व्याख्यान विधि क्या हैं ? इसके गुण व दोष

व्याख्यान विधि का उपयोग प्राचीन काल में किया जाता था। वर्तमान समय में विद्यालयों में भी इस विधि का उपयोग किया जाता है। व्याख्यान विधि में भाषण द्वारा शिक्षण प्रदान करना। इस विधि का प्रयोग माध्यमिक कक्षाओं एवं उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं में किया जाता है। इस विधि में शिक्षक विस्तृत व्याख्या करके तथ्यों एवं घटनाओं को समझाता है।

व्याख्यान विधि क्या हैं

व्याख्यान विधि यह पद्धति सबसे प्राचीन पद्धति मानी जाती हैं। इस विधि का प्रयोग शिक्षण विधियों के प्राप्त इतिहास के प्रारम्भ से ही किया जा रहा हैं। किसी विषय की बहुत अधिक समय तक विस्तार से व्याख्या करते चले जाना ही व्याख्यान कहलाता हैं इस विधि में शिक्षण का केन्द्र बिन्दु अध्यापक होता हैं वही सक्रिय रहता हैं अभिव्यक्ति को व्यक्त करने के लिये यह विधि जितनी प्रचलित हैं उतनी आसान नहीं। शिक्षण इस विधि में एक कुशल वक्ता के रूप में कार्य करता हैं और छात्र उसे सुनते हैं।

व्याख्यान परिचर्या का मुख्य अंश हैं यह विधि आज कालेज तथा विश्वविद्यालय में मुख्य रूप से प्रचलित हैं इसमें अध्यापक पूरी तैयारी करके व्याख्यान प्रस्तुत कर छात्रों में व्यवहार परिवर्तन का प्रयास करता हैं इस प्रकार जीव विज्ञान विषय का ज्ञान छात्रों तक पहुंचता हैं शिक्षण को सुनने के साथ साथ छात्र सम्प्रेषण के दौरान महत्वपूर्ण तथ्यों को नोट करने का प्रयत्न करते हैं।

प्रायः अच्छे व्याख्यान में निम्नलिखित तथ्यों का समावेश होना चाहिए।  1. तैयारी 2. प्रस्तुतीकरण 3. व्यक्तित्व कक्षा में जाने से पूर्व अध्यापक को विषय के संदर्भ में पाठ योजना तैयार करके आवश्यक अध्ययन तथा पूर्व जानकारी के साथ प्रस्तुत करना चाहिए।

व्याख्यान प्रणाली का प्रयोग करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए।
  1. व्याख्यान लम्बा, औपचारिक तथा ऊबाई नहीं होना चाहिए।
  2. शिक्षक को चाहिए कि व्याख्यान में पाठ्य सामग्री को क्रमबद्ध कर लें, शिक्षक को छात्रों की रुचि तथा स्तर का ध्यान भी रखना चाहिए।
  3. व्याख्यान रोचक एवं सक्रिय होना चाहिये क्योंकि अधिगम सक्रिय क्रिया हैं, इसलिये उसमें छात्र अध्यापक के मध्य अन्तः क्रिया होनी चाहिए।
  4. व्याख्यान शब्द प्रतीकों के माध्यम से प्रस्तुत विषय का पूर्ण चित्र छात्रों के मस्तिष्क में अंकित करने में सक्षम होना चाहिए।
  5. छात्र व्याख्यान को समझ सके, इसके लिये व्याख्यान के साथ अन्य किसी विधि का प्रयोग भी आवश्यक हैं।

व्याख्यान विधि की उपयोगिता

  1. व्याख्यान विधि के द्वारा शिक्षण को प्रभावशाली बनाने के लिए शिक्षक एवं शिक्षार्थी में सम्पर्क स्थापित होना आवश्यक है। शिक्षक जब भाषण देता है तो उसकी आवाज, भावभंगिमा, शारीरिक संचालन से छात्रों से सम्पर्क हो जाता है।
  2. इससे विद्यार्थियों में सुनने के कौशल का विकास होता है।
  3. व्याख्यान विधि अवधारणाओं को स्पष्ट करने की महत्वपूर्ण विधि है।
  4. व्याख्यान विधि से छात्रों की समय और शक्ति की बचत होती है।
  5. वर्तमान समय में प्रोजेक्ट विधि, समस्या शिक्षण विधि के सफल क्रियान्वित करने के लिए व्याख्यान विधि की आवश्यकता होती है।
  6. शिक्षक जब अपना भाषण तैयार करता है, तो वह बहुत पुस्तकों का सहारा लेता है। जिससे वह उन पुस्तकों का भाषण में उल्लेख करता है। प्रतिभाशाली विद्यार्थी उन पुस्तकों का अध्ययन कर अपनेज्ञान में वृद्धि करते हैं।

व्याख्यान विधि के गुण

  1. यह अत्यन्त सरल, संक्षिप्त एवं तीव्र गति से चलने वाली विधि हैं।
  2. इस विधि से समय की बचत होती हैं बहुत कम समय में ही एक साथ कई छात्रों को अधिक पाठ्य वस्तु दी जा सकती हैं।
  3. यह विधि छात्रों में तर्क शक्ति का विकास करती हैं
  4. इस विधि में अधिक धन तथा श्रम नहीं लगता हैं, क्यों कि इस विधि में प्रयोगशाला की आवश्यकता नहीं पड़ती हैं।
  5. इस विधि द्वारा संगठित ज्ञान निश्चित ज्ञान क्रम में विद्यार्थियों हैंतु प्रस्तुत किया जाता हैं।
  6. इस विधि से जीव विज्ञान शिक्षण के प्रेरणात्मक पक्षों का भी अधिक प्रभावशाली ढंग से विवेचन हो जाता हैं।
  7. नवीन पाठ प्रसंग तथा विषय की प्रस्तावना प्रस्तुत करने के लिये व्याख्यान विधि सर्वोत्तम हैं।
  8. छात्रों पर नियंत्रण रखना आसान होता हैं।
  9. स विधि से छात्रों में रुचि पैदा होती हैं साथ ही साथ शिक्षक को पाठ्य वस्तु की समाप्ति के साथ ही साथ स्वयं प्रेरणा मिलती हैं।

व्याख्यान विधि के दोष

  1. व्याख्यान विधि के द्वारा विद्यार्थी निष्क्रिय श्रोता बन जाते हैं।
  2. शिक्षक के द्वारा भाषण की तैयारी अच्छी न होने के कारण वास्तविक विषय से हट जाते हैं और अनावश्यक बातों को समाहित करते हैं।
  3. विद्यार्थी ज्ञान अर्जन के लिए शिक्षक पर निर्भर हो जाते हैं, क्योंकि वह शिक्षक के द्वारा दिये गये ज्ञान से संतुष्ट हो जाते हैं।
  4. व्याख्यान विधि के लिए शिक्षक द्वारा अध्ययन तथा अभ्यास की आवश्यकता के साथ भाषण कला में पारंगत होने की आवश्यकता होती है और सभी अध्यापक इसमें निपुण नहीं होते हैं।
  5. बच्चों में हमेशा बोरियत और अरूचि का भाव व्याप्त रहता हैं।
  6. इस विधि में बच्चों की भागीदारी बहुत कम होती हैं।
  7. अध्यापक द्वारा बताये गये तथ्यों को याद करते हैं।
  8. अध्यापक के व्याख्यान के समय बच्चे सिर्फ श्रवण क्रिया करते हैं ।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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