जनसंचार माध्यम का अर्थ और उनका वर्गीकरण

अनुक्रम
जनसंचार माध्यम का अर्थ शब्दार्थ की दृष्टि स इस शब्द का अर्थ है, ‘‘बड़ी संख्या में लोगों के साथ संप्रेषण का मुख्य साधन या माध्यम, विशेष रूप से टेलीविजन, रेडियो और समाचार-पत्र।’’ ‘माध्यम’ का सामान्य अर्थ हे-’’वह साधन जिससे कुछ अभिव्यक्त अथवा सम्प्रेषित किया जाए।’’

जनसंचार माध्यम  का अर्थ और उनका वर्गीकरण

शब्दार्थ की दृष्टि से इस शब्द का अर्थ हे, ‘‘बड़ी संख्या में लोगों के साथ संप्रेषण का मुख्य साधन या माध्यम, विशेष रूप से टेलीविजन, रेडियो और समाचार-पत्रों।’’ जनसंचार माध्यम का तात्पर्य यह हे कि जिनके द्वारा हम एक बड़े श्रोता या दर्शक समूह तक चाहे वे पास हों या दूर हों अपने भावों, विचारों को सम्प्रेषित करते है। भावों, विचारों के सम्प्रेशण के लिए जिन साधनों या उपकरणों का प्रयोग किया जाता है वे ही माध्यम है। इन जनसंचार के माध्यमों को तीन वर्गो में विभाजित किया जा सकता है -

1. मुद्रण माध्यम (Press) -

मुद्रण माध्यम अन्य आधुनिक माध्यमों की अपेक्षा सबसे प्राचीन है। मुद्रण के अन्तर्गत समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ, जर्नल, पुस्तकें इत्यादि शब्द माध्यम आते है। ये लिखित माध्यम आज भी अन्य आधुनिक जनसंचार माध्यमों की अपेक्षा अत्यधिक विश्वसनीय है क्योंकि मुद्रण माध्यम अन्य माध्यमों की अपेक्षा अधिक स्वतंत्र हैं। और स्वषासित है। विश्व के प्रायः सभी विकसित एवं विकासशील देशों में लगभग प्रत्येक पढ़ा-लिखा व्यक्ति दैनिक समाचार-पत्र पढ़ता है। एक समाचार-पत्र का पहला ओर मुख्य काय्र समाचारों का मुद्रण। मुद्रण यंत्र के अविश्कार से मानव जाति के इतिहास में एक महान क्रांति हुई है।

जैसे- जैसे शहरों का विकास हुआ ओर यूरोपीय देशों में व्यापार काुैलाव हुआ, लोगों को आवश्यकता अनुभव होने लगी कि सुदूर स्थानों पर क्या हो रहा है, इसकी जानकारी उन्हें मिलती रहे। 1702 ई. में लन्दन का पहला दैनिक पत्र अस्तित्व में आया। नयी अर्थव्यवस्था और नवीन शिक्षा पद्धति के कारण भारतीय जनता में एक ऐसी चेतना उत्पन्न हुई जिसके आधार पर लोग अपनी कठिनाइयों को समझने और उनको दूर करने की कोषिष करने लगे। इसके लिए प्रेस से बेहतर और कोइ्र साधन नहीं था। भारत वर्ष में मुद्रण यंत्र स्थापित करने का श्रेय पुर्तगालियों को है। सन् 1550 में उन्होंने दो मुद्रण यंत्र मँगवाकर धार्मिक पुस्तकें छापनी प्रारंभ की। सन् 1674 में ईस्ट इंडिया कम्पनी द्वारा मुंबई में मुद्रण काय्र प्रारंभ किया गया। 18वीं सदी में मद्रास, कोलकाता, हुगली, मुबइ्र आदि स्थानों में छापेखाने स्थापित हुए।

अंग्रेजों ओर मिषनरियों के समाचार-पत्र प्रथम प्रकाशित हुए, किन्तु अपने देष के सन्दर्भ में पत्र निकालने की पहल राजा राममोहन राय ने की सन् 1821 में उनके सहयोग से ‘‘संवादकौमुदी’’ नामक साप्ताहिक बंगाल पत्र का प्रकाशन हुआ। इसमें सामाजिक समस्याओं के सम्बन्ध में लेख रहते थे। बाद में सती प्रथा के विरूद्ध लेख लिखने के कारण वह पत्र भी बन्द हो गया। इसी समय दो पत्र और प्रकाशित हुए ‘समाचार दर्पण’ ओर ‘दिग्दर्शन’ 1822 ई. में ‘बाम्बे समाचार’ निकलना प्रारंभ हुआ। दैनिक पत्र के रूप में यह आज भी निकल रहा है।

कभी-कभी यह चिन्ता जताई जाती है कि रेडियो, टेलीविजन जैसे संचार माध्यमों के कारण प्रेस पिछड जायेगा। लेकिन यह चिन्ता निर्मूल है। हम देखते हे कि जिन घरों में रेडियो तथा टेलीविजन हें उनमें समाचार-पत्र भी अभिवाय्र रूप में खरीदे जाते हे। कारण यह है कि समाचार-पत्र विश्वसनीयता दूसरे माध्यमों की अपेक्षा अधिक होती हे। इसलिए मुद्रण यंत्र (प्रेस) का प्रभाव कभी कम कम नही होगा। 

2. इलेक्टॉनिक माध्यम :- 

इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के अन्तर्गत केवल श्रव्य माध्यम और श्रव्य-दृश्य माध्यम आते हे। केवल श्रव्य माध्यम में रेडियो, आडियों, केसेट आदि आते है। तथा श्रव्य दृष्य-माध्यम में टेलीविजन, फिल्म, वीडियो केसेट आदि आते है। ये सभी माध्यम संदेश को पलभर में पूरे विश्व में पहुँचा देते है और दृश्य श्रव्य सचित्र आदि होने के कारण इनका प्रभाव भी अधिक होता हे। प्रिंट मीडिया संदेश को वशो्र तक जीवित रख सकता है, किन्तु श्रव्य सन्देश कुछ पलों का होता है विशेषकर रेडियो का। टी.वी. का सन्देश चित्रों का सहयोग लेकर चलता है अत: वह कुछ समय तक स्मृति में रखता है। यहाँ कुछ माध्यमों का संक्षेप मे परिचय इस प्रकार हे। 

केवल श्रव्य माध्यम :- मुद्रण मध्यम प्रेस के उपरान्त दूसरा महत्वपूर्ण जनसंचार माध्यम रेडियो (आकाशवाणी) है। यह श्रव्य माध्यम की श्रेणी मे आता हे।

जनसंचार माध्यम रेडियो
जनसंचार माध्यम रेडियो


प्रिंट मीडिया या समाचार-पत्र समाचारों को उतनी तीव्रगति से नहीं पहुँचा सकते जितनी तीव्र गति से रेडियो पहुँचाता हे। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए जवरीमल्ल पारख ने ठीक ही लिखा है कि ‘‘रेडियो निरक्षरों के लिए भी एक वरदान है, जिसके द्वारा वे सिफ्र सुनकर अधिक से अधिक से सूचना,ाान, मनोरंजन हासिल कर सकते है। रेडियो और ट्रांजिस्टर की कीमत भी बहुत अधिक नहीं होती। इस कारण वह सामान्य जनता के लिए भी कमोवेष सुलभ है। यही कारण है कि टी.वी. के व्यापक प्रसारण के बावजूद तीसरी दुनिया के देषों में रेडियो का अपना महत्व आज भी कायम है।’’ 

श्रव्य दृश्य माध्यम (टेलीविजन, फिल्म, वीडियो) :- श्रव्य दृष्य माध्यम में फिल्म तथा टेलीविजन की गणना होती है। वीडियो भी इसी श्रेणी में आता है। आज फिल्म ओर टेलीविजन की लोकप्रियता सबसे अधिक हे, बल्कि फिल्म माध्यम भी अब टेलीविजन के साथ साँठ-गाँठ करके दुनिया का चेहरा बदलने में अपनी भूमिका निभा रहा है। अर्थात् थियेटर जाने की की जरूरत नहीं है, घर बैठे टी.वी. के पर्दे पर फिल्म देख सकते हे। सच तो यह है कि इन इलेक्टॉनिक माध्यम ने जहाँ मनुष्य को घर बैठे सारी दुनिया से जोड दिया है, वहीं वह शिक्षित होते हुए भी अशिक्षा के अंधरे की ओर लौट रहा है। टेलीविजन ने हमारी पढने की आदत बिगाड़ दी है और कम्प्यूटर ने हमारी गणित की क्षमता को बाँध दिया हे। उसके बावजूद फिल्म और टेलीविजन की उपयोगिता में कोइ्र कमी नहीं आ रही हे। अब तो कम्प्यूटर ने भी फिल्म और टेलीविजन के साथ अपना प्रगाढ़ सम्बन्ध बना लिया है अर्थात ् कम्प्यूटर के पर्दे पर भी फिल्म देखा जा सकता हे।

श्रव्य दृश्य माध्यम टेलीविजन
श्रव्य दृश्य माध्यम टेलीविजन

3. नव इलेक्ट्रॉनिक जनसंचार माध्यम :-

उपग्रह :- एक नवीनतम सुविकसित इलेक्ट्रॉनिक माध्यम उपग्रह (सैटेलाइट) भी है। उपग्रहों के कारण आजकल संचार की दुनिया में पर्याप्त विकास हुआ हे। इसके लिए विशवत् रेखा के ऊपर एक निश्चित ऊँचाइ्र पर उपग्रह स्थापित किया गया है। इन उपग्रहों को भूस्थिर उपग्रह की संज्ञा दी जाती है। ये उपग्रह अर्थात भूस्थिर उपग्रह प्रसारण की सुविधा प्रदान करते है, जिससे अन्तर्राश्ट्रीय संचार प्रणाली विकसित होती है। कई उपग्रह जब पृथ्वी की कक्षा में एक स्थान पर स्थिर हो जाता है तो वह पृथ्वी के साथ-साथ घूमने लगता हे इस प्रकार उपग्रह का परिक्रमा करने का समय एवं पृथ्वी के स्वयं अपनी कक्षा में घूर्णन का समय समान होता है। अत: इनको सुविधापूर्वक संचार उपग्रहों की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

पृथ्वी की विभिन्न कक्षाओं में सन् 1956 के बाद कई कृत्रिम उपग्रह स्थापित किये गये है। इन उपग्रहों को राकेट की सहायता से स्थापित किया जाता है, जिसे राकेट लांचर कहा गया है। इन उपग्रहों द्वारा भेजे गये समाचार एवं सुचनाएँ दिन-रात पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे है, जिनको दुनिया भर के देष रेडियो, टेलीविजन केन्द्रों द्वारा प्राप्त कर सकते है। यह उपग्रह का ही चमत्कार है कि एक समाचार-पत्र के कई-कई संस्करण एक साथ अलग-अलग स्थानों से प्रकाशित हो रहे है। चेन्नई से प्रकाशित ‘‘दि हिन्दू’’ समाचार पत्र, हरियाणा के गुडगाँव से उसी समय प्रकाशित हो जाता है।

आज समाचार, लम्बे लेख, चित्र आदि पलक झपकते हीुैक्स द्वारा सात समुंदर पर भी ज्यों का त्यों पहुँच जाता है। तात्पर्य यह है कि इस नव इलेक्ट्रॉनिक जनसंचार माध्यम उपग्रह ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अनूठी क्रांति घटित कर दी है। इस काम में उत्कृष्ट रूप से विकसित कम्प्यूटर भी हमारी बहुत सहायता कर रहा हे।

नव इलेक्ट्रॉनिक समाचार पत्र इंटरनेट :- उपग्रह ने सूचना क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया है। आज हमारे सभी जनसंचार माध्यम टेलीफोन, माध्यम मोबाइल, टी.वी कम्प्यूटर आदि उपग्रह से जुडे है और प्रभावशाली ढंग से संचार प्रक्रिया में लगे है। धीरे-धीरे हम इंटरनेट के माध्यम से नव इलेक्ट्रॉनिक समाचार पत्र की ओर बढ़ रहे है। उपग्रहों ओर कम्प्यूटरों की संचार क्रांति ने साधारण अखबारों .के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। मीडिया विशेषज्ञ अब यह कहने लगे है कि भविष्य में समाचार पत्र छपेंगे नहीं, कम्प्यूटर के परदे पर पढ़े जायेंगे और अब यह धारणा साकार होने लगी हे।

नव इलेक्ट्रॉनिक जनसंचार माध्यम मोबाइल
नव इलेक्ट्रॉनिक जनसंचार माध्यम मोबाइल

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