साइबर अपराध क्या है?

अनुक्रम
साइबर अपराध

साइबर अपराध को सामान्यत: कम्प्यूटर/संचार युक्ति और इन्टरनेट से जुडे हुए अपराध के रूप मे माना जाता है। साइबर अपराध का तात्पर्य ऐसे अवैध कृत्य से है जिसमें कम्प्यूटर या तो संचार युक्ति या लक्ष्य के रूप मे प्रयोग किया जाता है, या दोनो रूपों मे प्रयोग किया जाता है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के कम्प्यूटर अपराध नियत्रंण और निवारण मैनअुल के अनुसार साइबर अपराध ऐसा अपराध है जिसमे ठगी, जालसाजी और अनाधिकृत प्रवेश सम्मिलित होता है। यूरोपियन साइबर अपराध संधि परिशद् के अनुसार साइबर अपराध ऐसा अपराध है जो डाटा तथा प्रतिलिप्याधिकार के विरूद्ध किया जाता है। आज के कम्प्यूटर युग मे जैसे-जैसे तकनीक का विकास होता जा रहा है, वैसे ही अपराध-जगत से जुडे हुए व्यक्ति भी उन तकनीकियों का अनुप्रयोग अपने काम को अन्जाम देने में कर रहे हैं। साइबर अपराध सूचना प्रौद्योगिकी अथवा इन्टरनेट से सम्बन्धित है। 
साइबर अपराध अब बडा़ व्यापक और जटिल अपराध का विशय हो गया हैं। साइबर अपराध ऐसा अपराध है, जिसमे अपराध करने के लिए कम्प्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है, इस तरह के अपराध मे कम्प्यूटर, मोबाइल फोन एक उपकरण अथवा लक्ष्य दोनो हो सकता हैं। इस तरह के अपराध किसी देष या काल की सीमा से बधें नहीं होते, बल्कि व्यापक होते हैं। साइबर अपराध किसी व्यक्ति अथवा उसकी व्यक्तिगत सम्पित्त अथवा पूरे समाज या सरकार या कोई फर्म, कम्पनी या लोगों के समूह के खिलाफ कारित किया जाता है। 

उदाहरणार्थ, किसी व्यक्ति के खिलाफ ई-मेल अथवा प्रताड़नापूर्ण संदेश भेजना। साइबर अपराध करने में कम्प्यूटर का प्रयोग मानहानि, आर्थिक जालसाजी, अश्लील चित्रो sms, mms E-mail आदि का भेजना, कम्प्यूटर पर अपनी अनधिकृत पहुंच बना लेने, गोपनीयता का अतिक्रमण करने, बौद्धिक सम्पदा से सम्बन्धित अपराध करने, इन्टरनेट पर व्यक्ति का चोरी-छिपे पीछा करने में किया जाता है। बहतायत रूप से कम्प्यूटर का अवैध इस्तेमाल कम्प्यूटर तक अनधिकृत पहुंच बनाने मे, सूचनाओं की चोरी करने, ई-मेल बाम्बिंग (जिसमे बड़ी संख्या मे ई-मेल संदेश) व्यथित व्यक्ति के ई-मेल खाते में भेजे जाते हैं। डाटा डिडलिंग, सलामी अटैक, लॉजिक बाम्ब, ट्रोजन अटैक, वेब जैकिंग अथवा कम्प्यूटर नेटवर्क को नकुसान पहुंचाने में कम्प्यूटर का प्रयोग होता है।

साइबर अपराध एक विष्वव्यापी आरै एक जटिल समस्या का रूप ले चुका है। यह टेक्नोलॉजी के क्रमिक विकास के साथ-साथ और विकसित तथा परिवर्तित होता जा रहा है। यह अपराध मौलिकत: दो रूपों मे है- कम्प्यूटर अथवा मोबाइल फोन से छेड़-छाड़ (धारा 43, 66) और कम्प्यूटर अथवा मोबाइल फोन अथवा डिजिटल सहायक (PDA) द्वारा किए जाने वाले अपराध (धारा 66-के से 66-च तक, 67, 67 -क से 67-ग तक)

साइबर अपराध का विकास

साधारणतया ‘‘साइबर क्राइम’’ का तात्पर्य ऐसे अपराध से है, जो कम्प्यूटर अथवा संचार युक्ति के माध्यम से किए जाते हैं। अत: साइबर क्राइम के विकास को जानने के लिए कम्प्यूटर के विकास को जानना आवश्यक है। सामान्यत: ‘‘एबाकस’’ को कम्प्यूटर का सबसे प्रारम्भिक रूप माना जाता है। जिसकी उत्पित्त् लगभग 3500 ई0पू0 मे मानी जाती है, तथा चार्ल्स बैवेज के द्वारा बनाए गए विष्लेशणात्मक इंजन को सामान्यत: आधुनिक कम्प्यूटर युग की शुरूआत माना जाता है। इसीलिए चाल्र्स बैवेज को आधुनिक कम्प्यूटर का पिता कहा जाता है। 

कम्प्यूटर की दुनिया में सबसे पहला अभिलिखित साइबर क्राइम सन् 1820 मे हुआ था जो जोसेफ मैरी जेकार्ड के कर्मचारियों की अपने मालिक द्वारा उनके बुनाई के कार्य की जांच करने के लिए प्रयुक्त की गयी नई तकनीक के प्रयोग को हतोत्साहित करने के लिए कारित किया गया था। वर्तमान समय मे साइबर क्राइम दिन-प्रतिदिन बढते जा रहे है, और अब साइबर क्राइम एक अन्तर्राश्ट्रीय समस्या बन गया है।

साइबर अपराध के प्रकार

साइबर अपराध निम्नलिखित प्रकार के होते हैं-

1. वित्तीय अपराध

सामान्यत: सभी अपराधों के पीछे अपराधी का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक धन कमाना है अर्थात् रातों रात अमीर बन जाने की चाहत ही सभी अपराधों की जड़ होती हैं। ठीक यही बात साइबर अपराध के सम्बन्ध में भी लागू होती है। आरै अधिक से अधिक साइबर अपराध अधिकाधिक धन वह भी शीघ्रातिशीघ्र समय में कमाने के आशय से ही किए जाते हैं। ऐसे अपराध सामान्यत: आनलाइन टे्रनिंग, इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग इत्यादि के माध्यम से किए जातें हैं। मनी लांड्रिंग, खाता से सम्बन्धित घोटालें, कम्प्यूटर हेराफेरी, बैक सेवाओं की हैकिंग, क्रेंडिट कार्ड सम्बन्धी कपट और साइबर चीटिंग इत्यादि अपराधों को वित्तीय अपराध के रूप मे माना जाता है। 

2. बौद्धिक सम्पदा अपराध

ऐसे अपराध जो बौद्धिक सम्पदा (जैसे कापीराइट, पेटेन्टराइट, डिजाइन इत्यादि) से सम्बन्धित होते हैं। प्रतिलिप्यााधिकार अतिलंघन, टे्रडमार्क उल्लंघन, पेटेन्ट अधिकार का उल्लंघन, साफ्टवेयर की चोरी और कम्प्यूटर स्रोत कोड की चोरी इत्यादि जैसे अपराधों को बौद्धिक संपदा अपराध के रूप मे माना जाता है।

3. साइबर मानहानि

जब कभी मानहानि का अपराध कम्प्यूटर आरै इन्टरनेट के माध्यम से किया जाता है तो इसे साइबर मानहानि के नाम से जाना जाता है। अष्लील फोटोग्राफ को वेबसाइट पर डालना, किसी लड़की या स्त्री की नग्न तस्वीर को वेबसाइट पर जारी करना, मानहानिकारक कथन को वेबसाइट पर जारी करना या ऐसे कथनों का ई-मेल जारी करना इत्यादि जैसे अपराधों को साइबर मानहानि के रूप मे माना जाता है।

4. साइबर कूटरचना

जब कूटरचना का अपराध कम्प्यूटर, प्रिंटर्स और स्कैनर्स के माध्यम से किया जाता है, तो इसे साइबर कूटरचना के नाम से जाना जाता है। कूटरचित करंसी नोट बनाना, कूटरचित डाक टिकट और स्टाम्प पेपर बनाना और कूटरचित अंकपत्र तथा प्रमाण -पत्र बनाना इत्यादि जैसे अपराधों को साइबर कूटरचना के नाम से जाना जाता है। 

5. आनलाइन जुआ

 यह ऐसा अपराध है जिसमे जुआ खेलने की सुविधा कम्प्यूटर की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाती है। इस अपराध के बढ़ने का मुख्य कारण यह है कि कई देष ऐसे है, जो अपने देष में जुआ खेलने को अपराध नहीं मानते है वरन् वैध मानते है। 

6. ई-मेल बमबाजी

ई-मेल बमबाजी ऐसा अपराध हैं, जिसमें किसी व्यक्ति के ई-मेल खाते में बहुत बड़ी संख्या में ई-मेल भेजा जाता है। जिससे कि उसका सम्पूर्ण खाता ध्वस्त हो जाए या किसी कम्पनी के ई-मेल खाते मे बहुत बड़ी संख्या मे मेल सर्वर भेजा जाता है। या किसी ई-मेल सेवा प्रदाता के ई-मेल खातें में बहुत बड़ी संख्या मे मेल सर्वर भेजा जाता हैं जिनका मुख्य उद्देश्य उस कम्पनी या ई-मेल सेवा प्रदाता के ई-मेल खाते को ध्वस्त करना होता है।

7. अवैध वस्तुओं का विक्रय 

इसमें ऐसी वस्तुओं का विक्रय इन्टरनेट आरै वेबसाइट के माध्यम से किया जाता है जिसका विक्रय सामान्यत: प्रतिबंधित होता है, जैसे प्रतिबंधित हथियारों की चोरी छुपे बिक्री, प्रतिबंधित वन्य जीव वस्तुओं का विक्रय, प्रतिबधित स्वापक औशधि और प्रतिबंधित मन:प्रभावी पदार्थ या प्रतिबंधित मादक द्रव्यों की बिक्री की जाती है। इसमें ऐसे पदार्थो की उपलब्धता की सूचना इन्टरनेट या वेबसाइट के माध्यम से दी जाती है। और उनका मूल्य आनलाइन तय किया जाता है। ये ऐसे साधन है जिनके माध्यम से इन अवैध पदार्थो की बिक्री को सुगम बनाया जाता है जिससे ऐसे पदार्थो की बिक्री को प्रोत्साहन मिले।

वर्तमान समय मे ऐसे अपराधों की व्यापकता, पुरी वेबसाइटों को समाप्त करना, नई वेबसाइटों को समाप्त करना इत्यादि बाते अपराध निवारक व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए एक चुनौती बन गयी है। 

8. ई-मेल स्पूफिंग

किसी व्यक्ति/संस्था की ई-मेल के माध्यम से ठगने का अपराध किया जाता है, तो इसे ई-मेल स्पूफिंग के नाम से जाना जाता है। इसमें जो ई-मेल जारी किया हुआ नही होता है बल्कि किसी अन्य स्रोत से जारी किया हुआ होता है। इसीलिए इसे ई-मेल स्पूफिंग कहा जाता है।

9. ट्रोजन्स

ट्रोजन एक अप्राधिकृत प्रोग्राम है जो इस तरह किया जाता है कि यह बिल्कुल प्राधिकृत जैसे लगे, अत: इसके माध्यम से वास्तविकता को छिपाते हुए उसे वास्तविक बनाने का प्रयास किया जाता है। जैसे किसी की नग्न तस्वीर को वास्तविक रूप मे प्रकाशित करना।

10. की -लागर्स 

यह ऐसा अपराध है जो किसी कम्प्यूटर की वेबसाइट पर से किया जाता है। यह तब किया जाता है, जब कोई व्यक्ति अपने कम्प्यटर का प्रयोग आन लाइन बैंकिंग या अन्य वित्तीय संव्यवहारों के सम्बन्ध मे करता है। इसके लिए जैसे ही वह की बोर्ड के माध्यम से सम्बन्धित साइट पर जाता है, और सम्बन्धित संव्यहार को सम्पन्न करने के लिए ज्यों ही वह की-बोर्ड पर स्ट्रोक मारता है, वैसे ही वह उसे सेव कर लेता है, और इसके माध्यम से जो भी धनराशि इन्टरनेट के माध्यम से भेजी जाती ह, उसको ये चोरी करके लाखो-करोडा़े का चूना लगा देते है। ऐसे अपराधों की संख्या दिनोदिन बढ़ती जा रही है। और सम्पूर्ण विश्व के लिए एक समस्या बनती जा रही है।

11. ई-मेल कपट

जब कपट का अपराध कम्प्यूटर या इन्टरनेट के माध्यम से किया जाता है। तो इसे ई-मेल कपट के नाम से जाना जाता है। इसमें सामान्यत: ई-मेल भेजकर कपट का अपराध कारित किया जाता है। ऐसे सैकड़ो घोटाले नाइजीरिया मे किए गए थे। नाइजीरिया में ऐसे घोटालों को नाइजीरियन 419 घोटालें के नाम से जाना जाता है। इसे नाइजीरिया 419 के होने का मुख्य कारण यह है कि जिस तरह भारत में भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा मे ‘‘छल’’ या ‘‘कपट’’ को परिभाशित किया गया है। ठीक उसी तरह नाइजीरिया दण्ड संहिता की धारा 419 में इसे परिभाषित किया गया है।

12. वेब जैकिंग

तरंग जैकिंग किसी वायुयान के हाइजैकिंग या अपहरण की तरह ही एक अपराध है। जिस तरह वायुयान के अपहरण के मामले मे बल प्रयोग के द्वारा किसी वायुयान का अपहरण कर लिया जाता है। ठीक उसी तरह साइबर अपराधी बलपूर्वक किसी वेबसाइट को अपने कब्जे मे ले लेता है। और जिस तरह वायुयान के अपहरण के मामले मे उसे मुक्त करने मे फिरौती की मांग की जाती है। ठीक उसी तरंग जैकिंग के मामले मे भी साइबर अपराधी सम्बंधित वेबसाइट को मुक्त करने हेतु फिरौती की मांग करते है।

अत: तरंग जैंकिग के अपराध का मुख्य उद्देष्य तो अधिकाधिक और शीघ्रतिशीघ्र धन कमाना होता है। परन्तु कभी-कभी वायुयान अपहरण की तरह इसका उद्देश्य राजनीतिक भी हो सकता ह। इसके लिए अपहर्ता सम्बन्धित वेबसाइट मे या तो तोड-फोड़ करके या उसे परिवर्तित करके बलपर्वूक कब्जा प्राप्त कर लेता है। ऐसी स्थिति मे सम्बन्धित वेबसाइट के स्वामी का उस वेबसाइट पर कोई नियंत्रण नहीे रहता है। उसे सम्बन्धित वेबसाइट का कब्जा तभी प्रदान किया जाता है जब वह फिरौती का धन प्रदत्त कर देता है।

13. सलामी आक्रमण

ऐसा आक्रमण सामान्यत: वित्तीय प्रयोजनों हेतु किया जाता है इसमें साइबर अपराधी का मुख्य उद्देश्य शीघ्रतिशीघ्र अधिकाधिक धन कमाना होता है। इसमें साइबर अपराधी धन कमाने हेतु किसी व्यक्ति के साफ्टवेयर प्रोग्राम मे ऐसी हेराफेरी करता है कि उस व्यक्ति को ऐसी हराफेरी का आभास ही नहीे पाता। जैसे-यदि किसी बैंक का कर्मचारी बैंक के सर्वर मे ऐसा प्रोग्राम डाल दे कि उस बैंक के प्रत्येक ग्राहक के खाते से कम 2 रू0 प्रति माह की कटातैी हो करके वह रकम उस व्यक्ति के खाते में जमा होती रहे तो ऐसी सूक्ष्म कटौटी का किसी ग्राहक को आभास भी नहीें होगा और उस कर्मचारी को सभी ग्राहको से कुल मिलाकर एक अच्छी-खासी रकम प्राप्त होती रहेगी। ऐसे आक्रमण को ‘सलामी आक्रमण’ नाम से जाना जाता है।

14. सेवा से इंकार आक्रमण

इस प्रकार के अपराध मे साइबर अपराधी किसी कम्प्यूटर की सामान्य क्षमता से अधिक मात्रा में निवेदन प्रवेष करा देना है। जिससे उस कम्प्यूटर में ओवरफ्लां की स्थिति पैदा हो जाती है जिससे कम्प्यूटर काम करना बन्द कर देता है। जिसके परिणामस्वरूप उस कम्प्यूटर के अधिकृत उपयोगकर्ताओं को यह सेवा भी नहीे प्राप्त हो पाती है जिसके वे हकदार है। इसीलिए इस अपराध को ‘सेवा का इंकार आक्रमण’ के नाम से जाना जाता है।

15. वायरस/वार्म आक्रमण

कम्प्यूटर वायरस सामान्यत: एक विशेष प्रकार का साफ्टवेयर प्रोग्राम है जो एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर पर जाने के लिए और उस दूसरे कम्प्यूटर मे बाधाकारित करने के लिए बनाया जाता है, ये वायरस किसी व्यक्ति के कम्प्यूटर से डाटा को बेकार कर सकते है, हटा सकते है, और उसके कम्प्यूटर पर से सभी प्रोग्राम को किसी अन्य व्यक्ति के कम्प्यूटर पर ले जा सकते है। इनको सामान्यत: ई-मेल संदेशों या तत्काल संदेषीय संदेशों के माध्यम से एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर पर ले जाया जा सकता है।

ये ऐसे साफ्टवेयर प्रोग्राम हैं जो सामान्यत: किसी प्रोग्राम में या किसी फाइल में या किसी साफ्टवेयर या ग्रीटिंग कार्ड या आडियां और वीडियों फाइल इत्यादि मे छिपे रहते है। ज्यों ही वह कम्प्यूटर आपरेटर अपने कम्प्यूटर को खोलकर उस प्रोग्राम, फाइल या साफ्टवेयर मे जाता है, त्यों ही ये सक्रिय हो जाते है और अपना काम प्रारम्भ कर देते है।

सबसे पहला कम्प्यूटर वायरस पाकिस्तान के लाहौर “ाहर मे स्थित दो बन्धुओं- वासित फारूक अलवी और अमजद फारूक अलवी द्वारा बनाया गया था। इस कम्प्यूटर का नाम ‘बे्रन’ था परन्त इसे ब्रेन -ए यू0आई0यू0सी0, पाकिस्तानी, पाकिस्तानी ब्रन और लाहौर इत्यादि नामों से भी जाना जाता था। इसको तैयार करने का उनका मुख्य उद्देश्य अपने मेडिकल साफ्टवेयर को दस्युता से बचाना है।

वर्तमान कम्प्यूटर के युग मे इन कम्प्यूटर वायरसां का प्रयोग दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है और इनके प्रयोग से अब तक अरबो-खरबों रूपए का चूना लग चुका है। मई, 2000 में एक फिलीपीन्स निवासी, जो स्नातक था, ने बी0 बी0 एस0 लव लेटर जिसे ‘‘लव बग’ या ‘आई लव यू’ इत्यादि के नाम से भी जाना जाता हैं। इससे लगभग 10 मिलियन डालर का नुकसान हुआ। दिसम्बर 2000 मे विष्व व्यापार संगठन की वेबसाइट पर कम्प्यूटर वायरस का प्रयोग किया गया था। सन् 2002 में मेलीसा कम्प्यूटर वायरस का उपयोग व्यवसाय और शासकीय कम्प्यूटर नेटवर्क तथा पर्सनल कम्प्यूटरां पर किया गया जिससे सम्पूर्ण विष्व के लगभग दस लाख से भी अधिक कम्प्यूटर क्षतिग्रस्त हो गए और लगभग 80 मिलियन डालर से भी अधिक का नुकसान हुआ। सन् 2005 मे माइकल जैक्सन द्वारा स्वयं आत्महत्या कर लेने की खबर के साथ कम्प्यूटर वायरस का प्रयोग किया गया। सन् 2006 मे कम्प्यूटर कपट करते हुए एक अमेरिकी नागरिक को पकड़ा गया।

16. डेटा डिडलिंग 

शब्द का अर्थ है एंठना या तोड़-मरोड़ करना, यह सामान्य अपराध है इसमे या तो आगत के पूर्व या आगत के समय या तो निर्गत के पहले किसी कम्प्यूटर के साफ्टवेयर मे अवैध डाटा का प्रवेश करा दिया जाता है या अप्राधिकृत डाटा का प्रवेश करा दिया जाता हैं। इसके माध्यम से साख अभिलेख, तालिका अभिलेख, स्कूल अनुलिपियों तथा बैंको इत्यादि को नुकसान पहुंचाया जा सकता है जैसे सन् 1996 मे न्यू डेलही म्युनिसिपल कौसिल इलेक्ट्रिसिटी बिलिंग कपट का मामला।

17. वेब डिफेसमेंट

यह एक ऐसा अपराध है जिसमं किसी कम्प्यूटर की वेबसाइट के ओरिजिनल होम पेज को हटा करके उसके स्थान पर दूसरा पेज प्रवेष करा दिया जाता है। ऐसा सामान्यत: साइबर अपराधी द्वारा किसी की मानहानि या उससे सम्बन्धित कोई अष्लील लेखन सामग्री वेबसाइट पर डालने के लिए किया जाता है। ऐसी स्थिति में उनका मुख्य उद्देष्य राजनीतिक और धार्मिक विष्वास का फायदा उठाना होता है। इसके अतिरिक्त, कभी-कभी अन्य प्रयोजनों के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है। कभी-कभी निगमों की वेबसाइट पर भी इस तरह के अपराध किए जाते हैं। इस अपराध का प्रयोग सामान्यत: किसी कम्पनी या संगठन की वेबसाइट को विकृत करने के लिए किया जाता है। ऐसी विकृति के बाद वह साइट काम करना बन्द कर देती है।

18. साइबर स्टाकिंग

यह अपराध किसी व्यक्ति को तंग करने या परेशान करने के लिए किया जाता है। ऐसा इन्टरनेट, इ-मेल या अन्य इलेक्ट्रानिक कम्युनिकेषन डिवाइसेज इत्यादि के द्वारा किया जाता है। इसके माध्यम से लोगो को तंग किया जाता है, परेशान किया जाता है और धमकियां दी जाती है। इसमें साइबर अपराधी तंग या परेशान करने वाला कॉल करता है और संदेशों को भेजता है जिसका मुख्य प्रयोजन सम्बन्धित व्यक्ति से धन प्राप्त करना होता हैं इस तरह का सबसे पहला अपराध कैलीफोर्निया के एक 50 वश्र्ाीय युवक द्वारा एक महिला को परेशान करने के लिए किया गया था।

19. इन्टरनेट टाइम चोरी

ऐसा अपराध सामान्यत: तब किया जाता है, जब इन्टरनेट का प्रयोग किया जाता रहता है। इसमें साइबर अपराधी इन्टरनेट पर से ही कुछ प्रोग्रामो की चोरी कर लेते है। इसीलिए इसे इन्टरनेट पर चोरी के नाम से जाना जाता है।

20. साइबर आंतकवाद

उपर्युक्त विवेचन के आधार पर यह कहा जा सकता है कि ये सभी साइबर अपराध सम्पूर्ण विश्व को बडी सख्ती से चोट पहुंचा रहे हैं। वर्तमान मे ट्रोजन्स, कीलागर्स, ई-मेल बमबाजी, ई-मेल कपट, सेवा का इंकार आक्रमण, कम्प्यूटर वायरस इत्यादि ऐसे साइबर अपराध है जो आंधी की तरह सम्पन्न किए जाते हैं आरै कम्प्यूटर सिस्टम को क्षतिग्रस्त करके लाखों करोडा़े का चूना लगा देते है। 

अत: इन सभी अपराधों को सामान्य रूप मे साइबर आतंकवाद’ की संज्ञा दी जा सकती है, और यह कहा जा सकता है कि साइबर आतंकवाद विघटन करने वाली या तोड-फोड़ करने वाली गतिविधियों का या उनकी धमकियों का एक पूर्व चिंतित प्रयोग है जिसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक धार्मिक, राजनीतिक आदि प्रयोजनों को प्राप्त करना या ऐसी प्रयोजनों की प्राप्ति के लिए लोगो को अभित्रासित करना होता है। वर्तमान समय में साइबर अपराधियों मे इन्क्रिप्षन के प्रयोग की प्रवृित्त बढत़ी जा रही है। जिसके माध्यम से वे किसी भी सामग्री को कोड मे बदल देते है, जिसको केवल वही जान सकते है किसी भी अन्य व्यक्ति को इसके बारे मे कोई जानकारी नहीं हो सकती है। इस तकनीक का प्रयोग तो वर्तमान समय मे साइबर अपराधियों के लिए बेहद सुरक्षित तकनीक बना हुआ है जबकि अन्य व्यक्तियों विशेषकर सुरक्षा अधिकारियों के लिए बेहद समस्या बन गया है जिसका कोई निदान अभी तक संभव नही हो पाया है। सन् 1980 मे कैलिफोर्निया के बैरी कोलिन ने ‘साइबर स्पेस’ तथा ‘आतंकवाद’ नामक शब्दों का प्रयोग साइबर अपराध के संदर्भ मे साइबर आतंकवाद के रूप मे किया था।

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