आग्नेय चट्टानों की विशेषताएं एवं प्रकारों का वर्णन

ऐसा माना जाता है कि पृथ्वी अपनी प्रारम्भिक अवस्था में द्रव अवस्था में थी। धीरे-धीरे कालान्तर में पृथ्वी जब ठण्डी होकर ठोस बनी, सब तो से पहले आग्नेय चट्टान बनी। जैसे कि नाम से ही स्पष्ट है। आग्नेय आग से बनी हुई प्रारम्भ में पृथ्वी पर तापमान बहुत ज्यादा था, जब पृथ्वी का तापमान ठण्डा हुआ तो सबसे पहले जिस चट्टान का स्वरूप सामने आया, उसे आग्नेय चट्टान का नाम दिया गया।

आग्नेय चट्टानों की उत्पत्ति

आग्नेय भूपृष्ठ की प्रथम चट्टानें हैं। इसका निर्माण तब हुआ जबकि कोई भी जीव या वनस्पति की उत्पत्ति नहीं हुई थी, इसलिए इस चट्टान में किसी भी तरह की वनस्पति या जीव.जन्तु के अवशेष नहीं पाए जाते हैं। ज्वालामुखी की क्रिया के फलस्वरूप आज भी इनका निर्माण क्रम जारी है।

आग्नेय चट्टानों की विशेषताएं

आग्नेय चट्टानें जिन विशेषताओं के कारण अन्य चट्टानों से भिन्न हैं, वे इस प्रकार हैंः
  1. आग्नेय चट्टानों में कभी गोल कण नहीं होते। इन चट्टानों के टूटकर घिसने से ही गोल कण बनते हैं। 
  2. इन चट्टानों का सम्बन्ध प्रायः ज्वालामुखी क्रिया से होता है। अतः ये चट्टानें ज्वालामुखी क्षेत्रों में ही अधिक पाई जाती हैं। 
  3. इन चट्टानों में यद्यपि रवे होते है, परन्तु इन रवों का ना तो आकार और संख्या आदि ही निश्चित होती है और न उनकी रचना में कोई क्रम ही देखा जाता है। 
  4. इन चट्टानों में परतें नहीं होतीं। ये पूर्णतया सघन ;डंेेपअमद्ध होती हैं, किन्तु इनमें वर्गाकार जोड़ें होती हैं। ये जोड़ें ही चट्टानों के कमजोर स्थल होते हैं, जहाँ ऋतु अपक्षय का प्रभाव होता है।  ये चट्टानें कठोर तथा अरन्ध्र होती हैं, अतः जल का इन पर कोई प्रभाव नहीं होता, परन्तु विखण्डन के कारण ये टुकड़े.टुकड़े हो जाती हैं।

प्रमुख आग्नेय चट्टानें

1. ग्रेनाइट - यह एक कठोर चट्टान है जो भूगर्भ में मैगमा के जमने से बनती है। इसमें अभ्रक, फैसपार और स्फटिक आदि खनिज मिलते हैं। इसमें सैकता की मात्र 65 से 80 प्रतिशत तक होती है। इसके खनिज कण खुरदुरे होते हैं। इसकी सतह पर सन्धियाँ पाई जाती हैं। यह भवन निर्माण के लिए विशेष उपयोगी हैं। हार्नब्लेण्ड, रायोलाइट, प्यूमिस, अब्सीडियन तथा पिचस्टोन ग्रेनाइट वर्ग की मुख्य चट्टानें हैं।

2. डायोराइट - यह ग्रेनाइट से अधिक भारी चट्टान है। इसकी रचना मुख्यतः फेल्सपार और हार्नब्लेण्ड खनिजों से होती है। इसमें बायोराइट और ओगाइट के अंश भी मिल सकते हैं। इसमें स्फटिक नहीं होता। इसके कण समान होते हैं।

3. गैब्रो - यह एक भारी पातालीय चट्टान है। इसकी रचना फेल्सपार तथा ओगाइट खनिजों से होती है। प्रायः इसका रंग काला होता है। इसमें सैकता का अंश 40 से 50 प्रतिशत तक रहता हे। इसमें खुरदुरे तथा समान दोनों प्रकार के कण मिलते हैं।

4. पेरीडोटाइट - यह बहुत ही महत्वपूर्ण चट्टान है। इसमें ओगाइट अथवा ओलीवाइन खनिज मिलते हैं। इस चट्टान में क्रोमियम, निकिल तथा प्लेटीनम जैसी मूल्यवान धातुएँ पाई जाती हैं।

5. रायओलाइट - यह बहुत ही उम्दा रवों से बनी हुई चट्टान है जिसमें फेस्पार, स्फटिक तथा बायोराइट खनिज मिलते हैं। ऐसी चट्टानें जोधपुर के समीप मालानी और सौराष्ट्र में गिरनार पर्वत पर मिलती हैं।

6. बेसाल्ट - यह गैब्रो नामक चट्टान का ज्वालामुखी प्रतिरूप है। इनकी बनावट अच्छे महीन रवों से होती है। फेल्सपार के अच्छे रवे इसकी सतह पर मिलते हैं। यह भारी होती है और इसका रंग भूरा या काला होता है। इसमें खनिजों को पहचानना कठिन होता है। प्रायः इसमें ओगाइट, ओलीवाइन व मेग्नेटाइट खनिज मिलते हैं।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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