भारत में पहला रेडियो प्रसारण कब और किस वर्ष हुआ था

सन 1870 में प्रो. मैक्सवेल ने विद्युत चुम्बकीय तरंगों के माध्यम से बिना तार के संदेश भेजने की संचार तकनीक पर प्रयोग किए। वर्ष 1887 में हेनरिच रूडोल्फ हर्ट्स ने रेडियो तरगं ों के अस्तित्व को प्रमाणित किया और 1895 में मारकोनी ने इन्हीं रेडियो तरंगों द्वारा बिना तार के संकेत भेजने और प्राप्त करने के सफल प्रयोग किए। यहीं से शुरू हुआ संचार का एक नया सफर। 1896 में लंदन रेडियो पेटेंट होने के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक जनसंचार माध्यमों के वर्तमान युग की शुरूआत हुई। इस प्रकार बेतार यंत्र तकनीक का विकास होना आरंभ हुआ और 20वीं शताब्दी का आरंभ रेडियो युग से शुरू हुआ। हालाँकि इसका आधार 19वीं सदी के आखिरी वर्षों में बन चुका था।

भारत में पहला रेडियो प्रसारण कब और किस वर्ष हुआ था

भारत में पहला रेडियो प्रसारण 1921 में हुआ। नवम्बर 1923 में कोलकाता में एक क्लब ने रेडियो प्रसारण का आरंभ किया, 1924 में मुंबई और चेन्नई से भी प्रसारण आरंभ हुये। 1927 में सरकार ने इंडियन ब्राँडकास्टिगं कंपनी के साथ समझौता किया और फलस्वरूप मुंबई और कोलकाता में 1927 में प्रसारण शुरू हुए। वर्ष 1930 में इंडियन ब्राॅडकास्टिंग सर्विस का आरंभ हुआ, प्रबन्धन और प्रसार के लिये एक सलाहकार समिति का गठन हुआ तथा 1935 में ब्राॅडकास्टिंग के लिए एक कंट्रोलर की नियुक्ति भी की गयी। जून 1936 में इंडियन स्टेट ब्राँडकास्टिंग का नाम परिवर्तित कर आल इंडिया रेडियो किया गया। 1 जनवरी 1936 से दिल्ली केन्द्र से प्रसारण आरंभ हुये। 

भारत की स्वतन्त्रता के समय आल इंडिया रेडियो का स्वरूप पर्याप्त रूप से विकसित हो चुका था। स्वतन्त्र भारत का पहला प्रसारण केन्द्र 1 नवम्बर 1947 को जालंधर में खोला गया फिर तो लगातार विकास का ये क्रम चलता गया जो आज तक जारी है।

देश में हरित क्रांति, श्वेत क्रांति एवं नीली क्रांति में रेडियो की सराहनीय भूमिका रही है। 99.13 प्रतिशत जनसंख्या तक पहुंच होने के कारण देश के अशिक्षित वर्ग, कमजोर वर्गों तथा दूरदराज के वासियों के लिए रेडियो मनोरंजन एवं सूचना तथा शिक्षा का सशक्त साधन बना रहा है। वर्ष 2004 में शुरू की गई डी.टी.एच. (डाइरेक्ट टू होम) सेवा द्वारा रेडियो ने कई भाषाओं में प्रसारण कर पूरे देश में अपनी सार्थकता को पुनः स्थापित किया है।

रेडियो प्रसारण का आविष्कार कब और किसने किया

रेडियो प्रसारण का आविष्कार 1901 में इटली के मारकोनी नामक वैज्ञानिक ने किया था। प्रथम वाक् संकेत अटलांटिक के पार आलिंग्टन, वर्जीनिया और पेरिस के बीच सन् 1915 में भेजे गए। प्रारंभ में प्रसारण मात्र कौतूहल था। बाद में इसने खेल का दर्जा लिया। ऐसा शायद इसलिए रहा कि पहले शब्द नहीं थे मात्र मोर्स काडे की डॉट प्रणाली थी। शब्दों द्वारा रेडियो प्रसारण का प्रयोग 1933 ई. में जर्मनी ने किया था। यह प्रसारण युद्ध जनित तैयारी हते ु प्रयोग किया जाता रहा। 

1920 ई. के आसपास से यूरोप, अमेरिका और एशिया में काफी शोध कार्य किए गए जिसके परिणामस्वरूप रेडियो ने असाधारण पग्र ति की। बी.बी.सी. आज विश्व की सर्वश्रेष्ठ रेडियो प्रसारण संस्थाओं में से एक है। 1923 में इंग्लैंड के डाक विभाग के प्रयासों के फलस्वरूप इसकी नींव पड़ी। ‘सूचना’, ‘शिक्षा’ एवं ‘मनोरंजन’ के लक्ष्यों को बी.बी.सी. ने सामने रखा तथा समय, तथ्य और उच्चारण की शुद्धता पर बल दिया। ठीक इन्हीं उद्देश्यों को भारत में ‘आकाशवाणी’ ने भी अपनाया।

भारत में इसका आरंभ निजी कंपनियों ने किया था और 1921 में एक संगीत कार्यक्रम का भी इससे प्रसारण किया गया था। आरंभ में भारतीय रेडियो प्रसारण में बी.बी.सी. का भी गहरा सहयोग रहा था। प्रसारण माध्यम के रूप मे इसके महत्व को  उस समय की ब्रिटिश सरकार भी समझती थी। आरंभ में रेडियो के संबंध में भारतीय जनता ने अधिक उत्साह नहीं दिखाया था क्योंकि उस समय यह देश स्वाधीनता की अपनी समस्याओं से जूझ रहा था फिर भी जनवरी 1931 से मुंबई केंद्र से निरंतर कार्यक्रमों का प्रसारण होता था। रात्रि 9.20 से 11 बजे तक भारतीय भाषाओं में कार्यक्रम प्रसारित किए जाते थे जिनमें शास्त्रीय संगीत और सुगम संगीत के साथ ही बच्चों के कार्यक्रम शामिल होते थे। रात्रि 9 बजे हिन्दी मे समाचारों का प्रसारण किया जाता था। 

23 फरवरी 1946 को ऑल इंडिया रेडियो, सूचना एवं कला विभाग के अधीन हो गया था। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात ऑल इंडियो रेडियो का स्वरूप पर्याप्त रूप से विकसित हो चुका था और 14 रेडियो केन्द्र कार्य कर रहे थे। स्वतंत्र भारत में रेडियो प्रसारण के विकास के लिए वल्लभ भाई पटेल के नेतृत्व में एक समिति बनी थी। स्वतंत्र भारत का पहला प्रसारण केन्द्र 1 नवंबर 1947 को जालंधर मे खोला गया और फिर यह सिलसिला लगातार चलता रहा। जब जम्मू, पटना, कटक, अमृतसर, शिलांग, नागपुर, विजयवाड़ा, पणजी, इलाहाबाद, अहमदाबाद, मैसूर, हैदराबाद, विशाखापटनम, तूतीकोरिन और कोलंबो तक में भारतीय प्रसारण आरंभ हुआ। 

रेडियो प्रसारण को पंचवष्र्ाीय योजनाओं में भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ। 15 अगस्त 1993 से एक विशेष हिंदी समाचार पूल स्थापित हुआ और राष्ट्रमंडल संगीत प्रतियोगिता कॉमनवेल्थ हैजबाट अस टुगेदर को पहला स्थान मिला। 17 जनवरी 1933 से दिल्ली में एक केन्द्र स्थापित किया गया जहां से फोन इन सेवा आरंभ हुई, जिसके अनुसार कार्यक्रम के बीच में फोन करके प्रश्न पूछना संभव था। 24 फरवरी 1933 से आकाशवाणी दिल्ली में  एक एफ.एम. चैनल आरंभ हुआ जो केवल संगीत के लिए समर्पित है।

सन् 2000 में जो 20वीं शताब्दी का अंतिम वर्ष था, अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं को आकाशवाणी ने व्यापक रूप से प्रसारित किया था। 4 नवंबर, 2000 को 23 स्थानों पर आमंत्रित व्यक्तियों के सामने आकाशवाणी के संगीत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसकी प्रसारण व्यापकता इतनी बढ़ी कि यह लगभग 99 प्रतिशत जनसंख्या तक पहुँची गई, आज आकाशवाणी का तंत्र विश्व के सबसे बड़े तंत्रों में से एक है।   

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं। मैंने अपनी पुस्तकों के साथ बहुत समय बिताता हूँ। इससे https://www.scotbuzz.org और ब्लॉग की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।

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