रोमन गणतंत्र की राजनीतिक संरचना

गणतंत्र के तीन मुख्य घटक थे - सीनेट, मजिस्ट्रेट ओर आम जनता। गणतंत्र राज्य के शीर्ष पर दो काॅन्सल थे। उनकी सहायता के लिए बडी संख्या में मजिस्ट्रेट थे। इसके वहां अतिरिक्त प्रत्येक पांच वर्ष में प्रत्येक नागरिक की सामाजिक स्थिति की जांच ओर जनगणना कराने के लिए जनसंख्या नियंत्रक अधिकारी (सेंसर्स ) थे। तत्पश्चात् जनजातीय, अभिजात वर्ग ओर निम्न वर्गों  की सभाएं भी थीं।

रोमन गणतंत्र की राजनीतिक संरचना

सीनेट

गणतंत्र पर सीनेट का प्रभुत्व था और सदस्यता कुलीन वर्ग (भूमिपति अभिजात वर्ग) तक ही सीमित थी। सीनेट की सदस्यता जीवन भर के लिए थी और यह सह.चयनात्मक थी (अर्थात् केवल मूल सदस्य ही अतिरिक्त नए सदस्यों का चयन कर सकते थे)। इस प्रकार, सीनेट भूमिपति अभिजात वर्ग की एक सभा थी जिसकी सत्ता असीमित थी। सीनेट की सर्वोच्च ओर निरंतर बढ़ती शक्तियां उसकी कानून बनाने, मजिस्ट्रेटों की शक्ति पर अंकुश रखने ओर विदेशी मामलों पर नियंत्रण करने की योग्यता पर निर्भर थी। सीनेट की शक्ति में और अधिक वृद्धि उनके सामूहिक प्रभाव, समृद्धि और उसके सदस्यों के अनुभव से हुई।

मजिस्ट्रेट

प्रत्येक वर्ष जनता द्वारा गणतंत्र के सर्वोच्च अधिकारियों का चयन किया जाता था। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण वे दो काॅन्सल होते थे जो सीनेट की अध्यक्षता करते थे, और उनमें कार्यकारिणी, सैन्य और न्यायिक शक्तियां निहित थीं। 366 बी सी ई तक कान्सूलेट संस्था पर कानूनी रूप से चुने हुए चंद अभिजात वर्ग के लोगों का एकाधिकार था, तब हाल ही में समृद्ध हुए निम्न वर्ग ने अभिजात वर्ग को दो में से एक काॅन्सल के पद पर उनके सदस्यों के प्रवेश को स्वीकारने पर मज़बूर किया। लेकिन 172 बी सी ई में पहली बार दोनों काॅन्सल निम्न वर्ग से चुने गए। पूर्व काॅन्सल स्वतः ही सीनेट के सदस्य बन जाते थे। इस तरह सीनेट की सदस्यता का विस्तार हुआ ओर अभिजात वर्ग के अलावा इसमें हाल ही में समृद्ध हुए निम्न वर्ग के सदस्यों को भी शामिल किया गया।

काॅन्सलों के अलावा रोमन गणतंत्र में चुने हुए अन्य अनेक मजिस्ट्रेट/काॅन्सल थे। दंडाधिकारी को कानून प्रशासन का कार्यभार सोंपा गया। प्रारम्भ में नियंत्रक को प्रशासनिक करों के लिए रजिस्ट ªार के तौर पर नियुक्त किया गया, लेकिन जल्द ही नेतिकता के मामलों में उसे विस्तृत अधिकार प्राप्त हुए। एडिल्स को लोक कार्य, ओर रोम में सड़कों ओर इमारतों के निर्माण का कार्यभार सोंपा गया था।

जनता

अपनी विभिन्न सभाओं में जनता मजिस्ट्रेट का चुनाव करती थी, स्वीकृत और अस्वीकृत विधेयकों को उनके सामने रखा जाता था, ओर वे युद्ध ओर शांति के मामलों पर निर्णय लिया करती थी। सिद्धांत में, संप्रभुता का सिद्धांत प्रजा के अंदर ही निहित था, लेकिन वे मजिस्ट्रेट द्वारा बुलाने पर ही मिल सकते थे ओर उनके सामने जो मुद्दा रखा जाता था वे उस पर बिना किसी बहस के मत दिया करते थे।

सभा

काॅमीशिया का अर्थ हे जहां पर लोग एकत्र होते हैं। इस प्रकार, रोमन सभाएं काॅमीशिया के नाम से जानी जाती थीं। मेजिस्ट्रेट समय-समय पर महत्वपूर्ण मामलों में मतदान के लिए इन सभाओं को बुलाता था।

काॅमीशिया क्युरिआटा 

काॅमीशिया क्युरिआटा सभी नागरिकों की सभा थी। क्युरिआटा शब्द रोमन नातेदारी आधारित जनजातीय इकाई क्युरिएई से व्युत्पन्न था। ये संख्या में कुल तीस थीं और तीन जनजातीय समूहों में विभाजित थीं जिसमें प्रत्येक में दस क्युरिएई थे। क्युरिएट के पास मसलों पर चर्चा करने का अधिकार नहीं था, ये केवल उसे स्वीकार या अस्वीकार कर सकती थीं। ये मजिस्ट्रेट तथा धार्मिक अधिकारियों का चुनाव करती थीं, कानूनों को स्वीकृति देती थीं ओर युद्ध ओर शांति पर निर्णय लेती थीं। यह क्युरिएई ही थी जिसने राजशाही के उन्मूलन का निर्णय लिया ओर गणतंत्र की स्थापना की। किसी भी सेंचुरिआटा का आदेश तब तक कानून नहीं बन सकता था जब तक क्यूरिएई ने इसे स्वीकृत नहीं किया हो।

यद्यपि निम्न वर्ग ओर अभिजात वर्ग दोनों ही इन क्युरिएई का हिस्सा थे, अक्सर अभिजात वर्ग अपने प्रभुत्व का प्रयोग कर मुद्दों को प्रभावित करते थे। बाद में निम्न वर्ग की आवाज़ इस सीमा तक अप्रसांगिक हो गई कि प्रत्येक क्युरिएई ने मतदान के लिए सभा में केवल एक ही व्यक्ति को भेजना आरंभ कर दिया। धीरे-धीरे अभिजात वर्ग का प्रभाव इस हद तक बढ़ गया कि इसमें मुश्किल से ही निम्न वर्ग के हित की किसी बात का प्रतिनिधित्व होता हो। अतः सभा को पुनः संगठित करने की मांग और दबाव बढ़ने लगा, जिसके कारण नई सभा, काॅमीशिया सेंचुरिआटा का गठन हुआ।

सर्वियस इन्लियस (r. 575.535 बी सी ई) ने काॅमीशिया क्यूरिआटा के प्रमुख अधिकार काॅमिशिया सेंचुरिआटा को स्थानांतरित कर दिए। फिर भी क्यूरिआटा के पास सेंचुरिआटा द्वारा पारित किसी भी मसले को पारित करने या अस्वीकार करने का अधिकार कायम रहा। प्यूनिक युद्धों के काल में, क्यूरिआटा ने अपना महत्व पूर्णरूप से खो दिया और उसका अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया तथा उसका अधिकार क्षेत्र मात्र सामाजिक-धार्मिक प्रकृति के मसलों तक सिमट कर रह गया।

काॅमीशिया सेंचुरिआटा

काॅमीशिया सेंचुरिआटा, क्युरिआटा की तरह ही यह भी सभी नागरिकों की सभा थी जिसमें अभिजात वर्ग और निम्न वर्ग दोनों (दास, पेरेग्सिनी विदेशी,, महिलाएं ओर ऐईरारी ख्जो व्यक्तिगत कर के अधीन थे, को छोड़कर) सम्मिलित थे। हालांकि, ये लोग अलगअलग समूह में बंटे हुए थे। तीस क्यूरिआई से 193 ‘सेंचुरिआई’ (प्रत्येक सेंचुरिआई में 100 पुरुष होते थे, यद्यपि ऐसा हमेशा नहीं होता था) का निर्माण हुआ। ये सेंचुरिआई पांच वर्गों में समूहित थीं। इनमें से प्रथम तीन विशेष रूप से कुलीन वर्ग ओर भूपति वर्ग के लिए थीं। संपत्तिहीन नागरिकों को प्रोलेतारी के नाम से वर्गीकृत किया गया जो कि अंतिम वर्ग में आते थे, यद्यपि ये संख्या में सबसे अधिक थे ओर पहले तीन वर्ग संख्या में काफी कम थे। लेकिन, संख्या का मतदान के संदर्भ में कोई अर्थ नहीं था क्योंकि, प्रति व्यक्ति (एक मत एक व्यक्ति) का मत नहीं गिना जाता था बल्कि प्रति ‘सेंचुरिआई’ का एक मत गिना जाता था ओर प्रोलेतारी को 193 सेंचुरिआई में से प्रति सेंचुरिआई केवल एक ही मत प्राप्त होता था। इस प्रकार, अल्पसंख्यक होने के बावजूद अभिजात वर्ग की आवाज़ सभा में प्रभावी होती थी। ये वर्ग अगर किसी विषय पर निर्णय ले लेते थे तो निम्न वर्ग के मत की आवश्यकता नहीं होती थी। यहां तक कि ऐसा बहुत कम ही होता था जब निम्न वर्ग  को मत के लिए बुलाया जाता था। यह अश्वारोहियों के साथ भी होता था (मूल रूप से रोमन सेना के घुड ़सवार, जो बाद में राजनेतिक महत्व के समृद्ध वर्ग में शामिल हो गए)।

450 बी सी ई के आस-पास गठित सेंचुरिआटा गणतंत्र काल के दोरान नागरिकों की प्रमुख सभा बनी रही। सर्विअस इ ्यूलियस ने काॅमिआटा के अधिकार क्षेत्र से मजिस्ट्रेटों, काॅन्सलों ओर नियंत्रकों को चुनना, कानून पारित करना (ट्वेल्व टेबल का प्रसिद्ध कानून काॅमिआटा सेंचुरिआटा द्वारा पारित हुआ था), सेंचुरिआटा में अपील करने का अधिकार, युद्ध ओर शांति से संबंधित विषय आदि अधिकारों को स्थानांतरित कर दिया जो कि सभा के विशेषाधिकार थे।

काॅन्सिलियम प्लेबिस अथवा काॅमिशिया प्लेबिस ट्रिब्यून

काॅन्सिलियम प्लेबिस विशेष रूप से निम्न वर्ग की विधानसभा थी। यहां निम्न वर्ग से संबंधित सभी विषयों पर चर्चा होती थी। इसके द्वारा प्लेबियन ऐडिलेस सार्वजनिक इमारतों के प्रबंधन के लिए उत्तरदायी) ओर प्लेब्स ट्रिब्यून का चुनाव किया जाता था। इनके प्रस्ताव केवल प्लेबी सूला (कानून केवल प्लेबिस पर ही प्रभावी) थे। इस संस्था की स्वीकार्यता ओर सभा की सफलता इस तथ्य द्वारा आंकी जा सकती है कि जब 494 बी सी ई में प्लेबिस के दबाव में सभा द्वारा चयनित दो व्यक्तियों को, जिन्हें कहा जाता था, राज्य ने (काॅन्सल के रूप में) प्रतिष्ठित करने की स्वीकार्यता दी। 448 बी सी ई, तक इनकी संख्या बढ़कर दस ट्रिब्यून हो गई। इसका महत्व इस अर्थ में है कि इसने निम्न वर्ग को सत्ता में प्रवेश प्रदान किया, इस प्रकार, ट्रिब्यून का पद समृद्ध निम्न वर्ग के बीच सबसे अधिक मांग में आ गया।

एक अन्य सभा काॅमिशिया पाॅपुली ट्रिब्यूटा (जनजातीय लोगों की सभा) भी थी जिसके सदस्य सभी नागरिक थे और ये तीन जनजातीय समूहों में वर्गीकृत थे। यह प्राचीनतम सभा थी जो राजतंत्र के समय से अस्तित्व में थी। जनजाति के सभी युवा पुरुष सभा के सदस्य थे। इसका क्रम जनजातियों के विस्तार के अनुसार व्यवस्थित होता था।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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