साइबर क्राइम क्या है (What is cyber crime)?

साइबर क्राइम क्या है (What is cyber crime)?

साधारण भाषा में हम समझना चाहें तो साइबर क्राइम का अर्थ होता है, कम्प्यूटर जनित अपराध । हम यह भी कह सकते हैं कि कम्प्यूटर और इंटरनेट से जुडे़ क्राइम (अपराध) को ही साइबर क्राइम कहा जाता है। ऐसा कोई भी अपराध जिसमें कम्प्यूटर इंटरनेट नेटवर्क एवं हार्डवेयर तथा उससे संबंधित उपकरणों यथा स्कैनर, प्रिंटर, आदि का उपयोग किया गया हो, साइबर क्राइम कहलाता हैं। साइबर क्राइम वह अवैधानिक कार्य है जिसमे कम्प्यूटर या तो औजार की तरह या लक्ष्य की तरह प्रयोग होता है अथवा दोनो ही तरह से प्रयोग होता है।

यूरोपियन साइबर क्राइम ट्रीटी काउंसिल के अनुसार-: ‘‘साइबर क्राइम एक ऐसा अपराध है जो डेटा एवं कापीराइट के विरूद्ध की गयी आपराधिक गतिविधि है। 

कम्प्यूटर विज्ञानी जेवियर गीज के अनुसार-: साइबर क्राइम कम्प्यूटर और इन्टरनेट के माध्यम से होने वाला अपराध है। जिसके अन्तर्गत जालसाजी, अनाधिकृत प्रवेश, चाइल्ड पोनोग्राफी और साइबर स्टाकिंग शामिल है।’’  

संयुक्त राष्ट्र के कम्प्यूटर क्राइम कंट्रोल एण्ड प्रिवेंषन मेनुअल के अनुसार जालसाजी, ठगी और अनाधिकृत प्रवेश को ही साइबर क्राइम की परिभाषा में शामिल किया गया है।

साइबर क्रिमिनल समाज को तीन प्रकार से क्षतिकारित करते हैं-
  1. किसी व्यक्ति के विरूद्ध
  2. किसी संगठन के विरूद्ध
  3. संपूर्ण समाज के विरूद्ध।

1. व्यक्ति के विरूद्ध (Against the person)

इस प्रकार के साइबर अपराध में अपराधी किसी व्यक्ति को हानि कारित करता है। इस प्रकार उस व्यक्ति को हानि उसके आंकड़ों की चोरी करके, पासवर्ड की चोरी करके, एकाउन्ट से निजी संपित् की चोरी करके, उस व्यक्ति के इंटरनेट समय की चोरी करके, उस व्यक्ति से संबंधित अश्लील या आपित्तजनक या उसके निजी जिंदगी की गोपनीय सामग्री को प्रचारित-प्रसारित करके, बिना स्वीकृति के किसी व्यक्ति के निजी पत्र फोटो या फिल्म का प्रकाषन करके, किसी व्यक्ति के कम्प्यूटर पर कम्प्यूटर वायरय भेजकर उसके डाटा को नश्ट करना, किसी व्यक्ति के मौलिक लेख, शोध या सूत्र या सामग्री को नष्ट कर देना या उसमं हेराफेरी कर देगा, गंदे ई-मेल भेजना, आदि प्रकार से की जा सकती है। किसी व्यक्ति का पासवर्ड चोरी करके उसके बैंक खाते से मार्केटिंग कर लेना या जुएं मे पैसा लगा देगा या किसी दूसरे के क्रेडिट कार्ड का अवैध प्रयोग कर लेना साइबर क्रिमिनल द्वारा व्यक्ति के विरूद्ध किए गए अपराध की श्रेणी में आता है।

2.किसी संस्था या संगठन के विरुद्ध (Against any institution or organization)

इस प्रकार के अपराध सामान्य तौर पर किसी सरकारी प्रतिश्ठान, निजी संगठन, किसी कंपनी या किसी व्यक्तियों के समूह के विरूद्ध साइबर क्रिमिनल कारित करते है। ऐसे अपराधों की श्रैणी मे हैंकिग या क्रैकिंग (अर्थात कम्प्यूटर में भरे आंकडे को चोरी कर लेना या उस आंकडे को नष्ट कर देना, या अन्य गैर कानूनी तरीका से अनाधिकृत वैयाक्तिक सूचनाएं प्राप्त करना तथा उनका इस्तेमाल सरकार, सरकारी तंत्र या किसी संस्था के विरूद्ध करना आता है। इसके अतिरिक्त पाइरेटेड साफ्टवेयर का वितरण एवं कॉपीराइट कानूनों का उल्लंघन इसी श्रेणी में आता है।

3. संपूर्ण समाज के विरुद्ध (Against society as a whole)

साइबर क्रिमिनल द्वारा किए जाने वाले इस प्रकार के अपराध पूरे समाज को प्रभावित करते है। इस प्रकार के अपराधों मे अष्लील एवं नग्न चित्रों को बनाकर उसे नेट पर डाल देना ताकि वह प्रचारित हो जाय, पोनोंग्राफी (नग्न चित्रण विषेशकर बच्चां की पोनीग्राफी) तथा युवाओं की अष्लील सामग्री को प्रसारित करने अथवा ट्रैफिकिंग द्वारा दूशित वातावरण पैदा करने वाले अपराध आते हैं। इस प्रकार के अपराधी चर्चित हस्तियों, नायिकाओं, नेताओं, नायको के भी अष्लील न नग्न चित्रों को गोपनीय रूप से तलाष कर पचारित व प्रसारित कर देते हैं।

साइबर क्राइम सदैव तकनीक के जानकार व्यक्ति द्वारा ही किया जाता हैं। ऐसे अपराध ज्यादातर नजदीकी प्रतिद्वंदियों द्वारा किए जाते हैं। इंटरनेट व वल्र्ड वेब पर पडी किसी भी व्यक्ति की गुप्त सूचना या सम्पदा को उसके प्रतिद्वंद्वी द्वारा चोरी कर उसे मैनीपुलेट कर उसे प्रचारित-प्रसारित किया जाता हैं। उद्योग जगत मे भी इस प्रकार की प्रतिद्वंदिता चलती रहती ह। प्रतिद्वंदी सदैव अपनी समान कार्य करने वाली, समान उत्पादन करने वाली लोकप्रिय व लाभ में चल रही कंपनी की रणनीति या योजना, योजनाओं का विवरण, वित्तीय सूचनाओं को जानने की कोषिष करता रहता है और उसे चुराने के लिए हर प्रकार के हथकंडे अपनाता रहता है। और साइबर एक्सपटर््स की मदद लेता रहता है। साइबर विज्ञानी रिचर्ड पावर ने यह कहा भी हैं कि साइबर क्राइम में प्रतिद्वंदी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अंदा करते है।

विश्व का ऐसा कोई कोना नहीे है, जहां साइबर अपराधी न पाए जाते हों। ये साइबर क्रिमिनल शिक्षित व कम्प्यूटर तकनीकी में निपुण होते है। कुछ तो कम्प्यूटर को सीखते-सीखते कभी-कभी ऐसी साइट या ऐसे फाइल नेम या पासवर्ड को पा जाते है, और खेल-खेल मे अपराध कर डालते है उनका उद्देश्य मनोरंजन का होता है, परंतु वह अपराध की श्रेणी में आ जाता है। कुछ विशेषज्ञ प्रकृति के लोग जानबूझकर साइबर क्राइम करते है। कभी-कभी कंपनियों की व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता के चलते, कभी किसी कंपनी के असंश्तुट कर्मचारी और कभी जासूस प्रवृित्त के लोग संगठनों में घुसकर साइबर क्राइम करते है। संगठित हैकर्स एवं क्रैकर्स वास्तविक साइबर क्रिमिनल होते हैं इनकी प्रवृित्त नुकसान पहुंचाने, विनाश करने की होती हैं। ये हैकर्स एव क्रैकर्स इतने जानकार साइबर क्रिमिनल हैं कि ये अपनी तकनीकी जानकारी से कहर बरपा देते है। पूरे-पूरे संगठन के आंकड़ों को नष्ट-भ्रष्ट कर देते है, पूरे सिस्टम मे घातक वायरस भेजकर नेटवर्क जाम कर देते है। 

हैकर्स को एवं क्रैकर्स को कम्प्यूटर की दुनिया में साइबर टेरोरिस्ट की संज्ञा दी जाती हैं। साइबर हैकर्स एवं क्रैकर्स अपने राजनीतिक उद्देष्यों के लिए अतंर्राश्ट्रीय स्तर पर प्रतिद्वंद्वी देशों मे से किसी एक देष से मिलकर दूसरे देष मे साइबर क्राइम करते है। भारत के प्रति पाकिस्तान मे काफी संख्या मे संगठित हैकर्स कार्यरत हैं। ये भारतीय साइट्स को निशाना बनाते है। ये इतने अधिक पेशेवर किस्म के उच्च तकनीकी कम्प्यूटर विषेशज्ञ हैं कि ये सारे सुरक्षा बंधनो के चक्रव्यूह को तोड़कर हमला कर देते है।

Comments