सामाजिक मनोविज्ञान का क्षेत्र क्या है?

सामाजिक मनोवैज्ञानिक यह जानने का प्रयास करते हैं कि व्यक्ति एक दूसरे के बारे में कैसे सोचते हैं तथा कैसे एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। ‘‘सामाजिक मनोविज्ञान उन मानसिक अवस्थाओं एवं प्रवाहों का अध्ययन करता है जो मनुष्यों में उनके पारस्परिक सम्पर्क के कारण उत्पन्न होते हैं। यह विज्ञान मनुष्यों की उन भावनाओं, विश्वासों और कार्यों में पाये जाने वाले उन समानताओं को समझने और वर्णन करने का प्रयत्न करता है जिनके मूल में मनुष्यों के अन्दर होने वाली अन्त:क्रियाएं अर्थात् सामाजिक कारण रहते हैं।’’

सामाजिक मनोविज्ञान की परिभाषा

राबर्ट ए. बैरन तथा जॉन बायर्न - ‘सामाजिक मनोविज्ञान में यह कठिनाई दो कारणों से बढ़ जाती है : विषय क्षेत्र की व्यापकता एवं इसमें तेजी से बदलाव।’ ‘‘सामाजिक मनोविज्ञान वह विज्ञान है जो सामाजिक परिस्थितियों में व्यक्ति के व्यवहार और विचार के स्वरूप व कारणों का अध्ययन करता है।’’ 

किम्बॉल यंग नें सामाजिक मनोविज्ञान को परिभाषित करते हुए लिखा है कि, ‘‘सामाजिक मनोविज्ञान व्यक्तियों की पारस्परिक अन्तक्रियाओं का अध्ययन करता है, और इन अन्त:क्रियाओं का व्यक्ति विशेष के विचारों, भावनाओं संवेगो और आदतों पर क्या प्रभाव पड़ता है।’’

शेरिफ और शेरिफ के अनुसार, ‘‘सामाजिक मनोविज्ञान सामाजिक उत्तेजना-परिस्थिति के सन्दर्भ में व्यक्ति के अनुभव तथा व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन है।’’ 

मैकडूगल ने परिभाषित करते हुए लिखा है कि, ‘‘सामाजिक मनोविज्ञान वह विज्ञान है, जो समूहों के मानसिक जीवन का और व्यक्ति के विकास तथा क्रियाओं पर समूह के प्रभावों का वर्णन करता और उसका विवरण प्रस्तुत करता है।’’

विलियम मैकडूगल, (1919 :2) ओटो क्लाइनबर्ग (1957 :3) का कहना है कि, ‘‘सामाजिक मनोविज्ञान को दूसरे व्यक्तियों द्वारा प्रभावित व्यक्ति की क्रियाओं को वैज्ञानिक अध्ययन कहकर परिभाषित किया जा सकता है।’’ 

सामाजिक मनोविज्ञान का क्षेत्र

सामाजिक मनोविज्ञान का विषय क्षेत्र अत्यन्त विस्तृत है। मनोविज्ञान की अन्य विशिष्ट शाखाओं की भी बहुत सी सामग्रियाँ इसमें समाहित हैं। व्यक्ति व्यवहार-संगठित अथवा असंगठित, सामाजीकरण की प्रक्रिया, समूह तथा समूह व्यवहार, नेतृत्व तथा उसके पक्ष, मनोवृत्ति, रूढि़याँ, एवं पूर्वाग्रह, भीड़ व्यवहार, अभिप्रेरणा, संज्ञान, प्रत्यक्षीकरण, प्रचार, जनमत, अफवाह, भाषा तथा सम्प्रेषण, सामाजिक व्याधियाँ, आक्रमणशीलता, उग्र व्यवहार, साम्प्रदायिक एवं जातीय दंगे, भूमिका संघर्ष, फैशन इत्यादि-इत्यादि अनेकों विषयों का अध्ययन इसके अन्तर्गत किया जाता है।

ओटो क्लाइनबर्ग ने सामाजिक मनोविज्ञान के विषय क्षेत्र में इन विषयों के अध्ययन को सम्मिलित किया है।

1. सामान्य मनोविज्ञान और सामाजिक मनोविज्ञान की व्याख्या -इसमें अभिप्रेरणा, उद्वेगात्मक व्यवहार, प्रत्यक्षीकरण, स्मरण शक्ति पर सामाजिक कारकों के प्रभाव का अध्ययन करने के साथ ही साथ अनुकरण, सुझाव, पक्षपात  परम्परागत सामाजिक मनोवैज्ञानिक अवधारणाओं के प्रभाव की भी अध्ययन करने की कोशिश की जाती है।

2. सामाजीकरण, संस्कृति एवं व्यक्तित्व- संस्कृति और व्यक्तित्व के सम्बन्धों को भी ज्ञात किया जाता है। व्यक्तित्व के विकास में सामाजीकरण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। सामाजीकरण के कई पक्षों एवं स्वरूपों का अध्ययन सामाजिक मनोविज्ञान का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

3. वैयक्तिक एवं समूह भेद- दो व्यक्ति एक समान नहीं होते वैसे ही समूह में भी अंतर पाया जाता है। वैयक्तिक भिन्नता तथा समूह भिन्नता के सामाजिक-मनोवैज्ञानिक कारणों का अध्ययन सामाजिक मनोविज्ञान का एक विषय क्षेत्र है।

4. मनोवृत्ति तथा मत, सम्प्रेषण शोध, अन्तर्वस्तु विश्लेषण एवं प्रचार- मनोवृत्ति या अभिवृत्ति का निर्माण, कैसे मनोवृत्ति व्यवहार को प्रभावित करती है? कब मनोवृत्तियाँ व्यवहार को प्रभावित करती है? इसके साथ साथ जनमत निर्माण, विचारों के आदान-प्रदान के माध्यमों, सम्प्रेषण अनुसंधानों, अन्तर्वस्तु विश्लेषण तथा प्रचार के विविध स्वरूपों एवं प्रभावों इत्यादि को इसके अन्तर्गत सम्मिलित किया जाता है।

5. सामाजिक अन्तर्क्रिया, समूह गत्यात्मकता और नेतृत्व- सामाजिक मनोविज्ञान का क्षेत्र सामाजिक अन्तर्क्रिया, समूह गत्यात्मकता तथा नेतृत्व के कई पक्षों एवं प्रकारों को भी अपने में सम्मिलित करता है।

5. सामाजिक समस्याओं- समाज है तो सामाजिक समस्याओं का होना भी स्वाभाविक है। सामाजिक मनोविज्ञान के अन्तर्गत सामाजिक व्याधिकी के कई पक्षों एवं स्वरूपों का विस्तृत अध्ययन किया जाता है, जैसे बाल अपराधी, मानसिक असामान्यता, सामान्य अपराधी, औद्योगिक संघर्ष, आत्महत्या।

6. घरेलू तथा अन्तरराष्ट्रीय राजनीति- सामाजिक मनोविज्ञान में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय राजनैतिक व्यवहारों का भी विशद अध्ययन किया जाने लगा है। समय के साथ-साथ नये-नये क्षेत्र इसमें समाहित होते जा रहे हैं। नेता अनुयायी सम्बन्धों की गत्यात्मकता, सामाजिक प्रत्यक्षीकरण, समूह निर्माण तथा विकास का अध्ययन, पारिवारिक समायोजन की गत्यात्मकता का अध्ययन, अध्यापन सीख प्रक्रिया की गत्यात्मकता, कई क्षेत्र इसके अन्तर्गत आते हैं। 

सामाजिक मनोविज्ञान के विषय क्षेत्र के अन्तर्गत वह सब कुछ आता है, जिसका कि कोई न कोई सामाजिक-मनोवैज्ञानिक आधार हैं। 

सामाजिक मनोविज्ञान का महत्व

सामाजिक मनोविज्ञान का महत्व इस दौर में बढ़ता ही जा रहा है। सामाजिक मनोविज्ञान के महत्व को उसकी अध्ययन वस्तु के आधार पर अलग-अलग रूप से प्रस्तुत करके स्पष्ट किया जा सकता है।

1.  व्यक्ति को समझने में सहायक

सामाजिक मनोविज्ञान के द्वारा ही संस्कृति और व्यक्तित्व में सम्बन्ध, सामाजीकरण, सीखने की प्रक्रिया, सामाजिक व्यवहार, वैयक्तिक विभिन्नताएँ, उद्वेगात्मक व्यवहार, स्मरण शक्ति, प्रत्यक्षीकरण, नेतृत्व क्षमता से सम्बन्धित  जानकारी प्राप्त होती है। समाज विरोधी व्यवहार के सामाजिक तथा मानसिक कारणों को उजागर करके उन व्यक्तियों के उपचार को सामाजिक मनोविज्ञान ने सम्भव बनाया है। अच्छे व्यक्तित्व का विकास कैसे हो, सकारात्मक सोच कैसे आये, जीवन में आयी निराशा तथा कुण्ठा कैसे दूर हो और इन सभी परिस्थितियों के क्या कारण हैं, को सामाजिक मनोविज्ञान द्वारा ही जाना जा सकता है और परिवर्तित किया जा सकता है। तनाव से बचाने में भी इसका योगदान है। सामाजिक मनोविज्ञान व्यक्ति के सम्बन्ध में वास्तविक और वैज्ञानिक ज्ञान करवाता है। 

2. माता-पिता की दृष्टि से महत्व

बच्चों के पालन-पोषण में, समाजीकरण में तथा व्यक्तित्व के विकास में किस प्रकार की परिस्थितियाँ ज्यादा उपयुक्त होंगी और इनके तरीके क्या है कि वैज्ञानिक जानकारी सामाजिक मनोविज्ञान के द्वारा होती हैं। इसका ज्ञान बच्चों को बाल अपराधी, कुसंग, मादक द्रव्य व्यसन, अवसाद से बचा सकता है। प्रत्येक माता-पिता अपने बच्चों को संस्कारवान तथा स्वस्थ व्यक्तित्व वाला बनाना चाहता है। 

3. समाज सुधारकों एवं प्रशासकों के लिए

समाज में कई कुरीतियों, बुराईयों, विचलित व्यवहारों एवं आपराधिक गतिविधियों, समस्याओं, सामाजिक तनावों, साम्प्रदायिक दंगों, जातिगत दंगो के कारणों तथा उनको रोकने के उपायों की जानकारी सामाजिक मनोविज्ञान के अध्ययन के द्वारा समाज सुधारकों तथा प्रशासकों को होती है, जिसके द्वारा उन्हें इन समस्याओं को दूर करने में सहायता मिलती है। सामाजिक मनोविज्ञान के अध्ययन द्वारा समाज सुधारकों को तो लाभ प्राप्त होता ही है, यह प्रशासकों को भी विविध तरह से लाभ पहुँचाता है। 

सम्पूर्ण राष्ट्र की दृष्टि से महत्व

युद्ध एवं क्रान्ति जैसी स्थितियाँ किसी भी राष्ट्र के लिए चिन्ताजनक हो सकती हैं। सामाजिक मनोविज्ञान का अध्ययन न केवल व्यक्ति को समूह एवं समाज को तथा राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय जीवन को खतरा करने वाली कई स्थितियों एवं कारकों का ज्ञान कराता है और उनके परिणामों के सन्दर्भ में सचेत करता है। व्यक्ति-व्यक्ति के बीच कटुता एवं कलुषता को दूर करने में सहायता मिलती है, वहीं युद्ध, क्रान्ति, पक्षपात, अफवाह एवं विविध प्रकार के तनाव को रोकने में भी मदद मिलती है। 

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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