साइबर सुरक्षा क्या है ? इसके प्रकार और साइबर हमलों से बचने के उपाय

लोग अपने कार्यों को जैसे-पैसों का लेनदेन, ऑनलाइन टिकट बुक करना डिजिटल उत्पादों के माध्यम से बहुत आसानी से कर लेते हैं। डिजिटल उत्पादों के इस बढ़ते प्रयोग के साथ-साथ डिजिटल अपराध का भी तेजी से विकास हुआ है। इंटरनेट से ऑनलाइन डाटा का आदान-प्रदान किया जाता है और इस डाटा को कुछ लोग बिना हमारी अनुमति के चुरा लेते हैं और इसका गलत प्रयोग करते हैं। इन्हें साइबर क्रिमिनल या साइबर अपराधी के नाम से भी जाना जाता है। इंटरनेट पर हो रहे अपराधों या हमले को ‘‘साइबर हमला‘‘ कहा जाता है। साइबर हमलांे की गलत गतिविधियों से बचने के लिए ‘‘साइबर सुरक्षा‘‘ को बनाया गया है।

साइबर सुरक्षा क्या है?

साइबर सुरक्षा एक प्रकार की सुरक्षा होती है, जिसका काम इंटरनेट से जुड़े डिजिटल उपकरणों के डाटा को सुरक्षा करना होता है। साइबर सुरक्षा द्वारा इंटरनेट पर हो रही गलत गतिविधियों को रोका जाता है, जिससे इंटरनेट उपयोगकर्ता को अपने डाटा की नुकसान न हो पाए। यह सुरक्षा कम्प्यूटर, सर्वर, मोबाइल और नेटवर्क को इंटरनेट पर हो रहे साइबर हमलों से बचाता है।

साइबर सुरक्षा क्यों आवश्यक है?

इंटरनेट की इस दुनिया में साइबर सुरक्षा का होना बहुत आवश्यक है। क्योंकि कोई भी नहीं चाहेगा कि उसका जरूरी डाटा किसी हैकर के पास उपलब्ध हो जाए, जो इस डाटा का गलत प्रयोग करे। आज हम इंटरनेट पर अगर इतनी सरलता से और बिना किसी डर के अपने कार्य को कर पा रहे हैं तो यह केवल साइबर सुरक्षा की सहायता से ही संभव हो पाया है।

साइबर हमलों के प्रकार

साइबर हमलों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह साइबर हमले कुछ गलत प्रोग्राम व उपयोगकर्ता के कार्यों द्वारा कम्प्यूटर सिस्टम और डाटाबेस में प्रवेश कर जाते हैं। जिसके बाद यह उस कम्प्यूटर से डाटा को चुरा कर या गलत प्रयोग करके पूरे कम्प्यूटर सिस्टम और उपयोगकर्ता को हानि पहुँचाते हैं। साइबर हमले मुख्यतः निम्न प्रकार के होते हैंः

1. मैलवेयर

मैलवेयर एक प्रकार का गलत प्रोग्राम किया गया सॉफ्टवेयर होता है, जिसके द्वारा हैकर कम्प्यूटर सिस्टम में प्रवेश कर के डाटा की चोरी करता है या उनका गलत इस्तेमाल करता है। इंटरनेट पर अलग-अलग प्रकार के मैलवेयर उपलब्ध हैं, जिन्हें हम वायरस, रैनसमवेयर, स्पाइवेयर, ऐडवेयर नामों से जानते हैं। इस प्रकार के प्रोग्राम को फैलाने के लिए लिंक, ईमेल और डाउनलोड साइट का प्रयोग किया जाता है। जब कोई व्यक्ति इन लिंक पर क्लिक करता है, उस समय यह मैलवेयर कम्प्यूटर में इंस्टॉल हो जाता है जो कम्प्यूटर सिस्टम के लिए बहुत हानिकारक होता है।

2. फिशिंग

फिशिंग एक साइबर हमला होता है। इस प्रकार के हमलों में साइबर अपराधी एक नकली वेब पेज को बनाते है, जो देखने में बिलकुल असली वेब पेज की तरह लगता है। इस वेब पेज को ईमेल व लिंक की सहायता से शेयर किया जाता है। अगर गलती से कोई व्यक्ति इस लिंक पर क्लिक कर देता है, तो साइबर अपराधी उस वेब पेज की सहायता से कुछ निजी जानकारियाँ चुरा लेते हैं। जैसे-क्रेडिट कार्ड, खाता, एटीएम कार्ड का विवरण।

3. मैन इन द मिडिल अटैक

साइबर हमले में साइबर अपराधी किन्हीं दो व्यक्तियों के नेटवर्क संचार के बीच हस्तक्षेप करता है। जिसके द्वारा नेटवर्क से जुड़े दोनों व्यक्तियों के बीच हो रहे सभी डाटा ट्रांसफर को चुराया जा सकता है। इस हमले को करने के लिए साइबर अपराधी असुरक्षित वाई-फाई का प्रयोग करते हैं।

साइबर हमलों से बचने के उपाय

अभी तक आपने जाना की साइबर सुरक्षा क्या है? परंतु क्या आप जानते हैं कि केवल साइबर सुरक्षा द्वारा आप अपने सिस्टम को सुरक्षित नहीं रख सकते। इसके लिए आपको इंटरनेट चलाते समय एवं डिजिटल उत्पादों का उपयोग करते समय कुछ सावधानियाँ बरतनी होती है। क्योंकि केवल साइबर सुरक्षा द्वारा कम्प्यूटर सिस्टम व इंटरनेट को सुरक्षित नहीं बनाया जा सकता। इसलिए आपको और साइबर सुरक्षा को मिलकर कार्य करना पड़ेगा नहीं तो आप भी किसी साइबर हमले का शिकार बन सकते हैं। निम्नलिखित सावधानियों को अपनाकर आप साइबर हमलों से अपने कम्प्यूटर को बचा सकते हैंः

1. साइबर हमलों से बचने के लिए हमेशा अपने सिस्टम सॉफ्टवेयर को अपडेट रखना चाहिए। क्योंकि सॉफ्टवेयर को मजबूत बनाने के लिए उसे समय-समय पर अपडेट किया जाता है, जिससे पिछले वर्जन में रही कमियों को हटाया जा सके।

2. कम्प्यूटर में हमेशा एंटीवायरस का प्रयोग करना चाहिए। एंटीवायरस एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम होता है, जो सिस्टम को सभी प्रकार के मैलवेयर हमलों से बचाता है और यह समय-समय पर सिस्टम की जांच भी करता रहता है। कम्प्यूटर के एंटीवायरस को हमेशा अपडेट रखना चाहिए।

3. इंटरनेट का प्रयोग करते समय हमें किसी गलत साइट पर जाकर किसी फाइल या सॉफ्टवेयर को डाउनलोड नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे कम्प्यूटर सिस्टम में अनचाहे प्रोग्राम प्रवेश कर सकते हैं जो कम्प्यूटर पर साइबर हमले का कारण बन सकते हैं।

4. कम्प्यूटर में कई बार साइबर हमलों द्वारा स्टोर किए हुए डाटा को डिलीट कर दिया जाता हैं। इसलिए अपने स्टोर डाटा का सुरक्षित बैकअप अवश्य रखना चाहिए।

5. ऑपरेटिंग सिस्टम में उपलब्ध फायरवॉल को कभी भी डिसेबल नहीं करें। क्योंकि यह फायरवॉल नेटवर्क हमलों को कम्प्यूटर में प्रवेश नहीं करने देता है।

6. इंटरनेट उपयोग करते समय कभी भी किसी अनचाहे व अनआधारित लिंक पर क्लिक नहीं करें। इन लिंक पर जाकर व्यक्तिगत विवरण कभी नहीं भरना चाहिए, क्योंकि यह लिंक किसी साइबर अपराधी द्वारा बनाया गया हो सकता है।

7. डिजिटल उत्पादों व इंटरनेट के उपयोगकर्ता रोजाना अपने सोशल अकाउंट या अन्य अकाउंट एक्सेस करते हैं। अपने सिस्टम एवं अकाउंट का पासवर्ड हमेशा मजबूत बनाएं एवं उसे समय-समय पर बदलते रहें। कभी भी किसी सरल पासवर्ड जैसे -123456, 1234, अपना नाम, जन्मदिन इत्यादि का प्रयोग न करें।

8. डिजिटल उत्पादों के उपयोगकर्ता को अपना ओटीपी, पिन, खाता का विवरण, एटीएम/क्रेडिट कार्ड का विवरण आदि कभी भी किसी को नहीं बताना चाहिए।

9. अपने सिस्टम में कभी भी किसी पायरेटेड सॉफ्टवेयर का प्रयोग न करें। यह आपके सिस्टम पर साइबर हमलों का कारण बन सकता हैं।

बैंकिंग के लिए जरूरी है कि सभी लोग डिजिटल बैंकिंग के फायदे को समझें और डिजिटल बैंकिंग के उपयोग के सुरक्षित तरीकों को समझने के साथ ही साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक भी रहें। किसी भी दशा में फोन पर या अन्य साधन से अपने बैंक अकाउंट संबंधी जानकारी किसी को नहीं देनी चाहिए और न ही अपने से जुड़े निजी दस्तावेजों (पैन कार्ड, आधार कार्ड) के विषय में किसी को जानकारी देनी चाहिए।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

Post a Comment

Previous Post Next Post