मोहन राकेश का जीवन परिचय, कहानी संग्रह, भाषा शैली

मोहन राकेश का जन्म 8 जनवरी, सन् 1925 को हुआ था। वे कहानीकार, उपन्यासकार, नाटककार, निबंधकार और अनुवादक भी थे। देखा जाये तो नाटक के क्षेत्र में इनका अवदान सर्वाधिक रहा। मोहन राकेश का देहान्त 3 दिसम्बर, सन् 1972 को हुआ था।

मोहन राकेश के नाटक हैं-आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे। अपनी रंगधर्मिता, गुणवत्ता और गुणात्मकता की दृष्टि से ये नाटक सर्वश्रेष्ठ कहे जा सकते हैं। ‘आधे-अधूरे’ नाटक ने इन्हें अखिल भारतीय स्तर पर प्रतिष्ठित कर दिया। इनके कहानी-संग्रहां े के प्रकाशन सन् 1950 से शुरु होकर लगातार सन् 1960 तक प्रकाशित होते रहे। 

मोहन राकेश के कुल 16 कहानी संग्रह, 3 उपन्यास, 4 नाटक, एकांकी, यात्रा-संस्मरण, आलेख, डायरी आदि भी प्रकाशित हुए। मोहन राकेश के कहानी संग्रह हैं- इंसान के खंडहर, जानवर और जानवर, एक और जिन्दगी, नये बादल, फौलाद का आकाश, आज के साये, रोयें-रेशे, एक-एक दुनिया, मिले-जुले चेहरे, क्वार्टर वारिस, मेरी प्रिय कहानियां, पहचान, सुहागिनें, सम्पूर्ण कहानी संग्रह और पांच लम्बी कहानियां भी।

मोहन राकेश की भाषा शैली

मोहन राकेश की भाषा शैली सहज और सरल थी। वे जहां नाटकों को लेकर खासे नामवर रहे, वही उनकी कहानिया ं भी अपनी छाप पाठकों में छोडऩ े में पूर्ण रूपेण सफल रहीं।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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