मेघालय का इतिहास

मेघालय का शाब्दिक अर्थ है - मेघों का आलय यानि बादलों का घर, यह मूलत: एक पहाड़ी राज्य है। इस राज्य के प्राचीन इतिहास के सन्दर्भ में बहुत अधिक जानकारी नहीं प्राप्त है। अंग्रेजों से इस क्षेत्र का सम्पर्क सबसे पहले 1765 में हुआ उस समय खासी जनजातियों के 25 छोटे-छोटे कबीले थे। बाद में स्वतंत्रता के समय इस क्षेत्र के शासकों और कबीलों के मुखियाओं ने भारत के साथ विलय की संधि पर सामूहिक रूप से हस्ताक्षर किए। 1952 में जब असम में पांच स्वायत्त जिला परिषदों का गठन किया गया।

उस समय इस क्षेत्र में बसने वाली जनजातियों के लिए दो जिलों गारो हिल्स तथा संयुक्त खासी जयन्तिया हिल्स का गठन किया गया। परन्तु 1952 का यह निर्णय बहुत कारगर नहीं साबित हुआ और यहॉं अलग राज्य के लिए आन्दोलन शुरू हो गया। 1956 में राज्य पुर्नगठन आयोग के समक्ष भी अलग राज्य की मांग रखी गयी परन्तु आयोग ने यह मांग अस्वीकार कर 1960 में इस मांग को शांतिपूर्ण तरीकों से मनवाने के उद्देश्य से ‘आल पार्टी हिल लीडर्स कान्फ्रेंस’ का गठन किया गया। 

मेघालय का वर्तमान स्वरूप 2 अप्रैल 1970 को मिला जब उसे असम के अन्तर्गत एक स्वायत्तशासी राज्य के रूप में गठित किया गया। एक पूर्ण राज्य के रूप में मेघालय 21 जनवरी 1972 को अस्तित्व में आया।

मेघालय का इतिहास

मेघालय में मुख्य रूप से तीन जनजातियॉं रहती हैं इनके नाम खासी, गारो और जयन्तिया हैं। जनजातीय समुदाय के ये लोग अत्यन्त प्राचीन और विशिष्ट जनजातीय मूल के लोगों के वंशज हैं। मेघालय के मध्य और पूर्वी भाग में खासी और जयन्तिया पहाड़ियाँ है। इस विशाल पठारी इलाके में विस्तृत मैदान, पहाड़ियां और नदी घाटियां हैं। इस पठार के दक्षिणी इलाके में गहरे खड्ड और खड़े ढलान है और पहाड़ की तलहटी पर समतल भूमि की पतली पट्टी बांग्लादेश की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा के साथ लगी है। इस पहाड़ी राज्य में अनेक नदियां बहती हैं जिनमें नौका चलाना सम्भव नहीं है। गारो पहाड़ियों में उत्तर की ओर बहने वाली मांढा, दार्मिंग और जिंजीरम नदियों तथा पश्चिम की ओर बहने वाली रिगे और गैनोल नदियॉं हैं। गारो पहाड़ियों की सबसे बड़ी नदी सिमसोग और एक अन्य नदी बुगी दक्षिण की ओर बहती है। खासी और जयन्तिया पहाड़ियों और उत्तर की ओर बहने वाली नदियां हैं खी, उमियम, उमद्रियु और उमखेन। इनके अलावा जयन्तिया हिल्स और उत्तरी कछार हिल्स की सीमा पर कुपली नदी है। किंशी, मियम, माफलांग तथा उमागोर नदियां दक्षिण की ओर बहकर बांग्लादेश में प्रवेश करती हैं।

मेघालय का भौगोलिक विस्तार 250 3’ उ0 से 260 3’ उत्तरी अक्षांशों तथा 890 52’ पूर्वी देशान्तर से 930 पूर्वी देशान्तर के मध्य है। इसके उत्तर-पूर्व में असम तथा दक्षिण और पश्चिम में बांग्लादेश स्थित है। इस राज्य की सबसे ऊँची चोटी शिलांग 589.50 मीटर ऊँची है। दूसरे नम्बर की सबसे ऊँची चोटी ‘नोकोक’ है जो गारो हिल्स में है। गारो हिल्स राज्य के सबसे पश्चिम में, मध्य में खासी तथा पूर्व में जयन्तिया की पहाड़ियॉं हैं।

मेघालय बुनियादी तौर पर कृषि प्रधान राज्य है। यहॉं की लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या आजीविका के लिए मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर हैं। इस पर्वतीय राज्य की भौगोलिक स्थिति इस प्रकार की है कि यहॉं अधिक इलाके में खेती करवाने की बहुत कम गुंजाइश है। यहॉं की मिट्टी और जलवायु बागवानी के अनुकूल होने के कारण बागवानी के विकास की यहॉं काफी क्षमता है, अत: राज्य में ऐसे फलों और पैदावार के लिए अच्छी सम्भावनाएं हैं। शीतोष्ण, उपोष्ण और उष्ण कटिबन्ध फलों और सब्जियों के उत्पादन की भी यहॉं अच्छी सम्भावनाएं हैं।

चावल और मक्का यहॉं की मुख्य फसलें हैं। इनके अतिरिक्त यह संत्तरे (खासी मंदारिन) अन्ननास, केला, कटहल और आलूबुखारा, नाशपाती तथा आड़ू जैसे फलों के लिए भी मेघालय प्रसिद्ध है। परम्परागत ढंग से उगार्इ जाने वाली नकदी फसलों में आलू, हल्दी, अदरक, काली मिर्च, सुपारी, पान, टैपियोका, छोटे रेशे वाली कपास, पटसन और मक्का, सरसों और तोरिया शामिल हैं। इस समय गैर परम्परागत फसलों जैसे-तिलहनों (मूंगफली, सोयाबीन और सूरमुखी), काजू, चाय और काफी, मशरूम, जड़ी बुटियॉं, आर्किड और व्यावसायिक दृष्टि से उगाए जाने वाले फूलों की खेती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

राज्य में 17321 वर्ग किमी क्षेत्र में वन हैं जो कि राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 77.23 प्रतिशत है। 410 वर्ग किमी0 अधिक घने जंगल, 9501 वर्ग किमी मध्यम घने जंगल तथा 7410 वर्ग किमी0 खुले जंगल है। यहॉं लकड़ी की प्रमुख प्रजातियां हैं- साल, मक्रीसाल, खासी विंस, भूर्ज, टीक, टीटाचैप, गामरी, सैम, पोमा और खोकन आदि। लकड़ी के अलावा यह राज्य बांस, सरकंडा, बैंत और जड़ी बूटियों की सम्पदा में भी काफी समृद्ध है। यहॉं बड़ी संख्या में आर्किड पाये जाते हैं। राज्य में जैव-अनुवांशिक सामग्री का विशाल भण्डार उपलब्ध है। वन्य जीवों में मेघालय में रॉयल बंगाल टाइगर से लेकर पहाड़ी चीतों, सामान्य चीतों, जंगली बिल्ली जैसे-जीव पाए जाते हैं। यह राज्य एक अत्यन्त दुर्लभ वन्य जीव बिनतुरोंग (आर्कटिक्टिस बिनतुरोंग) का घर है। इसी प्रकार हुलाक प्रजाति के बन्दर भारत में केवल यहीं पाए जाते हैं। यहॉं हाथियों का घनत्व सर्वाधिक है। 

1993 की जनगणना के अनुसार राज्य में कुल 2,872 हाथी थे। हाथियों के अतिरिक्त यहॉं बाघ, भालू, जंगली सुअर, तेन्दुआ और जंगली बिल्ली, विभिन्न प्रकार के हिरण, बिंतोरोंग्स, लजीना वानर, लंगूर सहित विभिन्न प्रकार के बन्दर, गोल्डेन लंगूर और हूलोक्स, उड़न गिलहरी तथा बड़ी गिलहरी आदि पाये जाते हैं। कुछ दुर्लभ पक्षियों में धनेश, पैट्रिज, चेड़, चैती, स्नाइप, हंस, बत्तख, बटेर शामिल हैं। राज्य में दो राष्ट्रीय पार्क हैं - नोकरेक नेशनल पार्क और बलपकराम नेशनल पार्क/नोंगरबीलेम वन्य प्राणी अभ्यारण्य और सीजू वन्य प्राणी अभ्यारण्य नामक दो वन्य प्राणी अभयारण्य भी राज्य में हैं।

राज्य में औद्योगीकरण की गति काफी धीमी है। ज्यादातर उद्योग लघु क्षेत्रों में हैं। वर्ष 2007 में यहॉं लघु उद्योगों की संख्या 28,591 है। यहॉं लघुउद्योगों में बेकरी, फर्निचर, बुनार्इ आदि शामिल हैं। चेरापूंजी में सार्वजनिक क्षेत्र की सीमेन्ट फैक्ट्री, गारो पहाड़ी जिले के दमस और जयन्तिया पहाड़ी जिले के संतुगा में सीमेन्ट के लघु संयंत्रों में भी उत्पादन शुरू हो चुका है। शिलांग के पास बड़ापानी में मेघालय इलेक्ट्रानिक्स विकास निगम ने फ्रांस की फिरोडेक्स कम्पनी के सहयोग से टेंटासलय कैपिसिटरों के उत्पादन के लिए लगाया है। राज्य में सेवा उद्योग, बेकरी, फर्नीचर निर्माण, लोहे और इस्पात के फैब्रीकेशन, टायर मरम्मत और मसाले आदि के लघु उद्योगों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

यहॉं खनिजों में कोयला, सिलीमेनाइट, चूना पत्थर, डेलोमाइट, फायर क्ले, फेल्सपार तथा कांच रेत आदि खासी, जयन्तिया तथा गारो पहाड़ियों के क्षेत्र में पाये जाते हैं। देश के कुल सिलीमेनाइट का 95 प्रतिशत यहीं पाया जाता है। राज्य में 500 करोड़ टन कोयले और 400 करोड़ टन चूना पत्थर का अनुमानित भण्डार है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि पूर्वोत्तर क्षेत्र सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक विविधताओं से भरा हुआ है।

संदर्भ -
  1. भारत 2003, पूर्वोक्त, पृ0सं0-882-883.
  2. पूर्वोक्त63. चेसी, चाल्र्स, ‘पूर्वोत्तर में विकास की रणनीति’ योजना दिसम्बर 2006, प्रकाशन विभाग, सूचना प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, पृ0 21-24.
  3. भारत 2003, पूर्वोक्त, पृ0 886.
  4. भारत 2003, पूर्वोक्त, पृ0सं0-886.
  5. त्रिपाठी, कन्हैया, ‘मेघालय वासियों का सौन्दर्यबोध और मानवाधिकार’, योजना दिसम्बर 2010, प्रकाशन विभाग, सूचना प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, पृ0सं0 29-30.
  6. भारत 2003, पूर्वोक्त, पृ0सं0-886-887.

Bandey

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