चट्टान किसे कहते हैं चट्टान कितने प्रकार की होती हैं?

पृथ्वी के धरातल की रचना जिन पदार्थों से हुई है, उसे हम चट्टान कहते हैं। चट्टान शब्द कठोरता का परिचायक है। चट्टानों में अनेक तरह के खनिज पाए जाते हैं, किसी चट्टान के बनने में एक खनिज का योग होता है और किसी चट्टान के बनने में दो या दो से अधिक खनिज तत्वों का योग रहता है। शैल कई प्रकार के खनिजों का तत्सम रूप है और खनिज विशेष प्रकार के रासायनिक मूल तत्वों का योग है। 

अभी तक लगभग 108 मूल तत्वों की जानकारी हासिल हुई है। इनमें कुछ अल्प मात्रा में और कुछ अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। चट्टानों की रचना खनिजों से मिलकर ही होता है। 

आर्थर होम्स के अनुसार, ‘अधिकांश चट्टानें खनिजों का ही मिश्रित अंश है।’

चट्टान के प्रकार

चट्टान तीन प्रकार की होती हैः
  1. आग्नेय चट्टान
  2. अवसादी चट्टान
  3. कायान्तरित चट्टानें
1. आग्नेय चट्टान- जो चट्टानें जो द्रव पदार्थ के ठण्डे होने से ठोस अवस्था में बदल गई वे आग्नेय चट्टानें कहलाई। आग्नेय चट्टान भू.पृष्ठ की प्राचीनतम चट्टाने हैं धरातल पर प्राप्त कुछ पुरानी एवं कुछ नयी आग्नेय चट्टाने हैं।

आग्नेय चट्टानों में कभी गोल कण नहीं होते। ये चट्टानें प्रायः ज्वालामुखी क्रियाओं से बनती हैं। इन चट्टानों में किसी प्रकार के जीव या वनस्पति के अवशेष नहीं पाए जाते। स्थिति के अनुसार आग्नेय चट्टान के दो भेद हैं
  1. अम्ल आग्नेय चट्टान,
  2. पैठिक आग्नेय चट्टान।
मुख्य रूप से ग्रेनाइट, डायोराइट, गैब्रो, पेरीडोटाइट, रायओलाइट, बेसाल्ट प्रमुख आग्नेय चट्टानें हैं।

2. अवसादी चट्टान - धरातल पर पाई जाने वाली अधिकांश चट्टानें अवसादी हैं। ऐसा अनुमान है कि 75 प्रतिशत भाग धरातल का इन्हीं चट्टानों से बना है। अंग्रेजी शब्द sedimentary लैटिन भाषा के sedimentum शब्द से बना है जिसका अर्थ नीचे बैठने से होता है। अस्तु वे चट्टानें जो चूर्ण के एकत्र होकर जमा हो जाने से बनीं वे अवसादी चट्टानें हैं, इन चट्टानों में जाड़े तथा संधियाँ होती हैं। ये जोड़े मुख्यतः संयोजक तल से लम्बवत् होती हैं। अवसादी चट्टानों को उनकी निर्माण विधि के अनुसार चार भागों में विभक्त किया जा सकता हैः
  1. पूर्ववर्ती चट्टानों के क्षय पदार्थों से निर्मित चट्टानें
  2. जल में घुले हुए रसायनों से निर्मित चट्टानें
  3. कार्बनिक तत्वों से निर्मित चट्टानें
  4. विभिन्न साधनों द्वारा निर्मित चट्टानों के भी उप विभाग हैंः (i) जलज चट्टान,  (ii) समुद्री चट्टान,  (iii)  नदीकृत चट्टान,  (iv)  हिमानीकृत चट्टान, (v) वायु निर्मित चट्टान।
अवसादी चट्टान के मुख्य रूप- बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, खडि़या, चिकनी मिट्टी, डोलमाइट।

3. कायान्तरित चट्टानें - जिन चट्टानों में गर्मी, दबाव, रासायनिक क्रियाओं के फलस्वरूप उनके रूप में बनावट एवं खनिजों का पूर्ण कायान्तरण हो जाता है, कायान्तरित चट्टानें कहलाती हैं। 

चट्टानों में कायान्तरण के प्रमुख कारण हैंः 1. ताप, 2. सम्पीड़न 3. घोल

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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