रेडियो का आविष्कार किसने किया ? भारत में सबसे पहले रेडियो प्रसारण कब हुआ?


दुनिया में पहली बार 1916 में रेडियो के माध्यम से समाचार प्रसारित किया गया। यह समाचार संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के चुनाव की सूचना से संबंधित था। प्रिंट मीडिया से पहले चंद घंटों में संयुक्त राज्य अमेरिका के लोगों ने इस सूचना को सुना तो उनके कौतूहल का ठिकाना नहीं था। वे हतप्रभ थे। संयुक्त राज्य अमेरिका के लोगों को पहली बार यह अहसास हुआ कि इसका उपयोग संचार के क्षेत्र में किया जा सकता है। लोगों की उत्सुकता को देखते हुए 1919 में रेडियो कारपोरेशन ऑफ़ अमेरिका की स्थापना की गई। 

21 दिसम्बर 1922 को ईस्ट पिट्सबर्ग में रेडियो ब्रॉडकॉस्टिंग का श्रीगणेश हुआ। प्रसारण की दिशा में अमेरिका में हो रहे प्रयासों को देखते हुए दुनिया के अन्य देशों जैसे - कनाडा, ब्राजील, फ्रांस, इटली और रूस ने भी प्रसारण के क्षेत्र में अपने कदम आगे बढ़ाए। रेडियो का प्रयोग राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर होने लगा। इस दिशा में ब्रिटेन भी पीछे रहने वाला नहीं था।

1922 में ब्रिटेन ने रेडियो प्रसारण के लिए एक कम्पनी की स्थापना की। इस कम्पनी का नाम ब्रिटिश ब्रॉडकॉस्टिंग कम्पनी रखा गया। यही कम्पनी आगे चलकर जनवरी 1927 को ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन के रूप में कार्य करने लगी तथा बी.बी.सी. के नाम से पूरे विश्व में विख्यात हुई।

अमेरिका में 1921 में पहला प्रसारण केन्द्र मेसाचुसेट्स नगर में शुरू किया गया था। इसके पूर्व प्रसारण को सुचारु रूप से चलाने के लिए 1919 में संयुक्त राज्य अमेरिका में एक निगम का गठन किया गया, जिसका नाम रेडियो कॉर्पोरेशन ऑफ़ अमेरिका रखा गया था। इस तरह विदेशों में रेडियो के विस्तार की कल्पना साकार होने लगी। ट्रांसमिटर खुलने लगे तथा 21 दिसम्बर 1922 को विश्व में पहले रेडियो केन्द्र का जन्म हुआ।

रेडियो का आविष्कार

रेडियो का आविष्कार 1896 में इटली के एक वैज्ञानिक मारकोनी ने किया। इसके पूर्व रेडियो तरंगों का प्रायोगिक उपयोग जर्मन भौतिक शास्त्री हेनरिच हर्ज ने 1887 में किया था। इस संदर्भ में रदरफोर्ड, ऑलिवर लॉज के प्रयोगों ने भी उल्लेखनीय कार्य किए। लेकिन इटली के 27 वर्षीय वैज्ञानिक गुगलियो मारकोनी ने सबसे पहले संकेतों का संचार करने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने इंग्लैण्ड के कार्नवाल इलाके के पोलघु नामक स्थान से अटलांटिक महासागर के पार कनाडा के न्यू फाउण्ड लैण्ड स्थित सन्त जॉन्स से भेजी गई आवाज को सुनने और पुन: अपनी बात दूसरी तरफ पहुँचाने में कामयाबी हासिल की। 

मारकोनी ने इसके पहले 1890 में बेतार के तार का आविष्कार करके इस दिशा में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर लिया था। मारकोनी के बेतार के तार (वायरलेस टेलीग्राफ) की सहायता से एक छोर से दसूरी छोर तक के व्यक्ति से बातें होने लगी। ये बातें साकेंतिक भाषा में ही होती थी। धीरे-धीरे इस दिशा में विकास हुआ और इन सांकेतिक भाषाओं ने शब्द क्रांति को जन्म दिया।

रेडियो प्रसारण का आविष्कार

रेडियो प्रसारण का आविष्कार 1901 में इटली के मारकोनी नामक वैज्ञानिक ने किया था। प्रथम वाक् संकेत अटलांटिक के पार आलिंग्टन, वर्जीनिया और पेरिस के बीच सन् 1915 में भेजे गए। प्रारंभ में प्रसारण मात्र कौतूहल था। बाद में इसने खेल का दर्जा लिया। ऐसा शायद इसलिए रहा कि पहले शब्द नहीं थे मात्र मोर्स काडे की डॉट प्रणाली थी। शब्दों द्वारा रेडियो प्रसारण का प्रयोग 1933 ई. में जर्मनी ने किया था। यह प्रसारण युद्ध जनित तैयारी हते ु प्रयोग किया जाता रहा। 

1920 ई. के आसपास से यूरोप, अमेरिका और एशिया में काफी शोध कार्य किए गए जिसके परिणामस्वरूप रेडियो ने असाधारण पग्र ति की। बी.बी.सी. आज विश्व की सर्वश्रेष्ठ रेडियो प्रसारण संस्थाओं में से एक है। 1923 में इंग्लैंड के डाक विभाग के प्रयासों के फलस्वरूप इसकी नींव पड़ी। ‘सूचना’, ‘शिक्षा’ एवं ‘मनोरंजन’ के लक्ष्यों को बी.बी.सी. ने सामने रखा तथा समय, तथ्य और उच्चारण की शुद्धता पर बल दिया। ठीक इन्हीं उद्देश्यों को भारत में ‘आकाशवाणी’ ने भी अपनाया।

भारत में इसका आरंभ निजी कंपनियों ने किया था और 1921 में एक संगीत कार्यक्रम का भी इससे प्रसारण किया गया था। आरंभ में भारतीय रेडियो प्रसारण में बी.बी.सी. का भी गहरा सहयोग रहा था। प्रसारण माध्यम के रूप मे इसके महत्व को  उस समय की ब्रिटिश सरकार भी समझती थी। आरंभ में रेडियो के संबंध में भारतीय जनता ने अधिक उत्साह नहीं दिखाया था क्योंकि उस समय यह देश स्वाधीनता की अपनी समस्याओं से जूझ रहा था फिर भी जनवरी 1931 से मुंबई केंद्र से निरंतर कार्यक्रमों का प्रसारण होता था। रात्रि 9.20 से 11 बजे तक भारतीय भाषाओं में कार्यक्रम प्रसारित किए जाते थे जिनमें शास्त्रीय संगीत और सुगम संगीत के साथ ही बच्चों के कार्यक्रम शामिल होते थे। रात्रि 9 बजे हिन्दी मे समाचारों का प्रसारण किया जाता था। 

23 फरवरी 1946 को ऑल इंडिया रेडियो, सूचना एवं कला विभाग के अधीन हो गया था। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात ऑल इंडियो रेडियो का स्वरूप पर्याप्त रूप से विकसित हो चुका था और 14 रेडियो केन्द्र कार्य कर रहे थे। स्वतंत्र भारत में रेडियो प्रसारण के विकास के लिए वल्लभ भाई पटेल के नेतृत्व में एक समिति बनी थी। स्वतंत्र भारत का पहला प्रसारण केन्द्र 1 नवंबर 1947 को जालंधर मे खोला गया और फिर यह सिलसिला लगातार चलता रहा। जब जम्मू, पटना, कटक, अमृतसर, शिलांग, नागपुर, विजयवाड़ा, पणजी, इलाहाबाद, अहमदाबाद, मैसूर, हैदराबाद, विशाखापटनम, तूतीकोरिन और कोलंबो तक में भारतीय प्रसारण आरंभ हुआ। 

रेडियो प्रसारण को पंचवष्र्ाीय योजनाओं में भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ। 15 अगस्त 1993 से एक विशेष हिंदी समाचार पूल स्थापित हुआ और राष्ट्रमंडल संगीत प्रतियोगिता कॉमनवेल्थ हैजबाट अस टुगेदर को पहला स्थान मिला। 17 जनवरी 1933 से दिल्ली में एक केन्द्र स्थापित किया गया जहां से फोन इन सेवा आरंभ हुई, जिसके अनुसार कार्यक्रम के बीच में फोन करके प्रश्न पूछना संभव था। 24 फरवरी 1933 से आकाशवाणी दिल्ली में  एक एफ.एम. चैनल आरंभ हुआ जो केवल संगीत के लिए समर्पित है।

सन् 2000 में जो 20वीं शताब्दी का अंतिम वर्ष था, अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं को आकाशवाणी ने व्यापक रूप से प्रसारित किया था। 4 नवंबर, 2000 को 23 स्थानों पर आमंत्रित व्यक्तियों के सामने आकाशवाणी के संगीत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसकी प्रसारण व्यापकता इतनी बढ़ी कि यह लगभग 99 प्रतिशत जनसंख्या तक पहुँची गई, आज आकाशवाणी का तंत्र विश्व के सबसे बड़े तंत्रों में से एक है।   

भारत में पहला रेडियो प्रसारण

1926 ई. में ही भारत सरकार ने इस प्रसारण कंपनी को देश में प्रसारण केन्द्र स्थापित करने के लिये लाइसेंस प्रदान किया । इस कंपनी की ओर से पहला प्रसारण 23 जुलाई 1927 को मुंबई से हुआ । इसे प्रसारित किया था इंडिया ब्राडकास्टिंग कंपनी ने । मुंबई रेडियो स्टेशन का उदघाटन तत्कालीन वाइसराय लार्ड इर्विन ने किया था । कलकत्ता केन्द्र का उदघाटन तत्कालीन गवर्नर सर स्टेनली जैक्सन ने किया । इस उदघाटन के साथ 26 अगस्त 1927 को  बंगला में समाचार बुलेटिन का प्रसारण हुआ । 1930 ई. में भारत ने प्रसारण सेवा का प्रबंध अपने अधिकार में ले लिया । सरकार ने 1930 ई. में इंडियन ब्राडकास्टिंग सर्विस के नाम से एक नया सरकारी उपक्रम शुरु किए । इसके अधीन मुंबई, कलकत्ता के केन्द्र कार्य करने लगे । अब इस उपक्रम का नाम इंडियन स्टेट ब्राडकास्टिंग सर्विस ह¨ गया । बाद में इसका नाम आल इंडिया रेडियो हो  गया । 

1935 में तत्कालीन देसी रियासत मैसूर में एक स्वतंत्र रेडिय¨ स्टेशन की स्थापना हुई थी । तत्कालीन मैसूर रियासत ने इस स्टेशन क¨ आकाशवाणी नाम दिया था । जब देश आजाद हुआ तो सन् 1957 में भारत सरकार ने इस संगठन का नाम आकाशवाणी घोषित किया, जो मैसूर रियासत के रेडियो स्टेशन का नाम था । 

आज भारत में 100 से अधिक रेडियो स्टेशन है और' लगभग 90 प्रतिशत के लगभग जनसंख्या को  अपनी प्रसारण सीमा में लिए हुए है । करीब तीन करोड़ या उससे अधिक रेडियो सेट घर में बज रहे है । दुनिया के प्रायः सभी देशों में रेडियो प्रसारण की स्थिति में आशातीत प्रगति हुई है ।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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