भारत में निर्धनता के क्या कारण हैं निर्धनता दूर करने के उपाय?

निर्धनता धन कमी की स्थिति है। जब व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने की स्थिति में भी नहीं होता अर्थात उसके पास इतनी क्रय शक्ति भी नहीं होती कि वह अपनी न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके तो वह स्थिति निर्धनता की स्थिति कही जाती है। निर्धनता प्रति व्यक्ति आय की न्यूनता, पिछड़ा जीवन स्तर और न्यूनतम साधनों के अभाव की स्थिति है। 

भारत में निर्धनता के प्रमुख कारण

भारत में निर्धनता के कारण सामाजिक राजनीतिक ऐतिहासिक और आर्थिक सभी प्रकार के हैं:-

1. भारत में निर्धनता के ऐतिहासिक कारण 

भारत लम्बे समय तक विदेशी शासकों के शासन में रहा जिनकी रूचि भारत का शोषण करने की रही विकास कभी उनका उद्देश्य नहीं रहा इसलिये भारत की जनता गरीब रह गयी। जो भारत कभी सोने की चिडि़या कहलाता था। विदेशी आक्रमणकारियों ने देश के सारे संसाधनों को लूट लिया। देश का सारा सोना बाहर चला गया और गरीब हो गए।

2. भारत में निर्धनता के राजनीतिक कारण 

स्वतन्त्रता के बाद देश के राजनेताओं ने भारत के सर्वांगीण विकास के प्रयास सच्चे मन से नहीं किये। लोगों का वोटर के रूप में प्रयोग किया और सत्ता में आने पर वास्तविक दायित्व भूल गये। राजनैतिक इच्छा शक्ति के अभाव के कारण देश की आर्थिक स्थिति कमजोर रह गयी।

3. भारत में निर्धनता के सामाजिक कारण 

परम्पराएँ, कुप्रथाएँ, आराम पसंदगी, सामाजिक विषमताएं भेदभाव, पूर्वाग्रह, जातिवाद सामाजिक कारक भी लोगों की गरीबी के कारण होते हैं जो न सिर्फ रोजगार के अवसरों को वरन कुल आय को भी प्रभावित करते हैं। गरीबी का सबसे बड़ा कारण अति जनसंख्या है। भारत की सामाजिक प्रथाएं दहेज प्रथा, धार्मिक उन्माद, अंध विश्वास तथा अशिक्षा गरीबी का बड़ा कारण है।

4. भारत में निर्धनता के आर्थिक कारण

निर्धनता एक आर्थिक समस्या है प्रमुख आर्थिक कारण हैं:-
  1. जनसंख्या वृद्धि
  2. आवश्यक वस्तुओं के मूल्य स्तर में वृद्धि
  3. बेरोजगारी
  4. तकनीक और कौशल कर अभाव
  5. प्रशिक्षण संस्थानों की कमी
  6. सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों कर अभाव
  7. उद्योगों का अभाव

निर्धनता के प्रकार 

1. क्षेत्र के आधार पर

1. शहरी निर्धनता- कैलोरी के आधार पर शहर में 2100 कैलोरी पोषण प्राप्त न करने वाला व्यक्ति निर्धन कहलाता है जबकि आय के आधार रूपये से कम आय पाने वाले को निर्धन कहा जाता है।

2.  ग्रामीण निर्धनता- ग्रामीण क्षेत्रों में 2400 कैलोरी से कम पोषण पाने वाला तथा रू0 प्रतिदिन से कम आय प्राप्त करने वाला व्यक्ति निर्धन होता है।

2. तुलना के आधार पर

1. निरपेक्ष निर्धनता- निर्धारित कैलोरी या दैनिक आय प्राप्त न करने वाला व्यक्ति निर्धन है यह निर्धनता की निरपेक्ष माप और व्याख्या है।

2. सापेक्ष निर्धनता- सापेक्ष निर्धनता तुलनात्मक होती है कम आय वाला कोई भी व्यक्ति अपने से अधिक आय पाने वाले की तुलना में निर्धन होता है।

3. भाव के आधार पर

1. आर्थिक निर्धनता- एक निश्चित सीमा से कम आय या सम्पत्ति रखने वाला व्यक्ति निर्धन कहलाता है अर्थात ऐसी निर्धनता कर आधार आर्थिक होता है। धन हीन व्यक्ति ही निर्धन होता है।

2. मानसिक निर्धनता- मानसिक निर्धनता का आय व संपत्ति से कोई मतलब नहीं होता। धनी से धनी व्यक्ति भी मन से निर्धन हो सकता है। विचारों की दरिद्रता, दूसरों की सहायता न करने का भाव, मनोबल की कमी, उत्साह का अभाव अवसाद की स्थिति मानसिक दरिद्रता के ही उदाहरण है। स्वयं को ही न  और अशक्त समझने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से दरिद्र माने जाते है।

गरीबी के दुष्परिणाम अथवा दुष्प्रभाव 

धन में समस्याओं का समाधान करने की शक्ति है जबकि निर्धनता के कारण ये समस्यायें उत्पन्न हो जाती है-
  1. कुपोषण एवं असंतुलित आहार
  2. बाल श्रम
  3. बेरोजगारी
  4. निरक्षरता एवं अशिक्षा
  5. स्वच्छता का अभाव
  6. स्वास्थ्य की समस्यायें
  7. समाजिक विषमता
  8. आवासीय समस्या
  9. अपराधों को बढ़ावा
  10. तनाव को बढ़ावा

निर्धनता उन्मूलन की आवश्यकता

निर्धनता व्यक्ति और समाज के माथे पर कलंक है का टीका है। आर्थिक पिछडेपन के कारण सामाजिक और सांस्कृतिक पिछडापन आ जाता है क्योंकि निर्धनता के कारण व्यक्ति अशिक्षित रह जाता है, अज्ञानी रह जाता है और उसकी मानसिक विकास भी अवरूद्ध हो जाता है। गरीबी के कलंक को मिटाना अति आवश्यकता है। अर्थशास्त्रीय मान्यता यह भी है कि कहीं भी विद्यमान निर्धनता सम्पन्नता को सर्वत्र और सर्वदा तथा सर्वथा गंभीर खतरा है। निर्धनता जानित आर्थिक विषमता लम्बे समय तक चले तो वर्ग विद्वेष और अंततः वर्ग संघर्ष का
कारण बन जाती है समाज की सम्पन्नता, शांति और कल्याण की दृष्टि से यह आवश्यक है कि कोई भी कही भी और कभी भी निर्धन न रहे।

निर्धनता दूर करने के उपाय

निर्धनता दूर करने के निम्न उपाय किये जाने चाहिये
  1. शिक्षा प्रसार हो और व्यक्ति साक्षर ही नहीं शिक्षित बने उसमें ज्ञान का बढ़ावा हो
  2. तकनीकी प्रशिक्षण द्वारा व्यक्ति को काम करने की योग्यता प्रदान की जाय
  3. सामाजिक सुरक्षा का आधार सुदृढ़ हो लोगों को शिक्षा, चिकित्सा, बेरोजगारी भत्ता, पेंशन आदि उपलब्ध रहे।
  4. रोजगार के अवसर सुलभ किये जायें
  5. काम करने के सम्मान अवसर उपलब्ध हो
  6. ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि पर आधारित छोटे बडे़ उद्योग स्थापित किये जाने चाहिये।
  7. गरीब लोगों विशेषतः निर्धनता रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को जीवनोपयोगी आवश्यक वस्तुयें-आटा दाल चावल, शिक्षा चिकित्सा, पहनने के कपड़े विशेष सस्तीदरों पर उपलब्ध कराना चाहियें।
  8. जन संख्या वृद्धि को रोकने के प्रयास किये जाने चाहिये। 

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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