व्यावसायिक शिक्षा से आप क्या समझते हैं?

व्यावसायिक शिक्षा दो शब्दों के संयोग से निर्मित है। जिसमें पहला शब्द व्यवसाय एवं दूसरा शब्द शिक्षा है। ’’व्यवसाय’’ शब्द जीविकोपार्जन के लिए अपनाये जाने वाले कारोबार के अर्थ में है तथा शिक्षा-संबंधित व्यवसाय के प्रशिक्षण युक्त सीखने से है। तात्पर्य-व्यावसायिक शिक्षा वह शिक्षा है जो व्यवसाय संचालन संबंधी जानकारी प्रदान करती है।

व्यवसाय व तकनीकी दो ऐसे शब्द हैं जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हम सभी के साथ जुडे़ हैं। व्यवसाय से आशय वाणिज्य व उद्योग के सम्पूर्ण जटिल क्षेत्र, आधारभूत उद्योगों, प्राविधिक व निर्माणी उद्योग तथा सहायक सेवाओं के वृहद-जाल वितरण, बैंकिंग आदि से है। तकनीकी शिक्षा व्यावसायिक शिक्षा का अंग है। किसी भी समाज की अर्थव्यवस्था उसके व्यावसायिक विकास पर निर्भर करती है। व्यावसायिक शिक्षा व्यक्ति को किसी कार्य या व्यवसाय से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करती है। ताकि वह उस व्यवसाय के द्वारा अपनी जीविका का उपार्जन कर सकें।

व्यावसायिक शिक्षा कामगारों को दी जाने वाली शिक्षा या प्रशिक्षण है इसकी उत्पत्ति कार्य प्रशिक्षण अथवा कार्य अभ्यास से मानी जाती है इसी प्रकार की शिक्षा या प्रशिक्षण जिसमें कामगार भाग लेता है को व्यावसायिक शिक्षा कहते हैं।

व्यावसायिक शिक्षा का अर्थ मानव कार्य की शिक्षा से भी हो सकता है अर्थात् इसमें मनुष्य मस्तिष्क के बजाए हाथों से अधिक काम करता है। जैसे - चमडे़ का कार्य, लकड़ी का कार्य, धातु का कार्य, ड्राइंग आदि

जान डी वी के अनुसार ’’व्यवसाय परक शिक्षा व्यक्तियों को एक विशिष्ट कार्य के योग्य बनाती है, जिससे अपनी विशिष्ट सेवाओं के द्वारा समाज में विशिष्ट क्षमता का प्रदर्शन करता है।’’

सामाजिक विज्ञान का विश्व कोष ’’व्यापक रूप में व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत उस सब प्रकार की शिक्षा को सम्मिलित किया जा सकता है, जिसके द्वारा किसी भी व्यक्ति को जीविकोपार्जन के लिए प्रशिक्षण प्राप्त होता है।’’

अमेरिकन व्यावसायिक संगठन ’’व्यावसायिक शिक्षा ऐसी शिक्षा है जिसकी आवश्यकता कौशल विकास, योग्यता, समझ, व्यवहार, काम करने की आदत के लिए है और जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने व्यवसाय में विकास करता है और जो उत्पादकता के आधार के लिए लाभकारी है।’’

राधाकृष्णन आयोग (1998) ’’व्यावसायिक शिक्षा वह प्रक्रिया है जिसमें स्त्री एवं पुरुष व्यावसायिक भावनाओं के साथ परिश्रम पूर्व और उत्तरदायी सेवा के लिए अपने को योग्य बनाते हैं।’’

व्यावसायिक शिक्षा व्यक्ति को बिना कौशल वाले कार्य से हटाकर बौद्धिक स्तर पर पहुँचाने की क्षमता को बढ़ाती है। कोई भी ऐसा कार्य जो व्यक्ति के स्वयं या समाज के लिए आवश्यक है के लिए दी जाने वाली शिक्षा व्यावसायिक शिक्षा है। यह एक विशिष्ट शिक्षा है जो सामान्य शिक्षा से भिन्न है।

इस प्रकार व्यावसायिक शिक्षा व्यक्ति को किसी कार्य या व्यवसाय से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान करती है। ताकि वह व्यक्ति उस व्यवसाय द्वारा अपनी जीविका का उपार्जन कर सके। व्यावसायिक शिक्षा वह शिक्षा है जो विद्यार्थियों को किसी व्यावसायिक पाठ्यक्रम के लिए तैयार करती है।

यह रोजगार का ऐसा समुच्चय है जो किसी रोजगार के लिए विशेष रूप से आवश्यक है। कुछ विशेष प्रकार के रोजगारों के लिए कुछ विशेष छोटे या बडे़ स्वरूप की विशेष शिक्षा की आवश्यकता होती है। बुद्धिजीवियों के लिए जिनके लिए बौद्धिक क्षमताओं की आवश्यकता है - व्यावसायिक शिक्षा व्यवसाय के पूरे परिदृष्य को शामिल करती है। कार्य करते समय कम कौशल के कार्यों के लिए भी विशेष शिक्षा की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त इसकी आवश्यकता सामुदायिक महाविद्यालयों, तकनीकी संस्थाओं, महाविद्यालय या विश्वविद्यालय स्तर पर उच्च स्तर की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए होती है।

  1. जो व्यक्ति को रोजगार में प्रवेश के लिए तैयार करें।
  2. रोजगार में प्रवेश के उपरांत व्यक्ति की कार्य क्षमता को बढ़ाने के लिए।

व्यावसायिक शिक्षा के उद्देश्य 

  1. प्रत्येक व्यक्ति की रोजगार क्षमताओं को बढ़ाना और उनकी रुचि अनुसार उनको शिक्षा और रोजगार देना
  2. कुषल जनषक्ति की माँग और आपूर्ति के बीच अंतर को कम करना।
  3. शिक्षा के सुअवसरों में विभिन्नता लाना।
  4. विद्यार्थियों में आत्मविश्वास लाना।
  5. निरुद्देश्य एवं रूचिविहीन उच्च शिक्षा प्राप्त विद्यार्थियों को विकल्प उपलब्ध कराना।
  6. अधिक संख्या में स्वरोजगार आधारित पाठ्यक्रमों को तैयार करना।

व्यावसायिक शिक्षा के सामान्य सिद्धांत

व्यावसायिक शिक्षा के सामान्य सिद्धांत इस प्रकार है:-

  1. जिस प्रकार के वातावरण में प्रशिक्षु को प्रशिक्षण दिया जाता है उसी प्रकार से व्यावसायिक शिक्षा प्रभावशाली होती है।
  2. प्रभावशाली व्यावसायिक शिक्षा वहीं दी जा सकती है जहाँ उससे संबंधित कार्य उसी तरीके से किया जाये और उसकी तरह के औजार और मशीनों का प्रयोग किया जाए जैसा व्यावसायिक शिक्षा में बताया गया है।
  3. व्यावसायिक शिक्षा जिस अनुपात में लोग रूचि लेते हैं, अपनी बुद्धि का प्रयोग करते हैं उसी अनुपात में प्रभावशाली होगी।
  4. व्यावसायिक शिक्षा से लोगों की सही आदत और सही सोच की पुनर्रावृत्ति होती है।
  5. व्यावसायिक शिक्षा तभी प्रभावित होती है जबकि शिक्षक को स्वयं उसका ज्ञान हो और कार्य अनुभव हो।
  6. प्रत्येक व्यवसाय के लिए न्यूनतम उत्पादक योग्यता होनी चाहिए जो प्रशिक्षु में होती है। यदि वह नहीं है तो ऐसी शिक्षा का व्यक्तिगत और सामाजिक प्रभाव नहीं होता।
  7. व्यावसायिक शिक्षा तभी प्रभावशाली होती है जब वह आवश्यकतानुरूप और समयानुकूल प्रशिक्षण दे।
  8. व्यावसायिक शिक्षा को लचीला और तरल होना चाहिये न कि कठोर और मानकीकरण युक्त। 

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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