शैक्षणिक पुस्तकालय के प्रकार, उद्देश्य और कार्य

शैक्षणिक पुस्तकालय किसी शिक्षा संस्थान से संलग्न पुस्तकालय को शैक्षिक पुस्तकालय कहा जा सकता है। शिक्षा संस्थान, शिक्षा और शोध के ऐसे संस्थान है जो किसी निर्धारित पाठ्यक्रम के आधार पर किसी निश्चित स्तर, उपाधि या प्रमाण-पत्र की प्राप्ति के लिए छात्रों को औपचारिक शिक्षा प्रदान करते है। शैक्षणिक पुस्तकालय के अन्तर्गत विश्वविद्यालय महाविद्यालय व विद्यालयी पुस्तकालय आते है।

शैक्षिक पुस्तकालय शैक्षणिक संस्था से जुड़े रहते हैं। जिस स्तर की संस्था होती है, उसी स्तर के पाठकों को सेवा प्रदान करना शैक्षिक पुस्तकालय का मुख्य उद्देश्य होता है। शैक्षणिक पुस्तकालय पाठकों के साथ संस्था के अध्यापक व अन्य कर्मचारियों की सूचना आवश्यकताओं की पूर्ति करते भी करते हैं। आज के युग में तो शैक्षणिक पुस्तकालय अब इंटरनेट व अपनी कम्प्यूटरीकृत सेवाओं द्वारा भी अपने पाठकों को संतुष्ट कर रहे हैं।

शैक्षणिक पुस्तकालय की आवश्यकता

प्रकाशनों की संख्या तथा मूल्य में अभूत पूर्व  वृद्धि, नये-नये पाठ्यक्रमों का प्रारम्भ, उच्चस्तरीय शिक्षा पर बल आदि कुछ ऐसे तत्व है जिनके कारण प्रत्येक शिक्षण संस्थान में एक उत्तम पुस्तकालय का होना आवश्यक हो गया है। शिक्षण की प्रकृति में बीसवी शताब्दी में जो बदलाव आया, उससे पुस्तकालयों का महत्व और भी बढ़ गया।

पहले की शिक्षा व्याख्यान पर आधारित थी। शिक्षक व्याख्यान देते थे और छात्र सुनते थे। पाश्चात्य देशांे में शिक्षा इस प्रणाली पर आधारित नहीं है और भारत में भी इसमें बदलाव आ रहा है। आज की शिक्षा एक तरफा नहीं है। आज छात्र भी समान रुप से इसमें हिस्सा ले रहा है। शिक्षक छात्रां े को विषय के मूल तत्वों की जानकारी देकर उन्हें पुस्तकालय में पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित करता है। पुस्तकालय अपने संसाधनों से ही नहीं बल्कि दूसरे पुस्तकालयों के संसाधनों से भी नेटवर्क द्वारा जुड़कर अपने पाठकों को सेवाएं उपलब्ध कराता है। स्कूल पुस्तकालय अपने पाठकों में पढ़ने की आदत डालते हैं, वे बच्चों के स्तर की मनोरंजन एवं ज्ञानवर्धक पत्रिकाएं जैसे-शुभम, सौरव, चन्दामामा, चम्पक, लोट-पोट, जूनियर साइंस पत्रिकायें इत्यादि उपलब्ध कराते हैं।

विश्वविद्यालय पुस्तकालय

विश्वविद्यालयों में छात्र-छात्राएं शोध में लगे रहते हैं। विश्वविद्यालय पुस्तकालय एक प्रकार का शोध पुस्तकालय ही है। जो अपने पाठकों, शोधकर्ताओं को उनकी रुचि के अनुसार, विषयानुसार, अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराता है। विश्वविद्यालय पुस्तकालयों को अपने संग्रह का विकास इस प्रकार से करना चाहिए। जो पाठकों का े ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं दे सके। इसी के साथ विश्वविद्यालय पुस्तकालयों को नई-नई तकनीकों को भी अपनाना चाहिए। अपने परम्परागत तकनीकों पर ही नहीं चलना चाहिए। इनका कम से कम समय में अपने पाठकों को संतुष्ट करना ही मुख्य उद्देश्य है।

विश्वविद्यालय पुस्तकालय के कार्य

1. विश्वविद्यालय पुस्तकालय पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाआं,े आडियां-े विडियो टेप, सी.डी., डी.वी.डी. आदि का संग्रह करते है। अपने पाठकों की आवश्यकता एवं उनके स्तर के अनुसार संसाधनों का विकास करता है। पाठकों को उनके पाठ्यक्रम के पुस्तकों के साथ सहायक पुस्तक को तथा शोधकर्ताओं को उनके विषय पर संदर्भ एवं अन्य ग्रन्थ, उपलब्ध कराना ही विश्वविद्यालय पुस्तकालय का प्रमुख कार्य है।

2. विश्वविद्यालय अपने पाठकों की सुविधाओं के लिए क्रय किये हुए संसाधनों का वर्गीकरण कर उनको रैक में वगीकृत तरीके से लगाने के साथ ही साथ पाठकों के लिए सूची तैयार करता है। जो पाठकों को पुस्तकें खोजने के लिए एक उपयुक्त माध्यम है। दूसरा विश्वविद्यालय विषयानुसार वांग्मय सूचियांे को भी तैयार करता है। जिससे पाठकों को अपनी विषय पर उपलब्ध अन्य प्रकाशन की जानकारी प्राप्त हो सके। कम्प्यटूरीकृत पुस्तकालय अपने पाठकों को ओपेक और वेब ओपेक की सहायता से अपने संग्रह तक पहुंचने का माध्यम उपलब्ध कराता है।

3. विश्वविद्यालय पुस्तकालय के पास यदि कोई भी पुस्तक या अन्य प्रलेख नहीं है, जो पाठक द्वारा मांगा जाता है तो वह दूसरे पुस्तकालयों से Inter Library Loan के माध्यम से मंगवाकर देता है। आजकल तो इण्टरनेट की सहायता से यह समस्या और आसानी से हल हो रही है। भारत में इस तरह की सेवा कई पुस्तकालय में DELNET के माध्यम से उपलब्ध करायी जा रही है।

सी.ए.एस./एस.डी.आई.- इसके अन्तर्गत विश्वविद्यालय पुस्तकालय अपने पाठकों को पुस्तकालय में क्या-क्या नया आया है, उनको प्रदशिर्त करता है तथा एस.र्डी.आइ. के अन्तर्गत पुस्तकालय पाठकों की रुचि के अनुरुप लिस्ट बनाता है। पुस्तकालयों के पास उपलब्ध उस विषय से संबंधित क्या है, का मिलान करता है और पाठकों को प्रदान करता है।

4. पुस्तकालय अपने नये पाठकों को प्रत्येक वर्ष के आरम्भ में पाठक शिक्षा सप्ताह का आयोजन करता है, जिसके अन्तर्गत पाठकों की सहायता के लिए विभिन्न प्रागे ्रामां े का आयोजन करता है। जिसमें पाठकों को पुस्तकालय के संग्रह, सेवाओं तथा नियम-कायदों के बारे में बताया जाता है। इसके अन्तर्गत पाठकों  को पाठ्य सामग्री ढूंढने में मददगार यंत्र जैसे वर्गीकरण और सूचीकरण द्वारा अमकु पुस्तक को ढूंढना आसान बनाया जाता है। साथ ही साथ पुस्तकालयों की अन्य सेवायें जैसे- संदर्भ ग्रन्थ का विभाग, पाठ्य-पुस्तक विभाग, फ़ोटोकापी सेवा विभाग व उनके प्रयोग इत्यादि के बारे में भी इसके तहत पाठकों को अवगत कराया जाता है।

5. जैसे फोटोकापी, प्रिन्टिंग सर्विस, इण्टरनेट व अनुवाद आदि सेवाएं भी उपलब्ध कराना विश्वविद्यालय पुस्तकालय कार्यों के अन्तर्गत आता है। पुस्तकालय अपने प्रकाशन भी निकालते हैं, जैसे- वांगमय सूची व वार्षिक रिर्पोट आदि। समय-समय पर पुस्तकालय अपने पाठकों के लिए सप्ताह प्रदर्शनी का भी आयोजन करते हैं।

महाविद्यालय पुस्तकालय

महाविद्यालय के छात्रों के विभिन्न पाठ्यक्रमों से सम्बंधित पाठ्य पुस्तकें तथा अध्यापकों को संदर्भ ग्रन्थों तथा पत्र पत्रिकाओं का संग्रह तथा आदान-प्रदान सेवाएं महाविद्यालय पुस्तकालय में दी जाती है। लायल ने इस सम्बंध में कहा है कि कालेज पुस्तकालय सेवा, पुस्तक संग्रह तथा संचारण जैसे अन्य कार्यों से भी आगे बढ़ती है। काॅलेज पुस्तकालय केवल मात्र पुस्तकों के संग्रह एवं संचारण के लिए नहीं है अपितु संदर्भ सेवा द्वारा शैक्षणिक कार्यों में सहायता देने एवं सम्बंधित शैक्षणिक स्तर को उन्नत करने के लिए विभागीय सदस्यों को पुस्तकालय सेवा उपलब्ध कराने एवं विद्यार्थियों को अच्छी व अधिक से अधिक पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रोत्साहन करती है।

किसी महाविद्यालय का पुस्तकालय देखकर उस महाविद्यालय के बारे में जाना जा सकता है। कालेज पुस्तकालय का उद्देश्य छात्रां े को निर्देशन व सहायता देने के साथ- साथ अध्यापकों को भी आगे बढ़कर अपनी विषय में रुचि बढ़ाने में सहायक होना है। अतः महाविद्यालय पुस्तकालय का गठन वैज्ञानिक ढंग से अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए अपने छात्र/छात्राओं के पाठ्यक्रम के अनुरूप पुस्तकें उपलब्ध कराना ही मुख्य कार्य की श्रेणी में आता है।

महाविद्यालय पुस्तकालय की आवश्यकता

वर्तमान समय में महाविद्यालय पुस्तकालयों की ज्यादा जरूरत महसूस की गई है। नित्य नवीन पाठ्यक्रमों का आगमन, प्रकाशन मूल्यों में बढ़ोत्तरी, जटिल विषयों पर शोध कार्य तथा प्रकाशन सामग्री में तीव्रता के कारण पुस्तकालय की आवश्यकता महसूस की गई है। आज एक छात्र, अध्यापक या शोधकर्ता के लिए यह जान सकना असम्भव है कि उनके विषय पर क्या-क्या मुद्रित हो रहा है। पुस्तकालय ही इस सम्बन्ध में अपने पाठकों की सहायता सूची, वर्गीकरण, वांग्मय सूची आदि तैयार करके तथा सी.ए.एस. व एस.डी.आईसेवाआंे द्वारा कर सकते हैं। इसलिए आज पुस्तकालयों का महत्व बढ़ गया है।

महाविद्यालय पुस्तकालय के कार्य

वैसे तो कालेज पुस्तकालय के कार्य विश्वविद्यालय के पुस्तकालयों जैसे ही है परन्तु विश्वविद्यालय में शोध पर ज्यादा जोर दिया जाता है व बड़े स्तर पर पुस्तकालय का गठन किया जाता है। महाविद्यालय पुस्तकालय के निम्न कार्य है-

क. संग्रह करना-महाविद्यालय पुस्तकालयों में सर्वप्रथम कार्य अपने पाठकों के स्तर पर विभिन्न विषयों की पाठ्य पुस्तकों तथा सन्दर्भ ग्रन्थों का संग्रह करना है। महाविद्यालय यह संग्रह छात्रांे के सुझावों व मुख्य रुप से अध्यापकों के सुझावों के आधार पर करता है। 

ख. प्रबन्ध करना- दूसरा प्रमुख कार्य पाठ्य सामग्री का संग्रह पुस्तकों के चयन व खरीद द्वारा करना है। वगीर्करण करना, सूचीकरण एवं वांग्मय सूची इसके अन्तर्गत आते हैं। आजकल तो महाविद्यालय पुस्तकालय कम्प्यूटर साॅफ्टवेयर को अपनाकर यह काम बड़ी आसानी से व अच्छी तरह से कर रहे है। जिससे पुस्तकालय कर्मचारियों के समय की बचत के साथ छात्रों का भी लाभ हो रहा है।

ग. प्रदर्शन करना- पुस्तकालय सप्ताह तथा प्रदर्शनी द्वारा महाविद्यालय पुस्तकालय में उपलब्ध पाठ्य सामग्रियां े को अपने पाठकों से अवगत कराने का कार्य भी किया जाता है। 

घ. पाठक सप्ताह- महाविद्यालय अपने नये पाठकों के लिए आरम्भ में पाठक सप्ताह का आयोजन करते हैं, जिससे पुस्तकालय कर्मचारी छात्रों को पुस्तकालय द्वारा दी जा रही सेवाओं, पुस्तकालय का भौतिक स्वरूप तथा कायदे-कानून के बारे में बताते हैं। आजकल पुस्तकालय सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से भी ऐसे कार्यक्रम तैयार किये जा रहे हैं। 

ड. अन्य कार्य- उपरोक्त कार्यों के साथ-साथ महाविद्यालय पुस्तकालय फ़ोटोकापी सेवा प्रदान करता है तथा अपने पाठकों के विभिन्न विषयों पर वांगमय सूची भी तैयार करता है। 

विद्यालय पुस्तकालय

बच्चे देश के कर्णधार होते हैं। आज के बच्चे कल के भविष्य के रुप में होते हैं। यदि उनका सर्वांगीण विकास नहीं होता तो यह बाते सच नहीं हो पायेगी। विद्यालय पुस्तकालय विविध प्रकार के बच्चों के सर्वांगीण विकास में होते हैं। पाठ्यक्रमों के साथ-साथ बच्चों की मनोरंजक, ज्ञानवर्धन व सामान्य ज्ञान की सामग्री प्रदान करना स्कूल पुस्तकालय का कार्य है।

स्कूल पुस्तकालय का मुख्य कार्य बच्चों में पढ़ने की अभिरुचि पैदा करना और पुस्तकालय का उपयोग कैसे करना सिखाता है। बच्चों के सामने चित्र युक्त ज्ञानवर्धक कहानियाँ पत्र पत्रिकाएँ आदि रखनी चाहिए। बच्चे रंगीन चित्रों वाली कहानियाँ अधिक पढ़त े है। जिससे उनमें पढ़ने की आदत का विकास होता है। बच्चों में अच्छा चरित्र निर्माण करना शिक्षा व पुस्तकालय दाने ो का ही कर्तव्य है। देश भक्ति की भावना वीरता खेलकूद में प्रवीणता के साथ- साथ व्यावहारिक ज्ञान की भी जानकारी कराना विद्यालय पुस्तकालय का कार्य है।

विद्यालय पुस्तकालय के कार्य

विद्यालय पुस्तकालय के कार्य है-
  1. पुस्तकों पत्र-पत्रिकाओं तथा अन्य पाठ्य सामग्री कहाानियों छोटे सन्दर्भ ग्रन्थ आदि का संग्रह करना। 
  2. पाठयक्रमों की पुस्तकें तथा सहायक पुस्तकों को छात्रों के लिए जुटाना और पुस्तकालय में संग्रह करना। 
  3. पाठय पुस्तक व अन्य पाठ्य सामग्री का वर्गीकरण तथा सूचीकरण करना और बच्चों को पुस्तकें खोजने के बारे में सिखाना जिससे बच्चे स्वयं पुस्तकालय का उपयोग करना सीखे। 
  4. बच्चों के लिए पुस्तकों के आदान-प्रदान की व्यवस्था करना तथा पत्र-पत्रिकाओं की व्यवस्था करना।
  5. बच्चों को मनेारंजक व ज्ञानवर्धक पुस्तके व पत्रिकाएँ कहानियाँ देकर उनमें पढ़ने की रूचि पैदा करना। 
  6. समय-समय पर होने वाले प्रतियोगिता सम्बन्धी प्रोग्रामों के बारे में पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराकर बच्चों का मागर्दशन करना। 
  7. नये बच्चों को आकर्षित करने के लिए प्रदर्शनी लगाना तथा पुस्तकालय सप्ताह का आयोजन करना जिससे बच्चों को पुस्तकालय के बारे में पूरी जानकारी हो सके।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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