लोक मीडिया क्या है? लोक मीडिया की मुख्य विशेषताएँ

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लोक मीडिया क्या है

लोक मीडिया का अर्थ है लोगों का मीडिया। लोक मीडिया का अर्थ है- ग्रामीण तथा कबीले के लोगों को उपलब्ध संचार के विभिन्न साधन। इसे प्राय: ‘पारंपरिक मीडिया’, ‘स्वदेशी संचार प्रणाली’, वैकल्पिक मीडिया’, ‘समूह मीडिया’, ‘सस्ता मीडिया’ आदि भी कहा जाता है। 

लोक मीडिया की मुख्य विशेषताएँ

लोक मीडिया की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हो सकती हैं:
  1. एक सांस्कृतिक समूह या क्षेत्र के लोगों की भागीदारी होना।
  2. सस्ता होता है, प्राय: स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री ही आवश्यक है।
  3. ये समहू की औसत योग्यता पर आधारित होते हैं। यह योग्यता बिना किसी प्रशिक्षण के प्राप्त की जाती है।
  4. चूँकि इनमें सबकी भागीदारी होती है अत: गुणवत्ता या संख्या का कोई मानदंड नहीं होता।
  5. ये प्रचार के लिए लोगों पर आधारित होते हैं अत: इनका नियंत्रण स्वयं लोगों द्वारा किया जाता है।
  6. ये व्यवसायिक नहीं होते। धन शामिल न होने से कोई कापीराइट नियम लाग ू नहीं होता।
  7. इनको सबका समर्थन प्राप्त होता है।
  8. इन्हें अवसर या जनता विशेष के अनुकूल अपनाया और पुन: उत्पन्न किया जाता है।

भारत में लोक मीडिया

विद्वानों के अनुसार भारत में लगभग 6000 प्रकार के लोक मीडिया और पारंपरिक कला के रूप विद्यमान हैं। वे हमारे देश की परंपरा एवं संस्कृति को संरक्षित रखते हैं एवं संप्रेषण में मदद करते हैं। मनोरंजन करने के अतिरिक्त वे नैतिक शिक्षा भी प्रदान करते पारंपरिक मीडिया का जनता के साथ अच्छा तालमेल रहता है।

पारंपरिक मीडिया सस्ता होता है तथा लोगों द्वारा अच्छी प्रकार से समझ में आने वाली भाषा या बोली का प्रयोग करता है। इसमें काफी लचीलापन भी होता है। ये अवसरों एवं जरूरतों के अनुसार परिवर्तित हो जाते हैं। ये सभी विशेषताएँ लोक मीडिया को संचार का प्रभावशाली माध्यम बनाते हैं।

47 शास्त्रीय कलाओं से भिन्न लोक रूप किसी शाही और संरक्षण पर आधारित नहीं होती लोक मीडिया की उत्पत्ति किसी ब्राह्मणवाद या भारतीय संस्कृति की किसी वैदिक धार से नहीं हई। अपितु वे प्राचीन भारतीय संस्कृति से जुड़े हुए है तथा सामान्य जनजीवन की अभिव्यक्ति करने वाले वैकल्पिक मीडिया के रूप में हमेशा बने रहेंगे।

भारत के संपूर्ण उथल-पथल से भरे राजनीतिक इतिहास में लोक कलाओं में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए। लेकिन चिर-परीक्षित मूल्यों को संरक्षित करने तथा धार्मिक, सामाजिक और राजनैतिक वातावरण की भावनाओं और मनोभावों को उद्वेलित करने में लोगों का मीडिया होने की उनकी शक्ति निरंतर बनी रही।

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