राजनीतिक आधुनिकीकरण व राजनीतिक विकास में अंतर

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कुछ विद्वानों का मानना है कि राजनीतिक विकास की अवधारणा आधुनिकीकरण की अवधारणा की अपेक्षा संकुचित है। उनका मानना है कि राजनीतिक विकास आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का ही एक भाग है। उसका क्षेत्र केवल राजनीतिक है। राजनीतिक विकास एक लक्ष्योन्मुख प्रक्रिया है जिसे अपना गन्तव्य या लक्ष्य ज्ञात है, जबकि आधुनिकीकरण विभिन्न दिशाओं में लाया जाने वाला व्यापक परिवर्तन है तथा एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। लेकिन राजनीतिक आधुनिकरण धारणा राजनीतिक विकास के अधिक निकट है। राजनीतिक आधुनिकीकरण की धारणा भी आधुनिकीकरण से निकट का सम्बन्ध रखती है। इसलिए राजनीनितक विकास तथा राजनीतिक आधुनिकीकरण दोनों का सम्बन्ध आधुनिकरण की प्रक्रिया से है। 

राजनीतिक आधुनिकीकरण व राजनीतिक विकास में अंतर

आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में राजनीतिक विकास एक आश्रित चर बनकर रह जाता है। लेकिन कुछ विद्वानों का यह भी मानना है कि राजनीतिक विकास आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का परिणाम है। इसी कारण आधुनिकीकरण को एक समाजशास्त्रीय विचारधारा माना जाता है तथा राजनीतिक विकास को राजनीतिक विचारधारा माना जाता है। आधुनिकीकरण सामाजिक परिवर्तनों की सम्पूर्ण व्यवस्था का विश्लेषण है। राजनीतिक विकास केवल राजनीतिक सरंचनाओं एवं प्रक्रियाओं पर पड़ने वाले तीव्र सामाजिक व आर्थिक परिवर्तनों से सम्बन्ध रखता है। वह केवल उन राजनीतिक संरचनाओं और शक्तियों में रुचि रखता है जो विकासात्मक परिवर्तनों का कार्यान्वित करने में अहम् भूमिका अदा करते हैं। 

राजनीतिक आधुनिकीकरण भी इन्हीं पक्षों में रुचि लेता है, लेकिन सामान्य आधुनिकीकरण का एक भाग बनकर। यद्यपि राजनीतिक विकास की समाजशास्त्रीय धारणा राजनीतिक आधुनिकीकरण से मिलता हे, लेकिन उसकी वैज्ञानिक धारणा उससे काफी भिन्न है। यह राजनीति, राजनेताओं व राजनीतिक संस्थाओं को स्वतन्त्र स्थान प्रदान करती है। तुलनात्मक दृष्टि से राजनीतिक आधुनिकीकरण विकास से अधिक व्यापकतर अवधारणा मानी जाती है। इस दृष्टि से राजनीतिक विकास अधिक प्रगतिशील, गत्यात्मक एवं संकल्पनात्मक धारणा है।

हंटिगटन के अनुसार राजनीतिक विकास और आधुनिकीकरण में अन्तर है। उसकी दृष्टि में राजनीतिक विकास आधुनिकीकरण लाने वाली प्रक्रियाओं और संरचनाओं से सम्बन्ध रखता है। जाम्वाराइब ने भी राजनीतिक विकास और राजनीतिक विकास की अवधारणा राजनीतिक आधुनिकीकरण से अधिक व्यापक ओर सर्वग्राही है, जबकि हंटिगटन के अनुसार राजनीतिक विकास की अवधारणा आधुनिकीकरण से तो भिन्न है, लेकिन राजनीतिक आधुनिकीकरण से सम्बन्ध रखती है। 

जाग्वाराइब ने लिखा है-”राजनीतिक विकास एक प्रक्रिया के रूप में राजनीतिक आधुनिकीकरण तथा राजनीतिक संस्थाकरण का योग है। जाग्वाराइब के बाद आईजेन्सटाड ने भी राजनीतिक विकास को अधिक व्यापक अवधारणा माना है। लेकिन वे राजनीतिक आधुनिकीकरण को अधिक व्यापक अवधारणा मानने को तैयार नहीं हैं। ऑमण्ड तथा ल्यूशियन पाई ने भी राजनीतिक विकास के लक्ष्य व उपलक्षण बताकर इसे आधुनिकीकरण से अधिक व्यापक धारणा माना है। 

आइजेन्सटाड के अनुसार प्रकार्यात्मक दृष्टि से राजनीतिक आधुनिकीकरण के तीन लक्षण हैं - (क) विभेदीकृत राजनीतिक संस्थाएं (ख) केन्द्र सरकार की गतिविधियों का विस्तार तथा (ग) परम्परागत अभिजनों का शक्तिहीन होना। जाग्वाराइब का कहना है कि राजनीतिक विकास में राजनीतिक आधुनिकीकरण के अलावा भी संस्थाओं और संरचनाओं का संस्थाकरण हो जाता है। उसका कहना है कि इसमें भूमिका विभेदीकरण, उपव्यवस्था स्वायत्तता और लौकिकीकरण के लक्षण भी होते हैं। इस प्रकार राजनीतिक विकास राजनीतिक आधुनिकीकरण से आगे निकल जाता है। राजनीतिक विकास में जो विभेदीकरण होता है वह भिन्न व व्यापक आधार लिए रहता है। 

पाई ने भी राजनीतिक विकास के लक्षण समानता, क्षमता और विभेदीकरण को बताकर इसे राजनीतिक आधुनिकीकरण से अधिक व्यापक बना दिया है।

उपरोक्त विवेचन के बाद कहा जा सकता है कि राजनीतिक विकास तथा राजनीतिक आधुनिकीकरण में से किसे व्यापक अवधारणा माना जाए, यह विवाद का विषय है। जहां जाग्वाराइब व ऑमण्ड राजनीतिक विकास की व्यापक अवधारणा बना देते हैं, वहीें पाई के विचारों के आधार पर राजनीतिक आधुनिकीकरण की अवधारणा सीमित अवधारणा बनकर रह जाती है। यद्यपि कुछ विद्वानों ने इस बात का खण्डन भी किया है कि राजनीतिक विकास राजनीतिक आधुनिकीकरण से व्यापक अवधारणा नहीं हो सकती। उनका कहना है कि यदि राजनीतिक विकास का अर्थ केवल पाई द्वारा बताए गए लक्षणों - समानता, क्षमता व विभेदीकरण को ही मान लिया जाए तो यह काफी सीमित अवधारणा बनकर रह जाती है। 

लेकिन इस वाद-विवाद में न पड़कर उपरोक्त विवेचन के आधार पर राजनीतिक विकास व राजनीतिक आधुनिकीकरण में स्पष्ट तौर पर दिखाई देने वाले अन्तर को ही देखना चाहिए। यद्यपि दोनों अवधारणाएं आपस में कुछ साम्य भी रखती हैं, क्योंकि दोनों ही नवीन अवधारणाएं हैं जिनका जन्म द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद हुआ है। 

दोनों ही अवधारणाएं आधुनिकीकरण से सम्बन्ध रखती हैं, लेकिन फिर भी दोनों में निम्नलिखित अन्तर दृष्टिगोचर होते हैं :-
  1. राजनीतिक आधुनिकीकरण की अवधारणा एक संकुचित व सीमित अवधारणा है, जबकि राजनीतिक विकास की अवधारणा राजनीतिक आधुनिकीकरण से व्यापक है। 
  2. राजनीतिक विकास की प्रक्रिया उल्टनीय हो सकती हैं, जबकि राजनीतिक आधुनिकीकरण की प्रक्रिया सदैव सीधी होती है और यह कभी उल्टनीय नहीं हो सकती।
  3. राजनीतिक विकास की अवस्थाएं सुनिश्चित होती हैं, जबकि राजनीतिक आधुनिकीकरण में क्रम और प्रतिमान ही होते हैं, सुनिश्चित अवस्थाएं नहीं। 
  4. राजनीतिक विकास में होने वाले विकास पतन भी हो सकते हैं, लेकिन आधुनिकीकरण तो आधुनिककीकरण ही रहता है। 
  5. राजनीतिक विकास तो कभी-कभी स्थैतिक भी हो सकता है, लेकिन राजनीतिक आधुनिकीकरण कभी स्थैतिक नहीं होता।
  6. राजनीतिक विकास, विकास प्रक्रिया से स्वतन्त्र होता है, जबकि राजनीतिक आधुनिकीकरण की प्रक्रिया से स्वतन्त्र न होकर उसका एक महत्वपूर्ण भाग होता है। 
  7. राजनीतिक विकास, राजनीतिक प्रक्रियाओं और राजनीति का संस्थापन है, जबकि राजनीतिक आधुनिकीकरण का सम्बन्ध अक्रिाकतर राजनीतिक संरचनाओं से ही रहता है, संस्थाओं से नहीं।
उपरोक्त विवेचन के बाद कहा जा सकता है कि राजनीतिक आधुनिकीकरण बुद्धिसंगदतता, विभिन्नीकरण, सहभाग तथा सांस्कृतिक व सामाजिक परिवर्तन से सम्बन्धित है, जबकि राजनीतिक विकास राज व्यवस्था के औपचारिक स्वरूप व क्षमता पर अधिक जोर देता है। 

राजनीतिक आधुनिकीकरण में मुख्यत: औद्योगिकरया के द्वारा सामाजिक परिवर्तन शामिल किया जाता है, जबकि राजनीतिक विकास का आधार संस्थाकरण ही होता है, जिसके कारण राज-व्यवस्थाएं जनता की मांगों को पूरा करती है, संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि राजनीतिक विकास, राजनीतिक आधुनिकीकरण तथा राजनीतिक संस्थापन का योग है। जहां राजनीतिक विकास की धारणा विकसित व व्यापक है, वहीं राजनीतिक आधुनिकीकरण की अवधारणा सीमित है। जहां विकास की प्रक्रिया से राजनीतिक विकास स्वायत्त होता है, वहीं राजनीतिक आधुनिकीकरण, आधुनिकीकरण चिपका रहता है। 

अत: नि:सन्देह ही राजनीतिक विकास राजनीतिक आधुनिकीकरण की अवधारणा से अधिक व्यापक है।

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