स्थानीय इतिहास क्या है?

अनुक्रम

स्थानीय इतिहास अतीत को आमतौर पर ‘ऐतिहासिक-लेखन की विशिष्ट धारा जो भौगोलिक रूप में लघु क्षेत्र पर केन्द्रित, अव्यावसायिक इतिहास अतीतकारों द्वारा, अशैक्षिक श्रोताओं के लिए लगातार लिखा जाने वाला और उन पर केन्द्रित इतिहास अतीत माना जाता है।’ पश्चिमी देशों में, विशेष रूप से ब्रिटेन में, फ्रांस और अमेरिका में, स्थानीय इतिहास अतीत 18वीं (अठारहवीं) और 19वीं (उन्नीसवीं) शताब्दी में स्थानीय अभिजात्यों द्वारा लिखे गए। उन्नीसवीं शताब्दी में, इस प्रक्रिया ने जोर पकड़ा और कई संस्थाएँ स्थानीय इतिहास अतीत पर काम करने के लिए बनी। शहरीकरण, औद्योगीकरण और प्रव्रजन (स्थानांतरण) के प्रभाव में स्थानीय समुदाय अस्थिर हो गए और पहचान की समस्या उभर आई। इसका प्रभाव यह हुआ कि स्थानीय पढ़े-लिखे लोगों ने इस पर ध्यान दिया और उन लोगों में एक अभिलाषा उत्पन्न हुई। उन्होंने सोचा कि क्यों न हम स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर अपने इतिहास अतीत को अंकित करें। 1860 ई. से आगे, कई इतिहास अतीत समूह उभरकर सामने आए जो अपने क्षेत्र के अध्ययन को आगे बढ़ाने के लिए रुचि रखने लगे। उनका कार्य अतीत के कई पक्षों को समाहित करता था-

अभिलेखीय महत्त्व के अज्ञात स्थानों में स्थानीय चर्चों के इतिहास अतीत से लेकर पुरानी कुल्हाड़ी की खोज तक। वंश परंपरा का अध्ययन और पारिवारिक इतिहास अतीत जैसे कुछ दूसरे रुचि के क्षेत्र स्थानीय इतिहास अतीत में थे। अमेरिका में उन्नीसवीं शताब्दी विशेष रूप से स्थानीय इतिहास अतीत का काल या स्थानीय अभिजात्यों के संरक्षण में जो अपनी सामाजिक स्थिति को बनाए रखने या उसे बढ़ाने में रुचि रखते थे। यह इतिहास अतीत विशिष्ट क्षेत्र की स्थापना को अंकित किया। इसमें प्रारंभिक राजनीतिज्ञों की सूची और जीवन स्थानीय प्रमुखों का इतिहास अतीत आदि भी अंकित किया गया। स्थानीय इतिहास अतीत एक नौसिखिए प्रयास के रूप में शुरू हुआ स्थानीयता और समुदायिकता को गौरवान्वित करने के लिए और अभी भी यह प्रवृत्ति मौजूद है।

‘स्थानीय इतिहास अतीत’ के नाम से यह शब्द लगातार पुरातत्ववाद और शौकिया इतिहास अतीत-लेखन के साथ जुड़ा हुआ है। फिर भी 1930 ई. से, इस क्षेत्र में कुछ व्यवसायीकरण आया था। आगे के दो दशकों में कई पुस्तकें लिखी गई जो स्थानीय क्षेत्रों पर केन्द्रित थीं और पेशेवर उपलब्धि के क्षेत्र में किसी भी राष्ट्रीय इतिहास अतीत के समकक्ष मानी जाती थीं।

लिखी गई कुछ पुस्तकों के नाम:

  • ए. एच. डॉड का ‘इंडस्ट्रीज रिवोल्युशन इन नोर्थ वेल्स (1933)*
  • डब्ल्यू. एच. चलनर का ‘दि सोशल एंड इकोनोमिक डेवेलेपमेंट ऑफ क्रियू (1780– 1923)* (1950)
  • डब्ल्यू. जी. हास्किन का ‘क्लासिक दि मेकिंग ऑफ दि इंग्लिश लैंडस्केप (1955)’
  • जे. डी. मार्शल का ‘पुर्नेस एण्ड दी इंडस्ट्रीज रिवोल्युशन (1958)।’

जिन्होंने ब्रिटेन में स्थानीय इतिहास अतीत को आंदोलित कर दिया। स्वेडन में जार्न हर्सेन का ओस्टरलेन (1952) फ्रांस में गी चूलर का कार्य और अमेरिकन मिडवेस्ट पर जोसेफ अमेरों का कार्य ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया और स्थानीय इतिहास अतीत को पेशावर बनाने में योगदान दिया।

1947 में ब्रिटेन के लिसेस्टर में स्थानीय इतिहास अतीत विभाग स्थापित करके इस परंपरा को शैक्षिक आकार दिया गया। यहाँ शैक्षिक स्थानीय इतिहास अतीत का अभी भी विकसित दृष्टिकोण प्रभावी है जिसे ‘लिसेस्टर स्कूल’ के नाम से जाना जाता है। एच.पी.आर पिनबर्ग ने 1952 में अपने ‘उद्देश्य कथन’ में इस ‘स्कूल’ के उद्देश्य के बारे में कहा था: विभाग का प्राथमिक उद्देश्य होगा अपने मस्तिष्क को पोषित करना और उनके मस्तिष्क को जो हमारे निर्देशन की तरफ देखेंगे, स्थानीय इतिहास अतीत के तार्किक संकल्पना के लिए, ऐसा प्रदर्शन एक स्तर बनाएगा जिसके द्वारा हमारा अपना काम और दूसरों का काम भी जाँचा जा सकेगा।

फिनबर्ग और हास्किन्स, दो महत्त्वपूर्ण इतिहास अतीतकारों ने जो इस स्कूल से जुड़े थे, कई अवसरों पर परंपरागत स्थानीय इतिहास अतीत की आलोचना की। जॉर्ज और यातीना शोरन के अनुसार:

विचारधारा के अनुसार, फिनबर्ग और हास्किन्स अभिजात्यवादी और रूढ़िवादी सिद्धांत के विरोधी थे जिन्होंने परंपरा स्थानीय इतिहास अतीत की आधारशिला रखी जिसमें उन्होंने सामंतवादी परिवारों के इतिहास अतीत पर अधिक ध्यान का और सामान्य व्यक्ति की उपेक्षा का भी विरोध किया था। सिद्धांत रूप से, उन्होंने पुरातनवाद, तथ्य संग्रहण पद्धति, अनुदेश और पद्धति की कमी, और दस्तावेजी स्रोतों पर अधिक निर्भरता का विरोध किया जो स्थानीय इतिहास अतीत को एक विषय के रूप में स्थापित करने का काम करेगा….।

परंपरागत स्थानीय इतिहास अतीत में इस असंगतता को दूर करने के लिए, फिनबर्ग ने सुझाया कि स्थानीय इतिहास अतीतकारों का काम होना चाहिए ‘स्थानीय मनुष्य की उत्पत्ति, विकास, उत्थान और पतन को अपने मस्तिष्क में पुनर्रचित करना और अपने पाठकों के लिए प्रस्तुत करना।’ फिर भी फिनबर्ग और हास्किन्स ने यह परिभाषित नहीं किया कि ‘स्थानीय समुदाय’ का क्या संघटित करता है। ये इसके अस्तित्व को एक प्रमाण रूप में लेते हैं और इसके आकार को ‘लघु क्षेत्र से स्थानीय क्षेत्र के क्रम में।’ लिसेस्टर में उनके उत्तरािध्कारी, सी. फियियन एडम्स ने अपनी पुस्तक रोधकिग इंग्लिश लोकल हिस्ट्री (1987), में एक क्षेत्र को रूपरेखा के रूप में चित्रित किया।

लिसेस्टर स्कूल का मुख्य अभिलक्षण दृढ़निश्चयी आनुभविक अनुसंधान और क्षेत्रकार्य पूर्व औद्योगिक काल पर केंद्रित सामान्य व्यक्ति की श्रेष्ठता और समुदाय की संकल्पना के रूप में वर्णित किया जा सकता है। एशिया और अफ्रीका में स्थानीय इतिहास अतीत की प्रकृति अलग है। यहाँ पारंपरिक रूप मुख्य रूप से मौखिक परंपरा से संबंधित है। शाही वंश और युद्ध में उनकी उपलिब्ध्याँ इस परंपरा के मुख्य विषय हैं। इन इतिहास अतीतों के कुछ भाग लिखित रूप में भी थे किंतु मौखिक रूप प्रस्तुतीकरण की प्रभावी पद्धतियाँ थीं। भारत में, बखार (महाराष्ट्र में) रासों (राजस्थान में) और वंशावली (दक्षिण भारत में) कुछ ऐसे तरीके थे जिनमें स्थानीय पारंपरिक इतिहास अतीत प्रस्तुत किया गया। वे वंश इतिहास अतीत और इतिवृत है जो शाही परिवार के इतिहास अतीत को कहती है और युद्ध में सैनिकों की उपलिब्ध्यों का बखान करती है। अफ्रीका देशों में भी यह परंपरा मिथ और कथा के माध्यम से, नाटकीय अभिनय से, और अधिक औपचारिक कथाओं के माध्यम से बची रही है।

अक्सेल हर्निट सीवर्स एक संपादित पुस्तक के प्लेस इन दि वल्र्ड : न्यू लोकल हिस्टोरियोग्राफीज फ्रॉम अफ्रीका एंड साउथ एशिया (2002) की भूमिका में अपनी टिप्पणी देते है-

बहुत सारे दक्षिणी एशियाई और अफ्रीका समाजों में कुछ व्यक्ति या समूह सामान्य रूप से ऐतिहासिक ज्ञान को बढ़ाने वाले पारंपरिक विशेषज्ञ माने जाते हैं। इसको कार्यान्वित करने के कई औपचारिक तरीके हैं। एक जगह किसी गाँव में एक वृद्ध व्यक्ति हो सकता है, समुदाय में उसे स्थानीय इतिहास अतीत पर सबसे अधिक ज्ञान वाला व्यक्ति माना जा सकता है। दूसरे स्थानों पर, जैसे माली में विशेष रूप से प्रशिक्षित लोग एक व्यावसायिक इतिहास अतीतकार के रूप में कार्य करते हैं, या यहाँ तक कि इतिहास अतीत को सँजोने वाले सरकारी वैध्ता प्राप्त और शाही वंश परंपरा के इतिहास अतीतकार, जैसे इेसेखुरे और इहोम्बे शीर्षकधरी नाईजेरिया के बेविन के उबा राजदरबार में।

पश्चिमी शिक्षा पद्धति के आने और उपनिवेशीय प्रभुत्व से, एशिया और अफ्रीका में नए अभिजात्य वर्ग पनपने शुरू हो गए। उनके सोचने की पद्धति पश्चिमी शिक्षा से प्रभावित थी। 19वीं शताब्दी में भारत ने विश्वविद्यालय पद्धति की स्थापना और 1940 ई. के दौरान अफ्रीका में इसकी स्थापना से ऐतिहासिक ज्ञान औपचारिक शिक्षा के क्षेत्र में आया। फिर भी बहुत सारा इतिहास अतीत-लेखन अभी भी विश्वविद्यालय पद्धति के बाहर लिखा गया। स्थानीय इतिहास अतीत विशेष रूप से नौसिखियों के लिए और अशैक्षिक इतिहास अतीतकारों के लिए आकर्षक क्षेत्र था जो अपने समुदाय और स्थानीय क्षेत्र के अतीत के बारे में रुचि अनुभव करते थे।बहुत सारे यह इतिहास अतीतकार उसी समुदाय और स्थानों में जन्मे और पले-बढ़े थे जिस पर वे लिखते थे और इनमें से काफी लोग औपचारिक शिक्षा क्षेत्र के बाहर अव्यावसायिक इतिहास अतीतकार थे। यह भी सत्य है कि कुछ स्थानीय इतिहास अतीत विश्वविद्यालयों में भी लिखे गए। फिर भी, इसका अधिकांश भाग विश्वविद्यालय के बाहर के लोगों द्वारा लिखा गया। हनोर्ट-सिवर्स इन लेखनों को ‘नये स्थानीय इतिहास अतीत’ की संज्ञा देते हैं।

पारंपरिक स्थानीय इतिहास अतीत जो मौखिक था, की तुलना में नए-स्थानीय इतिहास अतीत लिखे और प्रकाशित किए गए। इसके अतिरिक्त, अतीत का हवाला देकर वृहद् संदर्भ में वे स्थानीय पहचान के पुनर्निर्माण के प्रयास थे-और जो प्रारूप में स्थानीय उद्देश्य और आवश्यकता के अनुसार आधुनिक इतिहास अतीत-लेखन का उपयोग करते थे। वे स्थानीयता के बारे में ज्ञान-प्रदान करने के उद्देश्य से और स्थानीय जागरूकता को बढ़ाने के उद्देश्य से लिखे गए। वे वृद्ध दुनिया के समक्ष स्थानीयता को सम्मान दिलाने की इच्छा रखते हैं और इसका नाम सबको मालूम कराना चाहते हैं।

स्थानीय इतिहास अतीत अक्सर स्थानीय ऐतिहासिक समाज या समूहों की एक स्थानीय ऐतिहासिक इमारत या अन्य ऐतिहासिक स्थल की रक्षा के रूप में प्रलेखित है। यह स्थानीय इतिहास अतीत के कई काम करता है शौकिया या स्वतंत्र रूप से विभिन्न संगठनों द्वारा नियोजित पुरालेखपाल काम इतिहास अतीतकारों द्वारा संकलित है। स्थानीय इतिहास अतीत इसका एक महत्त्वपूर्ण पहलू है और जो विशेष क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय या राष्ट्रीय रिकॉर्ड में संरक्षित दस्तावेजों के प्रकाशन सूचीबद्ध है। स्थानीय इतिहास अतीत अन्य प्रकार से भी दस्तावेज की तुलना में कम-से-कम एक देश या महाद्वीप की फस्तकें और कलाकृतियों के साथ हो जाता है। कई स्थानीय इतिहास अतीत मौखिक कहानियों या कहानियों के रूप में दर्ज कर रहे हैं, और तो और अधिक अच्छी तरह से ज्ञात मुद्दों की तुलना में कमजोर हैं। स्थानीय इतिहास अतीत की कलाकृतियाँ अक्सर स्थानीय इतिहास अतीत संग्रहालय, जो एक प्रोत्साहिक घर या अन्य इमारत में रखे जा सकते हैं, इसमें एकत्र कर रहे हैं, व्यक्तिगत ऐतिहासिक स्थलों को स्वाभाविक स्थानीय कर रहे हैं हालांकि वे राष्ट्रीय या दुनिया के इतिहास अतीत के महत्त्व के रूप में अच्छी तरह से हो सकता है।

यपाुनाइटेड किंगडम में स्थानीय इतिहास अतीत के लिए ब्रिटिश एसोसिएशन को प्रोत्साहित करती है और एक अकादमिक अनुशासन के रूप में और दोनों व्यक्तियों तथा समूहों द्वारा एक अवकाश गतिविधि के रूप में स्थानीय इतिहास अतीत के अध्ययन में मदद करता है। ब्रिटेन में स्थानीय इतिहास अतीत को एक लम्बा समय लगा। अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी में, एक अकादमिक अनुशासन के रूप में स्वीकार किया है। व्यापक रूप से एक पुरातात्विक पिछड़ा देश पारसंस के लिए उपयुक्त माना जाता था। परियोजना लंदन के विश्वविद्यालय में ऐतिहासिक अनुसंधान संस्थान द्वारा समन्वित है।

स्थानीय इतिहास अतीत के लिए विश्वविद्यालयों के भीतर एक अकादमिक विषय के रूप में उपेक्षित किया जा रहा है। अकसर शैक्षणिक स्थानीय इतिहास अतीतकार इतिहास अतीत के एक अधिक सामान्य विभाग के भीतर या सतत् शिक्षा में पाए जाते हैं। स्थानीय इतिहास अतीत शायद ही कभी ब्रिटिश स्कूलों में एक अलग विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है। 1908 में शिक्षा परिपत्र के एक वार्ड से आग्रह किया था कि स्कूलों पर ध्यान दें जिसमें वह स्थित हैं। शहर और जिले के इतिहास अतीत के लिए भुगतान करना चाहिए। 1952 में शिक्षा मंत्रालय को सुझाव दिया कि स्कूलों की स्थानीय सामग्री का उपयोग करने के लिए राष्ट्रीय विषयों का उदाहरण देकर स्पष्ट करना चाहिए। मौजूदा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या के भीतर 4 स्तर पर विद्यार्थियों से स्थानीय, राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय इतिहास अतीत के ज्ञान व समझ दिखाने की उम्मीद कर रहे हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका में, स्थानीय इतिहास अतीत आमतौर पर एक विशेष गाँव या बस्ती की जगह और लोगों के किसी भी इतिहास अतीत पर केंद्रित है। संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थानीय इतिहास अतीत नेटवर्क (ALHN) स्वतंत्र वंश और ऐतिहासिक संसाधनों तक पहुँचने के लिए एक ध्यान केन्द्र प्रदान करता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में, 79000 ऐतिहासिक स्थलों में ऐतिहासिक स्थानों के राष्ट्रीय रजिस्टर पर लिस्टिंग के रूप में पहचाने जाते हैं। स्थानीय इतिहास अतीत को एक नए रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका में विभिन्न शहरी पड़ोस में परियोजनाओं यदि यह सदन बात कर सकते है। के आंदोलन हैं। इन छोटे पैमानों पर स्थानीय रूप से उत्पन्न इतिहास अतीत की घटनाओं से इतिहास अतीत में एक ब्याज प्रोत्साहित करते हैं और आम जनता द्वारा खुले समाप्त भागीदारी के लिए प्रदान, हालांकि, वहाँ कोई पुनरीक्षण या तथ्यात्मक सबूत प्रस्तुत नहीं किया है कि तीसरे पक्ष की समीक्षा है, और इस तरह की प्रस्तुतियों में पेशेवर तीसरे पक्ष के इतिहास अतीत संगठनों द्वारा निरीक्षण की आवश्यकता होती है।

नया स्थानीय इतिहास अतीत पूरी तरह से परंपरा से कटा नहीं है। वह स्थानीय मौखिक और दूसरे प्राथमिक स्रोतो का प्रयोग करते हैं और स्थानीय समुदायों की निरंतरता को बनाए रखना चाहते हैं। यह सत्य है कि वह मौखिक परंपरा के बरअक्स लिखित शब्द की शक्ति बरकरार रखते हैं। फिर भी वह पुराने इतिहास अतीत के प्रति विरोधात्मक भाव नहीं रखते हैं और संबंधित समुदाय उन्हें स्थानीय गर्व की वस्तु समझते हैं। नए स्थानीय इतिहास अतीतकार, अपनी ओर से स्वयं के कामों को पुराने इतिहास अतीत के प्रति एक खतरा नहीं मानते, अपितु एक उद्देश्य मानते हैं जो इस पुराने ऐतिहासिक ज्ञान को शहरीकरण के खतरे, औपचारिक शिक्षा के खतरे, या युद्ध तथा विस्थापन के खतरे से इसकी रक्षा करता है। इतिहास अतीत को पूरे विश्व में समुदाय की ‘रचना’ और ‘कल्पना’ के काम में एक औज़ार के रूप में प्रयोग किया गया है।

एशिया और अफ्रीका ने नए स्थानीय इतिहास अतीत में सामान्य अतीत के संदर्भ में समुदाय और स्थानीयता की पहचान को पुनर्रचित करने का काम किया है। राष्ट्र की सीमा के अंतर्गत नए समुदाय ‘आधुनिक समुदाय’ बन गए हैं जो, अर्जुन अप्पादपाुराई के शब्दों में, मिश्रित घटना-क्रिया विज्ञान की गुणवत्ता, सामाजिक तात्कालिकता के अर्थ में, तकनीकी अंतक्रिया और संदर्भ के सापेक्षता के बीच संबंध के संघटन से निर्मित प्रक्रिया के अंग हैं। बदलता वातावरण, अंतर-क्षेत्रीय स्थानांतरण और लंबी दूरी की संप्रेषणीयता ने एक ऐसी अवस्था निर्मित की है जहाँ स्थानीय समुदाय के सदस्य भौतिक या भावात्मक रूप से किसी विशिष्ट स्थानीयता के साथ अधिक समय तक बँधे नहीं हैं। नए स्थानीय इतिहास अतीत ने इस बदले हुए वातावरण के लेखन की कोशिश की है और जैसा कि हर्नीट सीवर्स ने भी कहा है:

नया स्थानीय इतिहास अतीत समुदाय के बाहरी अंतक्रिया की जटिलता को कम करने का प्रयास करता है। यह स्थान विशेष की एक पारम्परिक, स्वपूरित और समांगीय छवि प्रस्तुत करता है। वह ऐतिहासिकता पर बल दे सकते हैं और बदलाव पर भी, वृहद संदर्भ के महत्त्व के भाग होकर भी स्थानीय गर्व के मामले में और आधुनिकता के सूचक के रूप में भी। ऐसे इतिहास अतीत दो अतिवादी दृष्टिकोणों के बीच झूलते हैं। ‘स्थानीय’ और वृहद विश्व के बीच तनाव रहता है-अधिक या कम सुस्पष्ट रूपों में सामान्यत: प्रत्येक नए स्थानीय इतिहास अतीत में। अफ्रीका और एशिया में नए स्थानीय इतिहास अतीत स्थानीयता को कई तरीकों से रचते हैं। जिन तरीकों का हवाला देकर वे स्थानीयता को प्रस्तुत करते हैं वे इस प्रकार हैं:

  1. सामान्य पूर्वज
  2. सामान्य संस्कृति
  3. प्राचीन राजत्व
  4. नातेदारी संबंध् और धर्मिक
  5. सांस्कृतिक
  6. राजनीतिक

एक नैतिक समुदाय के रूप में जो एक सामान्य मूल्य-पद्धति में भागीदार हैं। यह कार्य स्थानीय परंपरा और आधुनिक शैक्षिक इतिहास अतीत-लेखन के स्वीकृत मिश्रण से किया जाता है। एशिया और अफ्रीका में नए स्थानीय इतिहास अतीत का लेखन अधिकतर पश्चिमी शोध-पद्धति और सामग्री प्रस्तुतीकरण से प्रभावित है। ये इतिहास अतीतकाल क्रमबद्ध हैं और इनमें स्रोतों के वृहद् पैमाने पर संदर्भ हैं। इसके अतिरिक्त, वे सामान्यत: एक विकासवादी दृष्टिकोण में माने जाते हैं। परिकल्पनाकरण धार्मिक या मिथकीय शब्दों में नहीं है अपितु आधुनिक धर्मनिरपेक्ष शब्दों में है। फिर भी, विषय-वस्तु को, वे मुख्य रूप से पारंपरिक लिखित और मौखिक स्रोतों से निष्पादित करते हैं और उनके स्रोतों का प्रयोग सामान्यत: अतार्किक है।

वे कभी-कभी काल के रेखीय अर्थ को ग्रहण करते हैं पश्चिमी मॉडल के समान, लेकिन वे हमेशा अपनी वर्णित कथा के मूल में मिथकीय और पारंपरिक नायकों को शामिल करते हैं जिनका जीवन और कार्य किसी भी कालक्रम में सही नहीं बैठ सकता और जिसको प्रमाणित नहीं किया जा सकता यद्यपि इन इतिहास अतीतों का रूप पश्चिमी संकल्पना और पद्धति से मेल खा सकता है। इन इतिहास अतीतों के पाठक राष्ट्रीय और स्थानीय दोनों हैं या इससे भी दूर तक पैफले हैं। चूँकि ये लिखे और प्रकाशित किए जाते हैं और आधुनिक प्रस्तुतीकरण पद्धति का प्रयोग करते हैं। उनकी पहुँच स्थानीयता के आगे हैं।

फिर भी, वह स्थानीयता और इसकी परंपरा से संबंध् रखते हैं। इसके अतिरिक्त, ये स्थानीय इतिहास अतीत सामान्य शैक्षिक पाठ नहीं है। वे स्थानीय गर्व के निर्धरक के रूप में भी काम करते हैं और सामुदायिक तथा स्थानीय पहचान की भावना प्रदान करते हैं। अफ्रीका और एशिया में नए स्थानीय इतिहास अतीत, इसलिए दो स्तरों पर काम करते हैं-स्थानीय और स्थानीयता से परे। उनके लेखक सामान्य तौर पर आधुनिक शिक्षा पद्धति को ग्रहण करते हैं जो स्थानीय समाज से अलग भी हो सकती है।

उसी समय उनका काम स्थानीय परंपराओं से निष्पादित होता है और सीधे तौर पर स्थानीय बहस में भाग लेता है। यहाँ तक कि ये इतिहास अतीत अतीत को पारंपरिक रूप से प्रस्तुत करने को चपाुनौती देती हैं, वे स्थानीय परंपरा के आधार पर फलते-फूलते हैं और आवश्यक रूप से इन्हें हटाते नहीं हैं।

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