आतंकवाद का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं एवं उद्देश्य

अनुक्रम
किसी व्यक्ति या संगठित गुट द्वारा समाज या सरकार पर जोर-जबरदस्ती करने या धमकाने के उद्देश्य से, गैर-कानूनी तरीके से हिंसा का इस्तेमाल करना आतंकवाद कहलाता है। अकसर यह हमला सिद्धांतों या राजनीतिक कारणों से होता है। हालांकि यह बात साफ करनी होगी कि आतंकवाद और आतंकवादी हमलों पर बहस के बावजूद संयुक्त राष्ट्र संघ भी आतंकवाद की कोई सर्वमान्य परिभाषा देने में सफल नहीं रहा है। आतंकवाद की अलग-अलग लोगों के द्वारा अलग प्रकार से व्याख्या दी गई है। 

आतंकवाद की परिभाषा

आतंकवाद की किसी एक परिभाषा पर पहुँचने से पहले विभिन्न परिभाषाओं का अवलोकन करना आवश्यक है। आतंकवाद का अर्थ हिंसा का ऐसा प्रयोग है जो सैनिक दृष्टि से नहीं, बल्कि लक्ष्य (शिकार) को मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित करें। दूसरे शब्दों में आतंकवाद एक तरह का भयाक्रान्त करने की तकनीक है। इसकी प्रमुख उपयोगिता राजनीतिक व राजनयिक है। यही बुनियादी अन्तर क्रांतिकारियों और आतंकवादियों में है।

‘‘आतंकवाद एक नई प्रवृत्ति नहीं है। किसी न किसी रूप में यह इतिहास के पन्नों में उद्धत है। लेकिन हर बार इसका पुनरागमन होता है, और अधिक जटिल रूप में, और एक नये संकट के रूप में।’’

संयुक्त राष्ट्र संघ में आतंकवाद के स्रोत विश्लेषक ब्रेन जेंकिन्स ने आतंकवाद को परिभाषित करते हुए कहा है ‘‘आतंकवाद एक मंच की तरह है, यह दर्शकों को अपना निशाना बनाता है वास्तविक पीड़ितों को नहीं।’’

राष्ट्र संघ में 1937 में आयोजित ‘कन्वेंशन ऑन टेरेरिज्म’ में आतंकवाद की परिभाषा देते हुए माना गया कि ‘‘आतंकवाद एक हिंसक कार्यवाही है जो कि राज्य के खिलाफ होती है तथा जिसका लक्ष्य या मनोवृत्ति किसी व्यक्ति विशेष, व्यक्तियों के समूह अथवा जन सामान्य में आतंक का वातावरण बनाना है।’’

गुटनिरपेक्ष देशों के अनुसार ‘‘आतंकवाद एक ऐसी हिंसक कार्यवाही है जो व्यक्तियों के एक समूह द्वारा की जाती है जिससे मानवीय जीवन खतरे में होता है जो मौलिक स्वतंत्रताओं के लिए घातक होता है तथा जो एक राज्य एक समिति नहीं होता।’’

वाल्टर लेक्योर ने बहुत सरल शब्दों में आतंकवाद की परिभाषा देते हुए कहा है कि ‘‘आतंकवाद लोकतांत्रिक समाजों को अस्थिर करने की कार्यवाही है।’’

लेकिन इस परिभाषा में मुश्किल यह है कि आधुनिक युग में आतंक केवल प्रजातांत्रिक समाजों के खिलाफ हो यह आवश्यक नहीं। गैर लोकतांत्रिक सरकारों को भी आतंकवाद से खतरा हो सकता है।

शिमिड़ ने 1984 में आतंकवाद की सौ से अधिक परिभाषाओं को सूचीबद्ध किया। यथार्थ में प्रत्येक देश में परिस्थितियों एवं विधियों के आधार पर आतंकवाद को परिभाषित किया है। ‘‘आतंकवाद कोई विचारधारा या सिद्धांत नहीं है अपितु एक तरीका, एक प्रक्रिया या फिर एक उपकरण है जिसका उपयोग कोई भी राज्य, राजनीतिक संगठन, स्वतन्त्रतावादी समूह, अलगाववादी संगठन, जातीय या धार्मिक उन्मादी अपने उद्देश्यों को प्राप्त करना करने के लिये चाहते हैं।’’

रिचार्ड शुल्ज के अनुसार, ‘‘आतंकवाद राजनीतिक व्यवस्था के अन्दर क्रांतिकारी परिवर्तन लेने के उद्देश्य से अलग-अलग प्रकार के राजनीतिक हिंसा प्रयोग में लाने की तैयारी है।’’ आधुनिक समय में सभी प्रकार की आतंकवादी कार्यवाही में हिंसा तथा हिंसा का भय एक अनिवार्य तत्व के रूप में होता है। इसलिए कहा जा सकता है कि आतंकवाद कुछ निश्चित राजनीतिक परिवर्तन लाने के लिए हिंसा या हिंसा की धमकी के द्वारा पैदा किया गया भय है। 

इनसाइक्लोपीडिया ऑफ सोशल साइन्सेज में आतंकवाद को परिभाषित करते हुए आतंकवादी के उद्देश्य व व्यवहार को प्रमुखता दी गई है। यह कहा गया है कि ‘‘आतंकवाद एक हिंसक व्यवहार है जो समाज या उसके बड़े भाग में राजनीतिक उद्देश्यों से भय पैदा करने के इरादे से किया जाता है।’’ इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि आतंकवाद का मुख्य उद्देश्य समाज व राज्य के अन्दर भय का वातावरण पैदा करना है। 

दूसरे शब्दों में ‘‘यह एक ऐसा तरीका है जिसके द्वारा एक संगठित समूह या दल अपने प्रकट उद्देश्यों की प्राप्ति मुख्य रूप से हिंसा के योजनाबद्धा उपयोग से करता है।’’ योनाह अलेक्जेण्डर के अनुसार, ‘‘आतंकवाद चुने हुए नागरिक विद्वानों के विरूद्धा हिंसा की कार्यवाही या उसकी धमकी है जिससे कि राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए भय का वातावरण बनाया जा सके।’’

अलेक्स स्मिथ के अनुसार, ‘‘आतंकवाद हिंसा का या हिंसा की धमकी का उपयोग है, तथा लक्ष्य प्राप्ति के लिए संघर्ष। लड़ाई की एक विधि व रणनीति है एवं अपने शिकार में भय पैदा करना इसका प्रमुख उद्देश्य है। यह क्रूर है और मानवीय प्रतिमानों का पालन नहीं करता। इसकी रणनीति में प्रचार एक आवश्यक तत्व है।’’

भारतीय सन्दर्भ में आतंकवाद को एक धमकी के रूप में देखा गया है जिसका उद्देश्य विरोधी समूह में अधिक चिन्ता व भय उत्पन्न करना है। निर्दोष व्यक्तियों को उपयोग में लाकर राजनीतिक व धार्मिक मांगो को पूरा करने का उद्देश्य होता है।

ब्रिटेन के आतंकवाद निरोधक अधिनियम 1976 में आतंकवाद से अभिप्राय ‘‘राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रयोग में लाई गई हिंसा से है जिसमें कि वह सभी तरह की हिंसा सम्मिलित है जिसका उद्देश्य जनता को या समुदाय विशेष को भयभीत करना है।’’

अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेन्ट द्वारा आतंकवाद को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि आतंकवाद पूर्व निर्धारित एवं राजनीतिक रूप से अभिप्रेरित हिंसक प्रवृति है जिसका लक्ष्य कोई संगठन अथवा राज्य हो सकता है। 1986 में आतंकवाद पर दक्षेस के एक अध्ययन दल की बैठक को सम्बोधित करते हुए बांग्लादेश के तत्कालीन गृहमंत्री ने आतंकवाद को परिभाषित करते हुए कहा कि ‘‘यह मूल रूप में हिंसा अथवा हिंसा की धमकी है जिसके पीछे कुछ राजनीतिक उद्देश्य होते हैं। यह कानून व व्यवस्था की समस्या है परन्तु एक अन्तर के साथ।’’

संयुक्त राज्य अमेरिका के गिलमोर कमीशन ने भी आतंकवाद को हिंसा अथवा हिंसा की धमकी माना है जिसका उद्देश्य भय का वातावरण तैयार करना है जिससे दूसरे लोगों को कतिपय कार्य करने के लिए बाध्य किया जा सके जिनको कि अन्यथा वे नहीं करते।

एमö शेरिफ बेइयानी के अनुसार, ‘‘आतंकवाद एक गैर कानूनी हिंसा की रणनीति है जो कि उन सामान्य अथवा एक समूह में आतंक फैलाने के लिए अपनाई जाती है। जिसका उद्देश्य किसी निर्णय को लेने के लिए अथवा किसी बात को प्रसारित करने अथवा किसी कमी को उजागर करना हो।’’

उपरोक्त सभी परिभाषाओं को देखने से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि आतंकवाद का सम्बन्ध हिंसा से है।आतंकवादी का प्राथमिक ध्येय हिंसा का वातावरण तैयार करना है चाहे वह एक समुदाय में हो, पूरे समाज में अथवा सम्पूर्ण राज्य में हो। दूसरी बात इन परिभाषाओं से यह स्पष्ट हो जाती है कि आतंकवादी इसलिए आतंक फैलाना चाहता है कि वह समुदाय, समाज या राज्य में भय का वातावरण उत्पन्न कर सकें लेकिन यह बात भी निश्चित है कि उसके द्वारा किये गये इन कृत्यों के पीछे कुछ निश्चित राजनीतिक उद्देश्य होते हैं। आतंकवादी किस दायरे में आतंकवाद को फैलायेगा, यह इस बात कपर निर्भर करेगा कि उसके राजनीतिक हित क्या है ? इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि आतंकवाद एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कि हिंसा का सहारा लेकर समाज व राज्य में भय का वातावरण पैदा किया जाता है, जिससे कि कुछ निहित राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति हो सके।

आतंकवाद को परिभाषित करने के सन्दर्भ में इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए कि बहुत से विद्वान यह मानते हैं कि आतंकवाद की कोई सर्वमान्य परिभाषा देना एक कठिन कार्य है। इसका कारण संभवत: यह है कि आतंकवाद के इतने विविध उद्देश्य, तरीके व कार्यक्षेत्र हो सकते हैं कि उन सबको एक निश्चित परिभाषा में प्रस्तुत करना मुश्किल है। दूसरी बात यह है कि निश्चित राजनीति उद्देश्यों की पूर्ति के लिए फैलाई जा रही हिंसा के सन्दर्भ में अलग-अलग धारणाएÍ हो सकती है। उदाहरण के तौर पर एक देश के लिए जो आतंकवादी है दूसरों के लिए वह स्वतन्त्रता के लिए लड़ रहा स्वतन्त्रता सेनानी या आन्दोलनकारी हो सकता है। ऐसी स्थिति में उसको अलग-अलग परिभाषा में परिभाषित करना स्वाभाविक है।

इसी प्रकार इस बात को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए कि प्रत्येक देश आतंकवाद को अपने नजरिये से देखने का प्रयास करता है। इसलिए भी यह स्वाभाविक हो जाता है कि आतंकवाद के सन्दर्भ में अलग-अलग दृष्टिकोण बन जाते हैं अत: आतंकवाद की परिभाषा के सन्दर्भ में इन कठिनाइयों को ध्यान में रखना आवश्यक है। सुरक्षित तौर पर सिर्फ इतना कहा जा सकता है कि आतंकवाद निहित राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए की गई संगठित हिंसक कार्यवाही है।

यहा पर आतंकवाद और दूसरे प्रकार के अपराधियों में अन्तर समझना आवश्यक है। इस सन्दर्भ में यह कहा जा सकता है कि आतंकवादी साधारण अपराधी नहीं है बल्कि :-
  1. आतंकवादियों के कुछ निश्चित राजनीतिक उद्देश्य अथवा मन्तव्य होते हैं।
  2. हिंसा अथवा हिंसा का भय आतंकवाद का अनिवार्य तत्व है।
  3. आतंकवाद की योजना तथा उसका क्रियान्वयन संगठनात्मक होता है अर्थात् उसके पीछे एक संगठन होता है या संगठनों की श्रृंखला होती है।
आतंकवाद को समझने के साथ-साथ इस प्रश्न पर विचार करना आवश्यक है कि आतंकवादी कौन है ? एक आतंकवादी से अभिप्राय उस व्यक्ति से है जो कुछ निश्चित राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए हिंसक कार्यवाही में भाग लेता है। एक परिभाषा के अनुसार आतंकवादी वह है जो कि सरकार अथवा समुदाय को आतंकित करने के लिए भयात्मक कार्यवाही का समर्थन करता है।

एक समय था जबकि आतंकवादी को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था परन्तु ज्यों-ज्यों आतंकवाद का वीभत्स रूप सामने आया है और संकुचित राजनीतिक उद्देश्यों के पूर्ति के लिए आतंकवाद को एक यंत्र के रूप में प्रयोग लाये जाने लगा है तो आतंकवादियों के प्रति भावना भी बदलने लगी है।

‘‘आतंकवादी एक सुन्दर उपवन की खरपतवार या खोटी उपज के समान है। यदि इसे काटा जाए तो यह दुबारा आ जाएगी अत: इसे जड़ सहित उखाड़ा जाना चाहिए।’’ बेरिस ने आतंकवादी कौन है ? इस प्रश्न पर विचार करते हुए कहा गया है कि आतंकवादी एक विशिष्ट मानसिकता को लिए हुए होता है और यह मानसिकता होती है कुछ निश्चित मूल्यों के प्रति उसका समर्पण और इन मूल्यों को पूरा करने के लिए हिंसक रास्ता अपनाता है। आतंकवादी अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में होते है क्योंकि एक समाज में सभी आतंकवादी नहीं होते हैं।

आतंकवाद की विशेषताएं 

आतंकवाद की विशेषताएं मानी जा सकती है -

1. राज्य एवं समाज के विरूद्ध केन्द्रित

आतंकवाद का निशाना समाज, समुदाय या राज्य होता है। आधुनिक समय में राज्य आतंकवाद का सर्वप्रमुख निशाना बनता जा रहा है। वस्तुत:, आतंकवादियों की जिस प्रकार की राजनीतिक माÍग या अपेक्षाएÍ होती है, उनकी पूर्ति राज्य ही कर सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि आतंकवादियों की माग राजनीतिक स्वायत्तता प्राप्त करनाा है तो उस पर विचार केवल राज्य ही कर सकता है। इसलिए आतंकवादी संगठन यह मानते हैं कि उनकी लड़ाई राज्य अथवा समाज से है। अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद का जहाÍ तक प्रश्न है उसका निशाना पूरी तरह राज्य ही है।

2. राजनीतिक उद्देश्य

आतंकवाद एवं सामान्य हिंसक कार्यवाही में एक बड़ा अन्तर यह है कि हिंसा की कार्यवाही किसी तात्कालिक उत्तेजनावश व एक सीमित उद्देश्य की पूर्ति के लिए हो सकती है। परन्तु आतंकवाद राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए फैलाया जाता है। ये राजनीतिक उद्देश्य एक लम्बी प्रक्रिया में निर्धारित होते हैं तथा इनको पूरा करने के लिए एक रणनीति के रूप में आतंकवाद का सहारा लिया जाता है। इस प्रकार आतंकवाद एक सोची-समझी चाल कही जा सकती है।

आतंकवादियों के राजनीतिक उद्देश्य क्या हो सकते है। इसके बारे में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। ये उद्देश्य राजनीतिक प्रतिनिधित्व अथवा कतिपय राजनीतिक माÍगों की पूर्ति से लेकर व्यापक राजनीतिक उद्देश्यों तक विस्तृत हो सकते है जिसमें पृथकतावादी आन्दोलन भी सम्मिलित है।

3. अवैध व गैर-कानूनी

आतंकवादी घटना अवैध व गैर-कानूनी है। यद्यपि आतंकवादी संगठन अपनी माÍग और उसके लिए की जा रही कार्यवाही को उचित ठहरा सकते हैं अथवा जो लोग या जो राज्य किसी आतंकवादी घटना का समर्थन करते हैं वे उनकी मागों को न्यायोचित ठहरा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी कार्यवाही को पाकिस्तान उचित ठहरा सकता है लेकिन यह गलत है। वास्तविकता यह है कि आतंकवादी कृत्य मूलत: अवैध या गैर कानूनी है। इसका कारण यह है कि आतंकवाद का लक्ष्य हिंसा, भय व हत्या का वातावरण बनाना है। जबकि किसी भी व्यक्ति या संगठन को यह अधिकार प्राप्त नहीं होना चाहिए कि वह अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए दूसरों के जीवन को नष्ट करे। यह बर्बरतापूर्ण कृत्य है। अत: इसको न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।

4. भय व आतंक का वातावरण

आतंकवाद की रणनीति हिंसा व भय का वातावरण बनाने की होती है। इस प्रकार व्यक्ति उनका निशाना होता है क्योंकि आतंकवादी यह मानते हैं कि राज्य का प्राथमिक लक्ष्य व्यक्ति की सुरक्षा व कल्याण है। अत: व्यक्ति की सुरक्षा के हनन का अभिप्राय होगा राज्य को चुनौती देना। आतंकवादी समाज में हिंसा, हत्या लूटपाट व इस प्रकार की अन्य कार्यवाही के माध्यम से राज्य का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास करते हैं तथा िफर राज्य के साथ सौदेबाजी के माध्यम से अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति करना चाहते हैं। इस प्रक्रिया में बहुधा यह समझा जाता है कि जितना अधिक हिंसा व आतंक का वातावरण बनाया जा सकेगा उतना ही राज्य पर दबाव बनेगा और राज्य उनकी माÍगों की पूर्ति करने की स्थिति में आयेगा। इस प्रकार आतंकवादियों के लिए भय व आतंक राज्य पर दबाव डालने के लिए एक हथियार के रूप में है। इसलिए आतंकवादियों द्वारा की गई हत्या व लूटपाट की योजना विस्तृत एवम् एक सोची-समझी चाल है।

5. जन सामान्य की लाचारी

आतंकवादी संगठनों की एक विशेषता यह भी देखी जा सकती है कि वे जन सामान्य को एक निस्सहाय व लाचारी की स्थिति में लाने का प्रयास करते है। उनकी रणनीति यह होती है कि इतना अधिक हिंसा का वातावरण कर दिया जाए कि व्यक्ति निराश व असहाय हो जाए। इस स्थिति में या तो व्यक्ति राज्य के विरूद्ध विद्रोह कर डालेंगे या िफर राज्य पर दबाव डालेंगे कि वह आतंकवादियों की माÍग पूरी करे। दोनों परिस्थितियों में आतंकवादी लाभ की स्थिति में होंगे, क्योंकि यदि जन सामान्य विरोध की स्थिति में आ जाता है तो उसे राज्य की स्थिति कमजारे होती है। राज्य की स्थिति कमजोर होने से आतंकवादी उस पर आसानी से दबाव डाल कसते हैं।

6. अतिशीघ्र सरकारी तंत्र का ध्यान अपनी ओर खींचना

आधुनिक समय में आतंकवादियों का मुख्य ध्येय यह हो गया है कि वे शीघ्रता शीघ्र सरकारी तंत्र का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर सकें। इसलिए वे अपने आक्रमण के लिए या कार्यवाही के लिए ऐसा लक्ष्य चुनते हैं जिससे कि सरकार तुरन्त प्रतिक्रिया के लिए बाध्य हो जाए। उदाहरण के तौर पर बड़े राजनीतिक नेताओं की हत्या, महत्त्वपूर्ण सरकारी संस्थानों पर आक्रमण, वायुयानों का अपहरण एवं भीड़भाड़ वाले स्थानों पर आक्रमण करके अपने इस ध्येय को पूरा करने की कोशिश करते है।

7. व्यापक समर्थन

आतंकवाद चाहे वह राष्ट्रीय हो या अन्तर्राष्ट्रीय एक व्यापक समर्थन का लक्ष्य रखता है, जिससे कि वह अपनी माÍगों की और अधिक दबावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत कर सके। न केवल अन्तर्राष्ट्रीय बल्कि राष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों के सन्दर्भ में भी यह देखा गया है कि वे कार्यवाही एक स्थान पर करते हैं लेकिन उनको संरक्षण अन्य देशों में प्राप्त रहता है। इसी प्रकार आधुनिक आतंकवाद की एक विशेषता यह बन गई है कि वे आधुनिकतम अस्त्र-शस्त्रों व नवीनतम प्रविधियों को उपयोग में लाने का प्रयास करते हैं।

8. अराजकता

आतंकवादियों का उद्देश्य समाज में अराजकता फैलाना होता है। वस्तुत: अराजकतावादी अपने आपको सबसे अच्छा आतंकवादी मानते हैं। आतंकवादी अराजकता फैलाकर यह सिद्ध करना चाहते है कि व राज्य की सत्ता को स्वीकार नहीं करते क्योंकि यह राज्य सत्ता उनके हितों के प्रतिकूल कार्य कर रही है।

9. कानून एवं व्यवस्था का उल्लंघन

आतंकवादी जानबूझकर राज्य के कानून एवं व्यवस्था का उल्लंघन करना चाहते हैं। इसके माध्यम से भी वे यह सिद्धा करना चाहते हैं कि आतंकवादी राज्य के आदेशों को स्वीकार नहीं करते। वस्तुत: आतंकवादी इस सिद्धान्त को लेकन चलते हैं कि कानून अन्यायपूर्ण हैं और उन पर जबरदस्ती थोपे गये हैं।

10. विचारधारा

आतंकवाद में विचारधारा की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। तभी आतंकवादी संगठन विचारधारा से अभिप्रेरित होते है। और इस आधार पर वे अपने उद्देश्यों व रणनीति को निश्चित करते हैं।

आतंकवाद के उद्देश्य

आतंकवाद की विविध विशेषताओं के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि आतंकवाद भय पर आधारित कार्यवाही है, जिसका उद्देश्य आने निहित स्वार्थों की पूर्ति हेतु शासन तंत्र का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना होता है।

आतंकवाद आधुनिक समय में एक व्यापक प्रक्रिया बन चुकी है। एक राष्ट्रीय घटना से लेकर अन्तर्राष्ट्रीय प्रक्रिया तक आतंकवाद के विविध स्वरूप स्पष्टतः दृष्टिगोचर होते हैं। आतंकवाद चाहे किसी भी स्तर का हो उनमें कुछ सामान्य प्रवृत्तियों के बावजूद उद्देश्यात्मक विविधता देखी जा सकती है। आतंकवाद के सामान्यतः निम्नलिखित उद्देश्य माने जा सकते हैं :-
  1. आतंकवाद का उद्देश्य कतिपय निश्चय उद्देश्यों की पूर्ति करना होता है जैसे कि बंदियों की रिहाई, िफरौती की रकम वसूल करना, आदि। आतंकवादी अपनी कुछ कार्यवाहियों के माध्यम से इस प्रकार की नाटकीय स्थिति उत्पन्न कर देते है, ताकि सरकार तुरन्त प्रभाव से उनकी माÍगों को स्वीकार करने के लिए बाध्य हो जाए। इस प्रकार के भयपूर्ण नाटकीय स्थिति पैदा करना आतंकवादियों की अपनी रणनीति होती है।
  2. आतंकवादियों का एक उद्देश्य अपने लक्ष्यों को विचारधारा के सन्दर्भ में व्यापक प्रचार-प्रसार करना होता है। आतंकवादी चाहते हैं कि आतंकवाद की कार्यवाही के माध्यम से लोग उनके उद्देश्यों के बारे में जाने। इस प्रकार जितनी अधिक उग्र-आतंकवादी कार्यवाही होगी उतना ही अधिक उनका प्रचार होगा। इस प्रकार आतंकवादी आतंक व भय के माध्यम से अपने उद्देश्य एवं विचारों को प्रसारित-प्रचारित करना चाहते हैं। 
  3. आतंकवाद का उद्देश्य वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक सत्ता का विघटन व समाज में हताशा पैदा करना होता है। वस्तुत: यह अराजकतावादी, क्रांतिवादी व पृथकतावादी आतंकवादियों की एक विशेषता है। बहुत से क्रांतिकारी आतंकवादी इसलिए हिंसा का सहारा लेते है क्योंकि वे मानते हैं, कि इससे जन सामान्य को क्रांति के लिए तैयार किया जा सकेगा। 
  4. आतंकवाद का उद्देश्य बदले की भावना भी हो सकती है। आतंकवादी बदले की कार्यवाही के अन्तर्गत कानून व व्यवस्था का उल्लंघन, सरकारी अधिकारियों का अपहरण, विदेशियों को बन्दी बनाना, आदि कार्यवाही इस उद्देश्य से करते हैं कि जिससे कि सरकार उनके सम्बन्ध में तुरन्त प्रतिक्रिया जाहिर करे। 
  5. राज्य द्वारा पोषित आतंकवाद का उद्देश्य दूसरे राज्य में अव्यवस्था व आंतरिक संकट उत्पन्न करना हो सकता है। ऐसा राज्य न केवल आतंकवादी संगठनों को पोषण व सहायता करता है, अपितु उनको दूसरे राज्य पर आक्रमण करने के लिए उकसाता या प्रेरित भी करता है। बहुत से राज्यों में इस प्रकार के अभिकरणों का गठन कर लिया गया है जो कि आतंकवादी संगठनों व गतिविधियों का संचालन करते हैं। वस्तुत: जो राज्य आतंकवाद का पोषण कर रहे हैं वे सामाजिक हितों की पूर्ति के लिए इसे एक यंत्र के रूप में प्रयोग का प्रयास कर रहे हैं। 
  6. आतंकवाद का एक उद्देश्य दंड देना भी हो सकता है। बहुत से आतंकवादी इसलिए किसी बड़े नेता की हत्या कर देते हैं क्योंकि उनकी निगाह में उसने कोई सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक अपराध किया था इसलिए उसको दंड देना आवश्यक था।

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