घरेलू हिंसा का अर्थ, परिभाषा, कारण एवं दुष्परिणाम

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घरेलू हिंसा की जड़े हमारे समाज तथा परिवार में गहराई तक जम गई है। इसे व्यवस्थागत समर्थन भी मिलता है। घरेलू हिंसा के खिलाफ यदि कोई महिला आवाज मुखर करती है तो इसका तात्पर्य होता है अपने समाज और परिवार में आमूल-चूल परिवर्तन की बात करना। प्राय: देखा जा रहा है कि घरेलू हिंसा के मामले दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं। परिवार तथा समाज के सम्बन्धो में ईर्ष्या, द्वेष, अहंकार अपमान तथा विद्रोह घरेलू हिंसा के मुख्य कारण है। परिवार में हिंसा का शिकार सिर्फ महिलायें ही नहीं बच्चे और वृद्ध भी बन जाते हैं। प्रकृति ने महिला और पुरुष की शारीरिक संरचनायें जिस तरह की है उसमें महिला हमेशा नाजुक और कमजोर रही है, वहीं हमारे देष में यह माना जाता रहा है कि पति को पत्नी पर हाथ उठाने का अधिकार शादी के बाद ही मिल जाता है। जिसका फायदा पुरुष वर्ग वर्षों से उठाता चला आ रहा है।

घरेलू हिंसा का अर्थ

घरेलू हिंसा की परिभाषा

पुलिस विभाग के अनुसार -’’महिला, वृद्ध अथवा बच्चों के साथ होने वाली किसी भी तरह की हिंसा अपराध की श्रेणी में आती है महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा के अधिकांश मामलों में दहेज प्रताड़ता तथा अकारण मारपीट प्रमुख हैं’’। 

राज्य महिला आयोग के अनुसार -’’कोई भी महिला यदि परिवार के पुरुष द्वारा की गयी मारपीट अथवा अन्य प्रताडना से तृष्ट है तो वह घरेलू हिंसा का षिकार कहलायगी। घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 उसमें घरेलू हिंसा के विरुद्ध संरक्षण और सहायता के अधिकार प्रदान करता है’’। 

आधारशिला एन0 जी0 ओ0 के अनुसार -’’परिवार में महिला तथा उसके अलावा किसी भी व्यक्ति के साथ मारपीट, धमकी देना तथा उत्पीड़न घरेलू हिंसा की श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा लैंगिक हिंसा, मौखिक और भावनात्मक हिंसा तथा आर्थिक हिंसा भी घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत अपराध की श्रेणी में आते हैं’’।

हिंसा होने के कारण

पालन-पोषण में पितृसत्तता अधिक महत्व रखती है इसलिये लड़की को कमजोर तथ लड़के को साहसी माना जाता है। लड़की के स्वतंत्र व्यक्तित्व को आरम्भ में ही कुचल दिया जाता है। सामान्यता घरेलू हिंसा के प्रमुख कारण समतावादी शिक्षा व्यवस्था का अभाव, महिला के चरित्र पर संदेह करना, शराब का लती होना , इलेक्ट्रानिक मीडिया का दुष्प्रभाव, महिला को स्वाबलम्बी बनने से रोकना आदि माने जाते हैं। परिवारों में हिंसा होने के बहुत से कारण होते हैं जिनमें से कुछ कारणों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 

घरेलू हिंसा का दुष्परिणाम

महिलाओं तथा बच्चों पर घरेलू हिंसा के शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक दुष्प्रभाव पड़ते हैं। इसके कारण महिलाओं के काम तथा निर्णय लेने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। परिवार में आपसी रिश्तों और आस-पड़ोस के साथ रिश्तों व बच्चों पर भी इस हिंसा का दुष्प्रभाव देखा जा सकता है।
  1. घरेलू हिंसा के कारण दहेज मृत्यु हत्या और आत्महत्या बढ़ी हैं। वैश्यावृत्ति की प्रवृत्ति भी इसी कारण बढ़ी है।
  2. महिला की सार्वजनकि भागीदारी में बाधा होती है। महिलाओं का कार्य क्षमता घटती है, साथ ही वह डरी-डरी भी रहती है। परिणामस्वरूप प्रताड़िता महिला रोगी बन जाती है जो कभी-कभी पागलपन की हद तक पहुँच जाती है।
  3. पीड़ित महिला की घर में द्वितीय श्रेणी की स्थिति स्थापित की जाती है।

घरेलू हिंसा रोकने के उपाय

घरेलू हिंसा को रोकने के लिये घरेलू हिंसा महिला संरक्षण अधिनियम 2006, पुलिस न्यायालय, एन0 जी0 ओ0, पारिवारिक अदालते, महिला आयोग आदि संगठन सक्रिय रूप से कार्यरत हैं इसके अतिरिक्त षिक्षा संस्थाओं में छात्राओं को घरेलू हिंसा की खुलकर षिक्षा देना, प्रत्येक थाने पर प्रतिमाह समस्या समाधान षिविर आयोजित किया जाना आदि कदम सरकार के द्वारा उठाये गये हैं जिससे घरेलू हिंसा को रोका जा सकता है।

शारीरिक एवं भावनात्मक हिंसा

शारीरिक हिंसा से तात्पर्य मारपीट करना, थप्पड़ मारना, ठोकर मारना, दांत से काटना, लात मारना, मुक्का मारना, ढकेलना तथा किसी अन्य रीति से शारीरिक पीड़ा या छति पहुँचाना आदि हैं। भावनात्मक हिंसा से तात्पर्य मौखिक रूप से किसी का अपमान करना, गालियाँ देना, चरित्र और आचरण पर दोषारोपण लगाना, पुत्र न होने पर अपमानित करना, नौकरी करने से निवारित करना, नौकरी छोड़ने के लिये दबाव डालना, घटनाओं के समय क्रम में किसी व्यक्ति से मिलने से रोकना, आत्म हत्या करने की धमकी देना तथा कोई अन्य मौखिक या भावनात्मक दुव्र्यवहार करना आादि हैं।

घरेलू हिंसा


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