प्रोग्रामिंग लैंग्वेज क्या है प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कितने प्रकार के होते हैं?

कम्प्यूटर एक प्रशंसनीय आविष्कार है कम्प्यूटर स्वयं किसी भी कार्य को करने में सक्षम नहीं है। कम्प्यूटर को जो भी निर्देश दिए जाते हैं यह उनका पालन कर उसी प्रकार से कार्य करता है। इन कम्प्यूटर अनुदेशों को ही कम्प्यूटर प्रोग्राम कहते हैं। कम्प्यूटर प्रोग्राम को कम्प्यूटर की भाषा में लिखना बहुत जरूरी है। क्योंकि तभी कम्प्यूटर इन अनुदेशों को समझ सकेगा। वह भाषा जिसमें कम्प्यूटर दिए गए निर्देशों को समझ सकता है, प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कहलाती है। अनेक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज  (Programming language) प्रचलन में है।

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज क्या है

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के प्रकार

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Programming language) को इस प्रकार से वर्गीकृत कर सकते हैं -
  1. मशीन भाषा
  2. असेम्बली भाषा
  3. हाई लेवल भाषा
मशीन भाषा और असेम्बली भाषा को निम्न स्तर की भाषा माना गया है क्योंकि इनमें मशीन कोड का प्रयोग किया गया है जिसे सामान्य व्यक्ति नहीं समझ सकता। आज ऐसी अनेक भाषाएँ विकसित कर ली गई हैं जिन्हें समझ कर कोई भी सामान्य व्यक्ति कम्प्यूटर पर कार्य कर सकता है। इन भाषाओं को उच्चस्तरीय भाषा माना गया है। संक्षेप में कहें तो जिन भाषाओं को कम्प्यूटर समझता हैं वो निम्न स्तर की और जिन्हें हम समझते है वो उच्च स्तरीय भाषा कहलाती हैं।

1. मशीन भाषा

वह भाषा जिसे मशीन कम्प्यूटर सीधा ही समझ ले जिसको समझने के लिये अनुवाद करने की आवश्यकता न हो उसे ‘मशीन भाषा‘ कहते हैं। मात्र मशीन के द्वारा ही समझने के कारण इस भाषा को (Low Level) भाषा कहते हैं। यह कम्प्यूटर की मूलभूत भाषा है जो द्विवर्ण अंक (binary digit) ‘0’ एवं ‘1’ में ही लिखी जाती है। कम्प्यूटर द्वारा इस भाषा के अनुदेश सीधे समझ लेने से गणना कार्य बहुत तेजी से हो जाता है लेकिन मशीन भाषा में प्रोग्राम लिखना बहुत कठिन काम है। ये भाषा प्रथम पीढ़ी एवं द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटरों में 1950-1960 तक प्रयोग की जाती थी।

2. असेम्बली भाषा 

असेम्बली भाषा को प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के विकास का प्रथम चरण माना जाता है। यूजर द्वारा मशीन भाषा को समझने की कठिनाइयों को दूर करने के लिये इस भाषा में ‘0’ और ‘1’ के स्थान पर कुछ विशेष सांकेतिक शब्दों के निर्देश अंग्रेजी भाषा में लिखे जाने लगे जिन्हें आसानी से याद भी रखा जा सकता था। इन शब्दों को (Mnemonic) कोड या सांकेतिक मशीन कोड भी कहते हैं। इस भाषा से उपयोग करने वाले आसानी से संकेतों को याद रख सकते हैं किन्तु कम्प्यूटर तो '0' से '1' को ही समझता है। असेम्बली भाषा में दिये गये निर्देशों का मशीन भाषा में अनुवाद करना होता है जिसके लिये प्रोग्राम भाषा अनुवादक की आवश्यकता होती है जिसे असेम्बलर (Assembler) कहते है। असेम्बलर एक सिस्टम प्रोग्राम है जो कम्प्यूटर निर्माता द्वारा प्रदाय किया जाता है।

असेम्बली भाषा मशीन आश्रित होने से एक कम्प्यूटर के लिये बनाया गया प्रोग्राम अन्य कम्प्यूटरों के लिये सही नहीं होता। इस प्रोग्राम को लिखने के लिये कम्प्यूटर के हार्डवेयर का भी पूर्ण ज्ञान होना आवश्यक है। असेम्बली भाषा में लिखा प्रोग्राम कम्प्यूटर में निवेश करने से पहले असेम्बलर को लोड करना आवश्यक होता है जिसमें कम Memory वाले कम्प्यूटर के लिये यह सही नहीं होता।

हाई लेवल भाषा 

मशीन भाषा और असेम्बली भाषा में कम्प्यूटर के हार्डवेयर का ज्ञान होने की उलझन के कारण इनका उपयोग Experts तक ही था। कम्प्यूटर को  सभी के लिएसाधारण के उपयोगी बनाने के लिए ऐसी भाषा की आवश्यकता की जाने लगी कम्प्यूटर द्वारा ऑटोमैटिक  ही मशीन भाषा में अनुवाद करने की सुविधा हो। इस प्रकार ऐसी भाषा के निर्माण के प्रयास किये जाने लगे जो मशीन निर्भर न हो और जिसके लिये प्रोग्रामर को कम्प्यूटर हार्डवेयर का ज्ञान होना जरूरी न हो। इस कारण उच्चस्तरीय भाषा का निर्माण हुआ जिनको मनुष्य समझ सके। इसमें गणित व तार्किक निर्देशों को लिखने के लिये अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता है जिनको समझकर सामान्य व्यक्ति भी कम्प्यूटर का उपयोग किया जा सकता है। 

हाई लेवल भाषा को लिखना भी सरल है तथा इनमें से गलतिया ढूँढना और सुधारना भी आसान है। मशीन आधारित न होने से यह सभी प्रकार के कम्प्यूटर पर क्रियान्वित की जा सकती है।

हाई लेवल लैंग्वेज कौन कौन सी हैं?

1960 से 1970 तक तृतीय पीढ़ी, 1970 से 1980 तक चतुर्थ पीढ़ी और 1980 से अब तक पंचम पीढ़ी की हाई लेवल भाषा में श्रेणीगत की गई हैं। प्रमुख प्रचलित हाई लेवल भाषा हैं- BASIC, CC ++, COBOL, FORTRAN, Java, Pascal, Perl, PHP, Python, Ruby और Visual Basic हाई लेवल भाषा हैं। 

1. फाॅरट्रान (FORTRAN) - फाॅरट्रान का फुल फॉर्म फाॅरमुला ट्रांसलेशन (Formula Transation) है। फाॅरमुला से FOR तथा ट्रांसलेशन से TRAN लेकर इसे फाॅरट्रान से संबोधित करते है। यह सबसे पुरानी और प्रचलित भाषा है। इस भाषा को वैज्ञानिक और Engineering के क्षेत्र की समस्याओं के समाधान हेतु बनाया गया था। सबसे पहले इसका उपयोग 1957 में (IBM) कम्पनी में किया गया। इस भाषा के कई Version जैसे फाॅरट्रान II, फाॅरट्रान IV, से लेकर फाॅरट्रान 90, 95 भी विकसित हो चुके है।

2. बेसिक (BASIC) - बेसिक का फुल फॉर्म Beginners’ All Purpose Symbolic Instruction Code है। इसे शॉर्ट मे बेसिक से संबोधित करते हैं। इस भाषा का विकास 1963 में किया गया। इस भाषा को आसानी से जल्दी ही सीखा जा सकता है। 

3. कोबोल (COBOL) -  कोबोल का फुल फॉर्म Common Business Oriented Language है। इसे शॉर्ट मे कोबोल से संबोधित करते हैं। 

4. पास्कल (Pascal) - इस भाषा का नामकरण फ्रांसीसी गणितज्ञ Blaise Pascal के नाम पर किया गया। यह भाषा 1971 में Nicholas Wirth द्वारा विकसित की गई। इस भाषा को विकसित करने का उद्देश्य ऐसी भाषा का विकास करना था जिसकी सहायता से नौसिखिए प्रोग्राम बनाने की विधि को सीख सकें।

5. भाषा (C) - यह भाषा 1972 में (Dennis Ritchi) द्वारा विकसित की गई। सर्वप्रथम इसका उपयोग (UNIX) के आपरेटिंग सिस्टम को लिखने के लिये किया गया। आज भी इस भाषा को सरल और उपयोगी माना जाता है। यूनिक्स के लिये अनेक प्रोग्राम C भाषा में लिखे गये हैं जिनका उपयोग कर अन्य एप्लीकेशन प्रोग्राम बनाये जा सकते हैं।

6. सी़++ (C++) - यह  सरल भाषा है जिसे साधारण अंग्रेजी भाषा में लिखा जा सकता है।

7. जावा (JAVA) - इसको (OAK) नाम से संबोधित किया जाता था लेकिन बाद में इसका नाम जावा (JAVA) कर दिया गया। जावा भाषा को Java Jamcs Hosling ने टैलीविजन आदि उपयोक्ता इलेक्ट्राॅनिक्स के लिये विकसित किया था। 

संदर्भ -
  • नाइक, नितिन के (2008) सूचना प्रौद्योगिकी, कमल प्रकाशन, इंदौर।
  • www.web3tutorial.com/mysgl/sql in hindi php
  • विकिपीडिया.ऑर्ग/विकी/प्रोग्रामिंग भाषा
  • http: // www.webopedia.com > प्रोग्रामिंग भाषा

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

Post a Comment

Previous Post Next Post