मरुस्थल के प्रकार, मरुस्थल कितने प्रकार के होते हैं ?

मरुस्थल के प्रकार

विश्व के लगभग एक-तिहाई क्षेत्र पर मरुस्थलों का विस्तार है, जहाँ जलाभाव के कारण जैव जीवन नगण्य है। न्यूनतम वर्षा वाले क्षेत्र वनस्पति विहीन होकर मरुस्थल बन जाते हैं। अनेक भौतिक और मानवीय कारणों से आबाद क्षेत्र भी मरुस्थल का रूप लेता जा रहा हैं, जिससे मरुस्थल क्षेत्रफल में विस्तार हो रहा है। इस दैवीय विपत्ति के कारण भविष्य में जीवों के लिए आवासीय क्षेत्र कम होता जा रहा है। 

मरुस्थल के प्रकार

मरुस्थल के प्रकार, मरुस्थल कितने प्रकार के होते हैं, मरुस्थल प्रधानत: तीन प्रकार के होते हैं - 
  1. रेतीला मरुस्थल, 
  2. चट्टानी मरुस्थल और 
  3. पथरीला मरुस्थल। 
रेतीला मरुस्थल अपना क्षेत्रफल हवा के सहयोग से बढ़ा रहा है, क्योंकि वनस्पतियों की कमी से वेगवती हवा बालू उड़ाकर उपजाऊ मिट्टी को ढँक देती है, जिससे वह मरुस्थल बन जाता है। थार मरुस्थल का विस्तार पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर इसी ढंग से हो रहा हैं भूमि क्षरण से ढालू जमीन चट्टानों और पथरीली बन जाती है। हिमालयीय क्षेत्र और दक्षिण के पठारी भाग में इसी प्रकार के क्षेत्र विकसित हो रहे है। पथरीला मरुस्थल हवा उड़ाव से विकसित होता जा रहा है जहाँ महीन कण की मिट्टी उड़ जाती है और बजड़ी तथा चट्टानें बचीं रहती हैं राजस्थान के अनेक पहाड़ी हिस्सों में ऐसी प्रक्रिया क्रियाशील है। 

इससे अच्छी भूमि को मरुस्थल में बदलने का खतरा बढ़ता जा रहा है, क्योंकि कम वर्षा, वनस्पति आवरण में कमी तथा संरक्षण उपायों के अभाव में मरुस्थलीकरण एक दैवीय विपदा का रूप लेता जा रहा है। 

भारत सरकार की अनेक संस्थायें जैसे- ‘काजरी’ मरुस्थल शोध संस्थान, इस विपदा के निवारण के लिए उपाय ढूँढने का प्रयास कर रहा है। यह सत्य है कि वर्षा को नियंत्रित करना सम्भव नहीं है, लेकिन धरातल को नष्ट होने से बचाने के लिए कृत्रिम प्रयास किये जा रहे है। ऐसे क्षेत्रों में उष्णता झेलने वाली वनस्पतियों का रोपण कर धरातल का आवरण बचाना प्रमुख उपाय हैं झारखण्ड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के पठारी भाग में मृदा की उचित देखरेख के अभाव में पथरीला मरुस्थल तेजी से बढ़ रहा है। 

आदिवासी बहुल इन राज्यों में जनसहयोग के अभाव में कोई कार्य योजना सफल नहीं हो पा रही है। अत: आवश्यक है कि मृदा सुधार कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिये सघन जनजागरण अभियान चलाया जाय।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं। मैंने अपनी पुस्तकों के साथ बहुत समय बिताता हूँ। इससे https://www.scotbuzz.org और ब्लॉग की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।

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