समाजवादी पार्टी का इतिहास

समाजवादी पार्टी का गठन 4-5 नवम्बर 1992 ई0 को लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय स्थापना सम्मेलन में हुआ। इस सम्मलेन में सर्वसम्मति से मुलायम सिंह यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया तथा उन्हें पार्टी के गठन के लिए अधिकृत किया गया। समाजवादी पार्टी की स्थापना के समय से ही कुछ लोग प्रयासरत थे कि समाजवादी पार्टी न बन सके। इसलिए समाजवादी पार्टी की स्थापना को लेकर चुनाव आयोग और माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में मुकदमा दायर किया गया कि समाजवादी पार्टी के नाम के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाय। कुछ दिनों तक समाजवादी पार्टी को समाजवादी पार्टी (एम0) के नाम से काम करना पड़ा परन्तु अन्त में उच्च न्यायालय व चुनाव आयोग दोनों में ही सफलता मिली। समाजवादी पार्टी की स्थापना जब की गयी तब यह कहा जा रहा था कि इसने (पार्टी ने) आत्म हत्या की ओर कदम बढ़ा लिया है। परन्तु थोड़े दिनों में ही लोग जुड़ते गये और निरन्तर पार्टी का विस्तार होता गया। 26 फरवरी 1992 ई0 को रघु ठाकुर ने अपने साथियों के साथ समाजवादी पार्टी में विलय का फैसला किया।

समाजवादी पार्टी की स्थापना के बाद पार्टी के कार्यकारिणी की पहली बैठक 3-4 दिसम्बर 1992 को दिल्ली में की गयी। इस समय समूचा देश साम्प्रदायिकता की आग मे जल रहा था। समाजवादी पार्टी ने यह महसूस किया कि पार्टी के सामने पहला लक्ष्य उत्तर प्रदेश से साम्प्रदायिक शक्तियों को समाप्त करना है। 6 दिसम्बर की घटना के बाद पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक पटना में आयोजित की गयी और पार्टी ने साम्प्रदायिक शक्तियों को परास्त करने का निर्णय लिया। यह कार्यकारिणी की दूसरी बैठक थी। इसमें पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर फैलाने का निर्णय लिया गया। समाजवादी पार्टी ने मंसूरी और देहरादून मे 15 जुलाई से 5 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जिसमें उत्तर प्रदेश से लगभग 1500 कार्यकर्ताओं ने हिस्सेदारी की। सभी प्रशिक्षार्थी पाँच दिनों तक लगातार साथ रहे और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव पूरे 5 दिनो तक मसूरी में रहे। इस शिविर में भिन्न-भिन्न विषयों पर राजकिषोर, मस्तराम कपूर, कपिल देव सिंह, रजनी कान्त वर्मा, प्रोफेसर ईश्वरी प्रसाद, जनेश्वर मिश्र, रघु ठाकुर आदि ने अपने विचार रखे। इस शिविर के व्यवस्था संचालन मे रमाशंकर कौशिक, बलराम यादव एवं विनोद बथवाल की भूमिका सराहनीय रही। शिविर का उद्घाटन और समापन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव द्वारा किया गया। यह अपने आप में एक अनूठा प्रयोग था और इस शिविर ने कार्यकर्ताओं में एक नयी जान फूँक दी थी।

समाजवादी पार्टी



समाजवादी पार्टी अपने स्थापना काल से ही अत्यन्त परिश्रमी रही है और इसका कार्य भी संतोषजनक रहा है जिसके परिणामस्वरूप पार्टी को अपने संगठन के एक वर्ष बाद ही उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने में सफलता मिली। इसके पीछे राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव का नेतृत्व और पार्टी के कार्यकर्ताओं की मेहनत अभिनन्दनीय रही है। समूचे देष में लोग भाजपा की वापसी के प्रति आशंकित थे परन्तु मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के पार्टी कार्यकर्ताओं ने यह सिद्ध कर दिया कि अगर कार्यकर्ता संकल्प के साथ जुट जाय तो समाजवदी पार्टी पूरे देष में एक विकल्प के रूप में खड़ी हो सकती है। मात्र 23 माह में पार्टी का राष्ट्रीय स्वरूप उभर कर सामने आया और जो लोग पहले उगंली उठाते थे कि समाजवादी पार्टी मात्र उत्तर प्रदेश की पार्टी है। वे लोग अब पार्टी के राष्ट्रीय विस्तार और कार्यशैली से स्तब्ध हैं।

वर्तमान में समाजवादी पार्टी, भारतीय निर्वाचन आयोग के मानको के अनुसार एक राज्य स्तरीय राजनीतिक दल है। समाजवादी पार्टी देश के सबसे बडे़ राज्य उत्तर-प्रदेश में सत्तासीन एवं सक्रिय है। लेकिन इसका संगठन समूचे देश में फैला हुआ है। असम में समाजवादी पार्टी का संगठन असम राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री गोलब बारबोरा के नेतृत्व में सक्रिय हुआ। गोलब बारबोरा भारतीय जनता पार्टी के नेता थे। वे 12 मार्च 1978 से 4 दिसम्बर 1979 तक असम के मुख्यमंत्री रहे। बरबोरा समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव से प्रभावित एवं उनके, अनुगामी थे। गोलब बारबोरा असम में समाजवादी पार्टी के गठन से लेकर अपने मृत्यु (19 मार्च 2006) तक पार्टी को अपना नेतृत्व प्रदान करत े रहें।

समाजवादी पार्टी ने केरल राज्य में पार्टी के कार्यकारिणी का गठन केरल के पूर्व सांसद धप्पन थामस की अध्यक्षता में गठित की। केरल में समाजवादी पार्टी के प्रभाव एवं संगठन को मजबूत करने के लिए हरिमोहन सिंह का योगदान सराहनीय रहा है। वर्तमान मे केरल राज्य में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष पी0 एम0 हरिष के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी अपना कार्य कर रही है। केरल में समाजवादी पार्टी युवजन सभा, समाजवादी विद्याथ्र्ाी सभा समाजवादी पार्टी के अवयव के रूप में सक्रिय है।

मणिपुर में वयोवृद्ध समाजवादी नेता व डॉ0 लोहिया के सहयोगी टी0 निभाई सिंह के नते ृत्व में समाजवादी पार्टी सक्रिय रही है। इस समय डॉ0 धनंजय के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी मणिपुर में सक्रिय है।

चण्डीगढ में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष बी0 पी0 भारती रहे हैं। वे और रतन सिंह बागी ने चण्डीगढ़ में सदस्यता अभियान चलाया। पश्चिम बंगाल के किरणमय नन्द समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बनाये गये हैं। उनकी सोषलिस्ट पार्टी का समाजवादी पार्टी में विलय हो चुका है। किरणमय नंद को पश्चिम बंगाल में समाजवादी पार्टी को संगठित और सक्रिय करने की जिम्मेदारी दी गयी, इसके पूर्व बंगाल के हाथों में थी। विजय उपाध्याय ने समाजवादी पार्टी से अपने आप को अलग कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया है। पश्चिम बंगाल मे समाजवादी पार्टी वामपंथी सरकार की हिस्सेदार थी। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव किरणमय नन्दा की निगरानी में पश्चिम बंगाल में सदस्यता अभियान चलाया गया और परिणाम सन्तोश जनक रहा और उस समय पश्चिम बंगाल मे समाजवादी पार्टी से लगभग 28 हजार लोग जुड़े।

कर्नाटक समाजवादी पार्टी का अध्यक्ष वी0 रोमेगोड़ा को बनाया गया तथा कर्नाटक पार्टी शाखा में अभियान समिति का अध्यक्ष पूर्व विधायक वाई0 के0 रमैया को बनाया गया। इन दोनों नेताओं ने कर्नाटक राज्य मे समाजवादी पार्टी के संगठन को मजबूती प्रदान करने का कार्य किया। 18 सितम्बर 1994 को वाई0 के0 रमैया ने तुमकुर मे एक बड़ी रैली का आयोजन किया जिसमें लगभग 25 हजार लोगों ने हिस्सेदारी ली। यह कर्नाटक में समाजवादी पार्टी की बढ़ी हुई शक्ति का परिचायक रहा। समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सी0 पी0 योगेश्वर ने कर्नाटक की चन्ना पटना सीट पर जीत दर्ज कराई। इसके साथ ही समाजवादी पार्टी ने कर्नाटक राज्य विधान सभा में अपना खाता खोल लिया। इस दक्षिण भारतीय राज्य में समाजवादी पार्टी का खाता खोलने वाले योगेश्वर ने जनता दल (सेक्यूलर) की राज्य इकाई के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एच0 डी0 कुमार स्वामी की पत्नी अनिता कुमार स्वामी को पराजित किया।

डॉ0 राम मनोहर लोहिया के निकट सहयोगी बद्री विशाल पित्ती को समाजवादी पार्टी में शामिल होने से पार्टी को मजबूती मिली। जिन्होंने आन्ध्र प्रदेश के अनेक जिलों में समाजवादी पार्टी का संगठनात्मक ढॉचा खड़ा किया और इन ढॉचों के माध्यम से सदस्यता अभियान चलाया। आन्ध्र प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष जे0 वीर स्वामी को समाजवादी पार्टी के राज्य इकाई का अध्यक्ष बनाया गया। आन्ध्र प्रदेश सरकार के पूर्व गृहमंत्री प्रभाकर रेड्डी को अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया गया। ‘‘समाजवादी पार्टी अब आन्ध्र प्रदेश में अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

तिरूपति के दौरे पर आये उत्तर प्रदेश सरकार के विजली मंत्री शैलेन्द्र यादव ने आन्ध्र प्रदेश जिला अध्यक्षों के साथ बैठक की और प्रदेश में समाजवादी पार्टी की मजबूती के लिए युवाओं से आगे आने का आवाहन किया। आन्ध्र प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने 13 जिलों में सदस्यता अभियान का कार्य पूरा कर लिया है। आने वाले लोकसभा और विधान सभा चुनावों में समाजवादी पार्टी अपने उम्मीदवार खड़ा करेगी।

महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के प्रचार-प्रसार को और मजबूती प्रदान करने के लिए विदर्भ मराठ वाड़ा और मुम्बई की पृथक शाखाएँ गठित की गयी। विदर्भ में समाजवादी पार्टी का नेतृत्व डॉ0 शंकर राव चोरवारे को सौपा गया। चोरवारे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्त्त्ाा और लोग समाजवादी पार्टी से जुड़े। पृथक विदर्भ आन्दोलन के प्रमुख नेता रहे गुणवत नागपुरे, नागपुर के पूर्व पार्षद सुरेन्द्र शुक्ला और नागपुर विश्वविद्यालय के भूतपूर्व कुलपति दादा साहब कालमेघ जैसे लोगों के समाजवादी पार्टी में सम्मिलित होने से पार्टी को न केवल बल मिला बल्कि उसके संगठनात्मक ढ़ाचे में सक्रियता भी बढ़ी।

मराठवाड़ा में समाजवादी पार्टी के प्रभाव को बढ़ाने के लिए वहाँ के विख्यात एडवोकेट रामराव नागरगोजे के संयोजकत्व में पार्टी के प्रसार-प्रचार का कार्य प्रारम्भ हुआ। औरंगाबाद, बीड़, जालना, परभणी और उस्मानाबाद इन पाँच जिलों में जिला समितियों का गठन किया गया। इन पाँचों जिलों में जिला कार्यालय खोला गया तथा सदस्यता अभियान चलाया गया। दादा साहब कालमेघ को समाजवादी पार्टी के अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया गया।

मुम्बई में समाजवादी पार्टी की अध्यक्षता सी0 मार्टिस को सौपी गयी। वर्तमान में मुम्बई/महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी का अध्यक्ष अबू असीम आजमीं को बनाया गया है। अबू असीम आजमीं ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के साथ मिलकर अब्दुल कादिर चौधरी को महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी का प्रवक्ता नियुक्त किया है। मिराज सिद्धिकी को महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी का महासचिव बनाया गया है। तथा शाहनवाज खान को मुलायम युथ व्रिगेड का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।’’ मुम्बई/महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अबु असीम आजमी युवाओं को समाजवादी पार्टी से जोड़ने के लिए बड़ा आन्दोलन चला रहे है। उनका मानना है कि ‘‘किसी भी देश को बर्बाद करने में सबसे बड़ा योगदान उन युवाओं और पढे लिखे विद्वान लोगों का होता है। जो कहते है कि मुझे राजनीति से नफरत है। याद रखना राजनीति ही देश का भविष्य तय करती है।’’

समाजवादी पार्टी में अपने गठन के प्रारम्भ, मार्च 1993 में ही मध्य प्रदेश इकाई का गठन कर दिया। भोपाल में पार्टी का प्रदेश कार्यालय खोला गया। मध्यप्रदेष विधान सभा चुनाव में 100 से अधिक प्रत्याशी खड़े किये। मध्य प्रदेश में कुल 42 जिलों में जिला इकाइयों एवं तदर्थ समितियों का गठन किया गया है। सदस्यता अभियान चलाया गया। यद्यपि सदस्यता निर्धारित लक्ष्य की तुलना में काफी कम रही है। इस समय मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष अशोक सिंह यादव को बनाया गया है। मध्य प्रदेश समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। तथा अन्य सहकारी समितियों का गठन किया गया है।’’ 2003 के विधान सभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को मध्यप्रदेष विधान सभा चुनाव में 7 सीटों पर विजय प्राप्त हुयी थी।

राजस्थान मे समाजवादी पार्टी का गठन रघुवीर शरण निर्मल की अध्यक्षता में हुआ। राजस्थान में समाजवादी पार्टी का प्रदेश कार्यालय जयपुर में स्थित है, जहाँ से सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। पदोन्नति में आरक्षण का विरोध कर रहे मिशन 72 के संयोजक हेजीनिय गलु शन बाघला का मानना है कि इस सम्बन्ध मे समाजवादी पार्टी का निर्णय हमारे विचार धारा से मैच खाता है। अत: हम मिशन 72 के माध्यम से राजस्थान में समाजवादी पार्टी को अपना समर्थन देगें। यही विचार राजस्थान समता मंच का भी है। राजस्थान समता मंच के अध्यक्ष पराषर नारायण शर्मा ने समाजवादी पार्टी के इस निर्णय का स्वागत किया। राजस्थान समाजवादी पार्टी के उपाध्यक्ष अनिल शेखावत का मानना है कि राजस्थान में समाजवादी पार्टी के संगठनात्मक ढॅाचे को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

हरियाणा में समाजवादी पार्टी का गठन मास्टर हुकुम सिंह की अध्यक्षता में हुआ। तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुलायम सिंह यादव ने सोनीपत, रेवाड़ी और कुरूक्षेत्र में विशाल जन सभाओं को सम्बोधित किया तथा प्रदेश कार्यालय के माध्यम से प्रदेश इकाई का गठन करके जिला इकाइयों एवं कार्यकारिणी का गठन किया। पंजाब में समाजवादी पार्टी सुरेन्द्र सिंह संधु की अध्यक्षता में अपना विस्तार प्रारम्भ कर सदस्यता अभियान चला रही है। बिहार में रामदेव सिंह यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी का गठन हुआ और पप्पू यादव ने सदस्यता अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया गया। रामदेव सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी का अध्यक्ष बनने के बाद नैतिकता के आधार पर सभा से इस्तीफा दे दिया और केवल समाजवादी पार्टी के लिए कार्य करने का वादा किया। समाजवादी पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने पटना, भागलपुर, समस्तीपुर आदि स्थानो पर विशाल जन सभाओं को सम्बोधित किया। बिहार में कई स्थानों पर कार्यकर्त्त्ाा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण शिविर में कमलेष्वरी शाह का योगदान सराहनीय रहा है।

बिहार राज्य के पटना में समाजवादी पार्टी का प्रदेश कार्यालय बनाया गया और जिला इकाइयों एवं कार्यकारिणीयों का गठन किया गया है। वर्तमान में बिहार समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष रामचन्द्र यादव है।

दिल्ली में समाजवादी पार्टी का गठन दिल्ली विधान सभा चुनाव 1994 के समय किया गया था। शुजाउद्दीन साजिद को दिल्ली समाजवादी पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। शुजाउद्दीन साजिद ने अपने नेतृत्व में दिल्ली में पार्टी के कार्यों के संचालन हेतु कार्यकारिणी का गठन किया। हिमांचल प्रदेश में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष विधि चन्द्र रहे और हरदयाल विधायक को हिमांचल प्रदेश का प्रभारी बनाया गया। हिमांचल प्रदेश मे समाजवादी पार्टी ने विधान सभा चुनाव में अपन े प्रत्याशी खड़े किये। समाजवादी पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष और महासचिव मुलायम सिंह यादव व रघु ठाकुर ने अनको सभाओं को सम्बोधित करने के साथ-साथ प्रदेश और जिला इकाइयों का भी गठन किया। 

सन्दर्भ -
  1. रजनी कान्त वर्मा : समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पारित प्रस्तावों का संकलन, नवम्बर 1992 से अप्रैल 2005 समाजवादी पार्टी 18 कापर निक्स लेन, नयी दिल्ली, पृ0 115-116.
  2. रजनी कान्त वर्मा : समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पारित प्रस्तावों का संकलन, नवम्बर 1992 से अप्रैल 2005 समाजवादी पार्टी 18 कापर निक्स लेन, नयी दिल्ली, पृ0 115-116. 
  3. मोहन सिंह : समाजवादी पोथी, नेल्को प्रिंटर्स एण्ड पब्लिषर्स लखनऊ, पृ0 78.
  4. समाजवादी पार्टी कार्यालय, 18 कापर निक्स लेन, नई दिल्ली।

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