फलों का महत्व और वर्गीकरण

फलों का महत्व

फलों को हमारे दैनिक जीवन में आदिकाल से ही बड़ा महत्व दिया जाता रहा हैं। फलों का वर्गीकरण कई प्रकार से किया गया है जिसमें निम्नांकित वर्गीकरण उपयुक्त माना जाता हैं । 

फलों का महत्व

  1. फलों का नियमित सेवन मानव शरीर के स्वस्थ संचालन तथा उचित वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है 
  2. संतुलित भोजन के रूप में फलों का नियमित सेवन करना चाहिए। ये हमें बलशाली तथा स्वस्थ रखते है।
  3. हमें प्रतिदिन 100 ग्राम फल का सेवन करना चाहिए जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है।
  4. फलाहार हमारी पाचन प्रणाली के लिए भी स्वाभाविक और स्वास्थकारी हैं
  5. फलों में प्राकृतिक रेशा प्रचूर मात्रा में होने के कारण उदर रोगों की संभावना काफी घट जाती है।
  6. फल में कार्बोंहाइड्रेट के अच्छे स्रोत है। इसके साथ ही इसमें शर्करा, प्रोटीन, विटामिन तथा खनीज भी होते है।
  7. फल, जल क स्रोत होते है।
  8. इसमें  एंटीआक्सीडेटं ्स, प्रोटीन, वसा, खाद्य रेषा, कार्बोहाइड्रेट, आर्गेनिक एसिड, एंजाइम इत्यादि पाए जाते है।

फलों का वर्गीकरण

1. जलवायु के आधार पर फलों का वर्गीकरण

फलों को विभिन्न जलवायु क्षेत्रों (Climate Zone) में उगाने के आधार पर निम्न वर्गों में विभाजित किया जाता हैं :- 
  1.  शीतोष्ण कटिबन्धीय फल (Temperate Fruits) :- ये फल ठण्डे क्षेत्रों में सफलतापूर्वक उगाये जाते हैं जहाँ पर जाड़ों में तापक्रम फ्रीजिंग बिन्दु (Freeziong Point) से भी नीचे चला जाता हैं। इस वर्ग में सेब, नाशपाती, आडू , आलू बुखारा, बादाम, खुबानी, चेरी, रसभरी, अखरोट, स्ट्राबेरी, हेजलनर एवं पीक नट आदि सम्मिलित हैं।  
  2. उपोष्ण कटिबन्धीय फल (Subtropical Fruits) :- इस प्रकार के फल मैदानी क्षेत्रों में उगाये जाते हैं। इन फलों को गर्म एवं शुष्क जलवायु में उगाया जाता हैं। इस वर्ग में नींबू जाति के अंगूर, लीची, बेर, अनार, अंजीर, फालसा, आंवला, बेल, शहतूत, करौंदा, खजूर, इमली एवं जामुन आदि फल आते हैं। 
  3. उष्ण कटिबन्धीय फल (Tropical Fruits) :- आम, केला, पपीता, अमरूद, अनानास, शरीफा, काजू, कटहल, चीकू आदि फल इस श्रेणी में आते हैं। इन्हें उगाने हेतु उच्च तापक्रम की एवं आर्द्र जलवायु होना चाहिए। 

2. परागमण प्रकृति के आधार पर फसलों का वर्गीकरण 

इस आधार पर फलों का वर्गीकरण दो प्रकार से किया जाता हैं :- (1) स्वपरागित फल (Self Pollinated Fruits) (2) पर परगित फल (Cross Pollinated Fruits) ।
  1. स्वपरागित फल (Self Pollinated Fruits) :- इसके अन्तर्गत एप्रीकोट (खुबानी) (Prunusameni), नेक्टीन (Prunus Persica), नींबू (Citrusspp) एवं आडू (Prunus Persica) आदि सम्मिलित किये जाते हैं।
  2. पर परगित फल (Cross Pollinated Fruits) :- इसके अन्तर्गत आम, नाशपाती, रसभरी, अखरोट, चेस्टनर, सेब, एवोकैडो, केला, चेरी, खजूर, अंजीर, नारियल, अंगूर, पपीता, स्ट्राबेरी, बादाम आदि आते हैं।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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