रेडियो का आविष्कार किसने किया?

रेडियो का आविष्कार किसने किया

रेडियो प्रसारण का आविष्कार 1901 में इटली के मारकोनी नामक वैज्ञानिक ने किया था। प्रथम वाक् संकेत अटलांटिक के पार आलिंग्टन, वर्जीनिया और पेरिस के बीच सन् 1915 में भेजे गए। प्रारंभ में प्रसारण मात्र कौतूहल था। बाद मे इसने खेल का दर्जा लिया। ऐसा शायद इसलिए रहा कि पहले शब्द नहीं थे मात्र मोर्स काडे की डॉट प्रणाली थी। शब्दों द्वारा रेडियो प्रसारण का प्रयोग 1933 ई. में जर्मनी ने किया था। यह प्रसारण युद्ध जनित तैयारी हते ु प्रयोग किया जाता रहा। 

रेडियो का आविष्कार किसने किया?
रेडियो 

1920 ई. के आसपास से यूरोप, अमेरिका और एशिया में काफी शोध कार्य किए गए जिसके परिणामस्वरूप रेडियो ने असाधारण पग्र ति की। बी.बी.सी. आज विश्व की सर्वश्रेष्ठ रेडियो प्रसारण संस्थाओं में से एक है। 1923 में इंग्लैंड के डाक विभाग के प्रयासों के फलस्वरूप इसकी नींव पड़ी। ‘सूचना’, ‘शिक्षा’ एवं ‘मनोरंजन’ के लक्ष्यों को बी.बी.सी. ने सामने रखा तथा समय, तथ्य और उच्चारण की शुद्धता पर बल दिया। ठीक इन्हीं उद्देश्यों को भारत में ‘आकाशवाणी’ ने भी अपनाया।

भारत में इसका आरंभ निजी कंपनियों ने किया था और 1921 में एक संगीत कार्यक्रम का भी इससे प्रसारण किया गया था। आरंभ में भारतीय रेडियो प्रसारण में बी.बी.सी. का भी गहरा सहयोग रहा था। प्रसारण माध्यम के रूप मे इसके महत्व को  उस समय की ब्रिटिश सरकार भी समझती थी। आरंभ में रेडियो के संबंध में भारतीय जनता ने अधिक उत्साह नहीं दिखाया था क्योंकि उस समय यह देश स्वाधीनता की अपनी समस्याओं से जूझ रहा था फिर भी जनवरी 1931 से मुंबई केंद्र से निरंतर कार्यक्रमों का प्रसारण होता था। रात्रि 9.20 से 11 बजे तक भारतीय भाषाओं में कार्यक्रम प्रसारित किए जाते थे जिनमें शास्त्रीय संगीत और सुगम संगीत के साथ ही बच्चों के कार्यक्रम शामिल होते थे। रात्रि 9 बजे हिन्दी मे समाचारों का प्रसारण किया जाता था। 

23 फरवरी 1946 को ऑल इंडिया रेडियो, सूचना एवं कला विभाग के अधीन हो गया था। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात ऑल इंडियो रेडियो का स्वरूप पर्याप्त रूप से विकसित हो चुका था और 14 रेडियो केन्द्र कार्य कर रहे थे। स्वतंत्र भारत में रेडियो प्रसारण के विकास के लिए वल्लभ भाई पटेल के नेतृत्व में एक समिति बनी थी। स्वतंत्र भारत का पहला प्रसारण केन्द्र 1 नवंबर 1947 को जालंधर मे खोला गया और फिर यह सिलसिला लगातार चलता रहा। जब जम्मू, पटना, कटक, अमृतसर, शिलांग, नागपुर, विजयवाड़ा, पणजी, इलाहाबाद, अहमदाबाद, मैसूर, हैदराबाद, विशाखापटनम, तूतीकोरिन और कोलंबो तक में भारतीय प्रसारण आरंभ हुआ। 

रेडियो प्रसारण को पंचवष्र्ाीय योजनाओं में भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ। 15 अगस्त 1993 से एक विशेष हिंदी समाचार पूल स्थापित हुआ और राष्ट्रमंडल संगीत प्रतियोगिता कॉमनवेल्थ हैजबाट अस टुगेदर को पहला स्थान मिला। 17 जनवरी 1933 से दिल्ली में एक केन्द्र स्थापित किया गया जहां से फोन इन सेवा आरंभ हुई, जिसके अनुसार कार्यक्रम के बीच में फोन करके प्रश्न पूछना संभव था। 24 फरवरी 1933 से आकाशवाणी दिल्ली में  एक एफ.एम. चैनल आरंभ हुआ जो केवल संगीत के लिए समर्पित है।

सन् 2000 में जो 20वीं शताब्दी का अंतिम वर्ष था, अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं को आकाशवाणी ने व्यापक रूप से प्रसारित किया था। 4 नवंबर, 2000 को 23 स्थानों पर आमंत्रित व्यक्तियों के सामने आकाशवाणी के संगीत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसकी प्रसारण व्यापकता इतनी बढ़ी कि यह लगभग 99 प्रतिशत जनसंख्या तक पहुँची गई, आज आकाशवाणी का तंत्र विश्व के सबसे बड़े तंत्रों में से एक है।

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