ध्यान क्या है ध्यान करने के क्या लाभ हैं?

ध्यान का अर्थ है क्रियाहीन होना। ध्यान क्रिया नहीं, अवस्था है। ध्यान की अवस्था में मन विषयों से विमुख होकर अपने आंतरिक केंद्र से जुड़ता है। मन में उठने वाले अनेक विचार धीरे-धीरे शांत होते चले जाते हैं। जब चंचल मन शांत हो जाए, मन में कोई विचार कोई ख्याल न रहे लेकिन जागरूकता बनी रहे वही ध्यान है। ध्यान में चेतना धीरे -धीरे अपने आनंदमय स्वरूप में स्थापित होती जाती है। एक अलौकिक आनंद और प्रेम की अनुभूति होने लगती है। ध्यान की गहराई के चित्त का शांत, मन का विचारों से मुक्त होना अनिवार्य है। शांत मन में ही परमात्मा उतरते हैं। मन को शांत, स्थिर और प्रसन्न रखना ही एक योगी का पहला कर्तव्य है। मन को निर्विषय करना ही ध्यान है।

शांत और स्थिर मन का ही ध्यान में प्रवेश हो सकता है। जो ध्यानी हो जाता वह उस परम के सौंदर्य में डूब जाता है। उसका हर क्षण मस्ती से भरा होता है। इस संसार में हमारी उन्नति और पतन का कारण कोई और नहीं अपने विचार हैं। सात्विक और शुभ संकल्पों से परिपूर्ण विचार व्यक्ति को सफलता की ओर ले जाते हैं। साधक सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख, लाभ हानि, मान-सम्मान, ऊंच-नीच को समान भाव से ग्रहण करता है और अपने को सब प्रकार से जीत लेता है। जो हर परिस्थिति में समान रहते हैं, समान आचरण करते हैं, वे लोग साधना में शीघ्र प्रगति करते हैं।

ध्यानी व्यक्ति के जीवन का आधार सहजता होती है। एक छोटा बच्चा सहज होकर कार्य करता है, उसके कार्यों में कोई बनावट, कोई दिखावा नहीं होता, इसलिए उसकी हर छोटी बात भी प्यारी लगती है, उसका हर कृत्य आनंद से परिपूर्ण होता है उसी प्रकार ध्यान में व्यक्ति जितना सहज और सरल होगा वह उतना ही प्रसन्न और आनंदित होगा।

जब ध्यान की किरणें मनुष्य के जीवन पर पड़ती है तो जीवन में होश आने लगता है। व्यक्ति अपना हर कार्य सजगता से करता है। ध्यान-योग मन को विषयों से हटाकर परम चेतना की ओर मोड़ता है और तब वासना के जाल का एक-एक फंदा टूटने लगता है।

ध्यान करने से लाभ

1. ध्यान करने से शारीरिक लाभ

  1. ध्यान करने से रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है।
  2. मांसपेशियों में जकड़न कम होती है।
  3. ध्यान सिर दर्द एवं माइग्रेन में आराम दिलाता है।
  4. ध्यान शरीर को हानिकारक पदार्थों से बचाता है।
  5. ध्यान से चेहरे पर ओज और तेज आता है।

2. ध्यान करने से मनोवैज्ञानिक लाभ

  1. ध्यान आत्म-विश्वास और सहनशीलता को बढ़ाता है।
  2. ध्यान से सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है।
  3. ध्यान एकाग्रता की शक्ति को बढ़ाता है।
  4. ध्यान अशांत एवं चंचल विचारों को शांत करता है।
  5. ध्यान भावनात्मक स्थिरता को बढ़ाता है।

2. ध्यान के आध्यात्मिक लाभ

  1. ध्यान से ज्ञान में वृद्धि होती है।
  2. नई सोच का उदय ध्यान के द्वारा होता है।
  3. ध्यान हमारे जीवन को व्यवस्थित करता है।
  4. ध्यान हमें अपने वास्तविक स्वरूप से परिचित कराता है।
  5. ध्यान से शरीर, मन और आत्मा में संतुलन आता है।

ध्यान के नियम

आप जो भी कार्य करते हैं, वह पूरे मनोयोग से करें। अपनी समस्त उर्जा को कार्य के पूर्ण करने में लगा दें। ब्रह्ममुहूर्त में किया गया ध्यान ज्यादा लाभदायी होता है। शांत, शुद्ध वातावरण में ध्यान करने से मन में शांति आती है।
स्थूल रूप से वसिष्ठ ने दा े प्रकार का ध्यान माना है- सगुण और निगुर्ण। निगुर्ण ध्यान प्रकार अथवा आकार रहित है

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

Post a Comment

Previous Post Next Post