बहुजन समाज पार्टी की स्थापना कब हुई और किसने की?

अनुक्रम
बहुजन समाज पार्टी की स्थापना
कांशीराम

कांशीराम ने डॉ0 भीम राव अम्बेडकर की जयन्ती पर 14 अप्रैल 1984 को बहुजन समाज पार्टी नामक एक राजनीतिक पार्टी की विधिवत स्थापना की। इस प्रकार बहुजन समाज को राजसत्ता पर काविज करने के लिए बहुजन समाज पार्टी के रूप में एक ऐसे राजनीतिक दल की स्थापना हुई, जिसमे नेतृत्व से लेकर साधारण कार्यकर्ता तक दलित वर्ग का नियंत्रण था। इस देश में पहले से ही बहुत सी पार्टियाँ है जिसमें छ: राष्ट्रीय स्तर की पार्टियाँ हैं लेकिन प्राय: सभी राष्ट्रीय पार्टियों की बागडोर सवर्ण जातियों के हाथों में रही है जिन्हें वे अपने-अपने हित में चलाते रहे है। दलित शोषित वर्ग को इन पार्टियों द्वारा सदैव से ही गुमराह किया जाता रहा है। कांशीराम ने दलितों शोषित को एक सूत्र में बांधने तथा उनको उनका राजनीतिक हक दिलाने के लिए ही बसपा का गठन किया। 

बहुजन समाज पार्टी का प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन लाल किले के सामने वाले मैदान में 23 व 24 जून 1984 को हुआ।
‘बहुजन समाज अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों से बना है। बहुजन समाज के लोगों की संख्या इस देश की आबादी का 85 प्रतिशत है, इसलिए इस दलित शोषित समाज को हम बहुजन समाज कहते है। यह समाज कोई अपने आप नहीं बना है। ब्राह्मणवाद के आधार पर जिस व्यवस्था का निर्माण हुआ उस समाज रचना के आधार पर इन जातियों को गिराया गया तथा इसके साथ धोखा और अपमान हुआ है। बहुजन समाज ऐसी छ: हजार जातियों का समाज है। वैसे इस समाज को बताते समय हम जाति-पाति की बाते करते है परन्तु इसका मतबल यह नहीं है कि इस पार्टी को बनाने वाले बहुजन समाज के लोग जातिवादी है।’’

बहुजन समाज पार्टी का उद्देश्य

‘‘बहुजन समाज पार्टी दबे-कुचले बहुजन समाज के लोगों की एक ऐतिहासिक जरूरत थी। हम देखते है कि आज बहुजन समाज का पहला अंग या सबसे अधिक दबा-कुचला अंग जिसे हम अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति या बहुत से क्षेत्रों में हरिजन, आदिवासी भी कहते है। इसके लिए जो कानून में सुधार आया है और यह सुधार भी अपने आप नहीं आया है बल्कि हमारे बुजुर्गो की कोशिशों से लम्बे अर्से के संघर्ष से और खास कर डॉ0 बी0 आर0 अम्बेडकर की कोशिशों से सुधार आया है। कानून में तो सुधार जरूर आया लेकिन इस सुधरे हुए कानून को लाग ू नहीं किया जा सका। इस कानून को लाग ू करने के लिए और इन पर होने वाले अन्याय-अत्याचार को समाप्त करने या उनका मुकाबला करने के लिए ऐसी पार्टी की नितांत आवश्यकता थी। जिस प्रकार इस देश में नया संविधान लागू होने के बाद राजनैतिक क्षेत्र में बराबरी है उसी प्रकार सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में भी बहुजन समाज पार्टी बराबरी लाना चाहती है। 26 जनवरी 1950 को डॉ0 भीमराव अम्बेडकर ने संविधान लागू होने के अवसर पर बताया था कि हम दो तरफा जिन्दगी में कदम रखने वाले है। एक तरफ राजनीति में सबकी बराबरी होगी एक आदमी का एक वोट और एक वोट की कीमत एक ही होगी। दूसरी तरफ सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में जो गैर बराबरी ब्राह्मणवाद के आधार पर हजारों वर्षों से चली आ रही है, हमारे लिए बहुत आवश्यक हो जाता है कि इस गैर बराबरी को बहुत जल्द दूर किया जाय।’’

बहुजन समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह
बहुजन समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह

बहुजन समाज की आवाज को बुलन्द करना तथा संसदीय राजनीति में इनकी सक्रियता सुनिश्चित करना बसपा का उद्देश्य है। पार्टी के गठन की घोषणा के समय इसके निम्नलिखित उद्देश्य बताये गये-
  1. बहुजन समाज के सम्पूर्ण शोषण और दमन के खिलाफ बगावत करना ही बहुजन समाज पार्टी का उद्देश्य है।
  2. जिस दलित मजलूम का आज तक आंसू नहीं पोछा गया ऐसे लोगों के आंसू पोछने का कार्य बहुजन समाज पार्टी करेगी।
  3. बहुजन समाज पार्टी वह पार्टी है जो मनी, माफिया और मीडिया को आधार बनाकर राजनीति नहीं करती है।
  4. बहुजन समाज पार्टी वह पार्टी है जो ब्राह्मणवादी व्यवस्था के आधार पर 6747 जातियों में से 256 उपजातियों में विभाजित लोगों को एक करने का कार्य करेगी।
  5. बहुजन समाज पार्टी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक वर्ग, मुस्लिम, सिख, इसाई, बौद्ध, पारसी, जैन जिसकी संख्या 85 प्रतिशत है जो अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं करते उन्हें सुरक्षा प्रदान करना है।
बहुजन समाज पार्टी चूंकि दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यक वर्गों के हितों के संघर्ष की पार्टी है तथा ये ब्राह्मणवाद और सवर्णो से पीड़ित रहे हैं, इसलिए इस पार्टी के सदस्यों को ऊँची जाति से किसी भी प्रकार का सम्बन्ध रखने की मनाही थी। जबकि औपचारिक रूप से बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता जाति निरपेक्ष है। कांशीराम कहते थे कि सवर्ण बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो सकते है किन्तु नेतृत्व उनके हाथों में नहीं रहेगा।’’

विगत अनुभवों को ध्यान में रखते हुए बहुजन समाज पार्टी के सामाजिक और आर्थिक मोर्चों पर विशाल आंदोलन का उद्देश्य बहुजन समाज का सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक उत्थान है। उन दोनों आंदोलनों की रूपरेखा गम्भीर चिंतन, पर्याप्त विचार-विमर्श और लम्बे अनुभवों के बाद बनायी गयी है। सदियों पुरानी साामजिक बुराईयों को दूर करने के लिए प्रभावशाली और लम्बे उपचार की आवश्यकता है। अत: आने वाले समय में हमें संघर्ष के लिए तैयार रहना है। 15 अगस्त 1988 से 15 अगस्त 1989 तक के एक वर्ष चलाये गये संघर्शपूर्ण आंदोलन को सामाजिक रूपान्तरण आंदोलन का नाम दिया गया जो निम्नलिखित है-
  1. आत्म-सम्मान के लिए संघर्ष।
  2. स्वतंत्रता के लिए संघर्ष।
  3. समानता के लिए संघर्ष।
  4. अस्पृश्यता, अन्याय, अत्याचार और आतंक के विरूद्ध संघर्ष।’’

लोकसभा चुनावों में बसपा का प्रदर्शन -

दिसम्बर 1984 के लोकसभा आम चुनाव में बहुजन समाज पार्टी अपंजीकृत राजनीतिक दल के रूप में भाग ली। इस चुनाव में उसे 10.05 लाख वोट प्राप्त हुए और उसे एक भी सीटों पर विजय प्राप्त नहीं हो सकी किन्तु पार्टी जनमानस में अपने नाम का प्रचार-प्रसार करने में सफल रही।’’2 नवम्बर 1989 में लोकसभा के आम चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को कुल 9.5 प्रतिशत मत प्राप्त हुए और दो सीटों पर सफलता मिली।1 1991 मे सम्पन्न 10वीं लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को कुल 11 प्रतिशत मत प्राप्त हुए तथा उसे मात्र 01 सीट मिली।’’

मई 1996 में सम्पन्न हुए 11वीं लोकसभा के आम चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को कुल वैध मतों का 20.60 प्रतिशत प्राप्त हुआ और उसे 6 सीटों पर विजय मिली। 12वीं लोकसभा के लिए फरवरी 1998 मे  लोकसभा के आम चुनाव मे बहुजन समाज पार्टी को 20.90 प्रतिशत मत प्राप्त हुए तथा उसे 5 सीटें मिली। 13वीं लोकसभा चुनाव फरवरी 1999 में बहुजन समाज पार्टी को 22.04 प्रतिशत वोटों के साथ 14 सीटों पर विजय प्राप्त हुयी। 14वीं लोकसभा के लिए हुए आम चुनाव अप्रैल/मई 2004 में बहुजन समाज पार्टी को कुल 24.67 प्रतिशत मत मिले तथा उसे 19 सीटों पर विजय प्राप्त हुयी। 15वीं लोकसभा 2009 मे बहुजन समाज पार्टी को कुल 27.42 प्रतिशत मत प्राप्त हुए तथा उसे कुल 20 सीटें प्राप्त हुयी।’’ 16वीं लोक सभा मई 2014 के आम चुनाव में बहुजन समाज पार्टी एक भी सीट नहीं प्राप्त कर सकी जबकि उसको कुल डाले गये वैध मतों का 19.07 प्रतिशत मत मिले थे।’’

सन्दर्भ -
  1. Statical Report on General Election -2009 Election Commission of India New Delhi.
  2. Statical Report on General Election -1991 Election Commission of India New Delhi.
  3. राजकिषोर : ‘हरिजन से दलित’ वाणी प्रकाशन, नयी दिल्ली- 2004, पृ0 82.
  4. ए0 आर0 अकेला : ‘कांशीराम प्रेस के आइने में’, आनन्द साहित्य भवन सिद्धार्थ मार्ग अलीगढ़ - 945, पृ0 17.
  5. ए0 आर0 अकेला : ‘कांशीराम प्रेस के आइन में’, आनन्द साहित्य भवन सिद्धार्थ मार्ग अलीगढ़-1945, पृ0 19.
  6. आर0जे0 आजाद : ‘माननीय कांशीराम और उनकी पार्टी’, जिला कार्यालय बसपा, महराजगंज गोरखपुर- 1990 पृ0 55.
  7. बसपा केन्द्रीय कार्यालय द्वारा प्रकाशित एवं प्रचारित, वैदिक मुद्रालय नई दिल्ली -1989.
  8. कु0 मायावती : ‘मेरे संघर्षमय जीवन एवं बहुजन मूवमेन्ट का सफरनामा भाग-3’, बसपा केन्द्रीय कार्यालय, नयी दिल्ली- 15 फरवरी, 2008, पृ0 1094.
  9. कु0 मायावती : ‘मेरे संघर्षमय जीवन एवं बहुजन मूवमेन्ट का सफरनामा’ बसपा केन्द्रीय कार्यालय, नई दिल्ली-2008, पृ0 1094-1095.
  10. कु0 मायावती : ‘ मेरे संघर्षमय जीवन एवं बहुजन मूवमेन्ट का सफरनामा’ बसपा केन्द्रीय कार्यालय, नई दिल्ली- 2008, पृ0 1094-1095.
  11. हिन्दुस्तान समाचार पत्र : वाराणसी संस्करण, रविवार 17 मई, 2009, पृ0 2.
  12. निर्वाचन आयोग, नयी दिल्ली द्वारा घोषित परिणाम, दैनिक जागरण समाचार पत्र, वाराणसी, संस्करण, 17 मई 2014.

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