हिमालय की उत्पत्ति के सिद्धांत और हिमालय पर्वत से लाभ

हिमालय को संसार का सर्वोच्च पर्वत होने का श्रेय प्राप्त है। इसकी लंबाई लगभग 2,414 किमी. है जबकि चौड़ाई 240 से लेकर 320 किमीतक है। 

हिमालय की उत्पत्ति

प्राचीनम पैंजिया (Pangea) महाद्वीप के विदीर्ण हो जाने पर अंगारालैण्ड तथा गोंडवाना लैण्ड नाम के महाद्वीपों के बीच एक विशाल समुद्र का निर्माण हुआ जो जिब्राल्टर से सुदूर-पूर्व तक विस्तृत था। इसको टेथिस (Tethys) नाम दिया गया।। इसके दो प्रमुख क्षेत्र थे - कश्मीर और असम।। इस सागर की चौड़ाई मानव भूगोलबिंदू डी टेरा महोदय के अनुसार 3200 किमी. से कम नहीं थी तथा इसका मध्य भाग 1528 किमी. गहरा था। इसमें लाखों वर्षों तक पदार्थों के निक्षेप एकत्रित होते रहे जिससे 6000 मीटर से भी मोटी परत जम गयी। इस निर्बल एवं लचकदार क्षेत्र को भूगर्भीय शक्तियों ने मोडा़, झुकाया एवं उठाया जिससे अनेक मोड बन गये। 

भूवैज्ञानिक सुइस के अनुसार, प्राचीन नवयुग में, मध्य एशिया के कठोर अंगारालैंड का भूमि द्रव्यमान उत्तरी महासागर के तल के दबाव के कारण दक्षिण की ओर चला गया, जिसके कारण टेथिस का पानी ऊपर उठ गया और दुनिया का मुख्य हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ।। इस क्रम के जारी रहने से हिमालय की विभिन्न श्रेणियों की उत्पत्ति हुईं। 

सी.एस. पिचामुथु के अनुसार, ग्रेटर माउंटेन रेंज कैंबियन युग से एक भू-आकृति में एकत्रित तलछट के संचय से बनने वाली एक गतिशील बेल्ट है।

भ-ू विज्ञानी बुरार्ड के मतानुसार (सन् 1912) पृथ्वी की ऊपरी पर्पटी के नीचे एक पर्पटी है जो क्रमशः शीतल हो रही है। शीतल होने के साथ उसमें  सिकुड़न के साथ दरारें हो रही है ये दरारें अवसादों से पट जाती है। ये अवसाद तनाव के फलस्वरूप वलित पर्वत बन जाते है।  उपर्युक्त अवस्था में  हिमालय पर्वत की उत्पत्ति हुई। यह सिद्धान्त
मान्य नहीं  है। 

इंगलिश भू-वैज्ञानिक फाक्स तथा वेडेल के अनुसार तिब्बत के पठार के पीछे से दबाव आया फलस्वरूप वलन हुआ। धरातल के उत्थान के साथ नदियों का पुनर्युवन हुआ और घाटियाँ गहरी हो गयीं जो कालान्तर में भरती गयीं। भू-सन्तुलन के प्रभाव से दुबारा वलन पैदा हुआ और हिमालय की उच्च चोटियाँ बनती गयीं।

हिमालय पर्वत से लाभ

  1. उत्तरी स्थली सीमा पर हिमालय पर्वत दीवारों के जैसा खडा़ होकर प्रहरी का कार्य करता है। इसे पार करना दुष्कर है।
  2. दक्षिणी मानसूनी हवाएँ इसमें टकराकर भारी वर्षा करती हैं। 
  3. उत्तर की ओर से आने वाली ठण्डी हवाएँ हिमालय श्रेणियों द्वारा रोक दी जाती हैं जिससे शीत ऋतु में भारत का तापमान अधिक नीचे नहीं गिरने पाता है। 
  4. ये श्रेणियाँ वनों का अगाध भण्डार हैं जिनसे प्राप्त कच्चे पदार्थो पर अनेक उद्योग-धन्धे आधारित हैं। ईंधन के लिए भी पर्याप्त लकडी़ इन पर्वतों से प्राप्त हो जाती है। 
  5. इन श्रेणियों में प्राकृतिक झरने हैं जिनसे जलविद्युत शक्ति का विकास किया गया है और किया जायेगा। 
  6. मनोरम प्राकृतिक दृश्यों से सौन्दर्य भावना जागृत करने वाला यह पर्वत सैलानियों का मुख्य आकर्षण है। यहाँ के रमणीय दृश्यों को देखने के लिए अधिक संख्या में विदेशी भी आते हैं। शिमला, मसूरी, नैनीताल, दार्जिलिंग अनेक स्वास्थवर्द्धक स्थान हिमालय के आंचल में ही हैं। कैलाश, अमरनाथ, केदारनाथ, बद्रीनाथ, देवप्रयाग आदि तीर्थस्थान हिमालय में हैं। 
  7. हिमालय पर्वत खनिज सम्पत्तियों जैसे तांबा, सीसा, लोहा आदि का भी भण्डार है।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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