टीरियोटाइप welshstereotypes:- इन लोगों को आमतौर से सुस्त लोगो (Dull People) पर गाना गाने का एक खास हुनर रखने के रूप में चित्रित किया जाता है। वैल्श लोगों की यह छवि हे कि ये नए लोगों से मिलने में परहजे करते हैं तथाना ही नए विचारों का स्वागत करते ह®। वैल्श लागेों में इंग्लिश लोगों के प्रति हीन भावना होती हे औरये लागे अपनी शराब तथा ब्लडैं फडू (स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भोजन) के लिए भी जाने जाते है।

13. आस्टे्रलियन स्टीरियोटाइप (Australianstereotypes):- ऐसे चरित्र को हमश्ेाा Crikey (अचम्भित हाने की मुद्रा), G’day (अच्छा दिन)ए डंजम (दोस्त) आदि भावों का प्रयोग करते हुए दिखाया जाता है। ये अक्सर दुनियादारी से दूर, बियर (Beer) का अत्यधिक प्रयागे करते हुए, लहरों पर तैरते हुए दिखाए जाते है। कगांरुओं को दिखाकर भी इनका प्रतिनिधित्व किया जाता है। आस्ट्रेलियन पुरुषों को अक्सर एक मर्दाना (Macho) एनारीद्वेषक, निर्दयी और महिलाओं को कामकू (Sexy) बुलाकर सम्बोधित करते हुए दिखाया जाता है।

14. ज्यूविश स्टीरियोटाइप (Jewishstereotypes):- इनका उदभ्ाव उन्नीसवीं शताब्दी में आधुनिकयूरोपियन के पवूार्र्गह जो इनके बारे में उनके जहन में था उसके कारण हुआ। आज इन्हे। यहूदी लागे (Semitic Peoples) केनाम से पुकारा जाता है। जो आर्यन और इण्डोयरूाेि पयन से बिल्कुल अलग है। ज्यश्ूा इन लागों के धर्म से अपने आपको अलगनहीं करते पर इनकीनस्ल और अन्य बातों से अपने आपको अलग रखते हैंया असहमती जताते है। 1904 के आस-पास ज्यसू लागेों को “ाड्यन्त्रकारी व्यायसयी के रूप में चित्रित किया जाता था। इनके पश्चात इन्हें फिल्मोंया हास्य कार्यक्रमों में घुघंराले बालों और लम्बीनाक के साथ दर्शाया गया। आजकल इन्हें प्राकृतिक तौर पर बुद्धिमान की तरह स्टीरियाटेाइप किया जाता हे और इन्हें पैसे कमाने की साचे रखने वाला दिखाया जाता है।

15. फ्रैच स्टीरियोटाइप (Frenchstereotypes):- फ्रांस के लोगों को अक्सर गदां, बिना शेव किए, घुघंराली मछूों, गाले टोपी और धारीदार कमीज पहने हुए चित्रित किया जाता है। इन्हें अक्सर घमण्डी, चिड़िचडा़ , आलसी, विदश्ेाी लोगों के प्रति असभ्य दर्शाया जाता है। इन्हें Craissants (Smallsweet Bread) का आदी दिखाया जाता है। इनकी जो सकारात्मक छवि दर्शायी जाती है वो इन की एक अच्छे बावर्ची हाने की है। इन्हें कार्टनू स में भी मजाकिया तौर से चित्रित किया जाता रहा है।

17. जर्मन स्टीरियोटाइप (Germanstereotypes):- जर्मन स्टीरियाटेाइपस को हम चार अलग-अलग श्रेणी में रख सकते है:-

(i) ऊबमेन्श स्टीरियोटाइप (Ubermenschstereotypes):- ये जमर्न स्टीरियाटेाइप की एक श्रेणी है। ऊबमेन्श लोगों को अतिसयं मी, मजाक न करने वाले अति ऊर्जा वाले जटिल सिद्धान्तों वाले और अच्छे मैकेिनक तथा लम्बे कद काठी वाले एक खूबसरू त चहे रे के धनी के रूप में चित्रित किया जाता है। इन्हें मिल्ट्री लीडर और व्यवसायी के रूप में भी स्टीरियाटेाइप किया जाता है।

(ii) बवेिरयन स्टीरियोटाइप ( Bavarianstereotypes):- इन्हें शान्त स्वभाव का दर्शाया जाता है। पुरुषों को जर्मन की परम्परागत वश्ेाभष्ूाा (Leaderhosen), टायरोलीन हैटस (Tyrolean Hats) पहने हुए और मूंछ रखे हुए चित्रित किया जाता है। जबकि महिलाओं को ड्रिडं लस (Dirndles) पहने हुए दर्शाया जाता है और दोनों पुरुष और महिलाओं को अधिकतर सफेद , हरा और लाल रंग के पोषण का शौकीन दिखाया जाता है। इन्हें बियर (Beer) पीते हुए और (Schnitzel), (Sauerkraut) और (Sauerbraten) खाते हुए दिखाया जाता है।ये ओमपाह (Oompah) सगं ीत के शाकै ीन और उस पर थिरकते दिखाए जाते है।ये स्टीरियोटिपिकल विचार साउथरन जर्मन, बवेरियन और आस्ट्रेलियन सब पर स्टीरियाटेाइपड किए जाते है। अर्थात सभी जर्मन इन छवियों से स्टीरियाटेाइपड है।

(iii) बीयर मडैने स्टीरियोटाइप (Beer Maidenstereotype):- इन्हें बवेरियन के सब सैट (Subset) के रूप में चित्रित किया जाता है। बीयर मैडने स महिलाओं को सुन्दर, आकषर्क , मजबतू व स्वस्थ महिलाओं के रूप में दिखाया जाता हे जो भरूे और हल्के पीले रगं के बाल रखती हे तथा उनके सुडा़ ले स्तन होते है और उनकी भुजाऐं एक दर्जन बियर (Beer) की बोतल को एक सात उठा सकती है। नाजी और आयर्न (Aryan) के अनुसार ये महिलाएँ पुरुषों की तरह लेबर करने में सक्षम है, परन्तु इनमें एक सुन्दरनारीत्व भी है तथायेनई पीढी़ को जन्म देती है।ये महिलाएँयाद्धैा के रूप में चित्रित की जाती है।

(iv) रिसन्ेट एण्ड अदर स्टीियाटेटेाइपस (Recentand Otherstereotypes):- ब्रिटने में दूसरे विश्वयद्धु के बाद जर्मननागरिक की एक अलग छवि बनी। इस स्टीरियाटेाइप लाके प्रियता से जर्मन के प्रयर्टकों पर चित्रित किया गया किये प्रभावपूर्ण, शान्त, इज्जत देने व करने वाले है, परन्तुयुद्ध का जिक्र आते हीये बेचैन (Nervous) हो जाते है। इस स्टीरियोटाइप के माध्यम से जर्मनस को अपराध बोध (guilt) महसूस करते दिखाया गया। इससे अतिरिक्त जर्मनस को आम तौर पर यद्धुात्त्ेाजे क के रूप मे पिकल हुब (Pickel haube) पहनने वाले तथा जिद्दी वैज्ञानिक (Madscientists) जो नए-नए प्रयोग करता हे के रूप में चित्रित किया जाता है जो प्रयागे लाभदायक की बजाए हानिकारक भी हो सकते है। जर्मनस को मजबूत व स्वस्थ दिखाया जाता है तथा इन्हें आपेरा संगीतकार (Operasingers) के राले में दर्शाया जाता है।

18. इटालियन स्टीरियोटाइप (Italianstereotypes):- इन्हें अक्सर माफिया के रूप म,ें पास्ता और टमाटर के व्यजंन बनाने वाले ककु के रूप में चित्रित किया जाता है। इन्हें अपनी मा ँ के प्रति समर्पित, चुस्त तथा अपराधी के रूप में भी दर्शाया जाता है।ये अक्सर अपनी बातचीत में “a” का प्रयागे क्रिया के पीछे लगाकर करते हुए दिखाए जाते है। इटालियन को बहुत ज्यादा आकर्षित और मर्दो की तरह दिखाया जाता है। आमतौर पर इटालियन के लिए Sexbomb को नाम की सज्ञां की तरह पय्रागे किया जाता है। इटालियन मर्दो को फिल्मों में एक अच्छे प्रमे ी के रूप में चित्रित किया जाता है।

19. स्वीडिश स्टीरियोटाइप (Swedishstereotypes):- इन लोगों को अक्सर सैक्स मैड (Sex Mad) और अत्यधिक मजाक करने वाला तथा हल्के रगं की सफेद त्वचा (Palewhiteskin),नीली आँखों और हल्के भरूे पीले बालों वाला दिखाया जाता है। इन्हें एक सुन्दर शरीर के साथ बहुत आकषर्क दर्शाया जाता है। इन्हें मजाक करते हुए ऊँची आवाज से बोलते हुए चित्रित किया जाता है। स्वेदिश लोगों को रगं से भरे लकडी़ के घरों में (जो बिल्कलु चमकते हुए होते है, जिनके आस-पास पाईन (Pine) के वृक्षों का जगंल होता है) रहते हुए दिखाया जाता है।

20. पैनीश, हिसपैैनिक, लैटीनो- मिडल और साऊथ अमेरिकन स्टीरियोटाइप स (Panish, Hispanic, Latino-Middleandsouthamerican Stereotypes):- इन्हें अक्सर गर्म मिजाज, घमण्डी, आलसी और दिन में कुछ समय आराम करने की आदत वाला दिखाया जाता है।ये लोग कठिन व जटिल कार्य करने वाले चित्रित किए जाते है,ये कार्य चाहे समूह में करते है या फिर अकलेंये अपनी प्रेमिका के लिए (Serenade) गाते है। इनके अतिरिक्त इन्हें बैलों की लडा़ई का खले दख्ेाने वाला, ऑलीव और गर्म खाने के शौकीन दिखाया जाता है।येजतवदह स्पुनवत का प्रयोग अधिक करते है। और तों को आमतौर पर खुले वस्त्र पहने हुए तथा लम्बे बालों वाली सुन्दरी के रूप में दिखाया जाता है।

21. ईस्टर्नयूरोपियन और रशियन स्टीरियोटाइप (Eastern Europeanand Russianstereotypes):- इन्हें अक्सर कठोर स्वभाव का, बहुत साधारण, नाखुश रहने वाला और वर्कर टाइप जिसका सामाजिक स्तरनीचा हो, के रूप में दिखाया जाता है। कभी-कभी इन्हें स्टयू (Stew), गौलस (Goulash), योगेहर्ट (Yoghurt) पपरिका (Paprika) बनाते हुए एक बावर्ची दिखाया जाता है। जबये अपनी शराब खत्म कर लेते हे तो इन्हें गिलास फेंक कर उसे ताड त़े हुए दर्शाया जाता है। इनको अक्सर एक जासूसी पुलिस वाले के रोल में जो राजनीतिक, मिल्ट्री तथा व्यवसायिक गापेनीयता का पता लगाते है,ये चित्रण शीतयद्धु के समय से शुरु हुआ है। इन्हें अक्सर रामेानिया में रहते हुए दर्शाया जाता है। पुरुषों को तजे चिल्लाते हुए और स्त्रियों को भी उनकी नारीत्व की छवि से थाडेा़ हटकर गुस्से भरी महिला के रूप में दर्शाया जाता है। ईस्टयूरोपियन और रशियन का स्टीरियोटिपिकल चित्रण होता है कि वे अच्छे बैल्ट डांसर (Ballet Dancer ) और वॉयलनीसट्स (Violinists) है।

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