हिन्दी भाषा का महत्व और भविष्य क्या है?

हिन्दी विश्व की एक प्रमुख भाषा है, एवं भारत की राजभाषा है जिसकी लिपी “देवनागरी” है और जिसे भारतीय संविधान सभा ने 14 सिंतम्बर, 1949 को अधिकारिक भाषा केरूप में चुना, इसी वजह से 14 सितम्बर को हर साल “हिन्दी दिवस” के रूप में मनाया जाता है। हिन्दी भाषा एक मानकीकृत रूप हैं जिसमें संस्कृत के तत्सम तथा तद्भव शब्दों का प्रयोग अधिक है और अरबी-फारसी शब्द कम है। हिन्दी संवैधानिक रूप से भारत की “राजभाषा” है और भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जानी वाली भाषा है।

हिन्दी और इसकी बोलियां सम्पूर्ण भारत के विभिन्न राज्यों में बोली जाती है। सुखद बात यह है कि हिन्दी बोलने वालों का दायरा बढ़ा है जहाँ 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में 42 करोड़ 60 लाख (41.03 प्रतिशत) लोगों द्वारा बोली जाती थी वह अब 2011 की जनगणना के अनुसार 50 करोड़ 22 लाख (43.63 प्रतिशत) लोगों द्वारा बोली जाने लगी है। इसके अलावा विश्व के अन्य देशों में भी लोग हिन्दी बोलते हैं, पढ़ते हैं, और लिखते हैं। फिजी, माॅरीशस, गुयाना, सुरीनाम, पाकिस्तान, नेपाल और संयुक्त अरब अमीरात की जनता भी हिन्दी बोलती है।

फरवरी, 2019 में अबुधाबी में हिन्दी को न्यायालय की तीसरी भाषा के रूप में मान्यता मिली। 

हिन्दी भाषा का महत्व

हिन्दी का महत्व की बात तो हिन्दी भारत में सम्पर्क भाषा का कार्य करती है और कुछ हद तक पूरे भारत में आमतौर पर एक सरल रूप में समझी जानेवाली भाषा है। हिन्दी यूरोपीय भाषा परिवार के अंदर आती है। हिन्दी की सबसे बडी विशेषता यह है कि यह जो बोली जाती है वही लिखी और पढ़ी भी जाती है। जो अन्य भाषाओं के संदर्भ में नहीं है। विशेषकर अंगे्रजी के संबंध में जो आज के आधुनिक दौर में यानि विशेष कर भारत के कुछ खास वर्गो के लोगों के बारे मे जो हिन्दी बोलने में शर्मीदंगी महसूस करते हैं और अंगे्रजी बोलना ज्यादा पंसद करते हैं। दोष हम जैसे लोगों का भी है कि हम अंग्रेजी बोलने वालों को ज्यादा पढ़ा लिखा और ज्ञानी समझते है, हिन्दी वालों की उपेक्षा करते हैं।

“हिन्दी” सिर्फ भाषा नहीं बल्कि हिन्दी के द्वारा भारत के लोग एक दूसरे से काफी अच्छी तरह से जुड़ सकते है और देश की तरक्की को एक नई ऊँचाईयों तक ले जा सकते है। लोगों का ऐसा मानना है कि हिन्दी जाने बिना भी बहुत सारा काम हो सकता है। भारत के लोग कभी भी अंगे्रजी को मुख्य भाषा के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकते है। हिन्दी भाषा भारत के जन-मन मे पैठ बना चुकी है। भारत के लोग बचपन से ही इसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि यह एक सरल भाषा है और इसका इस्तेमाल करना बहुत आसान है।

भारत मे हिन्दी के बिना बहुत सारा काम नहीं हो सकता है क्योंकि यहां पर 70 से 80 प्रतिशत लोग अंगे्रजी नहीं जानते  है। अगर उन्हें संवाद करना हो तो हिन्दी जानना ही पड़ता है। हिन्दी सीखने में ज्यादा प्रयास नहीं करना पड़ता है। यहां तक कि दक्षिण भारत के लोग भी हिंदी फिल्म देखकर हिंदी सीख जाते है। भारत के अधिकांश लोगों की “मातृभाषा” हिंदी होने की वजह से उन्हें बोलने और समझने में कभी समस्या नहीं होती है। बहुत सारे लोग बिना स्कूल गए भी बहुत अच्छी हिंदी बोल लेते है। हिंदी मे शब्दों की भरमार है। इस भाषा में भावनाओं को सही तरीके से व्यक्त किया जा सकता है। अगर लोगों को लगता है कि हिंदी का भविष्य अच्छा नहीं है तो ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है हिंदी का महत्व स्थापित हो गया है। यह भाषा स्वाधीनता संग्राम के समय समूचे देश को आपस मे जोड़ने वाली सबसे सशक्त संपर्क भाषा बन गई थी। 

हिन्दी राष्ट्रीय एकता का मार्ग प्रशस्त करती है और यह धागा हमें और आपको एक सूत्र में मजबूती से बांध सकती है। 

हिंदी भाषा का भविष्य 

हिंदी भाषा के भविष्य के बारें में तो हम सबको यह जानकर बहुत हर्ष होगा कि हिंदी का भविष्य आने वाले दिनों मे काफी उन्नत होगा। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि वर्ष 2050 तक हिंदी विश्व की सबसे ताकतवर भाषाओं मे से एक होगी। वल्र्ड ईकोनाॅमिक फोरम ने पांच पावर भाषा इन्डेक्स तैयार किया है जिसमे यह टाॅप 10 में शामिल है और दसवें नम्बर पर है। इसको एक पैमाने पर तैयार किया जा रहा है जो आर्थिक, व्यापारिक इत्यादि महत्वों पर आधारित है। पावर भाषा इन्डेक्स में हिंदी के दसवें नंबर पर होने का कारण यह है कि भारत ने अपने पाचं हजार साल के इतिहास में कभी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं किया और दूसरे देशों में उपनिवेश भी स्थापित नहीं किया।

“अंग्रेजी” पावर भाषा इंडेक्स में पहले नंबर पर है। दूसरे पर चीन की भाषा “मंदारिन”। चीन की भाषा इस इंडेक्स में दूसरे नंबर पर इसलिए है कि चीन दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है और वहां के 140 करोड़ जनता ज्यादा चीनी भाषा का ही प्रयोग करते हैं। क्योंकि चीन मे ट्वीटर, फेसबुक और विकीपिडिया जैसे साईट पर प्रतिबंध हैं। हिंदी को इंटरनेट से नई ताकत मिली है। आपको यह जानकर हैरानी होगी की देश की डिजीटल वल्र्ड में अगं्रेजी की तुलना मे हिंदी की सामग्री की मांग पांच गुना तेजी से बढ़ रही है। भारतीय युवाओं के स्मार्ट फोन मे औसतम 32 ऐप मे से आठ या नौ हिंदी के होते हैं। भारतीय युवा 93 प्रतिशत यू-ट्यूब हिंदी मे देखते हैं।

डिजिटल वल्र्ड मे हिंदी को बढ़ाने में “यूनीकोड” ने अहम भूमिका निभायी है। अभी इंटरनेट पर हिंदी मे 15 से ज्यादा सर्च इंजन है। डिजीटल इंडिया में हिंदी की मांग 94 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। 21 प्रतिशत भारतीय

इटंरनेट पर हिंदी का इस्तेमाल करना चाहते है फिर भी हिंदी के सामने बड़ी चुनोैतियां है जिसे पार कर पाना काफी मुश्किल है। इंटरनेट पर 0.04 प्रतिशत ही हिंदी वेबसाईट है। चलिए फिर भी आने वाले दिनों में हिंदी का भविष्य सुनहरा लग रहा है। हिंदी अब अर्थ व्यवस्था और बाजार की भाषा बनने लगी है। दुनियां के 176 विश्वविद्यालयों मे हिंदी पढ़ाई जाने लगी है। विदेशों में 25 से ज्यादा अखबार और पत्रिकाएं हिंदी में मिलते है यहां तक की हिंदी शब्द “अवतार” पर हाॅलीवुड मे इस शीर्षक पर एक फिल्म भी बनी है।

यह ही नहीं पिछले वर्ष आक्सफोर्ड डिक्शनरी मे 500 नये शब्द शामिल किए गये थे उनमें से 240 शब्द हिंदी के थे। अब पूरी दूनियां में हिंदी का महत्व बढ़ रहा है। इस बात ने हमें उम्मीदों से भर दिया है कि अगर आप और हम अपने स्तर पर हिंदी को बढ़ाने का काम करें तो यह विश्व की एक ताकतवर भाषा बन सकती है।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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