कंप्यूटर नेटवर्क (Computer network) क्या है ? इसके प्रकार और लाभ

आज हर कार्य में कम्प्यूटर एवं संबंधित उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। नेटवर्किंग के माध्यम से कम्प्यूटर्स आपस में संपर्क स्थापित करके डाटा का आदान-प्रदान एवं उपकरणों का साझा (Share) कर सकते हैं।

नेटवर्क की परिभाषा

जब दो या अधिक इकाइयाँ कुछ विशेषताओं के आधार पर जुड़ती हैं तथा आपस में साझेदारी करती है, तब एक नेटवर्क की स्थापना होती है। नेटवर्क में सम्मिलित इकाइयाँ एक ही स्थान या अलग-अलग स्थान की हो सकती है जिनका मुख्य उद्देश्य सहभागिता करके अधिकतम लाभ प्राप्त करना होता है। नेटवर्क के माध्यम से किसी भी कार्य को साझा रूप से किया जा सकता है जिससे धन, समय और मानवशक्ति की बचत होती है।

कम्प्यूटर नेटवर्क (Computer network)

आज कम्प्यूटर का महत्व बहुत ही बढ़ गया है। आज कम्प्यूटर का उपयोग हर क्षेत्र में हो रहा है। सूचना संसाधनों के आदान-प्रदान में कम्प्यूटर की भूमिका में लगातार वृद्धि हो रही है। कम्प्यूटर नेटवर्क आपस में एक दूसरे से जुड़े कम्प्यूटरों का Group है जो आपस में संचार स्थापित करने और सूचना को Share इस्तेमाल करने में सक्षम होते हैं। 

किसी भी नेटवर्क को स्थापित करने के लिए प्रेषक, प्राप्तकर्ता, माध्यम तथा प्रोटोकाॅल की आवश्यकता होती है। कम्प्यूटरों के साधनों में भागीदारी करने के उद्देश्य से बहुत से कम्प्यूटरों का आपस में जुड़ना कम्प्यूटर नेटवर्किंग कहलाता है। कम्प्यूटर नेटवर्किंग की सहायता से उपयोक्ता उपकरणों, प्रोग्रामों, संदेशों और सूचनाओं को एक ही जगह पर रहकर उनके साथ Share कर सकते हैं। 

दूसरे शब्दों में कह सकते है कि कम्प्यूटर नेटवर्क आपस में Communication के लिए कम्प्यूटरों और अन्य devices का एक Group होता है जो Wire, wireless अथवा इंटरनेट से जुड़े होते है। devices कम्प्यूटर से संबंधित उपकरण है जैसे Speech, Router, Printer, Scanner, Server इत्यादि।

कंप्यूटर नेटवर्क के प्रकार

कम्प्यूटर नेटवर्क (Computer network) के कई प्रकार है। कम्प्यूटर नेटवर्क के प्रमुख प्रकार है:

1. व्यक्तिगत नेटवर्क (Personal network) : इस प्रकार के नेटवर्कों का स्वामित्व किसी निगम या किसी ऐसी सत्ता के पास रहता है जो इसका उपयोग अपने कर्मचारियों तक ही सीमित रखता है। व्यक्तिगत नेटवर्क में Access के लिए User को Permission की आवश्यकता होती है। आमतौर पर Access किसी नेटवर्क administrator द्वारा manual रुप से या किसी Password द्वारा User को दिया जाता है।

2. सार्वजनिक नेटवर्क (Public network) : यह नेटवर्क किसी भी संस्थान या व्यक्ति के Use के लिए Membership शुल्क देने पर मौजूद रहता है। इसमें नेटवर्क के Owner की तरफ से इसके उपयोग पर कोई restrictions नहीं होता है। 

3. सहकारी नेटवर्क (cooperative network) : इस प्रकार के नेटवर्कों का communication and management इसके users द्वारा किया जाता है। इसमें कई स्वायतषासी निकाय अथवा संघ जो विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ होते है मिलकर सर्वमान्य उद्देश्य हेतु नेटवर्क स्थापित करते हैं।

4. एकीकृत डिजिटल नेटवर्क सेवा (Integrated Digital Network Service) : आई एस डी एन का प्रार्दुभाव नेटवर्कों की संख्या में बहुत अधिक वृद्धि के कारण हुआ। एक ही कार्य के लिए कई नेटवर्क उपलब्ध होने से नेटवर्को में द्विरावृत्ति हो गई। 

5. लैन: लोकल एरिया नेटवर्क (LAN: Local Area Network) : यह एक ऐसा नेटवर्क है जिसमें दो या दो से अधिक कम्प्यूटरों को जोड़ा जाता है। लोकल एरिया नेटवर्क में कई प्रकार के उपकरणों, जैसे - Computer Terminal, Fax, Telex, CDROM Players, Print, Server को एक Workplace पर जोड़ा जाता है। अधिकतर LAN पैकेट स्विचिंग प्रौद्योगिकी का प्रयोग होता है, जिसमें डाटा संप्रेषण की गति काफी तेज होती है। यह एक ऐसा कम्प्यूटर नेटवर्क है जो स्थानीय इलाकों जैसे - घर, कार्यालय समूहों को नेटवर्क से जोड़ने के लिए Use में लाया जाता है। लोकल एरिया नेटवर्क तैयार करने में प्रोटोकाॅल का प्रयोग होता है, जिसे ethernet कहते है। 

आज के समय में लोकल एरिया नेटवर्क में Managed Switches & Hubs का उपयोग करके हजारों कम्प्यूटर्स को नेटवर्क से जोड़ा जा सकता है। Local Area Network का कार्य क्षेत्र छोटा होता है, इसलिए इसका control and operation एक व्यक्ति अथवा संस्था द्वारा किया जा सकता है। Local Area Network को स्थापित करने में Ring, Star, Linear Network Topology का उपयोग किया जाता है जिससे नेटवर्क की क्षमता, विश्वसनीयता एवं गति बढ़ जाती है। किसी विश्वविद्यालय का नेटवर्क लैन नेटवर्क का उदाहरण है।

लोकल एरिया नेटवर्क (LAN: Local Area Network) की विशेषताएँ
  1. यह एक कमरे तक सीमित रहता है।
  2. इसकी गति तीव्र होती है।
  3. इसमें डाटा सुरक्षित रहता है।
  4. इसमें डाटा को व्यवस्थित करना आसान रहता है।
  5. लैन के द्वारा सेन्ट्रल कम्प्यूटर या सर्वर से डाटा का आदान - प्रदान किया जा सकता है।
  6. नये कम्प्यूटर्स को नेटवर्क से जोड़ना आसान होता है।
  7. peripheral device को आसानी से Share किया जा सकता है।
6. मैन: मैट्रोपाॅलिटन एरिया नेटवर्क (MAN: Metropolitan Area Network :) : मैट्रोपाॅलिटन एरिया नेटवर्क एक शहर का नेटवर्क है जिसमें 75 किलोमीटर तक के दायरे में नेटवर्क स्थापित किया जा सकता है। इस तरह के नेटवर्क का उपयोग ज्यादातर गवर्मेन्ट संस्थानों द्वारा किया जाता है। डेवलपिंग लाइब्रेरी नेटवर्क (डेलनेट) जिसमें दिल्ली के पुस्तकालय जुड़े है इसका उदाहरण है।

Metropolitan Area Network एक तेज चलने वाला नेटवर्क है जिसमें 200 मेगाबाइट प्रति सेकण्ड या इससे भी अधिक गति से डाटा को संचारित किया जा सकता है। यह लोकल एरिया नेटवर्क तथा वाइड एरिया नेटवर्क के बीच का नेटवर्क है जो Dual queue/dual bus-DQDB तकनीकी पर आधारित होता है। Dual queue/dual bus-DQDB) तकनीकी द्वारा दो प्रकार का एक्सेस प्रदान किया जाता है। प्रथम एक्सेस को पूर्व आर्बिटेड सेवा कहा जाता है, जिसमें voice और विडियो जैसी समकालिक सेवाओं के लिए निश्चित broadband प्राप्त होता है। द्वितीय एक्सेस को क्रमबध्द आरबिट्रेट्ड सेवा कहा जाता है, जो मांग पर आधारित होता है और डाटा संचार को समायोजित करने का कार्य करता है।

मेट्रोपाॅलिटन एरिया नेटवर्क (Metropolitan Area Network) को स्थापित करने में Routers, Switches and Hubs का उपयोग किया जाता है जिससे हाई स्पीड नेटवर्क प्राप्त होता है। DELNET, CALIBNET, PUNENET, MALIBNET,  मेट्रोपाॅलिटन एरिया नेटवर्क के महत्वपूर्ण उदाहरण है।

मैट्रोपाॅलिटन एरिया नेटवर्क (Metropolitan Area Network) की विशेषताएँ
  1. इसका Maintenance आसान है।
  2. Combination आसान होता है।
  3. इसका नेटवर्क 75 किलोमीटर तक हो सकता है।
  4. इसमें डाटा ट्रांसमिशन की स्पीड तेज होती है।
7. वैन: वाइड एरिया नेटवर्क (WAN: Wide Area Network) : Wide Area Network की स्थापना अलग-अलग स्थानों पर लगे device अथवा उपकरणों को आपस में जोड़ने के लिए की जाती है। यह क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा नेटवर्क होता है, यह पूरे विश्व को जोड़ने का कार्य करता है। इसमें डाटा को सुरक्षित भेजा और प्राप्त किया जा सकता है। इस नेटवर्क को जोड़ने के लिए Leased line connection का उपयोग होता है जिसमें Satellite द्वारा डाटा का Communication किया जाता है। Leased line एक ऐसी सीधी-टेलीफोन लाइन होती है, जो किसी भी कम्प्यूटर को Internet service provider के Server से जोड़ती है। वैन नेटवर्क की घेरा में पूरा शहर, पूरा देश या हो
सकता है। इंटरनेट इसका एक अच्छा उदाहरण है। विभिन्न बैंको द्वारा ए.टी.एम की सुविधा प्रदान करने हेतु इसी प्रकार के नेटवर्क का उपयोग किया जाता है। 

NICNET, INDONET, INFLIBNET, ERNET नेटवर्क वैन नेटवर्क पद्धति पर स्थापित किये गये है, जिनका उपयोग देश के कोने-कोने में किया जा रहा है।

वाइड एरिया नेटवर्क की विशेषताएँ
  1. इसमें डाटा को Signals या उपग्रह Satellite के द्वारा भेजा और प्राप्त किया जा सकता है।
  2. यह सबसे बड़ा नेटवर्क होता है।
  3. इसके द्वारा पूरे विश्व में डाटा संचारित किया जा सकता है।
  4. इस नेटवर्क में अनगिनत केबल और टेलीफोन लाइनों को जोड़ा जा सकता है।

नेटवर्क प्रोटोकॉल (Network protocol) क्या है

नेटवर्क प्रोटोकाॅल नेटवर्क से जुड़े कई संचार और डेटा प्राप्त करने के नियमों का समुच्चय है, जो नेटवर्क के उपकरणों को जोड़ने में महत्वपूर्ण होता है। नेटवर्क संरचना का सबसे महत्वपूर्ण Component प्रोटोकाॅल होता है। 

दूसरे शब्दों में प्रोटोकाॅल एक मानक है जो नेटवर्क की स्थापना के लिए जरूरी होता है। हर प्रोटोकाॅल का अपना विधि होता है जो निर्धारित करता है कि डाटा को किस तरह से Send है, जब डाटा प्राप्त (Receive) होगा तब क्या करना है, कितने बड़े डाटा को एक साथ भेजना है, डाटा को कैसे Compress करना है। Ethernet, Local Token, Token Ring, FDDI, ATM नेटवर्क प्रोटोकाॅल के उदाहरण है।

1. इथरनेट: इथरनेट का विकास राबर्ट मेटकैफी ने वर्ष 1973 में किया था। यह बहुत ही महत्वपूर्ण प्रोटोकाॅल है जिसका सर्वाधिक उपयोग लोकल एरिया नेटवर्क स्थापित करने में किया जाता है। दो या दो से अधिक कम्प्यूटर्स केबल द्वारा आपस में जुड़े होते हैं। इन्हीं Cable के द्वारा कम्प्यूटर्स आपस में डेटा संचारित और प्राप्त करें। इथरनेट द्वारा इस पर Control करने कार्य किया जाता है। 

ओ एस आई (OSI) माॅडल के सात लेयर्स होते है, उनमें से ”इथरनेट“ डाटा लिंक लेयर और भौतिक लेयर दोनों में काम आता है। इथरनेट द्वारा 10 MBPS से 10 GBPS (Giga bytes Per Second) तक की गति से डाटा का
संप्रेशण किया जा सकता है।

2. लोकल टाॅक: इस प्रोटाकाल का विकास एप्पल कम्प्यूटर्स द्वारा अपने Macintosh कम्प्यूटर के लिए किया गया था। इसमें प्रोटोकाॅल एडेप्टर एवं केबल का उपयोग करके नेटवर्क स्थापित किया जाता है। Macintosh Operating System का Use  करते हुए peer-to-peer network स्थापित किया जाता है जिसके लिए किसी अन्य Software की आवश्यकता नहीं पड़ती। नेटवर्किंग के लिए Star, Bus or Tree Topology का उपयोग मुख्य रुप से किया जाता है। इस प्रकार के प्रोटोकाॅल की कमी यह है कि डाटा संचार की गति बहुत ही कम होती है।

3. टोकन रिंग: IBM द्वारा 1980  के मध्य इस प्रोटोकाॅल का विकास किया गया था। टोकन रिंग प्रोटोकाॅल में नोड अथवा कम्प्यूटर्स रिंग या बस टोपोलाॅजी द्वारा आपस में जुड़े होते हैं जो एक दूसरे को सूचना भेजने या प्राप्त करने हेतु टोकन का उपयोग करते हैं। जब भी कोई कम्प्यूटर किसी दूसरे कम्प्यूटर को डाटा भेजना चाहता है तो उसे सबसे  खाली टोकने मिलने का इंतजार करना पड़ता है। खाली टोकन मिलते है, ही प्रेषक कम्प्यूटर द्वारा टोकन से डाटा अटैच कर दिया जाता है जो नेटवर्क के कम्प्यूटर्स के पास बारी-बारी जाता है। जिस भी कम्प्यूटर के लिए डाटा भेजा गया है वह आपको रिसीव होने के बाद खाली टोकन पुनः नेटवर्क के दूसरे प्रतिक्षा करने सूची वाले कम्प्यूटर को मिल जाता है। इस प्रकार नेटवर्क के कम्प्यूटर्स आपस में डाटा का आदान-प्रदान करते हैं। इस प्रोटाकाॅल का
सर्वाधिक उपयोग लोकल एरिया नेटवर्क में किया जाता है। 

टोकन रिंग प्रोटोकाल में नेटवर्क की Speed तेज होती है। इसमें 4, 16 अथवा 100 megabytes per second की गति से डाटा संप्रेशित होता है।

4. FDDI (Fiber Distributor Data Interface): Fiber Distributor Data Interface एक ऐसा प्रोटोकाॅल है जिसका उपयोग दो या दो से अधिक लोकल एरिया नेटवर्क को जोड़ने के लिए किया जाता है। Fiber Distributor Data Interface को सन् 1986 में तैयार किया गया था। इस प्रोटोकाॅल का उपयोग करके दूर-दूर के नेटवर्को को भी जोड़ा जा सकता है। एफ डी डी आई की मुख्य विशेषता इसकी गति है। इसके फाइबर आप्टिक द्वारा 100 MBPS अथवा अधिक Speed से डाटा को भेजा और प्राप्त किया जा सकता है। 

Fiber Distributor Data Interface नेटवर्क मे fiber optic cable के कारण सुरक्षा अच्छी होती है और 200 किलोमीटर तक तीव्र गति से Signal को संचारित किया जा सकता है। Fiber Distributor Data Interface नेटवर्क में दो टोकन रिंग का उपयोग होता है।

सामान्यतः एक समय में एक ही टोकन रिंग कार्य करता है तथा दूसरा टोकन रिंग बैक-अप के रूप में
होता है। जैसे ही पहले टोकन रिंग मे किसी तरह की बाधा या खराबी आती है, दूसरा टोकन रिंग स्वतः
कार्य करना प्रारम्भ कर देता है, और एक नया रिंग तैयार हो जाता है जिससे नेटवर्क के कम्प्यूटर्स के मध्य
डाटा संप्रेशण प्रभावित नहीं होता।

5. ATM: asynchronous transfer mode में निश्चित आकार के डाटा पैकेट या सेल्स Cells को 155 MBPS अथवा अधिक की गति से सम्प्रेषित किया जा सकता है। यह ओ एस आई माॅडल के द्वितीय लेयर डाटा लिंक लेयर के अंतगर्त कार्य करता है। इस तरह के नेटवर्क के निमार्ण में स्टार टोपोलाॅजी का उपयोग किया जाता है जो फाइबर
आप्टिक के साथ-साथ ट्विस्टेड पेयर केबल पर कार्य कर सकता है। 

ATM प्रोटोकाॅल का उपयोग दो या दो से अधिक लोकल एरिया नेटवर्क को एक दूसरे से जोड़ने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग मेट्रोपाॅलिटन एरिया नेटवर्क को स्थापित करने में भी किया जाता है। इंटरनेट सेवा प्रदाता अपने ग्राहकों को उच्च गति की इंटरनेट सेवा प्रदान करने हेतु इसका उपयोग करते हैं। ATM तकनीकी द्वारा नेटवर्क स्थापित करने में कम लागत आता है, इसका उपयोग करके लोकल एरिया नेटवर्क में high speed प्राप्त की जा सकती है।

अच्छे नेटवर्क की विशेषताएं

एक अच्छे नेटवर्क के निम्न विशेषताएं होती है

1. परफारमेंस (Performance) : नेटवर्क से जुड़े Computers के बीच (Error free) डाटा ट्रांसफर करने के रेट द्वारा Performance की गणना की जाती है। दूसरे शब्दों में यह कह सकते है कि डाटा के लक्ष्य स्थान तक पहुँचने में समय (Response time) द्वारा नापा जाता है। नेटवर्क में User अधिक होने पर इसकी Speed  कम हो जाती है, जिसको कई प्रकार के उपकरणों का use करके बढ़ाया जा सकता है।

2. विश्वसनीयता (Reliability) : नेटवर्क बिना किसी रुकावट के कार्य करें और यदि किसी प्रकार का रुकावट आता है तो डाटा का नुकसान न हो जितनी मात्रा में डाटा संप्रेशित किसी कम्प्यूटर द्वारा किया जाये उतना ही प्राप्तकर्ता के पास रिसीव हो। नेटवर्क में स्थान-स्थान पर ऐसे उपकरण लगाना चाहिए जो नेटवर्क में रुकावट आने पर कार्य करें तथा नेटवर्क के कनेक्ट होते ही डाटा को सही स्थान पर संप्रेशित करें।

3. स्पीड (Speed) : किसी भी नेटवर्क की Speed से नेटवर्क के आदेश स्थिति की जानकारी मिलती है।
यदि कमांड या निर्देश देने पर Processing में 30 सेकण्ड से ज्यादा समय लगता है तो नेटवर्क की स्पीड अच्छी नहीं मानी जाती है।

4. सुरक्षा (Security) :  नेटवर्क के Hardware, Software और डाटा की अनाधिकृत उपयोग की रोकथाम ही सुरक्षा है। कम्प्यूटरों को नेटवर्क एक्सेस के लिए पासवर्ड दिया जाता है। इसके साथ-साथ एंटि-वायरस और फायरवाॅल का भी इस्तेमाल किया जाता है।

नेटवर्क कम्प्यूटिंग के लाभ

नेटवर्क कम्प्यूटिंग के लाभ है:
  1. नेटवर्क से जुड़े कम्प्यूटर्स आपस में सीधे फाइलों को Share कर सकते हैं। बड़े से बड़े साइज के फाइलों को आसानी से किसी भी कम्प्यूटर को भेजा या दूसरे कम्प्यूटर से प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रकार फाइल Sharing के लिए कोई डिस्क या फ्लैष ड्राइव या बाहरी स्टोरेज डिवाइस रखने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती।
  2. नेटवर्क से जुडे़े सभी कम्प्यूटर्स आपस के जैसे- प्रिंटर, स्कैनर, फैक्स , माॅडेम का उपयोग मिलकर कर सकते है। जिससे किसी एक स्थान अथवा कम्प्यूटर से जुड़े उपकरण के खराब होने पर वह दूसरे स्थान के कम्प्यूटर का उपयोग जरूरत के अनुसार कर सकता है।
  3. नेटवर्क से जुड़े किसी भी कम्प्यूटर में लोड/इंस्टाल साफ्टवेयर को नेटवर्क के किसी भी कम्प्यूटर का उपयोग किया जा सकता है। प्रत्येक कम्प्यूटर में विशेष साफ्टवेयर को इंस्टाल करने की आवश्यकता नहीं पड़ती जिससे सभी कम्प्यूटर्स के लिए साफ्टवेयर नहीं खरीदना पड़ता।
  4. सभी कम्प्यूटर्स नेटवर्क से जुड़कर एक-दूसरे से संचार स्थापित कर सकते हैं। जब वे इंटरनेट से जुडे़ होते हैं तो एक-दूसरे को ई-मेल द्वारा संदेश भेज सकते हैं।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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