किनोवा क्या है? | किनोवा का पोष्टिक महत्व | स्वास्थ्य लाभ

अनुक्रम
किनोवा एक फसल है। किनोवा विश्व में दक्षिणी अमेरिका के बोलीविया, पेरू एवं इक्वाडोर देशों की मुख्य खाद्य फसल है। इसको समुद्र तल से लेकर 2000-4000 मीटर तक उगाया जा सकता है। इन सब विशेषताओं के होते हुए भी अभी तक देश में किनोवा एक उपयोगी फसल है। किनोवा के लिए उपयुक्त जलवायु के अनुसार इसे भारत में सर्दी ऋतु (नवम्बर से मार्च) में उगाया जा सकता है। वर्तमान में किनोवा आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र एवं राजस्थान राज्यों में कुछ जगहों पर किसानों द्वारा उगाई जा रही है।

किनोवा का पौधा
किनोवा का पौधा

किनोवा का पोष्टिक महत्व

किनोवा मुख्य रूप से दानों के लिये उगाई जाती है। किनोवा के दानें दूसरी फसलों की तुलना में काफी अधिक पोष्टिक होते हैं। इसके पौधों व पत्तियों को हरे चारे के रूप में भी काम ले सकते हैं। विश्व स्तरीय अध्ययनों से ज्ञात होता है कि किनोवा के दानें पोष्टिकता में अन्य फसलों की तुलना में काफी श्रेष्ठ है। इसके दानों में औसतन 13.8 प्रतिशत प्रोटीन एवं 51 से 61 प्रतिशत शर्करा होती है। रेशों की मात्रा भी 4.1 प्रतिशत पाई गई है। किनोवा दानों में विटामीन, खनिज तत्व आदि भी प्रचुर मात्रा में होते हैं।

किनोवा
किनोवा 

किनोवा के स्वास्थ्य लाभ

  1. किनोवा में सभी नौ प्रकार के आवश्यक एमिनो अम्ल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होतें हैं। इन गुणवत्तायुक्त संपूर्ण प्रोटीन का शाकाहारी लोगों के आहार में विशेष महत्व है।
  2. किनोवा में रेशे प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। रेशे रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने, कोलेस्ट्रॉल को कम करने व शरीर का वजन नियंत्रित करने में सहायक होते हैं।
  3. किनोवा प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन रहित होता है जो ग्लूटेन के प्रति एलर्जी वाले लोगों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
  4. किनोवा के दानों में काफी कम मात्रा में “ग्लायसिमिक इंडेक्स” (लगभग 53) होता है। अत: डाइबिटीज, हृदय रोग एवं मोटापे से बचाता है। परन्तु कार्बोहाइड्रेट की अधिकता उन लोगों के लिए इतनी उपयोगी नहीं होती है जिन्हें कम कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन लेना होता है।
  5. किनोवा कैल्शियम, पोटेषियम, लोहा, जस्ता, फॉस्फोरस, मैंगनीज, मैग्निषियम व कॉपर का उत्तम स्रोत है। इसके दानों में विटामिन बी व ई भी प्रयाप्त मात्रा में मौजूद होते हैं। कुछ मात्रा में ओमेगा वसीय अम्ल (फैटी एसिड) भी पाए जाते हैं।
  6. इसमें “क्वेसेंटिन” व “केम्प्फेरॉल” नामक फ्लैवोनॉइड्स भी प्रचुर मात्रा में होते है जो एंटी-बैक्टीरियल एंटी-अॉक्सीडेंट, एंटी-वायरल व एंटी-कैंसर के रूप में काफी लाभदायक हैं।

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