अंतर्राष्ट्रीय विपणन क्या है इसकी प्रकृति एवं आवश्यकता का वर्णन?

अंतर्राष्ट्रीय विपणन वही हो सकता है जो एक से अधिक राष्ट्रों में किया जाता हो। स्वदेशी विपणन व अंतर्राष्ट्रीय विपणन का एक मात्र महत्वपूर्ण अंतर यह है कि अंतर्राष्ट्रीय विपणन एक से ज्यादा देशों में किया जाता है। विपणन की जो अवधारणाएं हैं वह राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर दोनों ही समान मानी जाती है। विपणन की प्रक्रिया व सिद्धांत भी वही मान्य होते है। व्यवसाय का मुख्य लक्ष्य उत्पादों के प्रचार मूल्य निर्धारण और वितरण करके लाभ कमाएं जिसके लिए बाजार बना है।

अंतर्राष्ट्रीय विपणन की परिभाषा

1. प्राइड तथा फैरेल के अनुसार- ”अंतर्राष्ट्रीय विपणन से तात्पर्य राष्ट्रीय सीमा रेखा से पार विपणन क्रियाओं का विकास एवं निष्पादन करना है।”

2. कैटोरा और गौरी (1993) के अनुसार- ”अंतर्राष्ट्रीय विपणन उन व्यापार गतिविधियों का कार्य-संपादन है जो मुनाफे के लिए एक से अधिक देश में उपभोक्ताओं या प्रयोक्ताओं के लिए एक कंपनी की व्यापारिक वस्तुओं और सेवाओं के प्रवाह का निर्देशन करता है।”

3. क्रैवेन्य के अनुसार- ”अंतर्राष्ट्रीय विपणन अन्य देशों के बाजारों में विपणन के उद्देश्यों को पूरा करने हेतु विपणन व्यूह रचनाओं का निर्माण एवं क्रियान्वयन करना है।” 

अंतर्राष्ट्रीय विपणन की प्रकृति

1. एक से अधिक देशों में विपणनः अपने देश से दूसरे देश में किया जाने वाला व्यवसाय है जिसे अंतर्राष्ट्रीय विपणन माना जाता है।

2. विदेशों में उत्पाद व सेवाओं का प्रवाहः विदेशों में सिर्फ उत्पादों का ही नहीं बल्कि सेवाओं का भी प्रवाह बनता है।

3. विदेशी वातावरण का विश्लेषणः कई देशों की भाषाएं, बोलचाल, खान-पान, रहन-सहन अलग होता है। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय के लिए विदेशी अर्थव्यवस्था, व्यावसायिक पर्यावरण, वह उपभोक्ता व्यवहार की जानकारी हो होना आवश्यक है।

4. अलग कानून प्रणालीः प्रत्येक देश की अपनी कानून प्रणाली होती है, इसलिए अंतर्राष्ट्रीय विपणन के लिए देशी और विदेशी दोनों ही नियमन प्रणाली के साथ करना होता है। इसलिए विपणनकर्ता को अंतर्राष्ट्रीय विपणन के लिए अपने तथा विपणन करने वाले विदेशी बाजार के आधार पर ही विपणन करना होता है। कुछ देश सिविल लाॅ अपनाते हैं तो कुछ अंग्रेजी काॅमन लाॅ अपनाते हैं।

5. अंतर्राष्ट्रीय विपणन अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से अलग हैः अंतर्राष्ट्रीय विपणन व अंतर्राष्ट्रीय व्यापार ये एक दूसरे से अलग है। अंतर्राष्ट्रीय विपणन एक प्रबंधकीय अवधारणा है जिसमें विपणन प्रबन्धकीय गुण के आधार पर कई देशों में विपणन उद्देश्यों को पूरा करने पर विचार करता है। दूसरी तरफ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कई देशों में संसाधनों की मांग व पूर्ति के संतुलन को बनाये रखने के लिए क्रियाशील होता है। यह देश के निर्यात व आयात की गतिविधियों से संबंधित होता है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सरकारी संस्थानों द्वारा विपणन प्रबंध कर के किया जाता है किन्तु अंतर्राष्ट्रीय विपणन अपने व्यवसाय के मुख्य उद्देश्य लाभ हेतु किसी कंपनी द्वारा दूसरे देश में किया जाता है।

6. कई देशों में विपणन उद्देश्यों की पूर्तिः विदेशों में बाजार का आकार बड़े रूप में मिलता है वहां व्यवसाय कर के कंपनियां अपने विपणन के उद्देश्यों की पूर्ति करती है।

7. मौद्रिक प्रणालीः अंतर्राष्ट्रीय विपणन में अन्य देशों की मौद्रिक प्रणाली का ज्ञान होना भी आवश्यक है जो उस देश की सरकार द्वारा सुनिश्चित की जाती है। तथा देश का मुद्रा की विनिमय दूर, उत्पाद व सेवाओं की मांग व पूर्ति की शक्ति द्वारा निर्धारित की जाती है।

अंतर्राष्ट्रीय विपणन को उपरोक्त प्रकृति से यह निश्चित होता है कि अंतर्राष्ट्रीय विपणन राष्ट्रीय विपणन के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से भी अलग है। अंतर्राष्ट्रीय विपणन के लिए प्रबंध को सही ज्ञान होना जरूरी है जिसकी सहायता से वह विदेशी विपणन नीति व उपभोक्ता व्यवहार को जान सके तथा विदेशी विपणन से लाभ कमा सके।

अंतर्राष्ट्रीय विपणन की आवश्यकता तथा महत्व

अंतर्राष्ट्रीय विपणन के महत्व को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है जो हैं-
  1. उपभोक्ता के दृष्टिकोण से
  2. उत्पादक के दृष्टिकोण से
  3. अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से

1. उपभोक्ता के दृष्टिकोण से

1. कई देशों के कानून अलग - अलग होते हैं इसलिए जो वस्तु एक देश के कानून के अंतर्गत अनुचित उपभोग में आती हो वो अन्य देश में उपभोग की जा सकती है। तो उपभोक्ता इसका पूर्ण फायदा लेकर उस वस्तु का उपभोग कर सकते हैं।

2. अंतर्राष्ट्रीय विपणन से उपभोक्ता को कम कीमत में उपभोग की वस्तुएं मिल जाती हैं। क्योंकि बाजार में प्रतियोगिता बढ़ने से मूल्य में अंतर आ जाता है।

3. अंतर्राष्ट्रीय विपणन से सभी देशों के विपणनकर्ताओं के बीच प्रतियोगिता बढ़ती है जिस वजह से वस्तुएं अच्छी गुणवत्ता के साथ-साथ कम मूल्य में प्राप्त होती है जिसका लाभ उपभोक्ताओं को मिलता है।

4. सभी देशों की वस्तुओं को उत्पाद करने की तकनीक अलग होती है। वे नये शोध में संलग्न होते हें उर नई वस्तुएं बाजार में उपलब्ध करते हैं जिसका फायदा उपभोक्ताओं को मिलता है।

2. उत्पादक के दृष्टिकोण से

1. अंतर्राष्ट्रीय बाजार एक बड़ा बाजार है जहां उत्पादक अपने अतिरिक्त उत्पाद को निर्यात द्वारा विक्रय कर के अधिक लाभ बढ़ा सकता है।

2. एक ही देश में विपणन करने से विकास की संभावनाएं कम होती है इससे ठीक उलटा विदेशों में विपणन से बाजार में विस्तार मिलता है और उत्पादक इसका पूर्ण लाभ ले सकते हैं।

3. कई देशों में उत्पादन के साधनों की लागत अलग -अलग होती है। जिस कारण औसत लागत में कमी आती है और उत्पादक समान गुणवत्ता का उत्पाद कम मूल्य में बेच पाता है। जो अंतर्राष्ट्रीय विपणन से ही संभव है।

4. विदेशी विपणन से मांग में वृद्धि होती है जिस वजह से उत्पाद में वृद्धि करना पड़ती है। और उत्पादन में वृद्धि होने से कुल लागत में कमी आती है जो अपने आप लाभ मात्रा अनुपात बढ़ाता है।

5. कभी-कभी ऐसा होता है कि किसी उत्पाद का विकसित देश में अप्रचलन हो जाता है। फलस्वरूप उन उत्पादों की मांग उस देश में नहीं होती है तो उस व्यावसायिक संस्थान पर संकट आ जाता है। ऐसी परिस्थिति में संस्थाएं अपने उत्पादन विदेशो में बेच देते हैं।

6. अंतर्राष्ट्रीय विपणन से उपभोक्ताओं को विदेशी वस्तुएं उपभोग करने से मिलती हैं जिससे वे गोर्वान्वित महसूस करते हैं जो एक उपभोक्ता की प्रकृति है पर इस प्रकृति से उत्पादकों को अंतर्राष्ट्रीय विपणन में लाभ प्राप्त होता है।

7. कई देशों की मुद्रा मूल्य में अंतर होता है तथा उपभोक्ताओं की विदेशी वस्तुओं की मांग बढ़ने से लागत में कमी आती है जिससे लाभ में बढ़ोतरी होती है। 

8. बाजार में विस्तार अंतर्राष्ट्रीय विपणन से उत्पन्न हुआ है इसके परिणामस्वरूप जो वस्तु एक देश में नहीं बिकती वह दूसरे देश में अधिक मांग उत्पन्न होने से बिक जाती है जिससे व्यापारिक जोखिम कम होती है।

3. अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से

1. जब किसी देश के उत्पादक अपनी वस्तुएं विदेशी बाजारों में निर्यात करने लगते हैं तो उन्हें पहले से अधिक उत्पादन क्षमता बढ़ानी पड़ती है जिससे उत्पादन बढ़ता है और इसका प्रभाव राष्ट्र के कुल या सकल उत्पादन पर भी पड़ता है।

2. विदेशी विपणन बढ़ने से निर्यात की दर भी बढ़ती है और निर्यात की दर बढ़ने से निर्यात की होने वाली आय में भी वृद्धि होती है जिससे देश की अर्थव्यवस्था को लाभ होता है।

3.तर्राष्ट्रीय विपणन से देश विदेश के ज्ञान तथा कई देशों की संस्कृति का आदान-प्रदान बढ़ता है जो किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी होता है।

4. अंतर्राष्ट्रीय विपणन से दो देशों के बीच शांति बनी रहती है तथा वह देश आवश्यकता या आपदा आने पर सहायता प्रदान भी करते हैं जो अंतर्राष्ट्रीय विपणन का महत्वपूर्ण पहलू है। 

5. बहुत से देशों की अर्थव्यवस्था अपने प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग इसलिए नहीं कर पाती क्योंकि वहां उसकी मांग अधिक नहीं होती है। अंतर्राष्ट्रीय विपणन से संसाधनों का अनुकूलतम प्रयोग किया जा सकता है जो उस देश की अर्थव्यवस्था को आर्थिक सबलता प्रदान करता है।

6. अंतर्राष्ट्रीय विपणन से विभिन्न देशों की आधुनिक तकनीक अपने देश में लाना आसान हो जाता है। सभी देशों की कंपनियां नये-नये अनुसंधान द्वारा उच्चतम तकनीकों का विकास कर रही है। जिससे कम लागत पर उचित उत्पाद होता है जिसका लाभ देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

7. देश जब अन्य देशों के साथ विपणन करता है तो उसे अपने गुणवत्तापूर्ण उत्पाद व सेवाएं प्रदान करने की जिम्मेदारी बढ़ जाती है और गुणवत्तापूर्ण वस्तुएं मिलने से राष्ट्र की विश्व में अलग छवि निर्मित होती है।

अंतर्राष्ट्रीय विपणन का क्षेत्र

अंतर्राष्ट्रीय विपणन को इस आधार पर अलग किया जा सकता है- 

1. निर्यात व्यापारः दूसरे देशों में उत्पाद व सेवाओं के विक्रय को निर्यात व्यापार कहा जाता है। इसमें विपणन संस्थानों द्वारा दूसरे देशों में सेवाओं व वस्तुओं का विक्रय किया जाता है। निर्यात व्यापार के लिए देश द्वारा प्रदान नियमों का पालन करना होता है जिसमें से कुछ विधियों जैसे- तकनीकी व प्रबंधकीय ज्ञान, परामर्श सेवाएं, संयुक्त साहस एवं सहयोग, विदेशों में शाखा स्थापित करना।

2. पुनः निर्यात व्यापारः इसके अंतर्गत एक देश दूसरे देश से  कच्चा माल लेकर उससे नया उत्पाद निर्मित कर के किसी तीसरे देश को बेच देता है। कभी-कभी पूर्ण निर्मित वस्तुएं दूसरे देश से निर्यात करके तीसरे देश को निर्यात कर दिया जाना भी पुनः निर्यात में आता है।

3. आयात व्यापारः जब किसी देश में किसी वस्तु या सेवा की आवश्यकता है लेकिन वह वस्तुएं या सेवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हों न हों तो ऐसी स्थिति में अन्य देश से उन वस्तुओं को  खरीदना आयात कहलाता है। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय विपणन कंपनियों द्वारा विदेशों से खरीद कर के अपने देश में बेचा जाता है।

4. उत्पादन का विशेषाधिकार : इस व्यवस्था के अनुसार एक निर्यातक एक अनुबंध के अंतर्गत दूसरे देश के व्यवसायी को अपने उत्पाद को निर्माण करने की अनुमति देता है। उदाहरणार्थ- डोमिनोस पीजा एक अमेरिकन कंपनी है जिसने अपने अधिकार भारत में प्रदान किये ताकि वहां अलग-अलग शहरों में इसके आउटलेट खोले जा सकें।

5. संयुक्त साहस : एक आयतक किसी अन्य निर्यातक के साथ मिलकर देश में संयुक्त स्वामित्व अधिकार में कारखाने की स्थापना करते हैं या पहले से निर्मित आयातक के कारखाने में निर्माण करते है और फिर संयुक्त रूप से उन वस्तुओं या सेवाओं का अंतर्राष्ट्रीय विपणन करते हैं। तो वह संयुक्त साहस कहलाता है- मारूति-सुजुकी इसका उदाहरण है।

6. सहायक कंपनी के रूप में : एक देश का विपणनकर्ता दूसरे देश की किसी कंपनी के साथ सहायक कंपनी के रूप में जुड़कर अंतर्राष्ट्रीय विपणन को बढ़ावा दे सकता है। भारत के बिरला ग्रुप ने कनाडा के सनलाइफ वित्त और बीमा कंपनी के साथ मिलकर भारत में बिरला सनलाइफ बीमा कंपनी को स्थापित की है।

7. विदेशों में एजेन्ट नियुक्त करनाः अंतर्राष्ट्रीय विपणन में कोई निर्यातक कंपनी विदेशों में ऐजेन्ट नियुक्त करके भी अपनी वस्तुएं विक्रय या उनके लिए मांग बढ़ा सकता है।

8. शाखाएं स्थापित करना : इस स्थिति में एक विपणनकर्ता विदेशों में विभिन्न जगहों पर अपनी शाखाएं स्थापित करके उसके द्वारा अपना माल बेच सकता है। अंतर्राष्ट्रीय विपणन में इस व्यवस्था में अधिक परिश्रम व खर्च लगता है।

अंतर्राष्ट्रीय विपणन को प्रभावित करने वाले तत्व या घटक

अंतर्राष्ट्रीय विपणन को प्रभावित करने वाले तत्व हैं-

1. प्रतिस्पर्धाः अंतर्राष्ट्रीय विपणन का क्षेत्र बहुत अधिक विस्तृत है। किसी अन्य देश में विपणन करने से उस देश के उत्पादक व उत्पाद दोनों से ही प्रतियोगिता (Competition) करनी पड़ती है। यह प्रतिस्पर्धा किस्म गुणवत्ता, मुख्य प्रवर्तन गतिविधि, उपलब्धता से संबंधित है। 

2. सामाजिक तत्वः किसी भी राष्ट्र को संस्कृति, खान-पान इत्यादि सामाजिक तत्व में आते हैं और यह तत्व अंतर्राष्ट्रीय विपणन को बहुत प्रभावित करते हैं। जैसे गर्म देशों में चाय व काॅफी का विपणन नहीं किया जा सकता है। 

3. उपभोक्ता क्रय शक्तिः अलग -अलग देशों में उपभोक्ता की क्रय शक्ति अलग-अलग होती है। विकसित देशों के उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बहुत अधिक होती है। वहीं विकासशील देशों में कम । इन परिस्थितियों के चलते विपणनकर्ता जो कई देशों में अपना समान उत्पाद बेच रहा हो बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। 

4. आर्थिक तत्वः अंतर्राष्ट्रीय विपणन को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण घटक है आर्थिक तत्व जिसमें उस देश की आयात निर्यात नीतियां, मौद्रिक नीतियां, मुद्रा स्फीर्ती व मुद्रा संकुचन, वाणिज्य नीति आदि। अंतर्राष्ट्रीय विपणन में प्रवेश करने से पहले विदेश की आर्थिक नीतियों का पूर्णता विश्लेषण कर लेना चाहिए। 

5. राजनैतिक घटक: राजनैतिक घटक ऐसे घटक हैं जिनका अंतर्राष्ट्रीय विपणन से सीधा संबंध होता है। यदि देश में स्थिर सरकार है तो नीतियों में स्थिरता होती है। यदि अस्थिर सरकार है तो नई आने वाली सरकार पुरानी सरकारी नीतियों में परिवर्तन कर देती है। जिस वजह से विपणन संबंधी नीतियों में परिवर्तन होने से सीधा प्रभाव अंतर्राष्ट्रीय विपणन पर पड़ता है। 

6. उपभोक्ता व्यवहारः जिस देश में उपभोक्ता आनलाईन वस्तुओं की संपूर्ण जानकारी लेते हैं कई ब्रान्ड के बीच का अंतर पता कर के वस्तुएं खरीदते हो, ऐसे उपभोक्ताओं वाले देश में वस्तुएं बेचने से पहले वहां के उत्पादकों व उत्पाद की गुणवत्ता भी ज्ञान रखना आवश्यक होता है। अलग-अलग देश में उपभोक्ता का व्यवहार अलग होता है और यह विपणन को प्रभावित करता है।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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