पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं

प्रायः यह देखने को मिलता है कि एक ही अर्थ के लिए अनेक शब्दों का प्रयोग किया जाता है जैसे कमल के लिए पद्म, पंकज, जलज आदि। ये शब्द पर्यायवाची कहलाते हैं। यद्यपि प्रत्येक शब्द का अपना विशिष्ट अर्थ होता है। परन्तु कालान्तर में इन विशिष्ट अर्थों का लोप हो जाता है और ये एक ही अर्थ में प्रयुक्त होने वाले वैकल्पिक शब्द बन जाते हैं। जैसे पंकज का अर्थ है कीचड़ में उत्पन्न हुआ और जलज का अर्थ है जल से उत्पन्न हुआ। कमल को कीचड़ में उत्पन्न हुआ भी माना जा सकता है और जल में उत्पन्न हुआ भी। परन्तु कीचड़ या जल में उत्पन्न हुआ केवल कमल ही नहीं होता अन्य वस्तुएँ भी होती है परन्तु प्रयोग की अधिकता के कारण ये शब्द कमल के लिए रूढ हो गए हैं अतः ये पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहलाने लगे।

पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं

भाषा में शब्द और अर्थ दोनों का अपना विशिष्ट स्थान एवं महत्व है। एक अर्थ के द्योतन हेतु एक शब्द विशेष होता है, परंतु भाषा-प्रयोग की दृष्टि से उस एक ही शब्द का अनेक बार प्रयोग उचित प्रतीत नहीं होता। ऐसी परिस्थिति में निहितार्थ की अभिव्यक्ति हेतु उसी के समान अर्थ प्रतीति कराने वाले अन्य शब्द का प्रयोग किया जाता है। ऐसे समानार्थी शब्द ही पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं। अपनी भाषा-शैली को प्रभविष्णु बनाने एवं एक ही शब्द की अनेक बार आवृत्ति को रोकने हेतु पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग किया जाता है।

अग्नि: आग, अनल, पावक, दहन, वह्नि, कृशान।
अतिथि: अभ्यागत, पाहुन, मेहमान, आगन्तुक।
अमृत: सुधा, सोम, पीयूष, अमी, अमिय, सुरभोग, देवभोग।
अपमान: अनादर, अवज्ञा, अवहेलना, अवमान, तिरस्कार।
अलंकार: आभूषण, भूषण, विभूषण, गहना, जेवर।
अश्व: घोडा़ , हय, हरि, घोटक, बाजि, सन्ै धव, तुरंग।
असुर: दनुज, दैत्य, दानव, राक्षस, तमचर, निशाचर, रजनीचर
अहंकार: गर्व, दर्प, दभ्ं ा, घमण्ड, मद, मान।
अंधकार: तम, तमस, तिमिर, तमिस्र, अंधेरा, अंधियारा।
आकाश: नभ, गगन, अम्बर, अन्तरिक्ष, अनन्त, व्योम, शन्ू य।
आँख: नत्रे , नयन, चक्षु, लोचन, दृग, अक्षि।
इच्छा: आकांक्षा, अभिलाषा, कामना, चाह, लिप्सा, लालसा।
इन्द्र: सुरश्े ा, सुरपति, देवराज, मेघराज, शक्र, शचीपति, देवेन्द।
उपवन: बाग, बगीचा, उद्यान, वाटिका, गुलशन।
कच: बाल, कश्े ा, कुन्तल, चिकुर, अलक, रोम, शिरारूे ह।
कण्ठ: ग्रीवा, गर्दन, गला, शिरोधरा।
कपड़ा: पट, चीर, वसन, अम्बर, वस्त्र, दुकूल, परिधान।
कबूतर: कपाते , रक्तलोचन, पारावत, कलरव, हारिल।
कमल: जलज, पंकज, सराजे , अरविन्द, राजीव, शतदल, पुण्डरीक, इन्दीवर।
कान: कणर्, श्रवण, श्रोत, श्रुि तपटु ।
कामदेव: मदन, मनोज, अनगं , काम, रतिपति, पष्ु पधन्वा, मन्मथ।
किनारा: तीर, कूल, कगार, तट।
किरण: कर, अंशु, रश्मि, मरीचि, मयूख, प्रभा।
कीत्र्ति: यश, प्रसिद्धि।
खग: पक्षी, द्विज, विहग, नभचर, अण्डज, शकुनि, पखेरू।
गणेश: विनायक, गजानन, लम्बादे र, गणपति, एकदन्त।
गुरु: शिक्षक, आचार्य, उपाध्याय।
गृह: घर, गेह, सदन, निकते न, भवन, आलय, मंदिर।
चन्द्रमा: इन्द,ु सोम, शशि, विधु, सुधांशु, हिमांशु।
चरण: पैर, पाद, पग, पद, पाँव।
चाँदनी: चन्द्रिका, कौमुदी, ज्योत्स्ना, चन्द्रमरीचि, उजियारी, चन्द्रप्रभा, जुन्हाइर्।
जगत्: संसार, विश्व, जग, जगती, भव, दुनिया, लाके , भुवन।
जल: वारि, अम्बु, तोय, नीर, सलिल, जीवन, पय।
जीभ: रसना, रसज्ञा, जिह्वा, रसिका, वाणी, वाचा, जबान।
ज्योति: आभा, छवि, द्युति, दीप्ति, प्रभा, भा, रुचि, रोचि।
तरुवर: वक्ष्ृ ा, पडे ़, द्रुम, तरु, विटप, रूंख, पादप।
तलवार: असि, कृपाण, करवाल, खडग् , चन्दह्र ास।
तालाब: जलाशय, सर, तडा़ ग, सरावे र, पुष्कर।
तीर: शर, बाण, विशिख, शिलीमुख, अनी, सायक।
दधि: दही, गारे स, मट्ठा, तक्र।
दाँत: दशन, रदन, रद, द्विज, दन्त, मुखखुर।
दास: सेवक, अनुचर, चाकर, भृत्य, किकं र, परिचारक।
दिन: दिवस, वार, वासर, अह्न, दिवा।
दीन: गरीब, दरिद्र, रंक, अकिंचन, निर्धन, कंकाल।
दीपक: दीप, दीया, प्रदीप।
दुर्गा: चण्डी, चामुण्डा, कल्याणी, कालिका, भवानी।
दूध: दुग्ध, पय, क्षीर, गौरस, स्तन्य।
देवता: दवे , अजर, अमर, सुर, विबुध।
देह: काया, तन, शरीर, वपु, गात।
द्रव्य: धन, अथर्, वित्त, सम्पदा, दालै त, वस्तु, पदार्थ।
धन: द्रव्य, वित्त, अर्थ, सम्पत्ति, पूंजी, राशि, मुद्रा।
धनुष: चाप, कमान, कादे ण्ड, सरासन, पिनाक, सारंग।
नदी: सरिता, तटिनी, तरंगिनी, आपगा, शैलजा, निर्झरिणी।
नाव: नौका, तरणी, वनवाहन, जलयान, पाते , नयै ा, तरी।
पत्थर: पाषाण, प्रस्तर, उपल, पाहन, शिलाखण्ड।
पत्ता: दल, पल्लव, पर्ण, दु्रमदल, किसलय, पान, पत्र।
पति: कातं , ईश, स्वामी, भरतार, वल्लभ, प्राणेश, नाथ।
पथ: बाट, मार्ग, राह, पंथ, रास्ता, मग।
पर्वत: पहाड़, अचल, गिरि, भूधर, नग, महीधर, शलै , मेरू।
पशु: चतुष्पद, जानवर, चैपाया, मृग।
पाताल: रसातल, नागलाके , अधोभुवन, उरगस्थान।
पार्वती: शिवा, गारै ी, उमा, भवानी, गिरिजा, शलै सुता, अम्बिका।
पास: आसन्न, निकट, समीप, सामीप्य, सन्निकट, उपकण्ठ, सानिध्य।
पुत्र: सुत, तनय, आत्मज, पूत, बटे ा, तनजु , तात, नन्दन, लाल।
पुत्री: सुता, तनया, आत्मजा, तनुजा, नन्दिनी, दुहिता, बेटी।
पुष्प: कसु ुम, सुमन, प्रसून, फूल, पहु ुप, गुल।
प्रातः: प्रभात उषा, अरुणोदय, सुबह, अहर्मुख, सवरे ा।
प्रवाल: मूँगा, विद्रुम, रक्तांग, लतामणि, रक्तमणि।
पृथ्ृथ्वी: भ,ू भूमि, अवनि, अचला, धरा, मही, इला, मेदिनी।
फल: परिणाम, नतीजा, लाभ, प्रभाव।
बन्दर: कपि, हरि, मर्कट, वानर, शाखामृग।
बसन्त: ऋतुराज, मधु, पिकानन्द, मधुमास, कुसुमाकर, मदनमीत।
ब्रह्म: विधि, विधाता, विरंि च, चतुरानन, स्वयंभू, प्रजापति।
बादल: मेघ, घन, जलद, पयाध्े ार, धाराधर, नीरद।
बालक: शिशु, बच्चा, बाल, कुमार, किशोर, लड़का, शावक।
ब्राह्मण: द्विज, विप्र, भूसुर, भूदेव, महीदवे , अग्रजन्मा।
बिजली: विद्युत, चपला, चचं ला, तडित, सौदामिनी, दामिनी।
बुद्धि: धी, मध्े ाा, मति, प्रज्ञा, मनीषा।
भाई: बन्धु, सहोदर, भा्र ता, भयै ा, तात, सगर्भा, सजाता।
भौंरंरा: भम्र र, मधकु र, मधुप, अलि, षटप् द, भृंग।
मक्खन: नवनीत, माखन, दधिसार, लौनी।
मनुष्य: नर, मानव, जन, मनुज, मानुष, मत्र्य, आदमी।
महादेव: शिव, शंभु, शंकर, पशुपति, त्रिनेत्र, हर, नीलकंठ।
माता: मा, अम्बा, जननी, प्रसू, मात, जन्मदायिनी, अम्ब।
मुख: आनन, वदन, वक्र, मुँह, चेहरा।
मूर्ख: अज्ञ, मढू ़, जड़, अज्ञानी, निर्बुद्धि।
मेंढ़क: मण्डकू , दादुर, हरि, भेक, शालूर, वर्षाभू।
मृग: करु ंग, सारंग, कस्तूरी, चमरी, कृष्णसार, हरिण।
मृत्यु: निधन, मरण, दहे ावसान, देहान्त, मौत, स्वगर्व ास।
युद्ध: रण, समर, संग्राम, जंग, विग्रह, लड़ाई।
युवक: युवा, तरुण, जवान, नवयुवक, नौजवान।
युवती: तरुणी, श्यामा, किशारे ी, नवयौवना, नवांगना।
रमा: लक्ष्मी, कमला, पदम् ा, इन्दिरा, श्री, सिन्धुजा, विष्णुप्रिया।
रवि: भानु, सूर्य, आदित्य, दिनकर, दिनेश, मार्तण्ड।
राजा: नृप, भूप, नृपति, नरेश, महीप, नरेन्द,्र महीन्द्र, महीपाल।
रात: रात्रि, निशा, शर्वरी, रजनी, यामिनी, राका, विभावरी।
रानी: राजवधू, राज्ञी, महारानी, महाराज्ञी, राजपत्नी।
लहर: तरंग, हिलोर, ऊर्मि, वीचि, लहरी।
वज्र: कुि लश, पवि, अशनि, भेदी, भिदुर, दंभोलि।
विद्वान्: काेि वद, पण्डित, प्राज्ञ, विदष्ु ा।
विष: जहर, गरल, हलाहल, कालकटू , गर।
विवाह: पाणिग्रहण, ब्याह, शादी, परिणय, प्रणय सूत्रबन्धन।
विष्णु: जनार्दन, चक्रपाणि, रमेश, चतभर््ु ाुज, गदाधर, दामोदर।
शत्रु: अरि, दुश्मन, बरै ी, विपक्षी, अमित्र, द्वेषी।
शुक: तोता, कीर, सुग्गा, दाडि़म-प्रिय, रक्ततुण्ड, सुआ।
सखी: सहचरी, आली, सजनी, सहेली, सरै ंध्री।
सन्ध्या: साँझ, शाम, सायं, दिनांत, गोधूलि, प्रदाष्े ाकाल।
सर्प: अहि, भुजगं , विषधर, व्याल, फणी, नाग, उरग।
समुद्र: सागर, सिंधु, रत्नाकर, उदधि, पयोधि, पारावार।
सरस्वती: भारती, गिरा, शारदा, वीणापाणि, हंसवाहिनी।
सिंह: शार्दूल, कसे री, हरि, मगृ ेन्द्र, वनराज, मृगराज।
सेना: कटक, अनी, चम,ू दल, वाहिनी, सैन्य, फाजै ।
स्वर्ग: सुरलाके , देवलाके , नाग, इन्द्रपुरी, द्या,ै परमधाम।
स्त्री: नारी, कामिनी, महिला, अबला, ललना, रमणी, तिय।
हृदय: उर, हिय, वक्ष, वक्षस्थल, हृद।
हनुमान: पवनसुत, महावीर, वजा्र ंग, मारुति, अंजनिसुत, मारुतनन्दन।
हाथ: हस्त, कर, पाणि, बाह,ु भुजा।
हाथी: गज, हस्ती, कुंजर, मातंग, द्विरद, द्विप, नाग, करि।
हंस: मराल, चक्रांग, कलहंस, कारडं व, सरस्वतीवाहन।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं। मैंने अपनी पुस्तकों के साथ बहुत समय बिताता हूँ। इससे https://www.scotbuzz.org और ब्लॉग की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।

Post a Comment

Previous Post Next Post