प्यूनिक युद्ध के कारण और प्रभाव

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प्रथम प्यूनिक युद्ध के कारण

कार्थेज अफ्रीका के उतरी किनारे पर स्थित है तथा ये लोग अच्छे नाविक थे तथा अटंलाटिक तथा भूमध्यसागर पर इनका एकाधिकार कायम था। इनके स्पेन, पुर्तगाल और सार्दमिया (Sardmia) द्वीपों से अच्छे संबध थे। रोम के विस्तार के कारण रोमन तथा कार्थेज का आपस में युद्ध शुरू हो गया। प्रथम प्यूनिक युद्ध का मुख्य कारण सिसली प्रदेश था। उधर रोम इसे अपने अधीन करना चाहता था। जब रोम ने दक्षिणी इटली के यूनानी नगरों को जीत लिया तो उनके और कार्थेज के व्यापारिक संबधं टकरा गए। इस प्रकार पश्चिमी भूमध्यसागरीय क्षेत्र पर अधिकार के लिए दोनों में युद्ध हुए जो 264-146 ई0पू0 के बीच चले। 

प्रांरभिक दोनों युद्धों में माइली का युद्ध 260 ई0पू0 तथा एक्नोमिस के युद्ध में रोम ने कार्थेज को हराया तथा सिसली में पर्लेमा (Palerma) को जीत लिया और बाद में कार्थेज पर सीधा हमला कर दिया। लेकिन कार्थेज ने स्पार्टा के जनरल की सहायता से रोम को हरा दिया। लेकिन शीघ्र ही रोम ने अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया। 241 ई0पू0 में रोम की सेना ने कार्थेज को ऐजियन (Aegean) द्वीप की लडाई में हरा दिया और सिसली में लिलीबकम पर अधिकार कर लिया तब कार्थेज ने सन्धि का प्रस्ताव रखा और सारे सिसली पर रोम का अधिकार मान लिया गया। 

इस तरह सिसली, सरदीमिया, तथा कोरसिका पर रोम का अधिकार हो गया और रोम एक शक्तिशाली समुद्री शक्ति बन गया। इसके बावजूद कार्थेज अभी भी काफी शक्तिशाली बना रहा।

द्वितीय प्यूनिक युद्ध के कारण

प्रथम प्यूमिक युद्ध में अपने कई क्षेत्रें को हारने के बाद अब कार्थेज ने स्पेन पर अपना आधिपत्य बढ़ाना शुरू कर दिया। प्रथम प्यूमिक युद्ध के जनरल हमिल्कर तथा उसके बेटे हन्निबल ने यह कार्य पूर्ण किया और स्पेन को कार्थेज के अ अधीन कर लिया फिर उन्होंने रोम से पहली हार का बदला लेने की सोची। इसकी शुरूआत करते हुए कार्थेज ने स्पेन में रोम के सहायक नगर को जीत लिया इस तरह दोनों के बीच शुरू हुआ जो द्वितीय प्यूमिक युद्ध का कारण बना।

218 ई0पू0 में हन्निबल ने अल्पस पर्वत को पार करके अल्पाइन कबीलों को हराकर अपने 26000 सैनिकों के साथ इटली में प्रवेश किया। इसने दो युद्धों में रोमनों को हराया तथा रोम नगर को घेर लिया तथा 217 ई0पू0 में टामिसेन झील के समीप युद्ध में उन्हें हराया। कार्थेज जनरल ने मदान के राजा फिलिप से सन्धि कर ली लेकिन इसके बाद भी रोमन अगले 9 वर्षो तक उन्हें तंग करते रहे। रोमनों ने 212 ई0पू0 में Syracuse, 211 ई0पू0 में Capua, तथा 209 ई0पू0 Arenthian का जीत लिया। 

208 ई0पू0 में हनीबल ने रोम को हराकर कोन्सुल मारिस्लुस (Consul Marcelles) को मार दिया, इसी बीच कार्थेज में हस्ड्रबल (Hasdrubal) को सेना के साथ सहायता के लिए भेजा। लेकिन इसकी सेना को रोमन नायक गौस क्लाडियस नीरों ने हरा दिया, जब यह समाचार दक्षिणी इटली में हनीबल के पास पहुंचा, तो इसी बीच रेाम ने उतरी अफ्रीका में स्वयं कार्थेज पर हमला कर दिया तो हनीबल को इटली छोड़कर वापिस कार्थेज की सुरक्षा के लिए आना पड़ा। 

202 ई0पू0 में उसे रोम ने नायक सिपिओं (Scipio) ने हरा दिया। बाद में हनीबल ने आत्महत्या कर ली। कार्थेज ने रोम से सन्धि कर ली और स्पेन रोम को दे दिया इसके अलावा काफी धन भी हर्जानें के तौर पर दिया। यह भी तय हुआ कि कार्थेज रोम की अनुमति के बिना किसी युद्ध में हिस्सा नही लेगा। 

150 ई0पू0 में कार्थेज ने संधि की अवहेलना करते हुए रोम की आज्ञा के बगैर नूमिडिया (Numidia) को युद्ध में हरा दिया, तो सीनेट ने कार्थेज युद्ध की घोषणा कर दी।

तीसरा प्यूनिक युद्ध के कारण

तीसरा प्यूनिक युद्ध केवल 3 साल तक चला (149-146 ई0पू0) यद्यपि कार्थेज की सेना बहादुरी से लड़ी, लेकिन हार गई। रोम ने कार्थेज पर अधिकार कर लिया और उसके शहरों को नष्ट कर दिया। इस क्षेत्र के ज्यादातर निवासी या तो मार दिए गए या दास बना लिए गए। इस तरह उतरी अफ्रीका का यह क्षेत्र रोमन साम्राज्य का हिस्सा बन गया।

कार्थेज की जीत के बाद रोम ने यूनानी नगर राज्यों पर अपना ध्यान केन्द्रित किया। मैसेत्रोन के फिलिप पंचम जिसने हनिबल का रोमनों के खिलाफ साथ दिया था। उसे सबक सिखाने का मौका तलाश किया गया। इसके लिए 146 ई0पू0 में राम ने कौरिन्थ को हराया और अगले 100 वर्षो में सभी यूनानी नगर राज्यों को रोमन साम्राज्य में मिला लिया। 

फिलिप को हराने के बाद बाकि यूनानी राज्यों को भी रोम में मिला लिया जैसे : क्रेट को 67 ई0पू0, फिलिसिया को 64 ई0पू0, साइप्रस को 58 ई0पू0 तथा मिस्र को 30 ई0ूप0 में जीत कर पूरे पश्चिमी यूरोप, एशिया मानइर, सीरिया इत्यादि को रोम साम्राज्य में मिला लिया गया।

प्यूनिक युद्धों का प्रभाव

इन युद्धों के कारण रोम ने विश्व में साम्राज्य की स्थापना की। इसके साथ ही वे यूनानी सभ्यता के सम्पर्क में आए जिससे रोम ने काफी कुछ ग्रहण किया। विजय के पश्चात इनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई जिस कारण सड़कों और नौसेना का विकास संभव हुआ इससे व्यापार और वाणिज्य को काफी बढ़ावा मिला। रोम के अमीर वर्ग विजित क्षेत्रों से काफी विलासिता की सामग्री आयात करवाने लगे। युद्धों के कारण नए क्षेत्रों से अनाज का आयात हुआ, काफी धन युद्ध की लूट तथा हर्जाने के रूप में रोम को प्राप्त हुआ। अनेक युद्ध बंदी दास के रूप में रोम लाए गए। इन तीनों चीजों के कारण रोम में अनेक परिवर्तन हुए। विजित क्षेत्रों से जबरन कर के रूप में अनाज को रोम लाया गया जिससे रोम में फालतू अनाज होने से उसकी कीमत गिर गई इस कारण छोटे किसानों को काफी नुकसान हुआ और वे कर्जदार बन गए। कर्ज चुकाने के लिए उन्हें अपनी जमीनें तक बेचनी पड़ी। 

इन युद्धों के कारण रोम में एक नए वर्ग का उदय हुआ। व्यापार का विस्तार होने से ये काफी धनी हो गए और इन्होंने छोटे-छोटे किसानों की भूमि खरीद कर बड़ी-बड़ी Estate स्थापित कर ली। 

इस भूमि पर दासों को, जो युद्ध बंदी रोम लाए गए थे। खेती के कार्य में लगाया गया। इस प्रकार सस्ते श्रम के कारण बड़े जमीदारों से छोटे किसान मुकाबला नही कर सके और इन्हें कृषि में नुकसान होने लगा। इस प्रकार हानि के कारण अधिकतर कृषक अपनी जमीन बेचने पर विवश हो गए। अधिकतर बेजमीन किसान रोम में बस गए तथा राज्य की ओर से इन्हें अनाज देना पड़ा। इस प्रकार समाज में अनेक समस्यांए पैदा हो गई क्योंकि अमीर और गरीब में दूरी बढ़ जाने से समाज में द्वेष फैल गया।

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