मानसिक स्वास्थ्य की परिभाषा, उद्देश्य, प्रभावित करने वाले कारक

मानसिक स्वास्थ्य शब्द का जन्म येल विश्वविद्यालय के स्नातक क्लिफोर्ड बीयर्स की निजी जीवन की घटना से जुड़ा है, जब उन्होंने अपने घर की चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने का असफल प्रयास किया। अपने अनुभव से उन्होंने "A Mind that found it Self " नामक पुस्तक लिखी। इस पुस्तक ने विभिन्न मनोवैज्ञानिकों को मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में चिंतन करने पर विवश कर दिया।
 
मन के स्वरूप की विवेचनाओं के आधार पर अलग-अलग तरह से भारतीय और पश्चिमी सिद्धांतों में मानसिक स्वास्थ्य को परिभाषित किया गया है। मनोरोगों से युक्त मानसिक अवस्था को मानसिक स्वास्थ्य माना गया है परन्तु आधुनिक नैदानिक मनोविज्ञान समायोजन की क्षमता को मानसिक स्वास्थ्य की कसौटी मानता है। कुछ आधुनिक मनोविश्लेषकों ने इसे मानसिक एवं भावनात्मक आवेगों के संतुलन की क्षमता कहा है। 

मानसिक स्वास्थ्य की परिभाषा (definition of mental health)

मानसिक स्वास्थ्य के सम्बन्ध में विभिन्न विद्वानों द्वारा अनेक परिभाषायें दी गई हैं। इनमें से कुछ प्रमुख परिभाषाओं को निम्न प्रकार से बतलाया गया है:

हैडफील्ड के मतानुसार, ‘‘सम्पूर्ण व्यक्तित्व की पूर्ण एवं सन्तुलित क्रियाशीलता को मानसिक स्वास्थ्य कहते हैं।

क्रो व क्रो के शब्दों में, ‘‘मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान वह विज्ञान है जिसका संबंध मानव कल्याण से है और इसी से मानव संबंधों का संपूर्ण क्षेत्र प्रभावित होता है।

लैडेल के अनुसार, ‘‘मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ है वास्तविकता के धरातल पर वातावरण से पर्याप्त समायोजन करने की योग्यता’’। के.ए.मेनिंगर के शब्दों में, ‘‘मानसिक स्वास्थ्य, मनुष्यों का आपस में तथा मानव जगत के साथ समायोजन है’’। आर.सी.कुल्हन के मतानुसार, ‘‘मानसिक स्वास्थ्य एक उत्तम समायोजन है जो भग्नाशा से उत्पन्न तनाव को कम करता है तथा भग्नाशा को उत्पन्न करने वाली परिस्थितियों में रचनात्मक परिवर्तन करता है’’।

कुप्पूस्वामी के शब्दों में, ‘‘मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ दैनिक जीवन में भावनाओं, इच्छाओं, महत्वाकांक्षाओं एवं आदर्शों में संतुलन बनाए रखने की योग्यता है। इसका अर्थ जीवन की वास्तविकताओं का सामना करने तथा उनको स्वीकार करने की योग्यता है’’।

ल्यूकेन - ‘‘मानसिक रूप से स्वस्थ्य व्यक्ति वह है जो स्वयं सुखी है, अपने पड़ौस में शांति के साथ रहता है, अपने बालकों को स्वस्थ नागरिक बनाता है तथा इन मूलभूत कर्त्तव्यों को करने के पश्चात् भी जिसमें इतनी शक्ति बच जाती है कि वह समाज के हितार्थ कुछ कर सके’’।

मानसिक स्वास्थ्य के उद्देश्य (purpose of mental health)

  1. मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखना।
  2. मानसिक रोगों तथा विचारों से अपने को बचाना।
  3. मानसिक संघर्षों तथा तनाव से बचाव करना।
  4. मानसिक रोगों का प्रारंभिक उपचार करना।
  5. नकारात्मक सोच समाप्त कर भावनात्मक सोच उत्पन्न करना।
  6. आत्मविश्वास जाग्रत करने के अवसर प्रदान करना।
  7. मानसिक रोग के उपचार हेतु उपयोगी विधियों को प्रयोग में लाना।
  8. व्यक्तित्व को गतिशील बनाना।

मानसिक स्वास्थ्य उत्पन्न करने के साधन (means of mental health)

मानसिक स्वास्थ्य उत्पन्न करने के विभिन्न साधन हैं :
  1. स्वास्थ्य
  2. वातावरण
  3. मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति
  4. आत्मविश्वास की भावना
  5. सुरक्षा की भावना 

मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक (factors affecting mental health)

मानसिक स्वास्थ्य को एक कारक प्रभावित नहीं करता वरन् इसको प्रभावित करने वाले अनेक कारक हैं,
  1. जैविक कारक (Biological Factor)
  2. मनौवैज्ञानिक कारक (Psychological Factor)
  3. बहु-तत्व कारक (Multiple Factor)
  4. वंशानुगत कारक (Hereditary Factor)
  5. वातावरणीय कारक (Environmental Factor)
  6. आर्थिक कारक (Economic Factor)
  7. सामाजिक कारक (Social Factor)

(1) जैविक कारक (Biological Factor) - 

आइजनेक कहते हैं कि, जो मजबूत केन्द्रीय स्नायुमण्डल रखते हैं वे संघर्षपूर्ण स्थितियों पर आसानी से विजय प्राप्त कर लेते हैं और जो कमजोर तंत्र के होते हैं वे जरा सी परेशानी से घबरा जाते हैं। अत: बहुत सी बीमारियों का शिकार संतुलित भोजन के अभाव में हो जाता है। व्यक्ति के शरीर में दो प्रकार की ग्रंथियाँ पायी जाती हैं : (अ) नलिकायुक्त ग्रंथियाँ, एवं (ब) नलिकाविहीन ग्रंथियाँ।

नलिकायुक्त ग्रंथियों में एक नलिका होती है जो कि आवश्यकता पड़ने पर ही कार्य करती है। नलिकाविहीन ग्रंथियों का शारीरिक विकास की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण स्थान है ये ग्रंथियाँ सदैव क्रियाशील रहती है। शारीरिक विकास की दृष्टि से इसका बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। ये ग्रंथियाँ सदैव क्रियाशील रहती हैं शारीरिक विकास, रक्त की शुद्धता, रासायनिक पदार्थों का मिश्रण बुद्धि, व्यक्तित्व संगठन, आदि सभी बातों को निर्धारित करने में इन ग्रंथियों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। इसलिए इन ग्रंथियों की अधिक क्रियाशीलता या शिथिलता अनेक मानसिक रोगों को जन्म देती है।

इसी प्रकार हमारा संपूर्ण स्नायुमण्डल भी व्यक्ति के व्यवहारों एवं अनुभवों का नियंत्रण व निर्धारक होता है। इनके माध्यम से ही व्यक्ति बाहरी वातावरण से समायोजन स्थापित करता है। टरमैंन तथा आइजनेक के अनुसार, स्कूलों में बालकों के दाँत खराब होना आम बात है, साथ ही शारीरिक बीमारी लगातार तनाव या कष्ट में रहना या अन्य कोई शारीरिक दोष उत्पन्न होना प्रमुख हैं। 

(2) मनोवैज्ञानिक कारक (Psychological Factor) -

मनौवैज्ञानिक कारणों में आत्ममूल्य सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। भावनायें भी उसके समायोजन को किसी सीमा तक प्रभावित करती हैं। यदि इन व्यक्तियों को स्नेह व सहमति मिलती है तो उसे संतोष मिलता है और वह अपने जीवन को सार्थक महसूस करता है। इसके विपरीत यदि उसे तिरस्कार मिलता है तो उसे असंतोष मिलता है। आत्मस्वीकृति के अंतर्गत कुछ मानक आदर्श तनाव से दूर रखते हैं। कुछ स्वयं को बहुत नीचा आंकते हैं, जो इन्हें मानसिक द्वन्द्वों में उलझा देती है और उनका मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ जाता है।

(3) बहुतत्व सिद्धांत (Multiple Factor Theory) -

कुछ मनोवैज्ञानिकों ने बहुत सी मानसिक तत्वों को परेशानी का कारण माना है प्रत्येक व्यक्ति की मानसिक तनाव को झेलने की एक सीमा होती है कमजोर इच्छा शक्ति वाले जरा सी मुसीबत से घबरा जाते और असफलता के भय से किसी कार्य को प्रारंभ ही नहीं करते लेकिन इसके विपरीत जो व्यक्ति दृढ़ इच्छाशक्ति वाले होते हैं वे जटिल से जटिल समस्याओं से भी नहीं घबराते और निरंतर उनसे जूझते रहते हैं और अन्त में अपने उद्देश्य की प्राप्ति करते हैं।

(4) वंशानुगत कारक (Hereditary Factor) -

वंशानुक्रम के आधार पर ही संतानों में विभिन्न गुणों का विकास होता है। पैतृक के द्वारा संक्रमित इन गुणों के आधार पर ही किसी जीव में विभिन्न मानसिक व शारीरिक योग्यताएँ निर्धारित होती हैं। कुछ शोधों के आधार पर यह सिद्ध हो चुका है कि अनेक मानसिक रोगों का संबंध मानसिकता से भी होता है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य को एक स्टील वायर ही समझना चाहिए।

(5) वातावरणीय कारक (Enviromental Factors) - 

मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने में वातावरण का भी महत्वपूर्ण योगदान रहता है। जब किसी कारणवश परिवर्तन करना होता है, ऐसी परिस्थितियाँ में सांवेगिक उथल-पुथल मचा देती है। 

(6) आर्थिक कारक (Economic Factor) -

व्यवसाय तथा घर की आर्थिक स्थिति संगी-साथियों में अपने स्थान का आभास दिलाती है। आर्थिक स्थिति न केवल हमारे मानसिक स्वास्थ्य को ही प्रभावित करती है बल्कि यह हमारे सामान्य स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। कुछ कार्य ऐसे होते हैं जिनमें आर्थिक पहलू विशेष महत्व रखता है और अगर ऐसे समय में बालक स्वयं को प्रतिभागी नहीं बनाता वो उसे अपमानित होना पड़ता है ऐसी स्थिति में बालक किसी पर बोझ भी नहीं बनना चाहता और आर्थिक स्वतंत्रता भी चाहता है। परिणामत: उसका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुए बिना नहीं रहता। 

(7) सामाजिक कारक (Social Factor) - 

(अ) घर (Home) : औद्योगिक प्रगति ने परिवार के संगठन को छिन्न-भिन्न कर दिया है। जिन घरों में माता-पिता दोनों ही नौकरी करते हैं वहाँ बालकों की स्थिति और भी दयनीय हो जाती है। आधुनिकता की दौड़ में अलगाव और तलाक बढ़ते जा रहे हैं। इन सभी बातों का प्रभाव बालकों के मस्तिष्क पर पड़ना स्वाभाविक ही है। माता-पिता का पक्षपातपूर्ण व्यवहार भी बालक को पलायनवादी, एकाकी, विद्रोही, चोरी करने वाला बना देता है।

(स) समाज (Society) : समाज सामाजिक संबंधों का ताना-बाना है। समाज के रीति रिवाज, परम्पराओं एवं सामाजिक नियमों का व्यक्ति की जीवन शैली पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। आज के संघर्षमय जीवन में पग-पग पर व्यक्ति अपने को असुरक्षित महसूस करता है। वह समाज में अपना पद प्रतिष्ठा बनाए रखने की कोशिश करता है। असफल होने की स्थिति में उसे तनाव होता है। वह मानसिक द्वन्द्व में फॅस जाता है।

सन्दर्भ -
  1. शर्मा, अंजना (2012), शिक्षा मनोविज्ञान, माधव प्रकाशन, आगरा, पृ. 204 50 
  2. शर्मा, पी.डी., एवं सत्संगी, जी.डी., (2011), शैक्षिक मनोविज्ञान, विनोद पुस्तक मंदिर, आगरा, पृ. 46
  3.  भटनागर, ए.बी., भटनागर मीनाक्षी एवं भटनागर, अनुराग, शिक्षा मनोविज्ञान, आर.लाल बुक डिपो, मेरठ, पृ. 352 
  4. विष्ट, एच.बी., बाल विकास, अग्रवाल पब्लिकेशन, आगरा, पृ. 86 33 भटनागर, ए.बी., भटनागर मीनाक्षी एवं भटनागर, अनुराग, शिक्षा मनोविज्ञान, आर.लाल बुक डिपो, मेरठ, पृ. 352
  5. भटनागर, ए.बी., भटनागर मीनाक्षी एवं भटनागर, अनुराग, शिक्षा मनोविज्ञान, आर.लाल बुक डिपो, मेरठ, पृ. 352 35 वही, पृ. 352 
  6. कुलश्रेष्ठ, एस.पी. (2011), शिक्षा मनोविज्ञान, आर. लाल बुक डिपो, मेरठ, पृ. 388
  7. त्यागी, नीता (2013-14), नवीन शिक्षा मनोविज्ञान, अग्रवाल पब्लिकेशन,आगरा, पृ. 178 53
  8. भटनागर, ए.बी., मीनाक्षी एवं अनुराग (2013), शिक्षा मनोविज्ञान, आर.लाल. बुक डिपो, मेरठ, पृ. 366
  9. पाठक, पी.डी. (2014), बचपन एवं बाल विकास, अग्रवाल पब्लिकेशन, आगरा, पृ. 55

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